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मध्य प्रदेश की कृषि और फ़सलें

मध्य प्रदेश भारत का "सोया राज्य" है, दलहन और गेहूँ (सीहोर के प्रसिद्ध शरबती सहित) का अग्रणी उत्पादक है, और देश में जैविक खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र यहीं है। काली मृदा, सिंचाई के विस्तार और सरकारी खरीद की व्यवस्था ने 2010 के दशक में इसे भारत की सबसे तेज़ी से बढ़ती कृषि अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया। MPPSC के लिए मध्य प्रदेश की कृषि की फ़सलें, क्षेत्र और विशेषताएँ।

21 Oct 2026 4 मिनट में पढ़ें

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इस गाइड में
  1. कृषि का महत्व
  2. कृषि-जलवायु क्षेत्र
  3. खरीफ़ फ़सलें (जून–जुलाई में बोई जाती हैं)
  4. रबी फ़सलें (अक्टूबर–नवंबर में बोई जाती हैं)
  5. बागवानी और मसाले
  6. जैविक खेती
  7. सिंचाई और वृद्धि
  8. प्रमुख मुद्दे
  9. अभ्यास

1970 और 1980 के दशक में जब सोयाबीन पूरे भारत में फैला, तो उसे मध्य प्रदेश के मालवा पठार की काली मृदा (black soil) पर आदर्श घर मिला। कुछ ही दशकों में मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक बन गया — और उसे "सोया राज्य" कहा जाने लगा। सोयाबीन राज्य की प्रमुख खरीफ़ फ़सल बन गई। इसी दौरान सिंचाई के विस्तार ने मध्य प्रदेश को भारत के प्रमुख गेहूँ उत्पादकों में ला खड़ा किया, जो सीहोर के सुनहरे शरबती गेहूँ के लिए प्रसिद्ध है। कृषि आज भी मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और MPPSC का एक मूल विषय है।

कृषि का महत्व

  • कृषि और संबद्ध क्षेत्र मध्य प्रदेश के कार्यबल के बड़े हिस्से को रोज़गार देते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान करते हैं।
  • 2010 के दशक में मध्य प्रदेश की कृषि वृद्धि भारत में सबसे तेज़ में से थी। इसके पीछे सिंचाई का विस्तार, सरकारी खरीद (procurement) और सड़कें थीं — राज्य ने केंद्र सरकार का कृषि कर्मण पुरस्कार कई बार जीता।
  • खेती का पशुधन, वनों और जनजातीय आजीविका से गहरा संबंध है।

कृषि-जलवायु क्षेत्र

मध्य प्रदेश कई कृषि-जलवायु क्षेत्रों (agro-climatic zones) में बँटा है — उदाहरण के लिए, मालवा पठार, निमाड़ घाटी, विंध्य पठार, सतपुड़ा पठार, बुंदेलखंड, गिर्द क्षेत्र, कैमूर पठार और सतपुड़ा पहाड़ियाँ, झाबुआ पहाड़ियाँ और छत्तीसगढ़ के मैदान (जो अब अधिकांशतः मध्य प्रदेश से बाहर हैं)। हर क्षेत्र की अपनी मृदा, वर्षा और फ़सलें हैं।

खरीफ़ फ़सलें (जून–जुलाई में बोई जाती हैं)

फ़सलप्रमुख क्षेत्रटिप्पणी
सोयाबीनमालवा — इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर; नर्मदा घाटीमध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा उत्पादक — "सोया राज्य"; भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Soybean Research) इंदौर में है
धान (चावल)पूर्व — बालाघाट, मंडला, सिवनी, रीवा, सतना, शहडोलअधिक वर्षा वाले पूर्वी जिले; बालाघाट का चिन्नौर चावल
मक्कापश्चिम और जनजातीय क्षेत्र — झाबुआ, अलीराजपुर, धार, छिंदवाड़ाजनजातीय क्षेत्रों का मुख्य भोजन
कपासनिमाड़ — खरगोन, खंडवा, बड़वानीनर्मदा घाटी की काली मृदा
दलहन (अरहर/तुअर, उड़द, मूँग)पूरे राज्य मेंवर्षा-आधारित

रबी फ़सलें (अक्टूबर–नवंबर में बोई जाती हैं)

फ़सलप्रमुख क्षेत्रटिप्पणी
गेहूँमालवा, नर्मदा घाटी, ग्वालियर–चंबलमध्य प्रदेश भारत के शीर्ष गेहूँ उत्पादकों में है; सीहोर और आसपास के जिलों का शरबती गेहूँ एक उत्तम (premium) किस्म है
चनापूरे राज्य मेंमध्य प्रदेश चने का और कुल मिलाकर दलहन का सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है
सरसोंउत्तर — भिंड, मुरैना, ग्वालियर, श्योपुरतिलहन
मसूरविभिन्न क्षेत्रदलहन

बागवानी और मसाले

फ़सलक्षेत्र
संतराछिंदवाड़ा, आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़
लहसुनमंदसौर, नीमच, रतलाम, मालवा — मध्य प्रदेश एक अग्रणी उत्पादक है
धनियागुना, मंदसौर, शाजापुर
प्याज़मालवा
इसबगोलनीमच, मंदसौर
अफ़ीम (लाइसेंस-प्राप्त)मंदसौर, नीमच — औषधीय उपयोग के लिए केंद्र सरकार के लाइसेंस के अंतर्गत

जैविक खेती

भारत में जैविक खेती (organic farming) का सबसे बड़ा क्षेत्र मध्य प्रदेश में है, जिसमें जनजातीय और वन-बहुल जिलों के बड़े भू-भाग जैविक के रूप में प्रमाणित हैं। राज्य ने जैविक और प्राकृतिक खेती (natural farming) को बढ़ावा दिया है, और डिंडोरी, मंडला तथा अन्य जिले जैविक उपज के लिए जाने जाते हैं।

सिंचाई और वृद्धि

  • 2000 और 2010 के दशकों में मध्य प्रदेश का सिंचित क्षेत्र तेज़ी से बढ़ा। इसके साधन थे नहरें (नर्मदा परियोजनाएँ), नलकूप (tube wells) और लघु सिंचाई।
  • सुनिश्चित सिंचाई के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ की सरकारी खरीद, बेहतर सड़कों और बिजली आपूर्ति ने उत्पादन को तेज़ी से बढ़ाया।
  • सिंचाई और बाँधों पर हमारी पोस्ट देखें।

प्रमुख मुद्दे

मुद्दाव्याख्या
एकल फ़सल प्रणाली (monocropping)खरीफ़ में सोयाबीन पर भारी निर्भरता; कीटों और मौसम के प्रति संवेदनशीलता
कीमतों में उतार-चढ़ावप्याज़, लहसुन और सोयाबीन की कीमतें तेज़ी से ऊपर-नीचे होती हैं
जलमालवा में भूजल का घटता स्तर; बुंदेलखंड में सूखा
मृदा स्वास्थ्यसघन खेती से घटती उर्वरता
छोटी जोतेंविशेषकर जनजातीय और पूर्वी जिलों में
जलवायु जोखिमबेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, गर्मी

(कृषि से जुड़े मुद्दों और सुधारों पर हमारी अर्थव्यवस्था वाली पोस्ट देखें।)

अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:

  1. मध्य प्रदेश को "सोया राज्य" क्यों कहा जाता है?
  2. भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान कहाँ है?
  3. शरबती गेहूँ के लिए कौन-सा जिला प्रसिद्ध है?
  4. मध्य प्रदेश के किन जिलों में लाइसेंस-प्राप्त अफ़ीम उगाई जाती है?
  5. भारत में जैविक खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र किस राज्य में है?

मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (लघु): सोयाबीन मालवा क्षेत्र में ही क्यों केंद्रित है?

मुख्य परीक्षा शैली (दीर्घ): 2010 के दशक में मध्य प्रदेश की तीव्र कृषि वृद्धि के पीछे के कारकों और उसके टिकाऊपन (sustainability) की विवेचना कीजिए।

तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।

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