इस गाइड में
1970 और 1980 के दशक में जब सोयाबीन पूरे भारत में फैला, तो उसे मध्य प्रदेश के मालवा पठार की काली मृदा (black soil) पर आदर्श घर मिला। कुछ ही दशकों में मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक बन गया — और उसे "सोया राज्य" कहा जाने लगा। सोयाबीन राज्य की प्रमुख खरीफ़ फ़सल बन गई। इसी दौरान सिंचाई के विस्तार ने मध्य प्रदेश को भारत के प्रमुख गेहूँ उत्पादकों में ला खड़ा किया, जो सीहोर के सुनहरे शरबती गेहूँ के लिए प्रसिद्ध है। कृषि आज भी मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और MPPSC का एक मूल विषय है।
कृषि का महत्व
- कृषि और संबद्ध क्षेत्र मध्य प्रदेश के कार्यबल के बड़े हिस्से को रोज़गार देते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान करते हैं।
- 2010 के दशक में मध्य प्रदेश की कृषि वृद्धि भारत में सबसे तेज़ में से थी। इसके पीछे सिंचाई का विस्तार, सरकारी खरीद (procurement) और सड़कें थीं — राज्य ने केंद्र सरकार का कृषि कर्मण पुरस्कार कई बार जीता।
- खेती का पशुधन, वनों और जनजातीय आजीविका से गहरा संबंध है।
कृषि-जलवायु क्षेत्र
मध्य प्रदेश कई कृषि-जलवायु क्षेत्रों (agro-climatic zones) में बँटा है — उदाहरण के लिए, मालवा पठार, निमाड़ घाटी, विंध्य पठार, सतपुड़ा पठार, बुंदेलखंड, गिर्द क्षेत्र, कैमूर पठार और सतपुड़ा पहाड़ियाँ, झाबुआ पहाड़ियाँ और छत्तीसगढ़ के मैदान (जो अब अधिकांशतः मध्य प्रदेश से बाहर हैं)। हर क्षेत्र की अपनी मृदा, वर्षा और फ़सलें हैं।
खरीफ़ फ़सलें (जून–जुलाई में बोई जाती हैं)
| फ़सल | प्रमुख क्षेत्र | टिप्पणी |
|---|---|---|
| सोयाबीन | मालवा — इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर; नर्मदा घाटी | मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा उत्पादक — "सोया राज्य"; भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Soybean Research) इंदौर में है |
| धान (चावल) | पूर्व — बालाघाट, मंडला, सिवनी, रीवा, सतना, शहडोल | अधिक वर्षा वाले पूर्वी जिले; बालाघाट का चिन्नौर चावल |
| मक्का | पश्चिम और जनजातीय क्षेत्र — झाबुआ, अलीराजपुर, धार, छिंदवाड़ा | जनजातीय क्षेत्रों का मुख्य भोजन |
| कपास | निमाड़ — खरगोन, खंडवा, बड़वानी | नर्मदा घाटी की काली मृदा |
| दलहन (अरहर/तुअर, उड़द, मूँग) | पूरे राज्य में | वर्षा-आधारित |
रबी फ़सलें (अक्टूबर–नवंबर में बोई जाती हैं)
| फ़सल | प्रमुख क्षेत्र | टिप्पणी |
|---|---|---|
| गेहूँ | मालवा, नर्मदा घाटी, ग्वालियर–चंबल | मध्य प्रदेश भारत के शीर्ष गेहूँ उत्पादकों में है; सीहोर और आसपास के जिलों का शरबती गेहूँ एक उत्तम (premium) किस्म है |
| चना | पूरे राज्य में | मध्य प्रदेश चने का और कुल मिलाकर दलहन का सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है |
| सरसों | उत्तर — भिंड, मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर | तिलहन |
| मसूर | विभिन्न क्षेत्र | दलहन |
बागवानी और मसाले
| फ़सल | क्षेत्र |
|---|---|
| संतरा | छिंदवाड़ा, आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़ |
| लहसुन | मंदसौर, नीमच, रतलाम, मालवा — मध्य प्रदेश एक अग्रणी उत्पादक है |
| धनिया | गुना, मंदसौर, शाजापुर |
| प्याज़ | मालवा |
| इसबगोल | नीमच, मंदसौर |
| अफ़ीम (लाइसेंस-प्राप्त) | मंदसौर, नीमच — औषधीय उपयोग के लिए केंद्र सरकार के लाइसेंस के अंतर्गत |
जैविक खेती
भारत में जैविक खेती (organic farming) का सबसे बड़ा क्षेत्र मध्य प्रदेश में है, जिसमें जनजातीय और वन-बहुल जिलों के बड़े भू-भाग जैविक के रूप में प्रमाणित हैं। राज्य ने जैविक और प्राकृतिक खेती (natural farming) को बढ़ावा दिया है, और डिंडोरी, मंडला तथा अन्य जिले जैविक उपज के लिए जाने जाते हैं।
सिंचाई और वृद्धि
- 2000 और 2010 के दशकों में मध्य प्रदेश का सिंचित क्षेत्र तेज़ी से बढ़ा। इसके साधन थे नहरें (नर्मदा परियोजनाएँ), नलकूप (tube wells) और लघु सिंचाई।
- सुनिश्चित सिंचाई के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ की सरकारी खरीद, बेहतर सड़कों और बिजली आपूर्ति ने उत्पादन को तेज़ी से बढ़ाया।
- सिंचाई और बाँधों पर हमारी पोस्ट देखें।
प्रमुख मुद्दे
| मुद्दा | व्याख्या |
|---|---|
| एकल फ़सल प्रणाली (monocropping) | खरीफ़ में सोयाबीन पर भारी निर्भरता; कीटों और मौसम के प्रति संवेदनशीलता |
| कीमतों में उतार-चढ़ाव | प्याज़, लहसुन और सोयाबीन की कीमतें तेज़ी से ऊपर-नीचे होती हैं |
| जल | मालवा में भूजल का घटता स्तर; बुंदेलखंड में सूखा |
| मृदा स्वास्थ्य | सघन खेती से घटती उर्वरता |
| छोटी जोतें | विशेषकर जनजातीय और पूर्वी जिलों में |
| जलवायु जोखिम | बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, गर्मी |
(कृषि से जुड़े मुद्दों और सुधारों पर हमारी अर्थव्यवस्था वाली पोस्ट देखें।)
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- मध्य प्रदेश को "सोया राज्य" क्यों कहा जाता है?
- भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान कहाँ है?
- शरबती गेहूँ के लिए कौन-सा जिला प्रसिद्ध है?
- मध्य प्रदेश के किन जिलों में लाइसेंस-प्राप्त अफ़ीम उगाई जाती है?
- भारत में जैविक खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र किस राज्य में है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (लघु): सोयाबीन मालवा क्षेत्र में ही क्यों केंद्रित है?
मुख्य परीक्षा शैली (दीर्घ): 2010 के दशक में मध्य प्रदेश की तीव्र कृषि वृद्धि के पीछे के कारकों और उसके टिकाऊपन (sustainability) की विवेचना कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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