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मध्य प्रदेश की जलवायु और मिट्टियाँ

मध्य प्रदेश की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है — गर्म ग्रीष्म, वर्षा वाला मानसून और हल्की सर्दी। पर वर्षा उत्तर-पश्चिम में 80 सेमी से कम से बढ़कर दक्षिण-पूर्व में 150 सेमी से अधिक हो जाती है, और पचमढ़ी राज्य का सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान है। मिट्टियाँ मालवा की प्रसिद्ध काली कपास मिट्टी से लेकर पूर्व की लाल-पीली मिट्टी और उत्तर की जलोढ़ मिट्टी तक हैं। MPPSC के लिए जलवायु और मिट्टियाँ।

16 Oct 2026 4 मिनट में पढ़ें

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इस गाइड में
  1. मध्य प्रदेश की जलवायु को क्या आकार देता है
  2. ऋतुएँ
  3. वर्षा
  4. तापमान
  5. जलवायु प्रदेश (मोटे तौर पर)
  6. मिट्टियाँ
  7. मिट्टी की समस्याएँ और संरक्षण
  8. जलवायु और मिट्टियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं
  9. अभ्यास

जून में जब दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य प्रदेश पहुँचता है, तो वह दो दिशाओं से आता है: अरब सागर शाखा दक्षिण-पश्चिम से नर्मदा और ताप्ती घाटियों के साथ भीतर आती है, और बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वी भाग तक पहुँचती है। सबसे अधिक वर्षा दक्षिण-पूर्व की पहाड़ियों और सतपुड़ा श्रेणी पर होती है, और सबसे कम राजस्थान से लगे उत्तर-पश्चिमी पठार पर। राज्य की विविध चट्टानों के साथ मिलकर यही प्रतिरूप मध्य प्रदेश की मिट्टियों, वनों और खेती को आकार देता है। जलवायु और मिट्टियाँ MPPSC भूगोल के मूल विषय हैं।

मध्य प्रदेश की जलवायु को क्या आकार देता है

कारकप्रभाव
स्थितिमध्य भारत; कर्क रेखा (Tropic of Cancer) राज्य को पार करती है — उष्णकटिबंधीय जलवायु
महाद्वीपीयता (continentality)समुद्र से दूर — गर्म ग्रीष्म और ठंडी सर्दी, तापमान का अधिक अंतर
उच्चावच (relief)सतपुड़ा, मैकल और विंध्य श्रेणियों की ढलानों पर अधिक वर्षा; पचमढ़ी में सबसे अधिक वर्षा
मानसून की शाखाएँअरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों शाखाएँ मध्य प्रदेश तक पहुँचती हैं

ऋतुएँ

ऋतुमहीनेविशेषताएँ
ग्रीष्ममार्च–मध्य जूनगर्म और शुष्क; सबसे अधिक तापमान उत्तर (ग्वालियर, मुरैना, दतिया) और उत्तर-पश्चिम में; गर्म हवाएँ (लू)
मानसूनमध्य जून–सितंबरवार्षिक वर्षा का अधिकांश भाग
मानसून के बादअक्टूबर–नवंबरसाफ़ आसमान; गिरता तापमान
शीतदिसंबर–फ़रवरीठंडी से सर्द; पश्चिमी विक्षोभों (western disturbances) से हल्की शीतकालीन वर्षा; उत्तर में शीत लहर

वर्षा

  • उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ती है।
  • उत्तर-पश्चिम (भिंड, मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर) और मालवा के कुछ भागों में सबसे कम वर्षा (लगभग 60–80 सेमी) होती है।
  • दक्षिण-पूर्व (मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, सिवनी) और सतपुड़ा की पहाड़ियों में सबसे अधिक (120–150 सेमी से अधिक) वर्षा होती है।
  • पचमढ़ी में राज्य की सर्वाधिक वर्षा होती है।
  • वर्षा साल-दर-साल परिवर्तनशील है, जिससे कुछ वर्षों में सूखा और कुछ में बाढ़ आती है।

तापमान

  • ग्रीष्म में उत्तर (ग्वालियर–चंबल क्षेत्र) और बुंदेलखंड के कुछ भागों में अधिकतम तापमान अक्सर 45°C से ऊपर चला जाता है।
  • उत्तर में सर्दियाँ ठंडी होती हैं और कभी-कभी पाला पड़ता है; सतपुड़ा की पहाड़ियाँ (पचमढ़ी) ठंडी रहती हैं।

जलवायु प्रदेश (मोटे तौर पर)

प्रदेशक्षेत्रविशेषताएँ
उत्तर (मध्य भारत और बुंदेलखंड)ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, सागरसबसे गर्म ग्रीष्म, कम वर्षा
मालवाइंदौर, उज्जैन, देवास, रतलामसुहावनी जलवायु; मध्यम वर्षा
नर्मदा घाटीजबलपुर, नर्मदापुरम, खंडवागर्म और आर्द्र; मध्यम से अधिक वर्षा
दक्षिण-पूर्व (सतपुड़ा, मैकल, बघेलखंड)मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, शहडोलसर्वाधिक वर्षा; घने वन

मिट्टियाँ

मिट्टीक्षेत्रविशेषताएँफ़सलें
काली (रेगुर) मिट्टीमालवा पठार, नर्मदा घाटी, सतपुड़ा के कुछ भाग — सबसे बड़ा क्षेत्रचिकनी (clayey), नमी रोकने वाली, दक्कन बेसाल्ट से बनी; सूखने पर दरारें पड़ती हैंसोयाबीन, गेहूँ, चना, कपास
लाल और पीली मिट्टीपूर्व और दक्षिण-पूर्व — बघेलखंड, मंडला, बालाघाट, शहडोलक्रिस्टलीय चट्टानों से बनी; कम उपजाऊधान, दालें, मोटे अनाज
जलोढ़ मिट्टीउत्तर — भिंड, मुरैना, ग्वालियर (गिर्द क्षेत्र)नदियों द्वारा जमा; उपजाऊगेहूँ, सरसों, दालें
मिश्रित लाल और काली मिट्टीबुंदेलखंड और उत्तर के कुछ भागसंक्रमणकालीनदालें, गेहूँ, तिलहन
लैटेराइट मिट्टीपहाड़ियों में छोटे-छोटे टुकड़े (जैसे मैकल के कुछ भाग)निक्षालित (leached), अम्लीयसीमित खेती

मिट्टी की समस्याएँ और संरक्षण

समस्याकहाँउपाय
अवनालिका अपरदन (gully erosion) और बीहड़चंबल घाटी (भिंड, मुरैना, श्योपुर)बीहड़ सुधार, वनीकरण, चेक डैम
परत अपरदन (sheet erosion)पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रसमोच्च मेड़बंदी (contour bunding), सीढ़ीदार खेत
घटती उर्वरतासघन सोयाबीन–गेहूँ क्षेत्रफ़सल चक्र, जैविक खाद, मृदा स्वास्थ्य कार्ड
जलभराव और लवणतानहर कमान क्षेत्रों के कुछ भागजल निकासी, संतुलित सिंचाई

चंबल के बीहड़ भारत में भूमि निम्नीकरण (land degradation) के सबसे नाटकीय उदाहरणों में से हैं — और ऐतिहासिक रूप से ये डाकुओं के छिपने के ठिकाने रहे।

जलवायु और मिट्टियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं

  • ये मध्य प्रदेश के फ़सल प्रतिरूप को समझाती हैं — काली मिट्टी पर सोयाबीन, अधिक वर्षा वाले पूर्व में धान, रबी में गेहूँ और चना।
  • ये वनों को आकार देती हैं — अधिक वर्षा वाले पूर्व में घने साल वन, अपेक्षाकृत शुष्क पश्चिम और दक्षिण में सागौन।
  • ये जल की चुनौतियों को समझाती हैं — बुंदेलखंड का सूखा, चंबल के बीहड़।

अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:

  1. मध्य प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा किस स्थान पर होती है?
  2. मध्य प्रदेश में वर्षा किस दिशा में बढ़ती है?
  3. मध्य प्रदेश में सबसे बड़े क्षेत्र में कौन-सी मिट्टी पाई जाती है?
  4. गिर्द क्षेत्र में कौन-सी मिट्टी पाई जाती है?
  5. मध्य प्रदेश का कौन-सा क्षेत्र बीहड़ों के लिए जाना जाता है?

मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (लघु): काली मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए उपयुक्त क्यों है?

मुख्य परीक्षा शैली (दीर्घ): मध्य प्रदेश में मिट्टियों, जलवायु और फ़सल प्रतिरूप के आपसी संबंध की विवेचना कीजिए।

तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।

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