इस गाइड में
धार जिले में स्थित मांडू का पठार आसपास के मैदानों से एकाएक ऊपर उठता है। गहरी खाइयाँ और कई दरवाज़ों वाली एक लंबी दीवार इसकी रक्षा करती हैं। पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभ से यह स्वतंत्र मालवा सल्तनत की राजधानी रहा। इसके शासकों ने इसे मस्जिदों, मकबरों, महलों, तालाबों और मंडपों से भर दिया। उन्होंने इसे शादियाबाद कहा — यानी आनंद की नगरी (City of Joy)। आज इसके स्मारक और बाज़ बहादुर और रूपमती की प्रेमकथा मांडू को भारत के सबसे भावपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में शामिल करते हैं। MPPSC में भी यह नियमित रूप से पूछा जाने वाला विषय है।
सल्तनत का उदय
- 1398 में तैमूर के दिल्ली पर आक्रमण के बाद दिल्ली सल्तनत कमज़ोर हो गई, और प्रांतों के सूबेदारों (governors) ने स्वतंत्रता घोषित कर दी।
- मालवा का सूबेदार दिलावर ख़ान ग़ोरी लगभग 1401 में व्यावहारिक रूप से स्वतंत्र हो गया। वह धार से शासन करता था।
- उसके पुत्र होशंग शाह ने राजधानी मांडू स्थानांतरित की और उसकी किलेबंदी मज़बूत की।
प्रमुख शासक
| शासक | मुख्य बातें |
|---|---|
| दिलावर ख़ान ग़ोरी | स्वतंत्र सल्तनत का संस्थापक (लगभग 1401) |
| होशंग शाह | मांडू को राजधानी बनाया; संगमरमर से बने उसके मकबरे को अक्सर भारत का पहला संगमरमर का मकबरा कहा जाता है |
| महमूद ख़लजी (खिलजी) प्रथम (1436–1469) | मालवा में ख़लजी वंश की नींव रखी; सबसे शक्तिशाली शासक; मेवाड़ के राणा कुंभा से युद्ध किया (दोनों पक्षों ने विजय का दावा किया और विजय स्तंभ बनवाए); जामा मस्जिद पूरी करवाई; अशर्फ़ी महल और एक सात मंज़िला विजय स्तंभ बनवाया |
| ग़ियासुद्दीन ख़लजी | शांतिपूर्ण, भोग-विलास वाला शासनकाल; जहाज़ महल उसके विशाल हरम से जोड़ा जाता है |
| महमूद ख़लजी द्वितीय | गागरोन (1519) में राणा सांगा से पराजित हुआ और बंदी बना; बाद में गुजरात के बहादुर शाह ने मालवा पर अधिकार कर लिया (1531) |
| बाज़ बहादुर | अंतिम स्वतंत्र शासक; संगीतज्ञ और कवि; 1561 में अकबर के सेनापति अधम ख़ान से पराजित |
बाज़ बहादुर और रूपमती
सुल्तान और संगीतज्ञ बाज़ बहादुर और रूपमती की कहानी भारत की सबसे प्रसिद्ध प्रेमकथाओं में से एक है। रूपमती एक हिंदू गायिका थीं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे नर्मदा क्षेत्र की थीं। परंपरा के अनुसार, रूपमती रोज़ भोजन से पहले पठार के किनारे बने अपने मंडप से नर्मदा की ओर देखती थीं। बाज़ बहादुर ने उनके महल तक पानी पहुँचाने के लिए रेवा कुंड बनवाया। जब 1561 में अधम ख़ान ने मांडू पर कब्ज़ा किया, तो बाज़ बहादुर भाग गया। कहा जाता है कि रूपमती ने विजेता के हाथ पड़ने के बजाय विष खा लिया।
मांडू का स्थापत्य
मांडू की इमारतों में अफ़ग़ान (पठान) स्थापत्य और स्थानीय परंपराओं का मेल है — विशाल और सादे रूप, नुकीले मेहराब और गुंबद, बढ़िया पत्थर और कहीं-कहीं संगमरमर।
| स्मारक | मुख्य बातें |
|---|---|
| होशंग शाह का मकबरा | सफ़ेद संगमरमर; माना जाता है कि इसने ताजमहल के निर्माताओं को प्रेरणा दी — कहा जाता है कि शाहजहाँ ने इसका अध्ययन करने के लिए अपने वास्तुकार भेजे थे |
| जामा मस्जिद | भव्य सामूहिक नमाज़ वाली मस्जिद; परंपरा के अनुसार दमिश्क की बड़ी मस्जिद के नमूने पर बनी |
| जहाज़ महल | दो तालाबों (मुंज तालाब और कपूर तालाब) के बीच बना एक लंबा, संकरा महल, जो पानी पर तैरते जहाज़ जैसा दिखता है |
| हिंडोला महल | "झूलता महल" — इसकी तिरछी दीवारें झूलने का आभास देती हैं |
| रूपमती का मंडप | पठार के दक्षिणी किनारे पर, जहाँ से नर्मदा की ओर निमाड़ के मैदान दिखते हैं |
| बाज़ बहादुर का महल | आँगन और जल-संरचनाओं सहित |
| रेवा कुंड | रूपमती के मंडप से जुड़ा जलाशय |
| अशर्फ़ी महल | महमूद ख़लजी प्रथम ने इसे मदरसे के रूप में बनवाया |
जल प्रबंधन
मांडू के निर्माताओं ने पठार पर मानसून की वर्षा को इकट्ठा करने के लिए तालाबों, बावड़ियों और नालियों की एक उन्नत व्यवस्था बनाई। यह मध्य भारत में मध्यकालीन जल प्रबंधन का एक उदाहरण है।
पतन और बाद का इतिहास
मुग़ल विजय के बाद मांडू एक प्रांतीय केंद्र बना रहा; जहाँगीर और शाहजहाँ यहाँ आए। समय के साथ राजधानी के रूप में इसका महत्व घटता गया, और नगर का बड़ा हिस्सा वीरान होकर जंगल से ढक गया — इसी से इसके स्मारक बचे रहे।
आज का मांडू
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) द्वारा संरक्षित स्मारक।
- लोकप्रिय पर्यटन स्थल; मांडू उत्सव इसकी विरासत का उत्सव मनाता है।
- मांडू विश्व धरोहर स्थलों की UNESCO की संभावित सूची (tentative list) में है (मध्य प्रदेश से भेजे गए नामांकनों के हिस्से के रूप में)।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- स्वतंत्र मालवा सल्तनत की स्थापना किसने की?
- किस मालवा शासक ने राजधानी मांडू स्थानांतरित की?
- मांडू की किस इमारत को अक्सर भारत का पहला संगमरमर का मकबरा कहा जाता है?
- 1561 में अकबर के लिए मांडू किसने जीता?
- मांडू का कौन-सा महल जहाज़ के आकार का है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (लघु): मांडू के स्थापत्य की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
मुख्य परीक्षा शैली (दीर्घ): मालवा सल्तनत के राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व की चर्चा कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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