इस गाइड में
हर दिसंबर में देश भर के संगीतकार ग्वालियर में तानसेन की समाधि के पास तानसेन समारोह के लिए जुटते हैं। यह देश के सबसे पुराने शास्त्रीय संगीत समारोहों में से एक है, और तानसेन के लिए उचित श्रद्धांजलि भी। मध्य प्रदेश पाँच शताब्दियों से भारतीय संगीत का एक बड़ा केंद्र रहा है। यह भारत की कुछ सबसे सराही गई जनजातीय कलाओं का घर भी है: गोंड और भील चित्रकला की बिंदुओं से भरी, रंग-बिरंगी दुनिया।
MPPSC में यह विषय दो तरह से काम आता है। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में सीधे मिलान वाले प्रश्न आते हैं: कौन-सा घराना, कौन-सा शहर, कौन-सा कलाकार, कौन-सा समारोह। मुख्य परीक्षा (Mains) इसी सामग्री का उपयोग मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर, जनजातीय पहचान और कला को जीवित रखने में राज्य की संस्थाओं की भूमिका पर उत्तरों में करती है। यह मार्गदर्शिका दोनों पहलुओं को समेटती है।
शास्त्रीय संगीत: ग्वालियर की परंपरा
राजा मानसिंह तोमर और ध्रुपद
ग्वालियर की संगीत कथा राजा मानसिंह तोमर (पंद्रहवीं शताब्दी का अंत और सोलहवीं शताब्दी का आरंभ) से शुरू होती है। वे ध्रुपद के संरक्षक थे, जो हिंदुस्तानी गायन की गंभीर, भक्तिपूर्ण शैली है। संगीत पर एक ग्रंथ, मानकुतूहल, उनके दरबार से जोड़ा जाता है। ग्वालियर स्थित प्रदेश का संगीत एवं कला विश्वविद्यालय उन्हीं के नाम पर है।
तानसेन
- तानसेन (सोलहवीं शताब्दी) का जन्म परंपरा के अनुसार ग्वालियर के पास बेहट में हुआ माना जाता है।
- उन्होंने ध्रुपद की शिक्षा ली; परंपरा उनके गुरुओं में स्वामी हरिदास का नाम लेती है।
- अकबर के दरबार में जाने से पहले वे रीवा क्षेत्र के बघेल शासक राजा रामचंद्र की सेवा में थे। अकबर के दरबार में उनकी गिनती "नवरत्नों" में होती थी।
- उनकी समाधि ग्वालियर में सूफ़ी संत मुहम्मद ग़ौस के मकबरे के परिसर में है।
- वहीं हर दिसंबर में तानसेन समारोह होता है, और मध्य प्रदेश का तानसेन सम्मान प्रतिष्ठित हिंदुस्तानी संगीतकारों को दिया जाता है।
घराने
घराना संगीतकारों की वह वंश-परंपरा है, जिसमें एक शैली गुरु से शिष्य तक पहुँचती है। भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण घराने आज के मध्य प्रदेश में शुरू हुए।
| घराना / परंपरा | स्थान | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| ग्वालियर घराना | ग्वालियर | सबसे पुराना ख़याल घराना माना जाता है; हद्दू ख़ाँ और हस्सू ख़ाँ बंधुओं से जुड़ा; इसकी शैली ने बाद के कई घरानों को आकार दिया |
| मैहर घराना | मैहर (पहले सतना जिले में, अब अपना अलग जिला) | बाबा अलाउद्दीन ख़ाँ ने खड़ा किया; शिष्यों में उनके पुत्र उस्ताद अली अकबर ख़ाँ, पुत्री अन्नपूर्णा देवी, पंडित रविशंकर, निखिल बनर्जी और पन्नालाल घोष शामिल; उन्होंने मैहर बैंड भी बनाया |
| भोपाल में ध्रुपद | भोपाल | उज्जैन के ध्रुपद गायक गुंदेचा बंधुओं ने गुरु–शिष्य परंपरा में शिक्षा देने के लिए भोपाल के पास ध्रुपद संस्थान स्थापित किया |
ग्वालियर घराना एक गायन (ख़याल) परंपरा है। मैहर घराना मुख्य रूप से वादन की परंपरा है: सितार, सरोद, सुरबहार और बाँसुरी। यह अंतर प्रारंभिक परीक्षा का एक आम जाल है।
ग्वालियर को 2023 में यूनेस्को का संगीत का रचनात्मक शहर (Creative City of Music) घोषित किया गया। सांस्कृतिक धरोहर पर उत्तरों में यह एक उपयोगी हालिया उदाहरण है।
मध्य प्रदेश से जुड़े संगीतकार
| संगीतकार | मध्य प्रदेश से संबंध |
|---|---|
| कुमार गंधर्व | कर्नाटक में जन्म; देवास में बस गए, जहाँ मालवा के लोकगीतों और कबीर के निर्गुण भजनों ने उनकी नवाचारी गायकी को आकार दिया |
| उस्ताद हाफ़िज़ अली ख़ाँ | ग्वालियर के सरोद उस्ताद |
| उस्ताद अमजद अली ख़ाँ | सरोद वादक, हाफ़िज़ अली ख़ाँ के पुत्र, ग्वालियर में जन्म |
| लता मंगेशकर | इंदौर में जन्म (1929); मध्य प्रदेश का लता मंगेशकर पुरस्कार सुगम संगीत के लिए है |
| किशोर कुमार | खंडवा में जन्म; मध्य प्रदेश किशोर कुमार सम्मान देता है |
जनजातीय और लोक कला
गोंड चित्रकला
- मंडला–डिंडोरी क्षेत्र में गोंड समुदाय की त्योहारों और अनुष्ठानों के लिए दीवारों और फ़र्श पर चित्र बनाने की परंपरा से विकसित हुई।
- डिंडोरी के पाटनगढ़ गाँव के जनगढ़ सिंह श्याम (1962–2001) इसे कागज़ और कैनवस पर लाए। कलाकार जे. स्वामीनाथन उन्हें भारत भवन लाए, और उनका काम भारत और विदेश की दीर्घाओं तक पहुँचा। उनकी शुरू की गई शैली को अक्सर जनगढ़ कलम कहा जाता है।
- विशेषताएँ: जानवर, पेड़, देवी-देवता और मिथक, जिनमें चटख रंगों में बिंदु, छोटी रेखाएँ और महीन लकीरें भरी जाती हैं। हर कलाकार भराई का अपना निजी पैटर्न विकसित करता है, जो लगभग हस्ताक्षर जैसा होता है।
- पाटनगढ़ शैली के कलाकारों, जैसे भज्जू श्याम और दुर्गा बाई व्याम, को पद्मश्री सहित राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं।
- गोंड चित्रकला को GI टैग (भौगोलिक संकेतक) मिला है।
भील कला
- पश्चिमी मध्य प्रदेश (झाबुआ, अलीराजपुर, धार) का भील समुदाय चटख रंगों में बिंदुओं की पंक्तियों से चित्र बनाता है: जानवर, त्योहार, जंगल और रोज़मर्रा का जीवन।
- झाबुआ के पिटोल की भूरी बाई कागज़ पर चित्र बनाने वाली पहली भील कलाकारों में थीं। वे भारत भवन में निर्माण मज़दूर के रूप में आई थीं; जे. स्वामीनाथन ने उन्हें चित्र बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्हें 2021 में पद्मश्री मिला।
पिथोरा
पिथोरा चित्र अनुष्ठानिक भित्ति चित्र हैं, जिनमें घोड़े और देवता भरे होते हैं। ये पश्चिमी मध्य प्रदेश और पड़ोसी गुजरात के भील, भिलाला और राठवा समुदायों में बनाए जाते हैं। इन्हें सजावट के लिए नहीं, बल्कि कोई मन्नत पूरी करने या किसी अवसर को मनाने के लिए बनाया जाता है।
पुरानी परंपराएँ
- शैल चित्र (rock art): भोपाल के पास भीमबेटका के शैलाश्रय, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, प्रागैतिहासिक काल से आगे के चित्र सँजोए हुए हैं।
- बाघ गुफाएँ (धार): बौद्ध गुफा चित्र, जिनकी तुलना अक्सर अजंता से की जाती है।
- मांडना: लाल मिट्टी की पृष्ठभूमि पर सफ़ेद रंग से बनाए जाने वाले फ़र्श और दीवार के अलंकरण, जो मालवा और पड़ोसी राजस्थान में आम हैं।
| कला रूप | समुदाय / क्षेत्र | मुख्य पहचान |
|---|---|---|
| गोंड चित्रकला | गोंड; डिंडोरी, मंडला | आकृतियों में भरे बिंदु और रेखाएँ; जनगढ़ सिंह श्याम |
| भील कला | भील; झाबुआ, अलीराजपुर | बिंदुओं की पंक्तियाँ; भूरी बाई |
| पिथोरा | भील, भिलाला, राठवा | घोड़ों वाला अनुष्ठानिक भित्ति चित्र |
| मांडना | मालवा | लाल मिट्टी से लिपे फ़र्श और दीवारों पर सफ़ेद अलंकरण |
संस्थाएँ और समारोह
| संस्था / समारोह | विवरण |
|---|---|
| भारत भवन, भोपाल | बहु-कला केंद्र, 1982 में खुला, चार्ल्स कोरिया ने डिज़ाइन किया; इसके प्रभागों में रूपंकर (दृश्य कला), रंगमंडल (रंगमंच), वागर्थ (कविता) और अनहद (संगीत) शामिल |
| तानसेन समारोह | ग्वालियर, दिसंबर |
| कालिदास समारोह | उज्जैन, देव प्रबोधिनी एकादशी के आसपास; कालिदास के सम्मान में नाटक, नृत्य और संगीत |
| खजुराहो नृत्य समारोह | खजुराहो, आम तौर पर फ़रवरी; मंदिरों की पृष्ठभूमि में शास्त्रीय नृत्य |
| लोकरंग | भोपाल, गणतंत्र दिवस के आसपास; लोक और जनजातीय कलाएँ |
| मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय | भोपाल; जनजातीय जीवन और कला, जिसे स्वयं जनजातीय कलाकारों ने प्रस्तुत किया है |
| इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय | भोपाल; खुले आकाश वाली प्रदर्शनियों के साथ मानव जाति का राष्ट्रीय संग्रहालय |
| कालिदास सम्मान | मध्य प्रदेश द्वारा 1980 में स्थापित राष्ट्रीय कला सम्मान |
मुख्य परीक्षा के लिए: इस विषय का उपयोग कैसे करें
प्रश्न: "भारतीय संगीत और कला में मध्य प्रदेश के योगदान की विवेचना कीजिए।" (250 शब्द)
रूपरेखा:
- भूमिका: मध्य प्रदेश दरबारी, भक्ति और जनजातीय परंपराओं का संगम-स्थल।
- शास्त्रीय संगीत: मानसिंह तोमर और ध्रुपद; तानसेन; सबसे पुराने ख़याल घराने के रूप में ग्वालियर घराना; मैहर और अलाउद्दीन ख़ाँ के शिष्य।
- आधुनिक व्यक्तित्व: कुमार गंधर्व और मालवा का लोक संगीत; ग्वालियर की सरोद परंपरा; लता मंगेशकर और किशोर कुमार।
- जनजातीय कला: गोंड चित्रकला (जनगढ़ सिंह श्याम), भील कला (भूरी बाई), पिथोरा; GI संरक्षण।
- संस्थाएँ: भारत भवन, जनजातीय संग्रहालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, तानसेन और कालिदास समारोह, राज्य के सम्मान।
- चुनौतियाँ: गुरु–शिष्य परंपरा में सीखने वाले युवाओं की घटती संख्या; जनजातीय कलाकारों को उचित पारिश्रमिक और डिज़ाइनों की नकल।
- निष्कर्ष: जीवित परंपराओं को केवल संग्रहालय नहीं, बल्कि संरक्षक, बाज़ार और शिक्षण भी चाहिए।
अभ्यास
1. तानसेन की समाधि कहाँ स्थित है? (a) ग्वालियर (b) रीवा (c) आगरा (d) उज्जैन
उत्तर: (a). यह मुहम्मद ग़ौस के मकबरे के परिसर में है।
2. किसे सबसे पुराना ख़याल घराना माना जाता है? (a) किराना (b) जयपुर-अतरौली (c) मैहर (d) ग्वालियर
उत्तर: (d). मैहर मुख्य रूप से वादन का घराना है।
3. बाबा अलाउद्दीन ख़ाँ किससे जुड़े हैं? (a) ग्वालियर घराना (b) मैहर घराना (c) ध्रुपद संस्थान (d) भारत भवन
उत्तर: (b).
4. जनगढ़ सिंह श्याम किससे जुड़े हैं? (a) भील कला (b) पिथोरा (c) गोंड चित्रकला (d) मांडना
उत्तर: (c). भूरी बाई भील कलाकार हैं।
5. भोपाल के भारत भवन को किसने डिज़ाइन किया? (a) बी. वी. दोशी (b) चार्ल्स कोरिया (c) लॉरी बेकर (d) ले कॉर्बूज़िए
उत्तर: (b). यह 1982 में खुला।
6. संगीतकार का मध्य प्रदेश के नगर से मिलान कीजिए: कुमार गंधर्व, किशोर कुमार, लता मंगेशकर।
उत्तर: देवास, खंडवा, इंदौर।
मुख्य परीक्षा शैली (लघु, 150 शब्द): गोंड चित्रकला की विशिष्ट विशेषताएँ क्या हैं, और यह राष्ट्रीय दर्शकों तक कैसे पहुँची?
दोहराव (Revision) के लिए
- मानसिंह तोमर, ध्रुपद, मानकुतूहल
- तानसेन: बेहट, रीवा, अकबर, ग्वालियर में समाधि, तानसेन समारोह (दिसंबर)
- ग्वालियर घराना (ख़याल) बनाम मैहर घराना (वादन); अलाउद्दीन ख़ाँ के शिष्य
- कुमार गंधर्व, हाफ़िज़ अली ख़ाँ, लता, किशोर: नगर
- गोंड, भील, पिथोरा, मांडना: समुदाय और पहचान
- भारत भवन 1982, चार्ल्स कोरिया, चार प्रभाग
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