इस गाइड में
- 1. पुराने पैटर्न की तैयारी करना
- 2. वैकल्पिक विषय पर ज़रूरत से ज़्यादा समय लगाना
- 3. निबंध को आख़िरी काम समझना
- 4. बिहार की कमज़ोर तैयारी
- 5. बिना जाँचे बिहार GK पर भरोसा
- 6. प्रारंभिक परीक्षा से पहले उत्तर लेखन न करना
- 7. सांख्यिकी छोड़ देना
- 8. सामान्य हिंदी को नज़रअंदाज़ करना
- 9. बहुत सारे स्रोत, बहुत कम दोहराव
- 10. थककर टूट जाना
- प्रारंभिक परीक्षा की जाँच: जाल पहचानिए
- आत्म-मूल्यांकन
हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी BPSC के लिए आवेदन करते हैं, और उनमें से बहुत छोटा हिस्सा ही अंतिम सूची तक पहुँचता है। कमी शायद ही कभी मेहनत की होती है। अधिकतर अभ्यर्थी मेहनत करते हैं। सफलता और मामूली अंतर से चूकने के बीच का फ़र्क अक्सर कुछ ऐसी गलतियों का होता है, जिनसे बचा जा सकता था, पर जो महीनों तक दोहराई जाती रहीं।
नीचे दी गई दस गलतियों को उपदेश नहीं, एक चेकलिस्ट की तरह पढ़ें। ज़्यादातर अभ्यर्थी इनमें से दो-तीन में खुद को पहचान लेंगे। इनमें से एक को भी सुधार लेना, एक और महीने की पढ़ाई से ज़्यादा फ़ायदेमंद हो सकता है।
1. पुराने पैटर्न की तैयारी करना
BPSC मुख्य परीक्षा (Mains) बदल चुकी है। वैकल्पिक विषय (Optional) अब 100 अंकों का क्वालीफाइंग (qualifying), वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र है, और निबंध 300 अंकों का है। मेरिट GS I, GS II और निबंध (900 अंक) और उसके बाद साक्षात्कार (Interview) से तय होती है। पुराने पैटर्न के लिए बनी किताबें, वीडियो और सलाह, जिनमें वैकल्पिक विषय के मेरिट में बड़े अंक होते थे, चुपचाप आपके घंटों को गलत दिशा में खींच सकती हैं।
इसके बजाय: bpsc.bihar.gov.in पर वर्तमान अधिसूचना (notification) और पाठ्यक्रम (syllabus) पढ़ें, पैटर्न को एक पन्ने पर लिख लें, और परीक्षा जैसी आज है, उसी के लिए योजना बनाएँ।
2. वैकल्पिक विषय पर ज़रूरत से ज़्यादा समय लगाना
कुछ अभ्यर्थी आज भी आदत के कारण, या किसी सीनियर को देखकर, महीनों वैकल्पिक विषय पर लगा देते हैं।
इसके बजाय: वस्तुनिष्ठ अभ्यास से उतनी तैयारी करें कि यह प्रश्नपत्र सुरक्षित रूप से पास हो जाए, फिर अपने सबसे अच्छे घंटे GS और निबंध को दें, जो मेरिट तय करते हैं। हमारी क्वालीफाइंग वैकल्पिक विषय वाली गाइड बताती है कि कितनी तैयारी काफ़ी है।
3. निबंध को आख़िरी काम समझना
निबंध का भार एक GS प्रश्नपत्र के बराबर है। फिर भी बहुत-से अभ्यर्थी अपना पहला पूरा निबंध मुख्य परीक्षा से एक महीना पहले लिखते हैं, और तब पता चलता है कि एक बैठक में तीन निबंध लिखना, एक उत्तर लिखने से बिल्कुल अलग खेल है।
इसके बजाय: जल्दी शुरू करें। तैयारी के लगभग छठे महीने से हर पखवाड़े एक निबंध, और प्रारंभिक परीक्षा के बाद हर सप्ताह एक निबंध। हमारी BPSC निबंध प्रश्नपत्र वाली गाइड देखें।
4. बिहार की कमज़ोर तैयारी
बिहार से जुड़ी सामग्री प्रारंभिक और मुख्य, दोनों परीक्षाओं में फैली है: इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था, राजव्यवस्था, संस्कृति और समसामयिकी (current affairs)।
इसके बजाय: पहले महीने से ही राष्ट्रीय परत के साथ-साथ बिहार की परत बनाएँ। हर राष्ट्रीय विषय के बाद खुद से पूछें: "इसका बिहार वाला रूप क्या है?"
5. बिना जाँचे बिहार GK पर भरोसा
GK पुस्तिकाओं और सोशल मीडिया पोस्टों में अक्सर गलत तिथियाँ, आपस में उलझी योजनाएँ और पुराने आँकड़े होते हैं, जो एक स्रोत से दूसरे में नकल होते चले जाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में आत्मविश्वास से चुना गया गलत तथ्य, खाली छोड़े गए प्रश्न से ज़्यादा महँगा पड़ता है, क्योंकि ऋणात्मक अंकन लागू है।
कुछ भ्रम, जिनमें हर वर्ष अभ्यर्थी फँसते हैं:
| आम भ्रम | जाँचा हुआ तथ्य |
|---|---|
| नालंदा और विक्रमशिला की स्थापना एक ही वंश ने की | नालंदा को परंपरा से गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम से जोड़ा जाता है; विक्रमशिला की स्थापना पाल राजा धर्मपाल ने की |
| बिहार 1936 में अलग राज्य बना | बिहार (उड़ीसा के साथ) 1912 में बंगाल से अलग हुआ; उड़ीसा 1936 में अलग प्रांत बना |
| चंपारण सत्याग्रह 1918 में हुआ | चंपारण 1917 में हुआ; खेड़ा 1918 में |
| झारखंड 2001 में बना | झारखंड 15 नवंबर 2000 को बना |
इसके बजाय: महत्वपूर्ण तथ्यों को विश्वसनीय स्रोतों से मिलाएँ: इतिहास की मानक पुस्तकें, बिहार आर्थिक सर्वेक्षण और आधिकारिक वेबसाइटें। जब दो स्रोत असहमत हों, तो दोनों नोट करें और तीसरा स्रोत खोजें।
6. प्रारंभिक परीक्षा से पहले उत्तर लेखन न करना
मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक है, और लेखन कौशल बनने में महीनों लगते हैं। जो अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा के बाद शुरू करते हैं, वे पहला महीना यह सीखने में लगा देते हैं कि कैसे लिखें, यह नहीं कि क्या लिखें।
इसके बजाय: लगभग चौथे महीने से उत्तर लेखन (answer writing) शुरू करें और हर सप्ताह तीन-चार उत्तर लिखें।
अभ्यास से कितना फ़र्क पड़ता है, यह देखिए। प्रश्न: "भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।"
| कमज़ोर उत्तर | बेहतर उत्तर |
|---|---|
| गांधी और 1942 के बारे में सामान्य पंक्तियों से शुरुआत | 8 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो प्रस्ताव और उसके बाद हुई गिरफ़्तारियों से शुरुआत, फिर दो पंक्तियों के भीतर बिहार पर |
| "बिहार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई", बिना किसी प्रमाण के | 11 अगस्त 1942 का पटना सचिवालय गोलीकांड, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश करते सात छात्र मारे गए |
| कोई नाम नहीं | नवंबर 1942 में हज़ारीबाग जेल से जयप्रकाश नारायण का भागना और उनका भूमिगत प्रतिरोध |
| एक लंबा अनुच्छेद | उपशीर्षक: छात्र, ग्रामीण क्षेत्र, भूमिगत नेता, दमन |
| वाक्य अधूरा छोड़कर अंत | एक निष्कर्ष के साथ अंत: बिहार उन प्रांतों में था, जहाँ आंदोलन सबसे तीव्र रहा |
आदर्श निष्कर्ष (दो पंक्तियाँ): बिहार ने भारत छोड़ो के आह्वान को 1942 के सबसे व्यापक जन-उभारों में से एक बना दिया, पटना सचिवालय के छात्रों से लेकर जयप्रकाश नारायण के इर्द-गिर्द बने भूमिगत तंत्र तक। इसके बाद हुआ दमन कठोर था, पर राज्य की राजनीति पर आंदोलन का स्थायी असर भी उतना ही गहरा था।
7. सांख्यिकी छोड़ देना
GS I में सांख्यिकी, ग्राफ़ और आरेख शामिल हैं। यह प्रश्नपत्र का वह हिस्सा है, जहाँ सही गणना पर आम तौर पर पूरे अंक मिलते हैं, फिर भी मानविकी पृष्ठभूमि के बहुत-से अभ्यर्थी डर के कारण इसे छोड़ देते हैं।
स्तर साधारण है। मान लीजिए उपज 12, 15, 9 और 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। माध्य = 50 ÷ 4 = 12.5। क्रम में रखने पर (9, 12, 14, 15) माध्यिका = (12 + 14) ÷ 2 = 13। अगर उत्पादन 400 से बढ़कर 460 इकाई हो जाए, तो वृद्धि = (460 − 400) ÷ 400 × 100 = 15%।
इसके बजाय: दो महीने तक हर सप्ताह दो छोटे सत्र। हमारी BPSC GS में सांख्यिकी और आँकड़े वाली गाइड में हल किए गए उदाहरण और अभ्यास योजना है।
8. सामान्य हिंदी को नज़रअंदाज़ करना
यह क्वालीफाइंग प्रश्नपत्र है (बताया गया उत्तीर्णांक 30 प्रतिशत है), और अधिकतर अभ्यर्थी इसे पास कर लेते हैं। लेकिन कुछ, खासकर अंग्रेज़ी माध्यम से लिखने वाले, इसमें चूक जाते हैं, और तब उनकी GS और निबंध की कॉपियाँ गिनी ही नहीं जातीं।
इसके बजाय: शुरुआत में ही पिछले वर्षों का एक प्रश्नपत्र हल करें। अगर आप उत्तीर्णांक से आराम से ऊपर नहीं हैं, तो हमारी सामान्य हिंदी प्रश्नपत्र वाली गाइड की छोटी अभ्यास योजना अपनाएँ।
9. बहुत सारे स्रोत, बहुत कम दोहराव
हर विषय की पाँच किताबें, तीन कोचिंग मॉड्यूल, कई वेबसाइटों से रोज़ के संकलन, और इनमें से किसी को भी दोहराने का समय नहीं।
इसके बजाय: हर विषय का एक मानक स्रोत और आपके अपने नोट्स, जिनका कम से कम तीन बार दोहराव (revision) हो। तीन बार पढ़ी गई एक किताब, एक-एक बार पढ़ी गई तीन किताबों से बेहतर है।
10. थककर टूट जाना
लंबी तैयारी, अनिश्चित कैलेंडर और परिवार व समाज का दबाव, सब अपना असर डालते हैं।
इसके बजाय:
- हर सप्ताह आधा दिन छुट्टी लें;
- नियमित रूप से सोएँ और व्यायाम करें;
- तैयारी के दायरे से बाहर के लोगों से संपर्क बनाए रखें;
- एक प्लान B और प्रयासों की एक समय-सीमा रखें। इससे प्रतिबद्धता नहीं, चिंता घटती है।
प्रारंभिक परीक्षा की जाँच: जाल पहचानिए
इनमें से हर प्रश्न ऐसा तथ्य जाँचता है, जिसे GK पुस्तिकाएँ अक्सर गलत बताती हैं।
- विक्रमशिला महाविहार की स्थापना किसने की थी?
- (a) कुमारगुप्त प्रथम
- (b) देवपाल
- (c) हर्षवर्धन
- (d) धर्मपाल
- चंपारण सत्याग्रह कब हुआ?
- (a) 1915
- (b) 1917
- (c) 1918
- (d) 1920
- उड़ीसा को बिहार से अलग करके नया प्रांत कब बनाया गया?
- (a) 2000
- (b) 1947
- (c) 1936
- (d) 1912
- 12, 15, 9 और 14 का माध्य है:
- (a) 12
- (b) 12.5
- (c) 13
- (d) 13.5
उत्तर:
- (d) धर्मपाल। देवपाल उनके उत्तराधिकारी थे, इसलिए विकल्प (b) भ्रम में डालता है।
- (b) 1917। खेड़ा (1918) आम तौर पर भ्रामक विकल्प होता है।
- (c) 1936। 1912 में बिहार और उड़ीसा को मिलाकर बंगाल से अलग किया गया था।
- (b) 12.5। योग 50 है, जिसे 4 से भाग दिया गया। माध्यिका 13 है, जो विकल्प (c) है।
आत्म-मूल्यांकन
| गलती | मुझमें नहीं | कुछ हद तक | निश्चित रूप से |
|---|---|---|---|
| पुराना पैटर्न | |||
| वैकल्पिक विषय पर ज़रूरत से ज़्यादा समय | |||
| निबंध की उपेक्षा | |||
| बिहार की कमज़ोर परत | |||
| बिना जाँचे तथ्य | |||
| उत्तर लेखन नहीं | |||
| सांख्यिकी छोड़ना | |||
| सामान्य हिंदी की अनदेखी | |||
| बहुत सारे स्रोत | |||
| थकान |
"निश्चित रूप से" वाली उस एक गलती को चुनें, जिसे सुधारने से सबसे बड़ा फ़र्क पड़ेगा, और इसी सप्ताह उसे ठीक करें। फिर एक महीने बाद इस तालिका पर लौटें।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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