इस गाइड में
मध्य प्रदेश का एक डिप्टी कलेक्टर सुबह SDM के रूप में राजस्व प्रकरणों की सुनवाई कर सकता है, दोपहर में नर्मदा किनारे बाढ़-राहत योजना की समीक्षा कर सकता है, और शाम को जनसुनवाई में ग्रामीणों की शिकायतें सुन सकता है। यह काम ठीक से करने के लिए — और प्रशासन पर MPPSC के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए भी — आपको साफ़ समझ होनी चाहिए कि राज्य का शासन कैसे चलता है: शक्ति किसके पास है, आदेश भोपाल से गाँव तक कैसे पहुँचते हैं, और नियंत्रण कहाँ-कहाँ हैं।
संवैधानिक ढाँचा
दूसरे राज्यों की तरह मध्य प्रदेश का शासन भी संविधान के भाग VI के अंतर्गत चलता है। यहाँ एक राज्यपाल (Governor), एक मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद (Council of Ministers), 230 सदस्यों वाला एकसदनीय (unicameral) विधानमंडल, और जबलपुर में उच्च न्यायालय है, जिसकी खंडपीठें इंदौर और ग्वालियर में हैं। राज्य से लोकसभा में 29 और राज्यसभा में 11 सदस्य जाते हैं।
कार्यपालिका
राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। राज्यपाल विधानसभा को आहूत करते हैं और उसका सत्रावसान करते हैं, विधेयकों पर अनुमति देते हैं (या उन्हें राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखते हैं), अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेश जारी करते हैं, मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं, और राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (Chancellor) होते हैं। मध्य प्रदेश के बड़े अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में पाँचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल की विशेष ज़िम्मेदारियाँ हैं, जिनमें जनजाति सलाहकार परिषद (Tribes Advisory Council) उन्हें सलाह देती है। मध्य प्रदेश के पहले राज्यपाल डॉ. पट्टाभि सीतारमैया (1956) थे।
मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास वास्तविक कार्यपालिका शक्ति होती है, और वे सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं। 91वें संशोधन (2003) के अनुसार मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा की सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकता — मध्य प्रदेश की 230 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए यह सीमा मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 34 मंत्री है। मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल (1956) थे।
सचिवालय
नीतियाँ राज्य के सचिवालय (Secretariat) में बनती हैं — भोपाल स्थित वल्लभ भवन में।
| स्तर | कौन | भूमिका |
|---|---|---|
| मुख्य सचिव (Chief Secretary) | सबसे वरिष्ठ IAS अधिकारी | सिविल सेवा के प्रमुख; मंत्रिमंडल के सचिव |
| अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव | IAS अधिकारी | विभागों के प्रमुख |
| आयुक्त / संचालक | क्षेत्र में विभागाध्यक्ष | क्रियान्वयन |
क्षेत्रीय प्रशासन
| इकाई | प्रमुख | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| संभाग (Division) | संभागायुक्त (Divisional Commissioner) | जिलों का पर्यवेक्षण; राजस्व अपीलें; समन्वय |
| जिला | कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी (District Magistrate) | राजस्व, कानून-व्यवस्था (पुलिस अधीक्षक के साथ), चुनाव, आपदा, विकास का समन्वय |
| अनुविभाग (Sub-division) | अनुविभागीय अधिकारी / अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) | राजस्व न्यायालय और प्रशासन; दंडाधिकारी के दायित्व |
| तहसील | तहसीलदार (और नायब तहसीलदार) | भू-अभिलेख, राजस्व प्रकरण, प्रमाण पत्र |
| विकासखंड (Development block) | मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत | ग्रामीण विकास; निर्वाचित जनपद पंचायत को सहयोग |
| गाँव | पटवारी और पंचायत सचिव | भू-अभिलेख; पंचायत का प्रशासन |
जिले में पुलिस व्यवस्था के प्रमुख पुलिस अधीक्षक (SP) होते हैं। भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त प्रणाली (police commissionerate system) है, जो 2021 में लागू हुई। इसमें पुलिस आयुक्त कुछ दंडाधिकारी शक्तियों का प्रयोग करते हैं।
संभाग और जिले
मध्य प्रदेश में 10 संभाग हैं — भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा, शहडोल, जबलपुर और नर्मदापुरम — और 55 जिले। मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर जैसे नए जिले 2023 में बनाए गए।
न्यायपालिका
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में है, और इसकी खंडपीठें इंदौर और ग्वालियर में हैं। सर्वोच्च राजस्व न्यायालय — राजस्व मंडल (Board of Revenue) — ग्वालियर में है। उच्च न्यायालय पर हमारी पोस्ट देखें।
प्रमुख संस्थाएँ
| संस्था | आधार |
|---|---|
| MPPSC (इंदौर) | अनुच्छेद 315 |
| राज्य निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 243K |
| राज्य वित्त आयोग | अनुच्छेद 243I |
| लोकायुक्त | मध्य प्रदेश लोकायुक्त अधिनियम, 1981 |
| राज्य मानव अधिकार आयोग, राज्य सूचना आयोग | केंद्रीय कानून |
| मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल | राज्य के कई पदों पर भर्ती |
प्रशिक्षण
अधिकारियों का प्रशिक्षण भोपाल स्थित आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी (R. C. V. P. Noronha Academy of Administration and Management) में होता है।
मुख्य परीक्षा के लिए ढाँचा: एक बड़े और विविध राज्य का शासन
- आकार और विविधता — बड़े जिले, जनजातीय और वन क्षेत्र, लंबी दूरियाँ।
- क्षमता — पटवारी, शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी के स्तर पर रिक्त पद।
- विकेंद्रीकरण — पंचायती राज, और जनजातीय क्षेत्रों में PESA।
- नागरिक सेवाएँ — मध्य प्रदेश का लोक सेवा गारंटी अधिनियम (2010), सीएम हेल्पलाइन, ई-गवर्नेंस।
- सुधार — छोटे जिले, तकनीक, कामकाज की निगरानी।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- मध्य प्रदेश की मंत्रिपरिषद का अधिकतम आकार कितना हो सकता है?
- मध्य प्रदेश के सचिवालय भवन का नाम क्या है?
- मध्य प्रदेश में कितने संभाग और कितने जिले हैं?
- मध्य प्रदेश का राजस्व मंडल कहाँ स्थित है?
- मध्य प्रदेश के किन शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (लघु): मध्य प्रदेश में कलेक्टर के क्या कार्य हैं?
मुख्य परीक्षा शैली (दीर्घ): मध्य प्रदेश जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य के प्रशासन की चुनौतियों की चर्चा कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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