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भोपाल से लगभग 30 किमी दूर, बेतवा के किनारे एक पहाड़ी पर एक अधूरा मंदिर खड़ा है, जिसमें भारत के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है। इसके आसपास की चट्टानों पर पुरातत्वविदों को मूल निर्माण-रेखाचित्र उकेरे हुए मिले हैं — एक ऐसे मंदिर की योजनाएँ जो कभी पूरा नहीं हुआ। भोजपुर मंदिर राजा भोज से जुड़ा है, जो परमार वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक थे। उन्होंने ग्यारहवीं शताब्दी के आरंभ में मालवा पर शासन किया और विद्या तथा राजधर्म की किंवदंती बन गए। परमार MPPSC का एक मूल विषय हैं।
उत्पत्ति
- परमार स्वयं को अग्निकुल का वंशज बताते थे — माउंट आबू के अग्नि से उत्पन्न कुल (राजपूतों की उत्पत्ति की कथा देखें)।
- ऐतिहासिक रूप से वे पहले मालवा में राष्ट्रकूटों के सामंतों के रूप में दिखाई देते हैं, और दसवीं शताब्दी में स्वतंत्र हुए।
- उनकी राजधानियाँ उज्जैन और बाद में धार (धारा नगरी) थीं।
प्रमुख शासक
| शासक | काल (लगभग) | प्रमुख बातें |
|---|---|---|
| सीयक द्वितीय (हर्ष) | 10वीं शताब्दी | स्वतंत्र परमार सत्ता की स्थापना की |
| वाक्पति मुंज | 10वीं शताब्दी का उत्तरार्ध | योद्धा और कवि; पद्मगुप्त और धनपाल जैसे कवियों के संरक्षक; चालुक्य राजा तैलप द्वितीय के विरुद्ध अभियान में मारे गए |
| सिंधुराज | लगभग 990 का दशक – 1010 | पद्मगुप्त के नवसाहसांकचरित के नायक |
| भोज (राजा भोज) | लगभग 1010–1055 | सबसे महान परमार शासक — विजेता, विद्वान, निर्माता |
| उदयादित्य | 11वीं शताब्दी | परमार सत्ता को फिर से खड़ा किया; उदयपुर (विदिशा ज़िला) में उदयेश्वर (नीलकंठेश्वर) मंदिर बनवाया |
| बाद के शासक | 12वीं–13वीं शताब्दी | घटती सत्ता; चालुक्यों, चंदेलों और दिल्ली सल्तनत का दबाव |
राजा भोज: विद्वान राजा
भोज को भारत के सबसे विद्वान शासकों में गिना जाता है। परंपरा उन्हें कई विषयों पर ग्रंथों का रचयिता मानती है:
| कृति | विषय |
|---|---|
| समरांगण सूत्रधार | स्थापत्य और अभियांत्रिकी — नगर नियोजन, मंदिर निर्माण, और यांत्रिक उपकरण (यंत्र) भी |
| युक्तिकल्पतरु | विविध विज्ञान, जिनमें नौका-निर्माण और राजनीति शामिल हैं |
| सरस्वतीकंठाभरण | व्याकरण और काव्यशास्त्र |
| शृंगार प्रकाश | काव्यशास्त्र और सौंदर्यशास्त्र |
कहा जाता है कि उन्होंने धार में देवी सरस्वती से जुड़ा संस्कृत विद्या का एक केंद्र भी स्थापित किया। परंपरा उन्हें भोपाल के पास एक बड़ी झील बनवाने का श्रेय भी देती है — शहर के नाम को अक्सर भोजपाल से निकला बताया जाता है।
भोजपुर मंदिर
- भोजपुर के पास, रायसेन ज़िले में।
- एक अधूरा शिव मंदिर, जिसमें एक विशाल चबूतरे पर बहुत बड़ा शिवलिंग है।
- आसपास की चट्टानों पर उकेरे गए स्थापत्य रेखाचित्र हैं — यह इस बात का दुर्लभ साक्ष्य है कि मध्यकालीन मंदिरों की योजना कैसे बनाई जाती थी।
- कभी एक बड़े बाँध से यहाँ एक झील बनी थी, जिसे परंपरा भोज से जोड़ती है।
युद्ध और राजनीति
भोज ने कई पड़ोसियों से युद्ध किए — कल्याणी और गुजरात के चालुक्य, त्रिपुरी के कलचुरि, और चंदेल। उनका शासनकाल उत्तर-पश्चिमी भारत में महमूद ग़ज़नवी के आक्रमणों के समय पड़ा, और कुछ परंपराओं के अनुसार उन्होंने ग़ज़नवी दबाव का सामना करने में दूसरे राजाओं की मदद की। उनके शासन के अंतिम दौर में प्रतिद्वंद्वियों के एक गठबंधन ने मालवा पर हमला किया, और लगभग 1055 में भोज की मृत्यु हो गई।
परमारकालीन मालवा की संस्कृति
- संस्कृत और प्राकृत साहित्य फला-फूला — पद्मगुप्त, धनपाल और अन्य कवि।
- उदयपुर (विदिशा), ऊन (खरगोन), ओंकारेश्वर और अन्य स्थानों के मंदिर स्थापत्य की भूमिज शैली दिखाते हैं, जिसमें शिखर छोटे-छोटे शिखरों की पंक्तियों से बना होता है।
- जैन विद्वानों को संरक्षण मिला।
पतन
तेरहवीं शताब्दी के बाद परमार सत्ता लगातार कमज़ोर होती गई। 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी ने मालवा जीत लिया, और परमार शासन का अंत हो गया। बाद में मालवा एक स्वतंत्र सल्तनत का आधार बना (मांडू पर हमारी पोस्ट देखें)।
परमार क्यों महत्वपूर्ण हैं
- राजा भोज — मध्य प्रदेश की स्मृति में विद्या और राजधर्म के प्रतीक।
- स्थापत्य — भूमिज शैली; भोजपुर मंदिर और उसके रेखाचित्र।
- साहित्य और विज्ञान — मालवा में संस्कृत विद्वत्ता।
- राजनीति — ग्यारहवीं शताब्दी के भारत में मालवा का केंद्रीय स्थान।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- परंपरा से समरांगण सूत्रधार की रचना का श्रेय किस परमार शासक को दिया जाता है?
- राजा भोज से जुड़ा अधूरा शिव मंदिर कहाँ है?
- किस परमार शासक ने उदयेश्वर मंदिर बनवाया?
- नवसाहसांकचरित की रचना किस कवि ने की?
- 1305 में मालवा को किसने जीता?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (लघु): राजा भोज को विद्वान राजा के रूप में क्यों याद किया जाता है?
मुख्य परीक्षा शैली (दीर्घ): मालवा की संस्कृति में परमारों के योगदान की चर्चा कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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