इस गाइड में
हर RAS अभ्यर्थी इस लेख में बताए गए किसी न किसी दफ़्तर में बैठने का सपना देखता है — शायद किसी मरुस्थलीय कस्बे में राजस्व मामलों की सुनवाई करते उपखंड अधिकारी (Sub-Divisional Officer) के रूप में, या किसी ज़िले में थानों की निगरानी करते पुलिस उप-अधीक्षक (Deputy Superintendent of Police) के रूप में। इसलिए यह समझना कि राजस्थान का शासन जयपुर के राजभवन से लेकर गाँव के पटवारी तक कैसे चलता है, परीक्षा का विषय भी है और नौकरी की तैयारी भी।
संवैधानिक ढाँचा
हर राज्य की तरह राजस्थान का शासन भी संविधान के भाग VI के अंतर्गत चलता है। यहाँ एक राज्यपाल, मंत्रिपरिषद् के साथ एक मुख्यमंत्री, 200 सदस्यों वाला एकसदनीय (unicameral) विधानमंडल, और जोधपुर में उच्च न्यायालय है, जिसकी एक पीठ जयपुर में है।
कार्यपालिका
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख है, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। राज्यपाल विधान सभा का सत्र आहूत और सत्रावसान करता है, विधेयकों पर अनुमति देता है (या उन्हें राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करता है), अनुच्छेद 213 के अंतर्गत अध्यादेश प्रख्यापित करता है, मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है, और राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होता है। दक्षिणी राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों में पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्यपाल के विशेष दायित्व हैं। 1956 में राजप्रमुख का पद समाप्त होने के बाद गुरुमुख निहाल सिंह राजस्थान के पहले राज्यपाल बने।
मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद् के पास वास्तविक कार्यपालिका शक्ति होती है, और वे सामूहिक रूप से विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं। 91वें संशोधन (2003) के अनुसार मंत्रिपरिषद् का आकार विधान सभा की सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकता। राजस्थान की 200 सदस्यों वाली विधान सभा के लिए इसका अर्थ है मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 30 मंत्री।
महाधिवक्ता (Advocate General) (अनुच्छेद 165) राज्य का मुख्य विधि अधिकारी है।
सचिवालय
नीतियाँ जयपुर स्थित सचिवालय (Secretariat) में बनती हैं।
| स्तर | कौन | भूमिका |
|---|---|---|
| मुख्य सचिव | सबसे वरिष्ठ IAS अधिकारी | सिविल सेवा का प्रमुख; मंत्रिमंडल का सचिव; विभागों में समन्वय |
| अतिरिक्त मुख्य सचिव / प्रमुख शासन सचिव / शासन सचिव | IAS अधिकारी | विभागों के प्रशासनिक प्रमुख |
| विभागाध्यक्ष / निदेशालय | निदेशक, आयुक्त | क्षेत्र में नीतियों का क्रियान्वयन |
सचिवालय (नीति) और निदेशालयों (क्रियान्वयन) के बीच का अंतर परीक्षा का एक मानक बिंदु है।
क्षेत्रीय प्रशासन
| इकाई | प्रमुख | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| संभाग | संभागीय आयुक्त | ज़िलों की निगरानी और समन्वय; राजस्व अपीलें |
| ज़िला | ज़िला कलेक्टर एवं ज़िला मजिस्ट्रेट | राजस्व, कानून-व्यवस्था (SP के साथ), चुनाव, आपदा प्रबंधन, विकास कार्यों का समन्वय |
| उपखंड | उपखंड अधिकारी (SDO) / SDM | राजस्व प्रशासन और राजस्व न्यायालय; मजिस्ट्रेट के कर्तव्य |
| तहसील | तहसीलदार (नायब तहसीलदार के साथ) | भू-अभिलेख, नामांतरण, प्रमाण-पत्र, राहत |
| विकास खंड | विकास अधिकारी (BDO) | ग्रामीण विकास योजनाएँ; पंचायत समिति के साथ काम |
| गाँव | पटवारी (राजस्व) और ग्राम विकास अधिकारी (विकास) | भू-अभिलेख (जमाबंदी, गिरदावरी); गाँव स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन |
ज़िले में पुलिस अधीक्षक पुलिस का प्रमुख होता है, और ज़िला परिषद का मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्रामीण विकास का समन्वय करता है।
बदलता नक्शा: संभाग और ज़िले
पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान का प्रशासनिक नक्शा काफ़ी बदला है:
| वर्ष | बदलाव |
|---|---|
| 2023 तक | 33 ज़िले और 7 संभाग |
| 2023 | 17 नए ज़िले (आधिकारिक घोषणा में 19, जिसमें पुनर्गठित जयपुर और जोधपुर ज़िले भी गिने गए) और 3 नए संभाग बनाए गए (कुल 50 ज़िले और 10 संभाग) |
| 28 दिसंबर 2024 | राज्य मंत्रिमंडल ने 9 नए ज़िलों और सभी 3 नए संभागों को बनाए न रखने का निर्णय लिया |
| अब | 41 ज़िले और 7 संभाग |
सात संभाग हैं: जयपुर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर और भरतपुर।
न्यायपालिका
राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में है और उसकी एक पीठ जयपुर में है। इसके नीचे ज़िला एवं सत्र न्यायालय, सिविल न्यायालय और विशेष न्यायालय हैं। उच्च न्यायालय पर हमारा अलग लेख देखें।
प्रमुख संवैधानिक और वैधानिक संस्थाएँ
| संस्था | आधार |
|---|---|
| राजस्थान लोक सेवा आयोग (अजमेर) | अनुच्छेद 315 |
| राज्य निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 243K — पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव |
| राज्य वित्त आयोग | अनुच्छेद 243I |
| लोकायुक्त | राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 |
| राज्य मानव अधिकार आयोग, राज्य सूचना आयोग, राज्य महिला आयोग | केंद्रीय और राज्य कानून |
| राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड | अधीनस्थ पदों पर भर्ती |
प्रशिक्षण
सिविल सेवकों का प्रशिक्षण जयपुर स्थित हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (HCM RIPA) में होता है।
मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए ढाँचा: राजस्थान के शासन की चुनौतियाँ
- दूरी और विरल आबादी — विशाल मरुस्थलीय ज़िलों में सेवाएँ पहुँचाना।
- पानी और सूखा — बार-बार आने वाले संकटों का प्रबंधन।
- क्षमता — पटवारी, शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी स्तर पर रिक्त पद।
- समन्वय — अनेक विभाग, एक-दूसरे से टकराती योजनाएँ।
- सुधार — ई-गवर्नेंस (जन आधार, ई-मित्र, राजस्थान संपर्क), छोटी प्रशासनिक इकाइयाँ, क्षमता निर्माण।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा शैली:
- राजस्थान की मंत्रिपरिषद् का अधिकतम आकार क्या है?
- दिसंबर 2024 के बाद राजस्थान में कितने ज़िले और संभाग हैं?
- राजस्थान के पहले राज्यपाल कौन थे?
- राजस्थान उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है?
- राजस्थान का लोकायुक्त किस अधिनियम के अंतर्गत बनाया गया?
मुख्य परीक्षा शैली (50 शब्द): राजस्थान में ज़िला कलेक्टर के कार्य क्या हैं?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): राजस्थान में छोटे ज़िले बनाने के पक्ष और विपक्ष में तर्कों की विवेचना कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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