इस गाइड में
1771 में मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय, जो इलाहाबाद में अंग्रेज़ों के संरक्षण में रह रहे थे, दिल्ली के लिए निकले और जनवरी 1772 में दिल्ली पहुँचे — महादजी सिंधिया के नेतृत्व वाली एक मराठा सेना के संरक्षण में। अगले दो दशकों तक महादजी उत्तर भारत के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति रहे; बादशाह और उनके नाम पर साम्राज्य के बड़े हिस्से पर उनका नियंत्रण था। उनका परिवार, सिंधिया (शिंदे), ग्वालियर को राजधानी बनाकर सबसे बड़े मराठा राज्यों में से एक पर शासन करता रहा, और स्वतंत्रता तक मध्य भारत की एक बड़ी शक्ति बना रहा। उनकी कहानी महाराष्ट्र, मालवा, दिल्ली और ब्रिटिश राज को जोड़ती है — और यह MPPSC के इतिहास पाठ्यक्रम (syllabus) का एक स्थायी विषय है।
उत्पत्ति: राणोजी सिंधिया
- राणोजी सिंधिया पेशवा बाजीराव प्रथम के अधीन एक सेनापति थे, जो साधारण पृष्ठभूमि से ऊपर उठे।
- 1720–30 के दशकों में जब मराठे मालवा में फैले, तो राणोजी को वहाँ क्षेत्र मिले और उन्होंने उज्जैन को अपना केंद्र बनाया।
- मल्हारराव होलकर के साथ मिलकर उन्होंने मालवा पर मराठा नियंत्रण स्थापित करने में मदद की।
महादजी सिंधिया: उत्तर भारत के स्वामी
| उपलब्धि | विवरण |
|---|---|
| पानीपत से बच निकले | पानीपत के तीसरे युद्ध (1761) में घायल हुए, फिर उत्तर में मराठा शक्ति को दोबारा खड़ा किया |
| शाह आलम द्वितीय की पुनर्स्थापना | मुग़ल बादशाह को वापस दिल्ली पहुँचाया (1771 में रवाना, जनवरी 1772 में दिल्ली में प्रवेश) और बाद में उनके संरक्षक और प्रतिनिधि शासक (regent) बने |
| सालबाई की संधि (1782) | उस शांति में मध्यस्थता की, जिससे पहला आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त हुआ |
| आधुनिक सेना | फ़्रांसीसी अधिकारी बेनुआ डी बोएन (Benoît de Boigne) से यूरोपीय ढंग पर प्रशिक्षित एक शक्तिशाली सेना बनाई, जिसमें तोपख़ाना और पैदल बटालियनें थीं |
| उत्तर में प्रभुत्व | 1794 में अपनी मृत्यु तक दिल्ली, आगरा और उत्तर भारत के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण रखा |
दौलतराव सिंधिया और अंग्रेज़
- दौलतराव सिंधिया महादजी के उत्तराधिकारी बने और मराठों के आपसी संघर्षों तथा अंग्रेज़ों से टकराव में उलझ गए।
- दूसरे आंग्ल-मराठा युद्ध (1803–05) में सिंधिया की सेनाएँ असई और लासवाड़ी जैसे युद्धों में पराजित हुईं; उन्होंने सुर्जी-अंजनगाँव की संधि (1803) पर हस्ताक्षर किए और क्षेत्र सौंपे।
- लगभग 1810 में राजधानी ग्वालियर ले जाई गई, जहाँ सेना की छावनी — लश्कर — एक नगर के रूप में विकसित हुई।
- तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध (1817–18) के बाद सिंधियों ने ब्रिटिश सर्वोच्चता (paramountcy) स्वीकार कर ली।
महाराजपुर का युद्ध (1843)
उत्तराधिकार के एक विवाद के दौरान लॉर्ड एलनबरो के नेतृत्व में अंग्रेज़ों ने दिसंबर 1843 में महाराजपुर और पनियार में ग्वालियर की सेना से युद्ध किया। सिंधिया राज्य की सैन्य शक्ति घटा दी गई और उसे और मज़बूती से अंग्रेज़ों के नियंत्रण में ले लिया गया।
जयाजीराव सिंधिया और 1857
- 1857 के विद्रोह के दौरान जयाजीराव सिंधिया अंग्रेज़ों के प्रति वफ़ादार रहे, हालाँकि उनकी सेना का बड़ा हिस्सा विद्रोहियों से जा मिला।
- जून 1858 में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर पर कब्ज़ा कर लिया और जयाजीराव को भागना पड़ा। 18 जून 1858 को रानी ग्वालियर के पास लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, और अंग्रेज़ों ने नगर पर फिर से कब्ज़ा कर लिया।
- जयाजीराव ने यूरोपीय शैली में भव्य जय विलास पैलेस (1874 में पूरा) बनवाया, जो अब मुख्यतः एक संग्रहालय है।
बाद के शासक और आधुनिक ग्वालियर
- माधोराव सिंधिया (बीसवीं शताब्दी का आरंभ) ने रेलवे (ग्वालियर लाइट रेलवे), शिक्षा और 1905 में शुरू हुए ग्वालियर व्यापार मेले (ग्वालियर मेला) को बढ़ावा दिया।
- जीवाजीराव सिंधिया मध्य भारत के राजप्रमुख बने। मध्य भारत 1948 में ग्वालियर, इंदौर और अन्य रियासतों को मिलाकर बना था, और ग्वालियर तथा इंदौर उसकी राजधानियाँ थीं (शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन)।
- 1956 में मध्य भारत नए मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया।
विरासत
| क्षेत्र | विरासत |
|---|---|
| नगर | एक बड़े नगर के रूप में ग्वालियर (लश्कर); उज्जैन की पहले की भूमिका |
| स्थापत्य | जय विलास पैलेस; सिंधिया शासकों की छतरियाँ (cenotaphs) |
| संस्थाएँ | सिंधिया स्कूल (ग्वालियर किले पर) जैसे विद्यालय, व्यापार मेला, रेलवे |
| राजनीति | परिवार के सदस्य स्वतंत्रता के बाद की राजनीति में प्रमुख बने रहे |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- मालवा में सिंधिया शक्ति का संस्थापक कौन था?
- 1771–72 में किस सिंधिया शासक ने शाह आलम द्वितीय को दिल्ली पहुँचाया?
- किस संधि से पहला आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त हुआ, और उसमें मध्यस्थता किसने की?
- सिंधियों ने अपनी राजधानी ग्वालियर कब स्थानांतरित की?
- ग्वालियर व्यापार मेला कब शुरू हुआ?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (लघु): महादजी सिंधिया की सेना का क्या महत्व था?
मुख्य परीक्षा शैली (दीर्घ): अठारहवीं शताब्दी में उत्तर और मध्य भारत की राजनीति में सिंधियों की भूमिका की चर्चा कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
अगली MPPSC गाइड ईमेल पर पाएँ
हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।