इस गाइड में
1920 में जब इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के एक अधिनियम से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, तो उसकी पहली कुलाधिपति (chancellor) एक महिला थीं: भोपाल की शासिका सुल्तान जहाँ बेगम। वे उन चार महिलाओं में अंतिम थीं, जिन्होंने एक के बाद एक, 1819 से 1926 तक, एक सदी से अधिक समय तक भोपाल पर शासन किया। भोपाल की बेगमों ने राजस्व और पुलिस व्यवस्था में सुधार किए, मस्जिदें और महल बनवाए, और लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया — उस समय, जब दुनिया में कहीं भी महिलाओं के हाथ में सत्ता कम ही होती थी।
MPPSC यह विषय दो तरह से पूछता है। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में बेगमों का क्रम और "किसने क्या बनवाया" पूछा जाता है। मुख्य परीक्षा (Mains) में आपसे उनके शासन का मूल्यांकन करने, या भोपाल के भारत में देर से विलय और राज्य की राजधानी के रूप में उसके चुनाव को समझाने के लिए कहा जाता है। यह मार्गदर्शिका दोनों को शामिल करती है।
भोपाल रियासत की शुरुआत
- मुग़लों की सेवा कर चुके एक अफ़ग़ान सैनिक दोस्त मोहम्मद ख़ान ने अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में इस रियासत की नींव रखी। उन्होंने इस्लामनगर में एक किला बनवाया और फिर भोपाल में फ़तेहगढ़ किला, जो उनकी राजधानी बना।
- उनके उत्तराधिकारी, भोपाल के नवाब, मराठों (सिंधिया, होलकर, पेशवा) और निज़ाम के बीच दबे एक छोटे राज्य पर शासन करते रहे।
- मराठों और पिंडारियों के दबाव में भोपाल ने 1818 में अंग्रेज़ों से संधि की और ब्रिटिश सर्वोच्चता (paramountcy) स्वीकार कर ली।
1818 का यह गठबंधन आगे की पूरी कहानी के लिए महत्वपूर्ण है: ब्रिटिश संरक्षण से रियासत को स्थिरता मिली, और ब्रिटिश रेज़िडेंट के समर्थन से बेगमें प्रतिद्वंद्वी पुरुष दावेदारों के सामने सत्ता में टिकी रह सकीं।
चार बेगमें
| बेगम | शासन | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| क़ुदसिया बेगम (गौहर बेगम) | 1819–1837 | पति नवाब नज़र मोहम्मद ख़ान की मृत्यु के बाद अपनी शिशु पुत्री की ओर से सत्ता सँभाली; गौहर महल बनवाया; जल-आपूर्ति के कार्य |
| सिकंदर बेगम | 1844 से संरक्षिका (regent) (1847 से पूर्ण अधिकार); शासिका 1860–1868 | राजस्व, सेना और पुलिस में सुधार; 1857 में अंग्रेज़ों का साथ दिया; मोती मस्जिद बनवाई; हज किया और उसका वृत्तांत लिखा |
| शाहजहाँ बेगम | 1868–1901 | ताज-उल-मसाजिद का निर्माण शुरू कराया; भोपाल का ताज महल महल और शाहजहाँनाबाद इलाका बनवाया; पुस्तकें लिखीं |
| सुल्तान जहाँ बेगम | 1901–1926 | लड़कियों के स्कूल, स्वास्थ्य और टीकाकरण; प्रशासनिक सुधार; AMU की पहली कुलाधिपति (1920); विस्तार से लेखन किया; 1926 में अपने पुत्र के पक्ष में गद्दी छोड़ी |
उनकी उपलब्धियाँ
- प्रशासन: सबसे बड़े सुधार का श्रेय आम तौर पर सिकंदर बेगम को दिया जाता है: उन्होंने रियासत का कर्ज़ चुकाया, राजस्व वसूली को पुनर्गठित किया, अदालतें और नियमित पुलिस स्थापित कीं, और बिचौलियों की शक्ति घटाई। बाद की बेगमों ने इसी नींव पर काम आगे बढ़ाया।
- सार्वजनिक निर्माण: नगर के लिए जल-आपूर्ति, सड़कें, बाज़ार, महल और मस्जिदें। भोपाल की "झीलों की नगरी" वाली पहचान इसी निर्मित धरोहर के आसपास विकसित हुई।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: सुल्तान जहाँ बेगम ने लड़कियों के लिए स्कूल खोले, अस्पतालों और टीकाकरण को सहारा दिया, और AMU के ज़रिए भोपाल को व्यापक मुस्लिम सुधार आंदोलन से जोड़ा।
- महिलाओं की स्थिति: उनका शासन अपने आप में स्थापित मान्यताओं को चुनौती था। सुल्तान जहाँ बेगम ने महिला शिक्षा पर भी लिखा।
सिकंदर बेगम और 1857
1857 के विद्रोह के दौरान सिकंदर बेगम ने भोपाल को अंग्रेज़ों के प्रति वफ़ादार रखा, जबकि उनके अपने कुछ सैनिकों और प्रजा की सहानुभूति विद्रोहियों के साथ थी। उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों की रक्षा की और विद्रोह के बाद पुरस्कृत हुईं। उनका यह निर्णय उस स्थिति को दिखाता है, जिसमें अधिकांश देशी शासक थे: विद्रोह करने पर रियासत दाँव पर लगती थी, वफ़ादार रहने पर घर में असंतोष का ख़तरा था। व्यापक तस्वीर के लिए मध्य प्रदेश में 1857 देखें।
नवाब हमीदुल्ला ख़ान और विलय
सुल्तान जहाँ बेगम के पुत्र नवाब हमीदुल्ला ख़ान (1926 से शासन) राजाओं की एक प्रमुख आवाज़ थे और नरेंद्र मंडल (Chamber of Princes) के चांसलर रहे। 1947 में वे चाहते थे कि भोपाल यथासंभव अलग बना रहे, और भारत में पूर्ण विलय टलता रहा।
एकीकरण की माँग को लेकर एक जन विलीनीकरण आंदोलन (merger movement) चला। इसके नेताओं में डॉ. शंकर दयाल शर्मा भी थे, जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने। जनवरी 1949 में नर्मदा तट पर बोरास (अब रायसेन जिला) में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में कई युवक मारे गए, जिन्हें आंदोलन के शहीदों के रूप में याद किया जाता है।
1 जून 1949 को भोपाल को संघ ने अपने अधिकार में ले लिया, और वह केंद्र के अधीन एक भाग 'ग' राज्य (Part C state) बना। शंकर दयाल शर्मा 1952 से 1956 तक इसके मुख्यमंत्री रहे।
समयरेखा
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1700 के दशक का आरंभ | दोस्त मोहम्मद ख़ान ने भोपाल रियासत की स्थापना की |
| 1818 | अंग्रेज़ों से संधि; भोपाल ने सर्वोच्चता स्वीकार की |
| 1819 | क़ुदसिया बेगम ने सत्ता सँभाली |
| 1820 का दशक | गौहर महल का निर्माण |
| 1844 | सिकंदर बेगम संरक्षिका बनीं (1847 में पूर्ण अधिकार) |
| 1857 | सिकंदर बेगम अंग्रेज़ों के प्रति वफ़ादार रहीं |
| 1860 | सिकंदर बेगम स्वयं शासिका बनीं |
| 1868 | शाहजहाँ बेगम उत्तराधिकारी बनीं |
| 1901 | सुल्तान जहाँ बेगम उत्तराधिकारी बनीं |
| 1920 | सुल्तान जहाँ बेगम AMU की पहली कुलाधिपति बनीं |
| 1926 | हमीदुल्ला ख़ान के पक्ष में गद्दी त्याग; बेगमों के शासन का अंत |
| जनवरी 1949 | विलीनीकरण आंदोलन के दौरान बोरास गोलीकांड |
| 1 जून 1949 | भोपाल का विलय; भाग 'ग' राज्य बना |
| 1 नवंबर 1956 | भोपाल नए मध्य प्रदेश की राजधानी बना |
भोपाल राजधानी बना
जब 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश बना, तो बड़े नगरों — ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर — के बजाय भोपाल को राजधानी चुना गया। यह नए राज्य के केंद्र के पास था, इसमें रियासती प्रशासन के समय की सरकारी इमारतें थीं, विस्तार के लिए ज़मीन थी, और यह आपस में होड़ करते क्षेत्रों के बीच समझौते के रूप में स्वीकार्य था। पूरी कहानी मध्य प्रदेश का गठन पर हमारी मार्गदर्शिका में है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर की रूपरेखा
अभ्यास प्रश्न (लगभग 150 शब्द): "भोपाल की बेगमें भारत में महिला नेतृत्व की अग्रदूत थीं।" चर्चा कीजिए।
रूपरेखा:
- भूमिका: चार महिला शासक, 1819–1926, ब्रिटिश सर्वोच्चता के अधीन।
- शासन: सिकंदर बेगम के राजस्व, पुलिस और सेना संबंधी सुधार।
- कल्याण और संस्कृति: मस्जिदें, महल, जल-आपूर्ति; सुल्तान जहाँ बेगम के समय लड़कियों के स्कूल और स्वास्थ्य।
- सीमाएँ: सत्ता ब्रिटिश समर्थन पर निर्भर थी; 1857 का निर्णय।
- निष्कर्ष: महिला नेतृत्व का एक वास्तविक, भले ही सीमित, उदाहरण।
आदर्श उत्तर (संक्षिप्त): 1819 से 1926 तक, एक सदी से अधिक समय तक, भोपाल पर चार महिलाओं ने शासन किया: क़ुदसिया, सिकंदर, शाहजहाँ और सुल्तान जहाँ बेगम। सिकंदर बेगम ने कर्ज़ चुकाए और राजस्व, पुलिस तथा अदालतों को पुनर्गठित किया। शाहजहाँ बेगम ने बड़े पैमाने पर निर्माण कराया, जिसमें उनके द्वारा शुरू की गई ताज-उल-मसाजिद भी शामिल है। सुल्तान जहाँ बेगम ने लड़कियों के लिए स्कूल खोले, स्वास्थ्य अभियानों को सहारा दिया, और 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की पहली कुलाधिपति बनीं। उनका नेतृत्व वास्तविक था, लेकिन सीमित: वे ब्रिटिश सर्वोच्चता के अधीन शासन करती थीं, और 1857 में सिकंदर बेगम की वफ़ादारी इसी निर्भरता को दर्शाती है। फिर भी, जब महिलाएँ सार्वजनिक सत्ता से काफ़ी हद तक बाहर थीं, तब बेगमों ने दिखाया कि महिलाएँ कुशलता से राज्य चला सकती हैं और सामाजिक सुधार आगे बढ़ा सकती हैं। यही उन्हें सच्ची अग्रदूत बनाता है।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
- भोपाल रियासत की स्थापना किसने की? (a) हमीदुल्ला ख़ान (b) दोस्त मोहम्मद ख़ान (c) नज़र मोहम्मद ख़ान (d) यार मोहम्मद ख़ान
- भोपाल की मोती मस्जिद किसने बनवाई? (a) क़ुदसिया बेगम (b) सिकंदर बेगम (c) शाहजहाँ बेगम (d) सुल्तान जहाँ बेगम
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (1920) के पहले कुलाधिपति कौन थे? (a) सर सैयद अहमद ख़ान (b) सुल्तान जहाँ बेगम (c) शाहजहाँ बेगम (d) हमीदुल्ला ख़ान
- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) गौहर महल क़ुदसिया बेगम ने बनवाया था। (2) भोपाल का भारत में विलय 1947 के स्वतंत्रता दिवस से पहले हो गया था। कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) दोनों (d) कोई नहीं
- बेगमों को उनके शासन के क्रम में लगाइए: (1) शाहजहाँ (2) क़ुदसिया (3) सुल्तान जहाँ (4) सिकंदर। (a) 2-4-1-3 (b) 2-1-4-3 (c) 4-2-1-3 (d) 2-4-3-1
उत्तर: 1 (b)। 2 (b)। 3 (b): सर सैयद ने 1875 में कॉलेज की स्थापना की थी, लेकिन उनकी मृत्यु 1898 में, विश्वविद्यालय बनने से पहले ही हो गई थी। 4 (a): भोपाल का विलय 1 जून 1949 को हुआ। 5 (a)।
आगे क्या करें
- चारों बेगमों को उनकी तिथियों और हर एक की एक इमारत के साथ याद करें।
- विलीनीकरण आंदोलन का दोहराव (revision) मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम के साथ करें।
- ऊपर दिया मुख्य परीक्षा का उत्तर 12 मिनट में लिखें और आदर्श उत्तर से उसकी तुलना करें।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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