इस गाइड में
दो अभ्यर्थियों के SSC GD की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBE) में बिल्कुल बराबर अंक आते हैं। एक का चयन हो जाता है, दूसरे का नहीं। कुछ भी गलत नहीं हुआ। बस दोनों अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं।
SSC GD की रिक्तियाँ राज्यवार बाँटी जाती हैं, और हर राज्य के अंदर वर्ग और लिंग के हिसाब से। आपकी रैंक केवल उन लोगों के बीच बनती है जो आपके ही "खाने" में हैं। यह समझ आ जाने के बाद आप खुद की तुलना देश के टॉपरों से करना छोड़ देते हैं और उस संख्या पर निशाना लगाते हैं जो सच में मायने रखती है: आपके राज्य का कट-ऑफ (cut-off)।
रिक्तियाँ कैसे बाँटी जाती हैं
बल SSC को बताते हैं कि उन्हें कितने कांस्टेबल चाहिए। फिर इन रिक्तियों को परतों में बाँटा जाता है।
- राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार, मोटे तौर पर जनसंख्या के अनुपात में।
- राज्य के अंदर क्षेत्र के अनुसार, कुछ बलों के लिए। हाल की अधिसूचनाओं में सीमा की सुरक्षा करने वाले बलों ने रिक्तियों का एक हिस्सा सीमावर्ती ज़िलों और उग्रवाद प्रभावित ज़िलों के लिए अलग रखा है। इसका दावा करने के लिए उस ज़िले का वैध अधिवास (domicile) प्रमाण पत्र चाहिए।
- वर्ग के अनुसार: UR, OBC, EWS, SC और ST। भूतपूर्व सैनिकों का अपना आरक्षण है।
- लिंग के अनुसार: पुरुषों और महिलाओं की रिक्तियाँ अलग-अलग दिखाई जाती हैं।
तो एक "खाना" कुछ ऐसा हो सकता है: राजस्थान, OBC, पुरुष, सीमावर्ती ज़िला। उस खाने में जितने लोग हैं, वही आपके प्रतियोगी हैं।
राज्यों के कट-ऑफ अलग क्यों होते हैं
| कारण | आमतौर पर असर |
|---|---|
| खाने में ज़्यादा रिक्तियाँ | कम कट-ऑफ |
| ज़्यादा अभ्यर्थियों का आवेदन | ज़्यादा कट-ऑफ |
| कड़ा मुकाबला (कई अच्छी तैयारी वाले अभ्यर्थी) | ज़्यादा कट-ऑफ |
| कई शिफ़्टों में कठिन प्रश्नपत्र | कम कच्चे अंक, जिन्हें सामान्यीकरण संतुलित करता है |
इसीलिए कम रिक्तियों वाले छोटे राज्य का कट-ऑफ किसी बड़े राज्य से ज़्यादा हो सकता है, और एक ही राज्य का कट-ऑफ एक साल से दूसरे साल बदल सकता है।
सामान्यीकरण
CBE कई दिनों और कई शिफ़्टों में होती है। कुछ शिफ़्टों का प्रश्नपत्र दूसरों से थोड़ा कठिन होता है। इसे न्यायपूर्ण रखने के लिए SSC अंकों का सामान्यीकरण (normalisation) करता है: वह अंकों को इस तरह समायोजित करता है कि कठिन और आसान शिफ़्ट वाले अभ्यर्थियों की तुलना एक ही पैमाने पर हो सके। इसका तरीका SSC के नोटिस में समझाया गया है।
आपके लिए इसका मतलब:
- आपके सामान्यीकृत अंक आपके कच्चे (raw) अंकों से थोड़े ज़्यादा या कम हो सकते हैं।
- कट-ऑफ सामान्यीकृत अंकों पर जारी होते हैं।
- अपनी शिफ़्ट आप तय नहीं कर सकते, इसलिए उसकी चिंता में ऊर्जा न गँवाएँ। इतना ऊँचा लक्ष्य रखें कि दोनों हालात में सुरक्षित रहें।
CBE से अंतिम चयन तक
- CBE का परिणाम। जो अभ्यर्थी न्यूनतम क्वालीफाइंग (qualifying) अंक पा लेते हैं, उन्हें उनके राज्य, वर्ग और लिंग के भीतर रैंक दी जाती है। (आधिकारिक नोटिस में इन्हें अर्हक अंक कहा जाता है।)
- PET और PST के लिए शॉर्टलिस्टिंग। हर खाने में रिक्तियों से कई गुना अभ्यर्थी बुलाए जाते हैं। यह अनुपात अधिसूचना में होता है।
- शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET), शारीरिक मानक परीक्षण (PST), चिकित्सा परीक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन। इन सबमें केवल पास या फ़ेल होता है।
- अंतिम मेरिट (final merit)। सामान्यीकृत CBE अंक और साथ में NCC बोनस अंक (अगर हों), आपके खाने के भीतर रैंक किए जाते हैं। हमारी NCC बोनस गाइड देखें।
- बल का आवंटन। आपकी मेरिट रैंक और आपकी दी हुई बल-वरीयताओं के आधार पर।
क्योंकि PET के लिए रिक्तियों से ज़्यादा अभ्यर्थी बुलाए जाते हैं, इसलिए किसी खाने का अंतिम कट-ऑफ आमतौर पर PET के बुलावे वाले कट-ऑफ से ज़्यादा होता है। PET का बुलावा पत्र मंज़िल नहीं है।
पिछले कट-ऑफ कैसे पढ़ें
- अपने ही खाने का कट-ऑफ देखें। राष्ट्रीय औसत या किसी दूसरे राज्य का आँकड़ा आपके किसी काम का नहीं।
- एक संख्या नहीं, एक दायरा लें। पिछले दो-तीन वर्षों की परीक्षाएँ देखें।
- पैटर्न के बदलाव पर ध्यान दें। पुरानी परीक्षाओं में 100 अंकों का प्रश्नपत्र था; हाल की परीक्षाओं में 160 अंकों का है। पुराने कट-ऑफ की सीधी तुलना नहीं हो सकती।
- SSC के आधिकारिक परिणाम नोटिस का इस्तेमाल करें, सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट का नहीं।
पुराने कट-ऑफ को बदलना (मोटा अनुमान)। मान लीजिए पुराना कट-ऑफ 100 में से 70 था। प्रतिशत में यह 70% है, और 160 का 70% = 0.7 × 160 = 112। इससे केवल मोटा अंदाज़ा मिलता है, क्योंकि पुराने प्रश्नपत्र के प्रश्न और समय अलग थे।
अपना लक्ष्य तय करना: एक हल किया हुआ उदाहरण
ये संख्याएँ केवल तरीका दिखाने के लिए मान ली गई हैं। अपने खाने के लिए SSC के नोटिस से असली आँकड़े लें।
मान लीजिए किसी अभ्यर्थी के खाने में पिछले तीन वर्षों के कट-ऑफ 110, 118 और 114 थे।
- सबसे ऊँचा लें: 118।
- लगभग 7 अंकों का सुरक्षा मार्जिन जोड़ें: 118 + 7 = 125।
- इसे उत्तरों में बदलें। मान लें कि एक सामान्य मॉक में लगभग 8 उत्तर गलत होते हैं, जिनसे 8 × 0.25 = 2 अंक कटते हैं। यानी सही उत्तरों से 125 + 2 = 127 अंक आने चाहिए। 127 ÷ 2 = 63.5, इसलिए 64 सही उत्तर।
- अपनी ताक़त के हिसाब से खंडों में बाँटें: रीज़निंग 17, भाषा 17, गणित 16, GK 14। कुल 17 + 17 + 16 + 14 = 64।
- जाँचें: 64 × 2 − 8 × 0.25 = 128 − 2 = 126, जो 125 से थोड़ा ऊपर है।
अब अभ्यर्थी के पास हर मॉक के लिए साफ़ लक्ष्य है: 64 सही, 8 या उससे कम गलत।
अपने कट-ऑफ का रिकॉर्ड रखें
| वर्ष | राज्य | वर्ग और लिंग | क्षेत्र (अगर हो) | कट-ऑफ (सामान्यीकृत) |
|---|---|---|---|---|
इसे SSC के आधिकारिक नोटिस से भरें। समझदारी भरा लक्ष्य तय करने के लिए दो-तीन पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
अभ्यास
- SSC GD की रिक्तियाँ किन चार परतों में बाँटी जाती हैं?
- किसी छोटे राज्य का कट-ऑफ किसी बड़े राज्य से ज़्यादा क्यों हो सकता है?
- एक पुराना कट-ऑफ 100 में से 65 था। 160 में यह लगभग कितना होगा?
- लक्ष्य 120 है और आपको 8 गलत उत्तरों की आशंका है। कितने सही उत्तर चाहिए?
- अंतिम मेरिट में CBE के अंकों में क्या जोड़ा जाता है?
उत्तर:
- राज्य या केंद्र शासित प्रदेश, राज्य के भीतर क्षेत्र (कुछ बलों के लिए), वर्ग, और लिंग।
- कम रिक्तियाँ और कड़ा मुकाबला कट-ऑफ को ऊपर ले जा सकते हैं।
- 160 का 65% = 0.65 × 160 = 104 (केवल मोटा अनुमान)।
- 120 + 8 × 0.25 = 122; 122 ÷ 2 = 61 सही।
- NCC बोनस अंक, अगर अभ्यर्थी के पास वैध प्रमाण पत्र है।
आगे क्या करें
- अपना अधिवास प्रमाण पत्र अभी सही नाम और सही प्रारूप में जाँच लें।
- SSC के नोटिस से अपने खाने के पिछले दो-तीन वर्षों के कट-ऑफ निकालें।
- ऊपर दिए तरीके से अपना लक्ष्य और खंडवार बँटवारा तय करें।
- लक्ष्य को अपने मॉक लॉग में सबसे ऊपर लिखें और हर मॉक की उससे तुलना करें।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Staff Selection Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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