इस गाइड में
- 1. पुराने पैटर्न की तैयारी करना
- 2. उत्तर प्रदेश को सहायक विषय मानना
- 3. सामान्य हिंदी को औपचारिकता मानना
- 4. निबंध की उपेक्षा
- 5. CSAT को नज़रअंदाज़ करना
- 6. बिना जाँचे उत्तर प्रदेश के तथ्यों पर भरोसा करना
- 7. प्रारंभिक परीक्षा से पहले उत्तर लेखन न करना
- 8. नीतिशास्त्र की केस स्टडी छोड़ देना
- 9. बहुत सारे स्रोत
- 10. थककर टूट जाना (बर्नआउट)
- खुद की जाँच
हर साल लाखों अभ्यर्थी UP PCS के लिए आवेदन करते हैं, और केवल कुछ सौ चुने जाते हैं। जो पीछे रह जाते हैं, उनमें से अधिकांश ने कड़ी मेहनत की थी — कई ने तो सफल होने वाले कुछ अभ्यर्थियों से भी ज़्यादा। उन्हें आम तौर पर मेहनत की कमी ने नहीं रोका, बल्कि कुछ गिनी-चुनी, पहले से पहचानी जा सकने वाली गलतियों में से एक या अधिक ने रोका। उत्साह की बात यह है कि इनमें से हर गलती जल्दी पकड़ी और सुधारी जा सकती है।
1. पुराने पैटर्न की तैयारी करना
UPPSC ने वैकल्पिक विषय (optional subject) हटा दिया और नीतिशास्त्र (Ethics) के पूरे प्रश्नपत्र के साथ उत्तर प्रदेश पर GS V और VI जोड़ दिए। फिर भी पुरानी किताबें, पुराने कोचिंग नोट्स और भला चाहने वाले सीनियर अब भी पहले वाला पैटर्न बताते हैं। जो अभ्यर्थी ऐसे वैकल्पिक विषय पर तीन महीने लगा देते हैं जो अब है ही नहीं, वे साल का एक-चौथाई हिस्सा गँवा चुके होते हैं।
इसके बजाय: uppsc.up.nic.in पर वर्तमान अधिसूचना (notification) और पाठ्यक्रम (syllabus) से शुरुआत करें, पाठ्यक्रम का प्रिंट निकालें और उसे अपनी मेज़ पर रखें। आपका हर स्रोत उस पन्ने की किसी न किसी पंक्ति से जुड़ना चाहिए।
2. उत्तर प्रदेश को सहायक विषय मानना
GS V और VI मिलकर 400 अंकों के हैं — मुख्य परीक्षा (Mains) के किसी भी अकेले घटक से अधिक। जो अभ्यर्थी इन्हें केवल आख़िरी दो महीनों में तैयार करते हैं, वे बिना समझे GK पुस्तिकाओं से तथ्य रटते रह जाते हैं, और उनके उत्तर सूचियों जैसे लगते हैं।
इसके बजाय: शुरुआत से ही हर राष्ट्रीय विषय में उत्तर प्रदेश की परत जोड़ें। जब आप भूमि सुधार पढ़ें, तो उत्तर प्रदेश ज़मींदारी विनाश अधिनियम, 1950 सीखें। जब नगरीय स्थानीय निकाय पढ़ें, तो सीखें कि उत्तर प्रदेश में महापौर कैसे चुने जाते हैं। चौथे महीने से अपने साप्ताहिक समय का कम से कम पाँचवाँ हिस्सा उत्तर प्रदेश को दें।
3. सामान्य हिंदी को औपचारिकता मानना
"यह तो बस हिंदी है" — इसी सोच के कारण बहुत से अभ्यर्थी, जिनमें कई ऐसे भी हैं जिनकी मातृभाषा हिंदी है, इस प्रश्नपत्र की कोई तैयारी नहीं करते। लेकिन सामान्य हिंदी के 150 अंक मेरिट (merit) में जुड़ते हैं, और इसकी जाँच सख़्ती से होती है: वर्तनी की गलतियाँ, पत्र का गलत प्रारूप और ढीला संक्षेपण, सब पर अंक कटते हैं।
इसके बजाय: हर सप्ताह व्याकरण, संक्षेपण, पत्र और शब्द-भंडार का अभ्यास करें, और पिछले वर्षों के कम से कम पाँच पूरे प्रश्नपत्र समय बाँधकर हल करें।
4. निबंध की उपेक्षा
निबंध भी 150 अंकों का है, और इसका प्रारूप — तीन घंटे में लगभग 700 शब्दों के तीन निबंध — UPSC के अभ्यर्थियों के लिए भी अपरिचित है। जिन अभ्यर्थियों ने कभी इसका अभ्यास नहीं किया, वे अक्सर पहले निबंध पर बहुत ज़्यादा समय लगा देते हैं और तीसरे में जल्दबाज़ी करते हैं।
इसके बजाय: ठीक इसी प्रारूप का नियमित अभ्यास करें — हर खंड से एक निबंध — और हर एक का समय नापें।
5. CSAT को नज़रअंदाज़ करना
यह दुखद कहानी हर साल दोहराई जाती है: अभ्यर्थी GS प्रश्नपत्र I में बहुत अच्छे अंक लाते हैं, और फिर इसलिए बाहर हो जाते हैं कि वे CSAT में 33 प्रतिशत से पीछे रह गए। यह प्रश्नपत्र केवल क्वालीफाइंग (qualifying) है, इसलिए इसे टालना आसान है — जब तक कि बहुत देर न हो जाए।
इसके बजाय: पहले ही महीने में पिछले वर्ष का एक CSAT प्रश्नपत्र हल करें। अगर आप 33 प्रतिशत से आराम से ऊपर नहीं हैं, तो तब तक नियमित अभ्यास तय करें जब तक न हो जाएँ।
6. बिना जाँचे उत्तर प्रदेश के तथ्यों पर भरोसा करना
राज्य की GK पुस्तिकाएँ सुविधाजनक हैं, पर उनमें अक्सर गलतियाँ होती हैं — गलत तारीखें, पुरानी पड़ चुकी योजना-राशियाँ, जगहों के नामों में उलझन। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के उत्तर में गलत तथ्य से अंक कटते हैं; मुख्य परीक्षा के उत्तर में गलत तथ्य से विश्वसनीयता घटती है।
इसके बजाय: महत्वपूर्ण तथ्यों को आधिकारिक स्रोतों से जाँचें — विभागीय वेबसाइटें, बजट दस्तावेज़, जनगणना, आयोग के अपने प्रश्नपत्र। जब स्रोत आपस में मेल न खाएँ, तो अनुमान लगाने के बजाय उस मतभेद को नोट करें।
7. प्रारंभिक परीक्षा से पहले उत्तर लेखन न करना
बहुत से अभ्यर्थी "प्रारंभिक परीक्षा के बाद लिखना शुरू करने" की योजना बनाते हैं। लेकिन प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और मुख्य परीक्षा के बीच का अंतर कम होता है, और आठ वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों के लिए महीनों का अभ्यास चाहिए। जो अभ्यर्थी देर से शुरुआत करते हैं, वे पाते हैं कि उनका ज्ञान अंकों में नहीं बदल रहा।
इसके बजाय: चौथे महीने से हर सप्ताह तीन-चार उत्तर लिखना शुरू करें, और उनकी समीक्षा करवाएँ।
8. नीतिशास्त्र की केस स्टडी छोड़ देना
GS IV पूरा 200 अंकों का प्रश्नपत्र है, और इसका बड़ा हिस्सा केस स्टडी का होता है। नीतिशास्त्र का सिद्धांत पढ़ना आरामदायक है; केस स्टडी लिखना असहज है, क्योंकि उसमें अस्पष्ट सोच उजागर हो जाती है। ठीक इसीलिए इनका अभ्यास ज़रूरी है।
इसके बजाय: हर सप्ताह दो केस स्टडी लिखें, हर एक में हितधारक, विकल्प, एक स्पष्ट निर्णय और व्यवस्था के स्तर पर एक सुधार हो।
9. बहुत सारे स्रोत
राजव्यवस्था की तीन किताबें, इतिहास के दो कोचिंग नोट्स, एक दैनिक संकलन, एक साप्ताहिक संकलन, एक मासिक पत्रिका, और दर्जन-भर YouTube चैनल — और इनमें से एक का भी दोहराव (revision) नहीं। यह सबसे आम गलती है।
इसके बजाय: हर विषय का एक मानक स्रोत, साथ में आपके अपने नोट्स, कम से कम तीन बार दोहराए हुए। विस्तार से ज़्यादा गहराई जीतती है।
10. थककर टूट जाना (बर्नआउट)
UPPSC की तैयारी लंबी है, और समय-सीमाएँ अनिश्चित। जो अभ्यर्थी बिना आराम के पढ़ते हैं, खुद को सबसे अलग कर लेते हैं, और अपना आत्म-मूल्य एक ही परिणाम से जोड़ लेते हैं, वे अक्सर थककर टूट जाते हैं — और यह थकान ठीक तब ख़राब प्रदर्शन के रूप में दिखती है जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।
इसके बजाय:
- हर सप्ताह आधे दिन की छुट्टी लें;
- नियमित रूप से सोएँ और व्यायाम करें;
- तैयारी की दुनिया से बाहर के लोगों से जुड़े रहें;
- प्रयासों की एक समय-सीमा तय करें, और एक दूसरा विकल्प (प्लान B) तैयार रखें।
खुद की जाँच
ईमानदारी से उन गलतियों पर निशान लगाएँ जो आप पर लागू होती हैं:
- मैंने पुराने पैटर्न के लिए लिखे गए स्रोतों का उपयोग किया है।
- मेरी उत्तर प्रदेश वाली परत कमज़ोर है।
- मैंने सामान्य हिंदी का अभ्यास नहीं किया है।
- मैंने UPPSC प्रारूप के निबंध नहीं लिखे हैं।
- मुझे पक्का नहीं पता कि CSAT में मैं सुरक्षित हूँ।
- मेरे उत्तर प्रदेश वाले तथ्य बिना जाँचे हुए हैं।
- मैंने 30 से कम उत्तर लिखे हैं।
- मैंने नीतिशास्त्र की केस स्टडी का अभ्यास नहीं किया है।
- मेरे स्रोत बहुत ज़्यादा हैं।
- मुझे लगता है कि मैं बर्नआउट के करीब हूँ।
वह एक निशान चुनें जिसे ठीक करने से सबसे बड़ा अंतर आएगा, और उसे इसी सप्ताह ठीक करें।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
अगली UPPSC गाइड ईमेल पर पाएँ
हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।