इस गाइड में
UPPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में दो प्रश्नपत्र होते हैं, लेकिन आपका भविष्य केवल एक तय करता है: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I। CSAT में 33 प्रतिशत अंक लाकर केवल क्वालीफाई (qualify) करना होता है — इस पर हमारी अलग CSAT गाइड देखें। आपकी रैंक GS I से तय होती है, जिसमें दो घंटे में 150 प्रश्न हल करने होते हैं। हर साल लाखों अभ्यर्थी यह प्रश्नपत्र देते हैं, पर उनमें से बहुत छोटा हिस्सा ही आगे बढ़ पाता है। अंतर शायद ही कभी केवल जानकारी का होता है। असली अंतर केंद्रित तैयारी, दोहराव (revision) और प्रश्न हल करने की रणनीति का होता है।
प्रश्नपत्र को जानें
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| प्रश्न | 150 |
| अंक | 200 (प्रति प्रश्न लगभग 1.33) |
| समय | 2 घंटे |
| ऋणात्मक अंकन (negative marking) | किसी प्रश्न के अंकों का एक-तिहाई |
| उद्देश्य | मुख्य परीक्षा के लिए छँटनी (screening) |
विषय क्षेत्र
| क्षेत्र | किन बातों पर ध्यान दें |
|---|---|
| इतिहास | प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक भारत; भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन; उत्तर प्रदेश की भूमिका |
| भूगोल | भौतिक, भारत और विश्व का भूगोल; उत्तर प्रदेश का भूगोल |
| राजव्यवस्था और शासन | संविधान, संस्थाएँ, अधिकार, स्थानीय शासन |
| अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास | मूल अवधारणाएँ, योजनाएँ, गरीबी, समावेशन |
| पर्यावरण | पारिस्थितिकी, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन |
| सामान्य विज्ञान | स्कूल स्तर की भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान; स्वास्थ्य |
| समसामयिक घटनाएँ | राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश |
पिछले पाँच वर्षों के प्रश्नपत्रों को इन क्षेत्रों में बाँटें। इससे पता चलेगा कि किस क्षेत्र को कितना महत्व मिलता है।
प्रारंभिक परीक्षा में उत्तर प्रदेश की परत
उत्तर प्रदेश से जुड़ी सामग्री अब प्रश्नों में पहले से अधिक दिखाई देती है। इनकी तैयारी करें:
- इतिहास और संस्कृति: उत्तर प्रदेश में हड़प्पा और वैदिक स्थल; महाजनपद; सारनाथ, कुशीनगर और श्रावस्ती; मथुरा कला शैली; कन्नौज; जौनपुर के शर्की; मुगलकालीन आगरा; अवध के नवाब; 1857 के केंद्र; चौरी चौरा और काकोरी; कथक और ठुमरी; रामलीला और कुंभ; ODOP (एक जनपद एक उत्पाद) के उत्पाद।
- भूगोल: भौतिक विभाग; नदियाँ और उनके उद्गम; टाइगर रिज़र्व और आर्द्रभूमियाँ; सोनभद्र के खनिज; मिट्टियाँ और फसलें।
- राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था: राज्य की संस्थाएँ; प्रमुख योजनाएँ; एक्सप्रेसवे; औद्योगिक गलियारे।
स्रोत
- NCERT (कक्षा 6–12)।
- हर विषय की एक मानक पुस्तक।
- उत्तर प्रदेश सामान्य अध्ययन की एक पुस्तक, दूसरे स्रोतों से मिलाकर।
- उत्तर प्रदेश खंड वाली मासिक समसामयिकी (current affairs) सामग्री, और आपके अपने नोट्स।
- UPPSC के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र।
दोहराव के चक्र
| चक्र | कब | कैसे |
|---|---|---|
| पहला | पूरा पाठ्यक्रम खत्म करने के बाद | धीरे-धीरे; नोट्स को कसें |
| दूसरा | परीक्षा से 6–8 सप्ताह पहले | तेज़ी से; चिह्नित तथ्यों पर ध्यान |
| तीसरा | अंतिम 2–3 सप्ताह | केवल संक्षिप्त नोट्स, मानचित्र और गलतियों की सूची |
ऋणात्मक अंकन के साथ प्रश्न हल करने की रणनीति
एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन में:
- चार विकल्पों में से अंधा अनुमान (blind guess) लगाने का अपेक्षित मान (expected value) शून्य है — इसमें जोखिम तो है, लाभ नहीं;
- एक विकल्प हटाने के बाद लगाया गया अनुमान थोड़ा लाभ देता है;
- दो विकल्प हटाने के बाद लगाया गया अनुमान साफ तौर पर फ़ायदेमंद है।
तीन दौर अपनाएँ:
- पहला दौर: जिन प्रश्नों पर आप निश्चित हैं, वे सब हल करें; बाकी पर निशान लगा दें।
- दूसरा दौर: निशान लगे प्रश्नों पर लौटें; जहाँ दो विकल्प हटा सकें, वहाँ उत्तर दें।
- तीसरा दौर: केवल सोच-समझकर लगाए गए अनुमान लें; उत्तर पत्रक जाँच लें।
कथन-आधारित प्रश्न
कई प्रश्नों में पूछा जाता है कि दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं। हर कथन को अलग-अलग परखें। अगर आप जानते हैं कि कोई कथन गलत है, तो वे सभी विकल्प हटा दें जिनमें वह कथन शामिल है। अक्सर दो कथनों से ही उत्तर मिल जाता है।
विकल्प हटाने (elimination) की विधि को एक अभ्यास उदाहरण से समझें। मान लीजिए किसी प्रश्न में तीन कथन दिए गए हैं:
- भितरी स्तंभ लेख में स्कंदगुप्त की उपलब्धियों का वर्णन है।
- दशावतार मंदिर ललितपुर जिले के देवगढ़ में है।
- प्रयाग प्रशस्ति की रचना कालिदास ने की थी।
विकल्प हैं: (a) केवल 1, (b) केवल 1 और 2, (c) केवल 2 और 3, (d) 1, 2 और 3।
हो सकता है कि आप कथन 2 के बारे में निश्चित न हों। लेकिन अगर आप जानते हैं कि प्रयाग प्रशस्ति की रचना कालिदास ने नहीं, हरिषेण ने की थी, तो कथन 3 गलत है। इससे (c) और (d) हट जाते हैं। अगर आप यह भी जानते हैं कि कथन 1 सही है, तो (a) या (b) बचते हैं — यानी पचास-पचास की संभावना, जिस पर अनुमान लगाना ठीक है। और अगर आपको याद है कि देवगढ़ ललितपुर में है, तो उत्तर (b) है। अधूरी जानकारी भी, अगर व्यवस्थित ढंग से इस्तेमाल की जाए, तो अक्सर सही उत्तर तक पहुँचा देती है।
परीक्षा कक्ष का मनोविज्ञान
प्रारंभिक परीक्षा में ज्ञान केवल आधा हिस्सा है; बाकी आधा हिस्सा आपका धैर्य और संयम है। किसी प्रश्नपत्र के पहले दस प्रश्न डरा देने जितने कठिन लग सकते हैं, और कई अभ्यर्थी घबराकर अनुमान लगाने लगते हैं। याद रखें कि प्रश्नपत्र सबके लिए कठिन है, और कट-ऑफ (cut-off) कठिनाई के हिसाब से ऊपर-नीचे होता है। आगे बढ़ते रहें, तीन दौर वाली पद्धति पर भरोसा रखें, और किसी एक कठिन हिस्से का असर अगले हिस्से पर न पड़ने दें। जो अभ्यर्थी पहले आधे घंटे में शांत रहते हैं, वे आमतौर पर अच्छी तरह संभल जाते हैं; जो घबरा जाते हैं, वे शायद ही संभल पाते हैं।
समसामयिकी
- परीक्षा से पहले के 12–18 महीनों पर ध्यान दें।
- राष्ट्रीय: योजनाएँ, कानून, न्यायिक निर्णय, रिपोर्टें, विज्ञान और पर्यावरण।
- अंतरराष्ट्रीय: भारत का पड़ोस, संगठन, शिखर सम्मेलन।
- उत्तर प्रदेश: योजनाएँ, निवेश सम्मेलन (investment summits), एक्सप्रेसवे, सांस्कृतिक आयोजन, पुरस्कार, नियुक्तियाँ, संरक्षित क्षेत्र।
मॉक टेस्ट
- हर विषय के बाद खंडवार (sectional) टेस्ट; अंतिम तीन महीनों में पूरे प्रश्नपत्र वाले (full-length) टेस्ट।
- हर गलती का विश्लेषण करें — जानकारी की कमी थी, प्रश्न गलत पढ़ा था या अनुमान गलत था।
- गलतियों की सूची (error log) बनाएँ और हर सप्ताह उसे दोहराएँ।
अंतिम पखवाड़ा
- कोई नया स्रोत नहीं।
- संक्षिप्त नोट्स, मानचित्र और गलतियों की सूची दोहराएँ।
- परीक्षा वाले समय पर ही दो पूरे मॉक टेस्ट दें।
- ठीक से नींद लें — थका हुआ दिमाग प्रश्न गलत पढ़ता है।
GS I को अच्छे अंतर से और CSAT को सुरक्षित ढंग से पार कर लें। फिर मुख्य परीक्षा, जहाँ UPPSC में असली फ़ैसला होता है, आपकी तैयारी का इंतज़ार कर रही है।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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