इस गाइड में
हर वर्ष 1 नवंबर को मध्य प्रदेश अपना स्थापना दिवस मनाता है। 1956 में इसी दिन राज्य पुनर्गठन अधिनियम (States Reorganisation Act) के तहत चार अलग-अलग इकाइयों को जोड़कर भारत के हृदय में एक नया राज्य बनाया गया, जो उस समय क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य था। यहाँ तक पहुँचने के लिए भाषा, सीमाओं और सबसे बढ़कर राजधानी को लेकर कठिन निर्णय लेने पड़े।
MPPSC यह विषय हर संभव तरीके से पूछता है: प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में तिथियाँ और "पहले" (firsts), और मुख्य परीक्षा (Mains) में गठन की प्रक्रिया, भोपाल का चुनाव, या 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग होने के प्रभाव। अच्छी बात यह है कि इस कहानी की संरचना साफ़ है। इसे इस क्रम में याद करें: 1947 से पहले → चार इकाइयाँ → SRC → 1956 → 2000।
1947 से पहले: दो तरह के क्षेत्र
जो भूमि आगे चलकर मध्य प्रदेश बनी, वह सीधे ब्रिटिश शासन और रियासती शासन में बँटी हुई थी:
- मध्य प्रांत (Central Provinces; 1861 में गठित, राजधानी नागपुर), जिसमें बाद में बरार जुड़ा और जो मध्य प्रांत और बरार कहलाया। इसमें हिंदीभाषी महाकोशल क्षेत्र (जबलपुर, सागर और अन्य), छत्तीसगढ़ और मराठीभाषी विदर्भ शामिल थे;
- दर्जनों देशी रियासतें, जिनमें ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, रीवा, दतिया और ओरछा शामिल थीं; इनमें से अधिकांश सेंट्रल इंडिया एजेंसी (Central India Agency) के अंतर्गत थीं।
1947 के बाद: चार इकाइयाँ
रियासतों के एकीकरण के साथ उन्हें नए संघों में समूहबद्ध किया गया। फिर संविधान (1950) ने राज्यों को भाग 'क' (Part A — पूर्व प्रांत), भाग 'ख' (Part B — पूर्व रियासती संघ, जिनके प्रमुख राजप्रमुख होते थे) और भाग 'ग' (Part C — केंद्र द्वारा चलाई जाने वाली छोटी इकाइयाँ) में वर्गीकृत किया।
| इकाई | गठन | किनसे मिलकर बनी | राजधानी | दर्जा |
|---|---|---|---|---|
| मध्य प्रदेश (पुराना) | 1950 में मध्य प्रांत और बरार का नया नाम | महाकोशल, छत्तीसगढ़ और विदर्भ, तथा विलय की गई छोटी रियासतें | नागपुर | भाग 'क' |
| मध्य भारत | 28 मई 1948 | ग्वालियर, इंदौर और मालवा की अन्य रियासतें | ग्वालियर (शीतकालीन), इंदौर (ग्रीष्मकालीन) | भाग 'ख'; राजप्रमुख जीवाजीराव सिंधिया |
| विंध्य प्रदेश | 1948 | रीवा तथा बुंदेलखंड और बघेलखंड की रियासतें | रीवा | 1950 से भाग 'ग' |
| भोपाल | 1 जून 1949 (भारत में विलय) | पूर्व भोपाल रियासत | भोपाल | भाग 'ग' |
राज्य पुनर्गठन आयोग (1953–1955)
1953 में आंध्र राज्य के गठन के बाद भाषाई राज्यों की माँग का दबाव बढ़ा। केंद्र ने दिसंबर 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganisation Commission, SRC) नियुक्त किया, जिसके अध्यक्ष फ़ज़ल अली थे और के. एम. पणिक्कर तथा एच. एन. कुंज़रू सदस्य थे। आयोग ने 1955 में अपनी रिपोर्ट दी।
देश के मध्य भाग के लिए आयोग ने एक बड़े, हिंदीभाषी राज्य की सिफ़ारिश की, जिसमें महाकोशल, छत्तीसगढ़, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल शामिल हों, जबकि मराठीभाषी विदर्भ बंबई राज्य में जाए। संसद ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के ज़रिए इसे लागू किया। सातवें संविधान संशोधन (1956) ने भाग 'क'/'ख'/'ग' वाला वर्गीकरण समाप्त कर दिया।
1 नवंबर 1956: मध्य प्रदेश का जन्म
नए मध्य प्रदेश में ये क्षेत्र एक साथ आए:
- पुराना मध्य प्रदेश, विदर्भ को छोड़कर;
- मध्य भारत, सुनेल अंतःक्षेत्र (enclave) को छोड़कर (जो राजस्थान में गया);
- विंध्य प्रदेश;
- भोपाल;
- साथ ही राजस्थान से सिरोंज क्षेत्र।
| पहले | नाम |
|---|---|
| मुख्यमंत्री | पंडित रविशंकर शुक्ल (31 दिसंबर 1956 को पद पर रहते हुए निधन) |
| राज्यपाल | डॉ. पट्टाभि सीतारमैया |
| विधानसभा अध्यक्ष | पंडित कुंजीलाल दुबे |
| राजधानी | भोपाल |
भोपाल ही क्यों?
जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर, तीनों बड़े नगर थे और तीनों राजधानी चाहते थे। भोपाल को चुनने के आम तौर पर ये कारण बताए जाते हैं:
- नए राज्य में केंद्रीय स्थिति;
- पूर्व भोपाल रियासत के प्रशासन की तैयार सरकारी इमारतें;
- विस्तार के लिए ज़मीन और झीलों के आसपास का सुहावना परिवेश;
- यह एक समझौता था, जिससे किसी बड़े क्षेत्रीय केंद्र का पक्ष लेने से बचा जा सका।
दूसरे नगरों को बड़ी संस्थाएँ देकर संतुलन बनाया गया: जबलपुर में उच्च न्यायालय (इंदौर और ग्वालियर में खंडपीठें), इंदौर में MPPSC और ग्वालियर में राजस्व मंडल (Board of Revenue)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और मध्य प्रदेश सरकार की संरचना पर हमारी मार्गदर्शिकाएँ देखें।
छत्तीसगढ़ का गठन (2000)
1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत छत्तीसगढ़ क्षेत्र (दक्षिण-पूर्व के 16 जिले) एक अलग राज्य बन गया। मध्य प्रदेश पर इसके बड़े प्रभाव पड़े:
- क्षेत्रफल: मध्य प्रदेश राजस्थान के बाद दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया।
- संसाधन: अविभाजित राज्य के कोयले, लौह अयस्क और बॉक्साइट का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में था, साथ ही कोरबा और भिलाई जैसे बड़े बिजली और इस्पात केंद्र भी।
- जनसंख्या: मध्य प्रदेश ने बड़ी जनजातीय आबादी और अपने वन आवरण का बड़ा हिस्सा खो दिया।
- विधायिका: विधानसभा में अब 230 सीटें हैं।
समयरेखा
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 1861 | मध्य प्रांत का गठन (राजधानी नागपुर) |
| 1936 | प्रांत का औपचारिक नाम मध्य प्रांत और बरार हुआ |
| 1948 | मध्य भारत (28 मई) और विंध्य प्रदेश का गठन |
| 1 जून 1949 | भोपाल का भारत में विलय; भाग 'ग' राज्य |
| 26 जनवरी 1950 | संविधान लागू; मध्य प्रांत और बरार बना मध्य प्रदेश (भाग 'क') |
| दिसंबर 1953 | राज्य पुनर्गठन आयोग नियुक्त |
| 1955 | SRC की रिपोर्ट |
| 1 नवंबर 1956 | नए मध्य प्रदेश का गठन; राजधानी भोपाल |
| 1 नवंबर 2000 | छत्तीसगढ़ अलग हुआ |
| 2023 | मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर जिले बने |
आज का मध्य प्रदेश
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| क्षेत्रफल | लगभग 3.08 लाख वर्ग किमी, दूसरा सबसे बड़ा राज्य |
| जिले | 55 |
| संभाग | 10 |
| पड़ोसी राज्य | उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान |
| विधायिका | विधानसभा 230; लोकसभा 29; राज्यसभा 11 |
मुख्य परीक्षा के उत्तर की रूपरेखा
अभ्यास प्रश्न (लगभग 150 शब्द): भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी क्यों चुना गया, और क्षेत्रीय हितों में संतुलन कैसे बनाया गया?
रूपरेखा:
- भूमिका: 1 नवंबर 1956 को चार इकाइयों से मध्य प्रदेश बना; राजधानी के लिए प्रतिद्वंद्वी दावे।
- भोपाल के पक्ष में कारण: स्थिति, इमारतें, ज़मीन, समझौता।
- संतुलन: जबलपुर में उच्च न्यायालय, इंदौर में MPPSC, ग्वालियर में राजस्व मंडल।
- निष्कर्ष: एक बड़े, विविधतापूर्ण राज्य को जोड़े रखने के लिए संस्थाओं को फैलाने का तरीका।
आदर्श उत्तर (संक्षिप्त): जब 1 नवंबर 1956 को पुराने मध्य प्रदेश, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल को मिलाकर मध्य प्रदेश बनाया गया, तो बड़े नगरों — जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर — में से हर एक ने राजधानी पर दावा किया। इसके बजाय भोपाल को चुना गया। यह नए राज्य के केंद्र के पास था, इसमें पूर्व भोपाल रियासत के प्रशासन की इमारतें थीं, विस्तार के लिए ज़मीन थी, और यह एक तटस्थ समझौता था, जिससे किसी एक बड़े क्षेत्रीय केंद्र का पक्ष नहीं लिया गया। क्षेत्रीय हितों में संतुलन के लिए बड़ी संस्थाएँ अलग-अलग नगरों में दी गईं: उच्च न्यायालय जबलपुर को, इंदौर और ग्वालियर में खंडपीठों के साथ; लोक सेवा आयोग इंदौर को; और राजस्व मंडल ग्वालियर को। राज्य की संस्थाओं के इस बँटवारे से एक बड़े और विविधतापूर्ण नए राज्य के लिए एक ही राजधानी को स्वीकार करना आसान हुआ।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
- मध्य प्रदेश का गठन कब हुआ? (a) 26 जनवरी 1950 (b) 1 नवंबर 1956 (c) 1 मई 1960 (d) 1 नवंबर 2000
- मध्य भारत के राजप्रमुख कौन थे? (a) यशवंतराव होलकर (b) जीवाजीराव सिंधिया (c) हमीदुल्ला ख़ान (d) मार्तंड सिंह
- 1956 में राजस्थान से कौन-सा क्षेत्र मध्य प्रदेश को दिया गया? (a) सुनेल (b) सिरोंज (c) दतिया (d) नीमच
- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) SRC के अध्यक्ष फ़ज़ल अली थे। (2) 1956 में विदर्भ नए मध्य प्रदेश का हिस्सा बना। कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) दोनों (d) कोई नहीं
- मध्य प्रदेश के पहले राज्यपाल कौन थे? (a) रविशंकर शुक्ल (b) कुंजीलाल दुबे (c) पट्टाभि सीतारमैया (d) द्वारका प्रसाद मिश्र
उत्तर: 1 (b): 1 मई 1960 महाराष्ट्र और गुजरात का, और 1 नवंबर 2000 छत्तीसगढ़ का स्थापना दिवस है। 2 (b)। 3 (b): सुनेल उलटी दिशा में गया था। 4 (a): विदर्भ बंबई राज्य में गया। 5 (c): शुक्ल पहले मुख्यमंत्री थे और दुबे पहले विधानसभा अध्यक्ष।
आगे क्या करें
- चारों इकाइयों वाली तालिका राजधानियों और भाग के दर्जे सहित याद से बनाएँ।
- "पहले" (firsts) और सुनेल-सिरोंज की अदला-बदली याद करें।
- भोपाल की बेगमें वाली मार्गदर्शिका में भोपाल के विलय का दोहराव (revision) करें।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Madhya Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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