इस गाइड में
जैसलमेर के पास मरु राष्ट्रीय उद्यान (Desert National Park) के घास के मैदानों में धरती के सबसे दुर्लभ पक्षियों में से एक रहता है — ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, जिसे स्थानीय रूप से गोडावण कहते हैं। लगभग एक मीटर ऊँचा यह पक्षी कभी भारत के बड़े भाग के घास के मैदानों में घूमता था। आज इनकी थोड़ी-सी संख्या ही बची है, जिनमें से अधिकांश राजस्थान में हैं। गोडावण राजस्थान का राज्य पक्षी है, और इसका भविष्य इस बात की परीक्षा बन गया है कि राज्य विकास और संरक्षण में संतुलन बना पाता है या नहीं। राजस्थान के वनों और वन्यजीवों के व्यापक विषय में प्रवेश के लिए भी यह एक अच्छा बिंदु है।
वन आवरण
- वन आवरण के हिस्से के मामले में राजस्थान देश के सबसे कम वन आवरण वाले राज्यों में है — हाल की भारत वन स्थिति रिपोर्टों के अनुसार भौगोलिक क्षेत्रफल का केवल लगभग 5% — हालाँकि राज्य के बड़े आकार के कारण उसका कुल वन क्षेत्र उल्लेखनीय है।
- वन दक्षिण और दक्षिण-पूर्व (उदयपुर, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सिरोही, बारां, करौली) में और अरावली के साथ-साथ केंद्रित हैं।
- मरुस्थल में वन बहुत कम हैं, पर उसकी झाड़ियाँ, घास के मैदान और वनों के बाहर के वृक्ष (जैसे खेजड़ी) पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
वनों के प्रकार
| प्रकार | कहाँ | प्रजातियाँ |
|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती | दक्षिण और दक्षिण-पूर्व — उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, कोटा, बारां | सागवान (दक्षिण), धोकड़ा, सालर, खैर, तेंदू |
| उष्णकटिबंधीय कँटीले वन | पश्चिम और उत्तर-पश्चिम | खेजड़ी, बबूल, कैर, बेर, रोहिड़ा |
| उपोष्ण (पर्वतीय) वन | माउंट आबू | सदाबहार और अर्ध-सदाबहार प्रजातियाँ |
| धोकड़ा वन | अरावली | धोकड़ा (Anogeissus pendula) — अरावली का सबसे आम वृक्ष |
राज्य प्रतीक
| प्रतीक | प्रजाति |
|---|---|
| राज्य वृक्ष | खेजड़ी (Prosopis cineraria) |
| राज्य पुष्प | रोहिड़ा (Tecomella undulata) |
| राज्य पक्षी | गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) |
| राज्य पशु | चिंकारा (वन्यजीव श्रेणी) और ऊँट (पशुधन श्रेणी) |
बाघ अभयारण्य
राजस्थान में पाँच बाघ अभयारण्य (tiger reserves) हैं:
| बाघ अभयारण्य | ज़िला/ज़िले | टिप्पणी |
|---|---|---|
| रणथंभौर | सवाई माधोपुर | भारत के पहले बाघ अभयारण्यों में से (1973, प्रोजेक्ट टाइगर); बाघ दर्शन के लिए विश्व-प्रसिद्ध |
| सरिस्का | अलवर | 1978 से बाघ अभयारण्य; अवैध शिकार के कारण 2004–05 तक बाघ समाप्त हो गए, और 2008 में रणथंभौर से उन्हें फिर से बसाया गया — दुनिया में इस तरह का पहला पुनर्वास |
| मुकुंदरा हिल्स | कोटा, चित्तौड़गढ़, बूँदी, झालावाड़ | 2013 में अधिसूचित |
| रामगढ़ विषधारी | बूँदी | 2022 में अधिसूचित |
| धौलपुर–करौली | धौलपुर, करौली | राजस्थान का सबसे नया (पाँचवाँ) बाघ अभयारण्य |
राष्ट्रीय उद्यान और प्रमुख अभयारण्य
| क्षेत्र | ज़िला | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान | भरतपुर | आर्द्रभूमि वाला पक्षी स्वर्ग, जिसे भरतपुर के शासकों ने बत्तखों के शिकार के लिए बनाया था; UNESCO विश्व धरोहर स्थल (1985) और रामसर स्थल (1981); कभी साइबेरियाई सारस का शीतकालीन ठिकाना |
| मरु राष्ट्रीय उद्यान | जैसलमेर, बाड़मेर | गोडावण; रेत के टीले; आकल वुड फ़ॉसिल पार्क |
| मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान | कोटा | बाघ अभयारण्य का भाग |
| ताल छापर | चूरू | काला हिरण; प्रवासी शिकारी पक्षी |
| कुंभलगढ़ | राजसमंद, पाली, उदयपुर | भेड़िये, तेंदुए; अरावली के वन |
| माउंट आबू | सिरोही | पर्वतीय वन |
| सीतामाता | प्रतापगढ़ | उड़न गिलहरी; सागवान के वन |
| जवाई | पाली | गाँवों के साथ-साथ रहने वाले तेंदुए (कंज़र्वेशन रिज़र्व) |
| राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य | चंबल के साथ-साथ | घड़ियाल, डॉल्फ़िन |
गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
- गंभीर रूप से संकटग्रस्त (critically endangered); केवल छोटी-सी आबादी बची है, अधिकतर थार में।
- ख़तरे: बिजली लाइनों से टकराव, आवास की हानि (घास के मैदानों का खेतों और ऊर्जा परियोजनाओं में बदलना), अतीत में शिकार, धीमा प्रजनन।
- प्रोजेक्ट गोडावण / संरक्षण प्रजनन (conservation breeding) — जैसलमेर में सम और रामदेवरा के पास के केंद्रों ने जंगल से इकट्ठा किए गए अंडों से चूज़े निकाले हैं, ताकि बंदी आबादी तैयार करके आगे चलकर उसे प्रकृति में छोड़ा जा सके।
- उच्चतम न्यायालय ने संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा में संतुलन रखते हुए इस पक्षी के प्राथमिकता वाले आवास में बिजली लाइनों पर निर्देश दिए हैं।
सामुदायिक संरक्षण
- बिश्नोई — धार्मिक कर्तव्य के रूप में वृक्षों और पशुओं (काला हिरण, चिंकारा) की रक्षा करते हैं; खेजड़ली बलिदान (1730) के लिए याद किए जाते हैं।
- ओरण — मंदिरों और गाँवों के आसपास के पवित्र उपवन, जिनकी रक्षा परंपरागत रूप से समुदाय करते हैं; महत्वपूर्ण आवास और चरागाह।
- मेनार और खींचन — प्रवासी पक्षियों की रक्षा करने वाले गाँव (दोनों अब रामसर स्थल हैं, 2025)।
ख़तरे
| ख़तरा | व्याख्या |
|---|---|
| आवास की हानि | खनन, कृषि, ऊर्जा परियोजनाएँ, शहरी विस्तार |
| अवैध शिकार | बाघ (सरिस्का 2004–05), काला हिरण, पक्षी |
| मानव–वन्यजीव संघर्ष | गाँवों के पास तेंदुए; अभयारण्यों से बाहर भटकते बाघ |
| चराई का दबाव | वनों और घास के मैदानों का क्षरण |
| आक्रामक प्रजातियाँ | घास के मैदानों में फैलता Prosopis juliflora (विलायती बबूल) |
| जल | सूखे के वर्षों में केवलादेव को पानी की आपूर्ति में कमी |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- राजस्थान का राज्य पक्षी कौन-सा है?
- राजस्थान के पाँच बाघ अभयारण्यों के नाम बताइए।
- केवलादेव को UNESCO विश्व धरोहर स्थल कब घोषित किया गया?
- 2008 में बाघों को कहाँ फिर से बसाया गया?
- चूरू का कौन-सा अभयारण्य काले हिरण के लिए प्रसिद्ध है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (50 शब्द): गोडावण गंभीर रूप से संकटग्रस्त क्यों है?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण में सामुदायिक परंपराओं की भूमिका की विवेचना कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
अगली RAS गाइड ईमेल पर पाएँ
हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।