इस गाइड में
अगर आप राजस्थान के मानचित्र पर अरावली पर्वतमाला के साथ-साथ एक रेखा खींचें — दक्षिण-पश्चिम में माउंट आबू से उत्तर-पूर्व में दिल्ली के पास की पहाड़ियों तक — तो राज्य दो बिल्कुल अलग दुनियाओं में बँट जाता है। पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में थार मरुस्थल है: रेत के टीले, बहुत कम वर्षा, दूर-दूर बसे गाँव। पूर्व और दक्षिण-पूर्व में चंबल, बनास और माही से सिंचित मैदान हैं, और हाड़ौती का काली मिट्टी वाला पठार है। स्वयं अरावली पहाड़ियों, जंगलों और खनिजों की एक तीसरी दुनिया है। इन भौतिक प्रदेशों (physiographic regions) को समझना राजस्थान के भूगोल की नींव है।
स्थिति और विस्तार
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| क्षेत्रफल | लगभग 3,42,239 वर्ग किमी — भारत का लगभग 10.4%; 2000 से क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य |
| अक्षांश | लगभग 23°3′ उत्तर से 30°12′ उत्तर |
| देशांतर | लगभग 69°30′ पूर्व से 78°17′ पूर्व |
| आकृति | मोटे तौर पर विषमकोणीय चतुर्भुज (पतंग जैसी आकृति) |
| कर्क रेखा | राज्य के दक्षिणी सिरे (बाँसवाड़ा और डूँगरपुर क्षेत्र) से होकर गुज़रती है |
| अंतरराष्ट्रीय सीमा | पाकिस्तान के साथ लगभग 1,070 किमी (रेडक्लिफ़ रेखा), श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर ज़िलों के साथ-साथ |
| पड़ोसी राज्य | पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात |
चार भौतिक प्रदेश
| प्रदेश | क्षेत्रफल में अनुमानित हिस्सा | मुख्य ज़िले / क्षेत्र | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| 1. उत्तर-पश्चिमी रेतीला मरुस्थल (थार) | लगभग तीन-पाँचवाँ | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर, जालोर, पाली, सीकर और झुंझुनूं के भाग | रेत के टीले, कम वर्षा, आंतरिक अपवाह |
| 2. अरावली पर्वतीय प्रदेश | लगभग दसवाँ भाग | सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, जयपुर, अलवर | सबसे पुराने वलित पर्वत; वन; खनिज; जल-विभाजक |
| 3. पूर्वी मैदान | लगभग एक-चौथाई | जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर | उपजाऊ जलोढ़ और अन्य मिट्टियाँ; नदी घाटियाँ; सघन जनसंख्या |
| 4. दक्षिण-पूर्वी पठार (हाड़ौती) | लगभग पंद्रहवाँ भाग | कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ | काली मिट्टी; चंबल और उसकी सहायक नदियाँ; अधिक वर्षा |
1. उत्तर-पश्चिमी रेतीला मरुस्थल
यह प्रदेश थार (महान भारतीय मरुस्थल) का भाग है। इसे इन भागों में बाँटा जा सकता है:
- मरुस्थली (वास्तविक मरुस्थल) — सबसे शुष्क पश्चिमी भाग, जहाँ खिसकते रेत के टीले हैं (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर);
- बांगर (Bagar) — पूर्व की ओर अर्ध-शुष्क संक्रमण क्षेत्र (शेखावाटी, नागौर और जालोर के भाग);
- लूनी बेसिन — लूनी नदी द्वारा अपवाहित मैदान (जोधपुर, बाड़मेर, जालोर);
- घग्घर का मैदान — मौसमी नदी घग्घर का उत्तरी मैदान, जो अब नहरों से सिंचित है (हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर);
- शेखावाटी — आंतरिक अपवाह वाले रेतीले मैदान।
यहाँ की विशेषताओं में विभिन्न प्रकार के रेत के टीले, प्लाया और खारी झीलें (जिन्हें स्थानीय रूप से रन या ताल कहते हैं), बहुत कम वर्षा और अत्यधिक तापमान शामिल हैं। थार मरुस्थल पर हमारा लेख देखें।
2. अरावली पर्वतीय प्रदेश
अरावली राजस्थान के भीतर लगभग 550 किमी तक (पूरी पर्वतमाला की लगभग 692 किमी लंबाई का करीब 80%) तिरछी फैली है — खेड़ब्रह्मा (गुजरात) से सिरोही होते हुए खेतड़ी और आगे दिल्ली की ओर। यह दुनिया के सबसे पुराने वलित पर्वतों (fold mountains) में से है। माउंट आबू पर गुरु शिखर (लगभग 1,722 मीटर) सबसे ऊँची चोटी है। यह प्रदेश खनिजों से समृद्ध है और एक अहम जल-विभाजक (water divide) बनाता है — इसके पूर्व की नदियाँ (चंबल-यमुना-गंगा तंत्र के रास्ते) बंगाल की खाड़ी में जाती हैं, जबकि पश्चिम की नदियाँ अरब सागर की ओर बहती हैं। अरावली पर हमारा लेख देखें।
3. पूर्वी मैदान
पूर्वी मैदानों का अपवाह चंबल, बनास और माही नदी तंत्र करते हैं। इसके उप-प्रदेश हैं:
- बनास-चंबल बेसिन, जहाँ उपजाऊ मिट्टी और अच्छी खेती है;
- दक्षिण में बाँसवाड़ा और डूँगरपुर के आसपास माही बेसिन (छप्पन का मैदान, या वागड़) — पहाड़ी, जनजातीय क्षेत्र;
- धौलपुर और सवाई माधोपुर में चंबल के बीहड़ — अवनालिका अपरदन (gully erosion) से बनी उत्खात भूमि (badlands)।
इस प्रदेश में मरुस्थल की तुलना में अधिक वर्षा, उपजाऊ मिट्टी और अधिक जनसंख्या घनत्व है।
4. दक्षिण-पूर्वी पठार (हाड़ौती)
कोटा और बूँदी के हाड़ा चौहानों के नाम पर बना हाड़ौती का पठार मालवा के पठार का भाग है। यहाँ (दक्कन के लावा से बनी) काली मिट्टी है, चंबल और उसकी सहायक नदियाँ (कालीसिंध, पार्वती, परवन) हैं, और मैदानी क्षेत्रों में सबसे अधिक औसत वर्षा होती है। यहाँ सोयाबीन, गेहूँ, धनिया और लहसुन जैसी फ़सलें होती हैं, और चंबल पर बड़े बाँध और बिजलीघर हैं।
भौतिक स्वरूप का महत्व
| पहलू | भौतिक स्वरूप से संबंध |
|---|---|
| जलवायु | दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं के समानांतर फैली अरावली पश्चिम में वर्षा को सीमित करती है |
| जल | मरुस्थल: आंतरिक अपवाह और दुर्लभ भूजल; पूर्व और दक्षिण-पूर्व: नदियाँ और बाँध |
| कृषि | मरुस्थल में वर्षा पर आधारित फ़सलें; नहर और नदी क्षेत्रों में सिंचित खेती |
| खनिज | अरावली में केंद्रित |
| जनसंख्या | मरुस्थल में विरल; मैदानों में सघन |
| अर्थव्यवस्था | मरुस्थल में सौर और पवन ऊर्जा; क़िलों और टीलों में पर्यटन; पहाड़ियों में खनन |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- राजस्थान भारत के कितने क्षेत्रफल पर फैला है?
- कौन-से राज्य राजस्थान की सीमा से लगते हैं?
- कर्क रेखा किन ज़िलों से होकर गुज़रती है?
- राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?
- किस भौतिक प्रदेश में काली मिट्टी है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (50 शब्द): उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल के उप-प्रदेश कौन-से हैं?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): स्पष्ट कीजिए कि भौतिक स्वरूप राजस्थान की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
अगली RAS गाइड ईमेल पर पाएँ
हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।