इस गाइड में
सूर्यास्त के समय जैसलमेर के पास सम के धोरों पर खड़े हों, तो थार ख़ाली-सा लगता है — क्षितिज तक फैली सुनहरी रेत की लहरें। पर असल में थार दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले मरुस्थलों में से है। गाँव, पशुपालक, किसान और कस्बे सदियों से इसकी अतियों के अनुसार ढलते आए हैं — पानी के टांके बनाकर, खेजड़ी के पेड़ लगाकर, ऊँट और भेड़ पालकर, और एक समृद्ध संस्कृति रचकर। आज यह मरुस्थल नहर सिंचाई, सौर पार्कों और पवन फ़ार्मों के साथ तेज़ी से बदल रहा है, और इसे समझना RAS भूगोल का केंद्रीय हिस्सा है।
विस्तार
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| नाम | थार, या महान भारतीय मरुस्थल |
| कुल विस्तार | राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा के भागों, तथा सिंध (पाकिस्तान) तक फैला |
| राजस्थान में हिस्सा | भारतीय थार का बड़ा भाग राजस्थान में है; मरुस्थल राज्य के लगभग तीन-पाँचवें भाग पर फैला है |
| मुख्य ज़िले | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, और जालोर, पाली, सीकर, झुंझुनूं के भाग |
थार कैसे बना?
इसकी कोई एक सर्वमान्य व्याख्या नहीं है। प्रमुख सिद्धांत ये हैं:
- जलवायु परिवर्तन — पिछले हिमनद काल के बाद अधिक शुष्क परिस्थितियों की ओर बदलाव;
- वृष्टि छाया और हवाएँ — अरावली मानसूनी हवाओं के समानांतर फैली है, और यह क्षेत्र नमी के स्रोतों से बहुत दूर है;
- प्राचीन समुद्र और नदियाँ — यह क्षेत्र कभी समुद्र (टेथिस) के नीचे था और बाद में प्राचीन सरस्वती/घग्घर जैसी नदियाँ इससे होकर बहती थीं, जिनके सूखने से तलछट रह गई;
- मानवीय गतिविधियाँ — माना जाता है कि ऐतिहासिक काल में अत्यधिक चराई और वनों की कटाई ने मरुस्थलीय परिस्थितियों का विस्तार किया।
उप-प्रदेश
| उप-प्रदेश | स्वरूप |
|---|---|
| मरुस्थली | पश्चिम का वास्तविक मरुस्थल — खिसकते टीले, बहुत कम वर्षा |
| बांगर (Bagar) | मरुस्थली के पूर्व में, अरावली से लगा अर्ध-शुष्क क्षेत्र (शेखावाटी, नागौर और जालोर के भाग) |
| लूनी बेसिन | मौसमी नदी लूनी द्वारा अपवाहित मैदान — जोधपुर, बाड़मेर, जालोर |
| घग्घर का मैदान | घग्घर का उत्तरी मैदान — अब नहरों से सिंचित (हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर) |
| शेखावाटी क्षेत्र | आंतरिक अपवाह और बिखरी पहाड़ियों वाले रेतीले भूभाग |
रेत के टीले
टीले थार की सबसे आकर्षक विशेषता हैं। इनका आकार हवा की दिशा, हवा की शक्ति, रेत की उपलब्धता और वनस्पति पर निर्भर करता है।
| टीले का प्रकार | आकार | कहाँ / टिप्पणी |
|---|---|---|
| बरखान (Barchan) | अर्धचंद्राकार, सींग हवा की दिशा में आगे की ओर | पश्चिमी मरुस्थल में आम; हवा के साथ खिसकते हैं |
| अनुदैर्ध्य (Longitudinal) (सीफ़) | हवा के समानांतर लंबी कटकें | पश्चिमी जैसलमेर और बाड़मेर |
| परवलयिक (Parabolic) | U-आकार, सींग हवा के आने की दिशा में, वनस्पति से टिके हुए | पूरे मरुस्थल में आम |
| अनुप्रस्थ (Transverse) | हवा से समकोण पर कटकें | जहाँ रेत की आपूर्ति अधिक हो |
| तारा (Star) | चारों ओर फैली भुजाएँ | जहाँ हवाएँ कई दिशाओं से आती हों |
| झाड़ीनुमा टीले (Shrub-coppice) | झाड़ियों के आसपास छोटे टीले | जहाँ वनस्पति रेत को रोक लेती है |
धरियन जैसलमेर क्षेत्र में खिसकते टीलों के लिए प्रयुक्त स्थानीय शब्द है।
अन्य भू-आकृतियाँ
- प्लाया और खारी झीलें — ऐसे गर्त जहाँ पानी इकट्ठा होकर भाप बन जाता है और नमक छोड़ जाता है: सांभर, डीडवाना, पचपदरा, लूणकरणसर, कुचामन।
- रन या ताल — नीची खारी या चिकनी मिट्टी वाली समतल भूमि के स्थानीय नाम।
- आंतरिक अपवाह — कई धाराएँ समुद्र तक पहुँचने के बजाय रेत में ही लुप्त हो जाती हैं।
जलवायु
- वर्षा — पश्चिम में वर्ष में 25 सेमी से कम (जैसलमेर के कुछ भागों में 10 सेमी से भी कम), जो पूर्वी किनारे पर बढ़कर लगभग 40–50 सेमी हो जाती है।
- तापमान — बहुत गर्म ग्रीष्म ऋतु (भारत का सबसे ऊँचा तापमान, फलोदी जैसे स्थानों पर 50°C से अधिक) और ठंडी शीत ऋतु की रातें।
- हवाएँ — गर्मियों में धूल भरी आंधियाँ; गर्म हवाएँ (लू)।
- सूखा — बार-बार पड़ने वाला और गंभीर।
थार में जीवन
| पहलू | अनुकूलन |
|---|---|
| वनस्पति | खेजड़ी (Prosopis cineraria — राज्य वृक्ष), रोहिड़ा, कैर, बबूल, फोग; सेवण जैसी घासें |
| वन्यजीव | गोडावण (Great Indian Bustard) (राज्य पक्षी), चिंकारा (राज्य पशु, वन्य श्रेणी; 2014 से ऊँट पालतू पशु श्रेणी में राज्य पशु है), काला हिरण, मरु लोमड़ी और प्रवासी पक्षी |
| पशुधन | ऊँट, भेड़, बकरी; पशुपालन केंद्रीय है |
| जल | वर्षा जल संग्रह के लिए टांका, कुंडी, बेरी, नाडी और खड़ीन (जल संरक्षण पर हमारा लेख देखें) |
| आवास | अंदर ठंडक बनाए रखने के लिए मोटी मिट्टी की दीवारों और छप्पर की छत वाली गोल झोंपड़ियाँ |
संरक्षित क्षेत्र
जैसलमेर और बाड़मेर के पास मरु राष्ट्रीय उद्यान (Desert National Park) टीलों के पारिस्थितिकी तंत्र और गंभीर रूप से संकटग्रस्त गोडावण की रक्षा करता है। यहाँ आकल वुड फ़ॉसिल पार्क (जुरासिक काल के जीवाश्म बने पेड़ों के तने) जैसे जीवाश्म स्थल भी हैं।
बदलता मरुस्थल
| बदलाव | प्रभाव |
|---|---|
| इंदिरा गांधी नहर | उत्तरी और पश्चिमी मरुस्थल में सिंचाई पहुँची; खेती का विस्तार हुआ; पर कुछ स्थानों पर जलभराव और लवणता की समस्या आई |
| सौर और पवन ऊर्जा | भड़ला (जोधपुर), जैसलमेर और बीकानेर में विशाल पार्क; रोज़गार और राजस्व, पर भूमि-उपयोग के विवाद और पक्षियों के लिए ख़तरा (गोडावण का बिजली की लाइनों से टकराना) |
| खनन और तेल | बाड़मेर के तेल क्षेत्र; लिग्नाइट; जिप्सम |
| सड़कें और कस्बे | बेहतर संपर्क; शहरी विकास |
मरुस्थलीकरण
थार अत्यधिक चराई, पवन अपरदन, वनस्पति के नुकसान और ख़राब जल प्रबंधन के कारण भूमि क्षरण झेल रहा है। इसके उपायों में रक्षक पट्टियाँ (shelterbelts), टीलों का स्थिरीकरण, नियंत्रित चराई, और जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काज़री, CAZRI) का शोध शामिल हैं। मिट्टी और मरुस्थलीकरण पर हमारा लेख देखें।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- राजस्थान का राज्य वृक्ष कौन-सा है?
- किस प्रकार का टीला अर्धचंद्राकार होता है?
- थार की तीन खारी झीलों के नाम बताइए।
- कौन-सा राष्ट्रीय उद्यान गोडावण की रक्षा करता है?
- जोधपुर का कौन-सा संस्थान शुष्क क्षेत्रों पर शोध करता है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (50 शब्द): बरखान टीले क्या हैं?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): "थार एक बदलता हुआ मरुस्थल है।" नहरों और नवीकरणीय ऊर्जा के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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