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किसी शादी से पहले मिथिला के किसी गाँव में जाइए, तो आप महिलाओं को कोहबर (वधू का कक्ष) की दीवारों पर कमल, बाँस, मछली, तोते और देवी-देवताओं के चित्र बनाते देख सकते हैं — ऐसे चित्र जिनमें उर्वरता, प्रेम और लंबी आयु की कामनाएँ छिपी हैं। ये चित्र, जिन्हें आज दुनिया भर में मधुबनी या मिथिला चित्रकला के नाम से जाना जाता है, बिहार की महान सांस्कृतिक देनों में से एक हैं। ये शिल्पों, गीतों, नृत्यों, त्योहारों और खान-पान की एक कहीं बड़ी सांस्कृतिक दुनिया का हिस्सा हैं, जिसे BPSC नियमित रूप से पूछता है।
चित्रकला की परंपराएँ
मधुबनी (मिथिला) चित्रकला
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| क्षेत्र | मिथिला — मधुबनी, दरभंगा और आसपास के ज़िले |
| परंपरा | अनुष्ठानों, त्योहारों और विवाहों के लिए महिलाएँ दीवारों और फ़र्श पर बनाती हैं |
| विषय | देवी-देवता (कृष्ण, राम–सीता, दुर्गा), प्रकृति (मछली, पक्षी, कमल, बाँस), कोहबर |
| शैलियाँ | भरनी (रंग भरी हुई), कचनी (महीन रेखाएँ), तांत्रिक, गोदना (गुदना से प्रेरित), कोहबर |
| रंग | परंपरागत रूप से प्राकृतिक रंग; टहनियों, उँगलियों और निब-कलमों से चित्रण |
| काग़ज़ पर आना | 1960 के दशक के अंत के सूखे के दौरान अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड ने महिलाओं को बेचने के लिए काग़ज़ पर चित्र बनाने को प्रोत्साहित किया, जिससे आमदनी हुई और यह कला दुनिया तक पहुँची |
| मान्यता | GI टैग (भौगोलिक संकेतक); कई कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्म सम्मान मिले — जगदंबा देवी, सीता देवी, गंगा देवी, महासुंदरी देवी और अन्य |
चित्रकला की अन्य परंपराएँ
| परंपरा | क्षेत्र | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| मंजूषा कला | भागलपुर (अंग) | बिहुला–बिषहरी (सर्प देवी) की कथा से जुड़ी; पेटी जैसी मंदिर-आकृतियों (मंजूषा) पर चित्रित; सीमित रंग (गुलाबी, हरा, पीला) |
| पटना कलम | पटना | कंपनी काल की चित्रकला, जिसमें रोज़मर्रा का जीवन दिखता है (कंपनी शासन पर हमारी मार्गदर्शिका देखें) |
| टिकुली कला | पटना | मूल रूप से सजावटी बिंदियाँ; अब हार्डबोर्ड पर इनेमल रंगों से चित्रित |
शिल्प
| शिल्प | क्षेत्र | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| सुजनी कढ़ाई | मुज़फ़्फ़रपुर (भुसुरा) | कपड़े की परतों वाली रज़ाइयाँ, जिन पर कच्चे टाँके (running stitch) की कढ़ाई से कहानियाँ कही जाती हैं; GI टैग प्राप्त |
| सिक्की घास शिल्प | मिथिला | सुनहरी सिक्की घास से बुनी टोकरियाँ और आकृतियाँ; GI टैग प्राप्त |
| भागलपुरी रेशम (तसर) | भागलपुर | "सिल्क सिटी"; GI टैग प्राप्त |
| एप्लिक (खटवा) | पटना और अन्य जगहें | कपड़ा काटकर की गई सजावट |
| पत्थर शिल्प | गया (पत्थरकट्टी) | पत्थर पर नक्काशी |
| बावन बूटी | नालंदा (बसवन बिगहा) | 52 आकृतियों (motifs) वाली हथकरघा बुनाई |
प्रदर्शन कलाएँ
लोक संगीत और रंगमंच
- बिदेसिया — भिखारी ठाकुर द्वारा रचित भोजपुरी लोक नाट्य (उन्हें अक्सर "भोजपुरी का शेक्सपियर" कहा जाता है)। यह पलायन (migration) की पीड़ा दिखाता है — कमाने के लिए परदेस गया पति और पीछे छूटी पत्नी — और बेटियों की बिक्री जैसे सामाजिक मुद्दे भी। बिहार के लिए यह आज भी उल्लेखनीय रूप से प्रासंगिक है।
- कजरी, चैती, सोहर, बिरहा — ऋतुओं और जीवन-संस्कारों से जुड़े गीत।
- शारदा सिन्हा बिहार के लोकगीतों और छठ गीतों की सबसे प्रसिद्ध गायिकाओं में से हैं।
लोकनृत्य
| नृत्य | क्षेत्र / अवसर |
|---|---|
| जट-जटिन | मिथिला; महिलाओं द्वारा; बिछड़े दंपति की कथा |
| झिझिया | मिथिला; महिलाएँ सिर पर दीपयुक्त घड़े रखकर नाचती हैं और वर्षा तथा रक्षा की प्रार्थना करती हैं |
| डोमकच | विवाह के अवसर पर महिलाओं द्वारा |
| पाइका | युद्ध-नृत्य (martial dance) |
| लौंडा नाच | लोक प्रदर्शन, जिसमें पुरुष स्त्री की भूमिकाएँ निभाते हैं |
शास्त्रीय संगीत
- ध्रुपद — मल्लिक परिवार से जुड़ा दरभंगा घराना और बेतिया घराना, ध्रुपद की दो सबसे पुरानी परंपराएँ।
- शहनाई के उस्ताद और भारत रत्न (2001) उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान का जन्म 1916 में बिहार के डुमराँव (बक्सर ज़िला) में हुआ था।
त्योहार
छठ
- सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित त्योहार, जो चार दिन तक मनाया जाता है — सबसे प्रमुख रूप से कार्तिक में (दीवाली के बाद), और चैत्र में भी।
- अनुष्ठान: नहाय-खाय, खरना, नदियों या तालाबों में खड़े होकर डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य और उगते सूर्य को उषा अर्घ्य।
- अपनी पवित्रता, घाटों की सामुदायिक सफ़ाई, मुख्य अनुष्ठानों में पुरोहित की अनुपस्थिति, और हर जाति-वर्ग की भागीदारी के लिए प्रसिद्ध।
- अब जहाँ भी बिहारी रहते हैं, वहाँ मनाया जाता है — दिल्ली, मुंबई और विदेशों में भी।
अन्य त्योहार और मेले
| त्योहार / मेला | विवरण |
|---|---|
| सामा-चकेवा | मिथिला; भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव, पक्षियों की मिट्टी की मूर्तियों के साथ, कार्तिक में |
| सोनपुर मेला | हरिहर क्षेत्र (सोनपुर) में, गंडक और गंगा के संगम पर, कार्तिक पूर्णिमा के आसपास; ऐतिहासिक रूप से एशिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक |
| पितृपक्ष मेला | गया; पूर्वजों के लिए अनुष्ठान (पिंडदान) |
| राजगीर महोत्सव | राजगीर में सांस्कृतिक उत्सव |
| बिहुला | अंग क्षेत्र; बिहुला–बिषहरी की कथा |
| जितिया | माताएँ अपनी संतान के लिए व्रत रखती हैं |
खान-पान
लिट्टी-चोखा (सत्तू भरी सेंकी हुई गेहूँ की लोइयाँ, साथ में मसली हुई सब्ज़ियाँ), सत्तू के पेय, ठेकुआ (छठ का प्रसाद), खाजा (सिलाव का, GI टैग प्राप्त), तिलकुट (गया का), अनरसा, मखाना के व्यंजन और शाही लीची।
बिहार के GI टैग वाले उत्पाद (चुने हुए)
- मधुबनी चित्रकला; सुजनी कढ़ाई; सिक्की घास उत्पाद; भागलपुरी रेशम; एप्लिक (खटवा) कार्य।
- शाही लीची (मुज़फ़्फ़रपुर); मिथिला मखाना; कतरनी चावल (भागलपुर); जर्दालु आम (भागलपुर); मगही पान; सिलाव खाजा।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- मधुबनी चित्रकला की पाँच शैलियों के नाम बताइए।
- मंजूषा कला किस कथा से जुड़ी है?
- बिदेसिया की रचना किसने की?
- उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान का जन्म कहाँ हुआ था?
- सोनपुर मेला कहाँ लगता है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "बिहार की लोक परंपराएँ उसके सामाजिक इतिहास का दर्पण हैं।" मधुबनी चित्रकला और बिदेसिया के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
- बिहार के शिल्पों के संरक्षण और प्रोत्साहन में GI टैग की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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