Skip to content
Free shipping above ₹499
Oakspine Press

बिहार की कला और संस्कृति: मधुबनी से छठ तक

मिथिला की चित्रित दीवारें, मुज़फ़्फ़रपुर की सुजनी, बिदेसिया के गीत, छठ के चार दिन, सोनपुर का पशु मेला, बिस्मिल्लाह ख़ान की शहनाई — बिहार की संस्कृति समृद्ध है, जीवित है और परीक्षा में खूब पूछी जाती है। इसकी कलाओं, शिल्पों, प्रदर्शन परंपराओं, त्योहारों और खान-पान की एक व्यवस्थित मार्गदर्शिका।

13 Oct 2026 5 मिनट में पढ़ें

Read this guide in English →
इस गाइड में
  1. चित्रकला की परंपराएँ
  2. शिल्प
  3. प्रदर्शन कलाएँ
  4. त्योहार
  5. खान-पान
  6. बिहार के GI टैग वाले उत्पाद (चुने हुए)
  7. अभ्यास

किसी शादी से पहले मिथिला के किसी गाँव में जाइए, तो आप महिलाओं को कोहबर (वधू का कक्ष) की दीवारों पर कमल, बाँस, मछली, तोते और देवी-देवताओं के चित्र बनाते देख सकते हैं — ऐसे चित्र जिनमें उर्वरता, प्रेम और लंबी आयु की कामनाएँ छिपी हैं। ये चित्र, जिन्हें आज दुनिया भर में मधुबनी या मिथिला चित्रकला के नाम से जाना जाता है, बिहार की महान सांस्कृतिक देनों में से एक हैं। ये शिल्पों, गीतों, नृत्यों, त्योहारों और खान-पान की एक कहीं बड़ी सांस्कृतिक दुनिया का हिस्सा हैं, जिसे BPSC नियमित रूप से पूछता है।

चित्रकला की परंपराएँ

मधुबनी (मिथिला) चित्रकला

विशेषताविवरण
क्षेत्रमिथिला — मधुबनी, दरभंगा और आसपास के ज़िले
परंपराअनुष्ठानों, त्योहारों और विवाहों के लिए महिलाएँ दीवारों और फ़र्श पर बनाती हैं
विषयदेवी-देवता (कृष्ण, राम–सीता, दुर्गा), प्रकृति (मछली, पक्षी, कमल, बाँस), कोहबर
शैलियाँभरनी (रंग भरी हुई), कचनी (महीन रेखाएँ), तांत्रिक, गोदना (गुदना से प्रेरित), कोहबर
रंगपरंपरागत रूप से प्राकृतिक रंग; टहनियों, उँगलियों और निब-कलमों से चित्रण
काग़ज़ पर आना1960 के दशक के अंत के सूखे के दौरान अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड ने महिलाओं को बेचने के लिए काग़ज़ पर चित्र बनाने को प्रोत्साहित किया, जिससे आमदनी हुई और यह कला दुनिया तक पहुँची
मान्यताGI टैग (भौगोलिक संकेतक); कई कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्म सम्मान मिले — जगदंबा देवी, सीता देवी, गंगा देवी, महासुंदरी देवी और अन्य

चित्रकला की अन्य परंपराएँ

परंपराक्षेत्रविशेषताएँ
मंजूषा कलाभागलपुर (अंग)बिहुला–बिषहरी (सर्प देवी) की कथा से जुड़ी; पेटी जैसी मंदिर-आकृतियों (मंजूषा) पर चित्रित; सीमित रंग (गुलाबी, हरा, पीला)
पटना कलमपटनाकंपनी काल की चित्रकला, जिसमें रोज़मर्रा का जीवन दिखता है (कंपनी शासन पर हमारी मार्गदर्शिका देखें)
टिकुली कलापटनामूल रूप से सजावटी बिंदियाँ; अब हार्डबोर्ड पर इनेमल रंगों से चित्रित

शिल्प

शिल्पक्षेत्रविशेषताएँ
सुजनी कढ़ाईमुज़फ़्फ़रपुर (भुसुरा)कपड़े की परतों वाली रज़ाइयाँ, जिन पर कच्चे टाँके (running stitch) की कढ़ाई से कहानियाँ कही जाती हैं; GI टैग प्राप्त
सिक्की घास शिल्पमिथिलासुनहरी सिक्की घास से बुनी टोकरियाँ और आकृतियाँ; GI टैग प्राप्त
भागलपुरी रेशम (तसर)भागलपुर"सिल्क सिटी"; GI टैग प्राप्त
एप्लिक (खटवा)पटना और अन्य जगहेंकपड़ा काटकर की गई सजावट
पत्थर शिल्पगया (पत्थरकट्टी)पत्थर पर नक्काशी
बावन बूटीनालंदा (बसवन बिगहा)52 आकृतियों (motifs) वाली हथकरघा बुनाई

प्रदर्शन कलाएँ

लोक संगीत और रंगमंच

  • बिदेसिया — भिखारी ठाकुर द्वारा रचित भोजपुरी लोक नाट्य (उन्हें अक्सर "भोजपुरी का शेक्सपियर" कहा जाता है)। यह पलायन (migration) की पीड़ा दिखाता है — कमाने के लिए परदेस गया पति और पीछे छूटी पत्नी — और बेटियों की बिक्री जैसे सामाजिक मुद्दे भी। बिहार के लिए यह आज भी उल्लेखनीय रूप से प्रासंगिक है।
  • कजरी, चैती, सोहर, बिरहा — ऋतुओं और जीवन-संस्कारों से जुड़े गीत।
  • शारदा सिन्हा बिहार के लोकगीतों और छठ गीतों की सबसे प्रसिद्ध गायिकाओं में से हैं।

लोकनृत्य

नृत्यक्षेत्र / अवसर
जट-जटिनमिथिला; महिलाओं द्वारा; बिछड़े दंपति की कथा
झिझियामिथिला; महिलाएँ सिर पर दीपयुक्त घड़े रखकर नाचती हैं और वर्षा तथा रक्षा की प्रार्थना करती हैं
डोमकचविवाह के अवसर पर महिलाओं द्वारा
पाइकायुद्ध-नृत्य (martial dance)
लौंडा नाचलोक प्रदर्शन, जिसमें पुरुष स्त्री की भूमिकाएँ निभाते हैं

शास्त्रीय संगीत

  • ध्रुपद — मल्लिक परिवार से जुड़ा दरभंगा घराना और बेतिया घराना, ध्रुपद की दो सबसे पुरानी परंपराएँ।
  • शहनाई के उस्ताद और भारत रत्न (2001) उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान का जन्म 1916 में बिहार के डुमराँव (बक्सर ज़िला) में हुआ था।

त्योहार

छठ

  • सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित त्योहार, जो चार दिन तक मनाया जाता है — सबसे प्रमुख रूप से कार्तिक में (दीवाली के बाद), और चैत्र में भी।
  • अनुष्ठान: नहाय-खाय, खरना, नदियों या तालाबों में खड़े होकर डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य और उगते सूर्य को उषा अर्घ्य।
  • अपनी पवित्रता, घाटों की सामुदायिक सफ़ाई, मुख्य अनुष्ठानों में पुरोहित की अनुपस्थिति, और हर जाति-वर्ग की भागीदारी के लिए प्रसिद्ध।
  • अब जहाँ भी बिहारी रहते हैं, वहाँ मनाया जाता है — दिल्ली, मुंबई और विदेशों में भी।

अन्य त्योहार और मेले

त्योहार / मेलाविवरण
सामा-चकेवामिथिला; भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव, पक्षियों की मिट्टी की मूर्तियों के साथ, कार्तिक में
सोनपुर मेलाहरिहर क्षेत्र (सोनपुर) में, गंडक और गंगा के संगम पर, कार्तिक पूर्णिमा के आसपास; ऐतिहासिक रूप से एशिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक
पितृपक्ष मेलागया; पूर्वजों के लिए अनुष्ठान (पिंडदान)
राजगीर महोत्सवराजगीर में सांस्कृतिक उत्सव
बिहुलाअंग क्षेत्र; बिहुला–बिषहरी की कथा
जितियामाताएँ अपनी संतान के लिए व्रत रखती हैं

खान-पान

लिट्टी-चोखा (सत्तू भरी सेंकी हुई गेहूँ की लोइयाँ, साथ में मसली हुई सब्ज़ियाँ), सत्तू के पेय, ठेकुआ (छठ का प्रसाद), खाजा (सिलाव का, GI टैग प्राप्त), तिलकुट (गया का), अनरसा, मखाना के व्यंजन और शाही लीची।

बिहार के GI टैग वाले उत्पाद (चुने हुए)

  • मधुबनी चित्रकला; सुजनी कढ़ाई; सिक्की घास उत्पाद; भागलपुरी रेशम; एप्लिक (खटवा) कार्य।
  • शाही लीची (मुज़फ़्फ़रपुर); मिथिला मखाना; कतरनी चावल (भागलपुर); जर्दालु आम (भागलपुर); मगही पान; सिलाव खाजा।

अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:

  1. मधुबनी चित्रकला की पाँच शैलियों के नाम बताइए।
  2. मंजूषा कला किस कथा से जुड़ी है?
  3. बिदेसिया की रचना किसने की?
  4. उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान का जन्म कहाँ हुआ था?
  5. सोनपुर मेला कहाँ लगता है?

मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:

  • "बिहार की लोक परंपराएँ उसके सामाजिक इतिहास का दर्पण हैं।" मधुबनी चित्रकला और बिदेसिया के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
  • बिहार के शिल्पों के संरक्षण और प्रोत्साहन में GI टैग की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।

अगली BPSC गाइड ईमेल पर पाएँ

हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।

और पढ़ें

BPSCBihar HistoryJP आंदोलन और संपूर्ण क्रांतिमार्च 1974 में महँगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध पटना में छात्रों के विरोध के रूप में जो शुरू हुआ, वह जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में "संपूर्ण क्रांति" का राष्ट्रीय आंदोलन बन गया — एक ऐसा मोड़, जिसके बाद आपातकाल लगा और केंद्र में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। कारण, घटनाएँ और विरासत। 4 min read·11 Oct 2026BPSCBihar Historyराजेंद्र प्रसाद और जयप्रकाश नारायणबिहार के दो सपूतों ने आधुनिक भारत को बिल्कुल अलग-अलग ढंग से गढ़ा — राजेंद्र प्रसाद, शांत गांधीवादी वकील, जिन्होंने संविधान सभा की अध्यक्षता की और भारत के पहले राष्ट्रपति बने; और जयप्रकाश नारायण, बेचैन समाजवादी, जो 1942 में जेल से निकल भागे और उस आंदोलन का नेतृत्व किया जिसने आपातकाल का अंत करवाया। उनका जीवन, विचार और विरासत। 4 min read·10 Oct 2026BPSCBihar Historyबिहार का निर्माण: 1912, 1936 और 2000बिहार दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है, क्योंकि 1912 में इसी दिन बिहार बंगाल से अलग हुआ था। इसके बाद नक्शा दो बार और बदला — 1936 में उड़ीसा अलग हुआ और 2000 में झारखंड बना। पृथक्करण आंदोलन, हर सीमा-परिवर्तन, 2000 में बिहार ने क्या खोया, मुख्य परीक्षा का आदर्श उत्तर और MCQ। 8 min read·9 Oct 2026BPSCBihar Historyस्वामी सहजानंद सरस्वती और किसान सभागाजीपुर का एक संन्यासी स्वतंत्रता-पूर्व भारत का सबसे प्रभावशाली किसान नेता बना। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने बिहार प्रांतीय किसान सभा (1929) कैसे बनाई, अखिल भारतीय किसान सभा (1936) और बकाश्त संघर्षों का नेतृत्व कैसे किया, कांग्रेस से उनका टकराव क्यों हुआ और ज़मींदारी उन्मूलन राष्ट्रीय एजेंडे पर कैसे आया। समयरेखा, आदर्श उत्तर और MCQ। 8 min read·8 Oct 2026