इस गाइड में
5 जून 1974 को पटना का गांधी मैदान एक विशाल भीड़ से भरा था। तब 71 वर्ष के हो चुके जयप्रकाश नारायण ने उन्हें संबोधित किया और संपूर्ण क्रांति (Total Revolution) का आह्वान किया: केवल सरकार बदलना नहीं, बल्कि समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और संस्कृति का रूपांतरण। उनके नेतृत्व वाला आंदोलन — जिसे बिहार आंदोलन या JP आंदोलन कहा जाता है — स्वतंत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण जन-आंदोलनों में से एक था।
पृष्ठभूमि
| कारक | विवरण |
|---|---|
| आर्थिक संकट | 1971 के युद्ध, 1973 के तेल संकट और ख़राब फ़सलों के बाद ऊँची महँगाई (inflation); खाद्यान्न की कमी |
| बेरोज़गारी | शिक्षित युवाओं के पास नौकरियाँ नहीं |
| भ्रष्टाचार | सरकार में भ्रष्टाचार की व्यापक धारणा |
| शिक्षा | विश्वविद्यालयों में संकट — बाधित सत्र, कमज़ोर सुविधाएँ |
| राजनीतिक केंद्रीकरण | सत्ता का बढ़ता केंद्रीकरण |
| गुजरात | गुजरात के नवनिर्माण छात्र आंदोलन (1973–74) ने राज्य सरकार को इस्तीफ़ा देने पर मजबूर किया, जिससे बिहार के छात्रों को प्रेरणा मिली |
छात्र आंदोलन
- 1974 की शुरुआत में बिहार के छात्र संगठनों ने छात्र संघर्ष समिति बनाई।
- 18 मार्च 1974 को छात्रों ने पटना में बिहार विधानमंडल की ओर मार्च किया; विरोध हिंसक हो गया और पुलिस ने गोली चलाई।
- छात्रों ने JP को नेतृत्व के लिए आमंत्रित किया। वे इस शर्त पर तैयार हुए कि आंदोलन शांतिपूर्ण और दलगत राजनीति से ऊपर रहेगा।
JP ने नेतृत्व सँभाला
- 8 अप्रैल 1974: JP ने पटना में एक मौन जुलूस का नेतृत्व किया।
- 5 जून 1974: गांधी मैदान में उन्होंने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया।
- आंदोलन ने बिहार विधानसभा को भंग करने और राज्य सरकार के इस्तीफ़े की माँग की।
- 4 नवंबर 1974: पटना में एक प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज में JP घायल हुए, जिससे जनता का आक्रोश और बढ़ गया।
- आंदोलन बिहार से बाहर फैला और विपक्षी दलों को एक साथ ले आया।
संपूर्ण क्रांति क्या थी?
JP ने संपूर्ण क्रांति को कई आयामों में क्रांतियों के मेल के रूप में बताया:
| आयाम | अर्थ |
|---|---|
| सामाजिक | जातिगत भेदभाव और सामाजिक बुराइयों (जैसे दहेज) का अंत |
| आर्थिक | असमानता घटाना; विकेंद्रीकृत विकास |
| राजनीतिक | स्वच्छ, जवाबदेह राजनीति; प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार (right to recall); जन समितियाँ |
| सांस्कृतिक | नैतिक और सांस्कृतिक नवीनीकरण |
| वैचारिक / बौद्धिक | समाज के बारे में नई सोच |
| शैक्षिक | शिक्षा को प्रासंगिक बनाने के लिए उसमें सुधार |
| आध्यात्मिक | सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्य |
JP ने अधिकारियों को जवाबदेह बनाने के लिए गाँव के स्तर पर जनता सरकारों (जन समितियों) का प्रस्ताव भी रखा।
आंदोलन से आपातकाल तक
- 12 जून 1975: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राजनारायण मामले में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का निर्वाचन रद्द कर दिया।
- 25 जून 1975: JP ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली को संबोधित किया और एक अवैध सरकार के साथ असहयोग का आह्वान किया।
- उसी रात "आंतरिक अशांति" (internal disturbance) के आधार पर अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया।
- JP और हज़ारों विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया; नागरिक स्वतंत्रताएँ निलंबित हुईं और प्रेस पर सेंसरशिप लगी।
1977 के चुनाव
- जनवरी 1977 में चुनावों की घोषणा हुई।
- JP के समर्थन से विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई।
- मार्च 1977 में जनता पार्टी जीती; मोरारजी देसाई पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।
- बाद में 44वें संशोधन (1978) ने, अन्य सुरक्षा उपायों के साथ, राष्ट्रीय आपातकाल के आधार के रूप में "आंतरिक अशांति" की जगह "सशस्त्र विद्रोह" (armed rebellion) कर दिया।
विरासत
| क्षेत्र | विरासत |
|---|---|
| लोकतंत्र | शांतिपूर्ण जन-विरोध की शक्ति दिखाई; आपात शक्तियों के दुरुपयोग के विरुद्ध सुरक्षा उपाय आए |
| बिहार की राजनीति | नेताओं की एक ऐसी पीढ़ी तैयार हुई, जिसने दशकों तक बिहार की राजनीति पर प्रभुत्व रखा |
| नागरिक स्वतंत्रताएँ | मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूकता मज़बूत हुई |
| आलोचना | कुछ लोगों का तर्क है कि निर्वाचित विधानसभा को भंग करने की माँग से आंदोलन ने संस्थाओं को कमज़ोर किया; जनता सरकार ख़ुद तीन वर्ष के भीतर गिर गई |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- JP ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान कब और कहाँ किया?
- गुजरात के किस छात्र आंदोलन ने बिहार के छात्रों को प्रेरित किया?
- 18 मार्च 1974 को पटना में क्या हुआ?
- 1975 में आपातकाल किस अनुच्छेद के तहत घोषित किया गया?
- किस संशोधन ने "आंतरिक अशांति" की जगह "सशस्त्र विद्रोह" किया?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "JP आंदोलन भारतीय लोकतंत्र में एक निर्णायक मोड़ था।" विवेचना कीजिए।
- संपूर्ण क्रांति की अवधारणा और आज उसकी प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
अगली BPSC गाइड ईमेल पर पाएँ
हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।