फ़िरोज़ाबाद में भट्ठियों से तपती कार्यशालाओं में हर रंग की चूड़ियाँ चमकती हैं; भदोही में बुनकर ऐसे कालीनों में गाँठें बाँधते हैं जो यूरोप और अमेरिका के घरों तक पहुँचते हैं; लखनऊ में महिलाएँ मलमल पर सफ़ेद धागे की बारीक कढ़ाई — चिकनकारी — करती हैं, ठीक वैसे ही जैसे उनकी दादी-नानी करती थीं। उत्तर प्रदेश की शिल्प परंपरा भारत की सबसे समृद्ध परंपराओं में से एक है। 2018 में राज्य ने इन शिल्पों को विकास की एक रणनीति के केंद्र में रखा: एक ज़िला एक उत्पाद (One District One Product — ODOP)।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिल्प
| शिल्प | ज़िला | टिप्पणी |
|---|---|---|
| चिकनकारी | लखनऊ | बारीक सूती कपड़े पर नाज़ुक सफ़ेद कढ़ाई; मुगल और अवध का संरक्षण; GI टैग प्राप्त |
| बनारसी रेशमी साड़ियाँ और ज़री-वस्त्र (brocade) | वाराणसी | सोने-चाँदी की ज़री वाला रेशम; GI टैग प्राप्त |
| हाथ से गाँठे गए कालीन | भदोही, मिर्ज़ापुर | भारत का "कालीन नगर"; बड़ा निर्यात उद्योग; GI टैग प्राप्त |
| पीतल के बर्तन और सामान | मुरादाबाद | "पीतल नगरी"; बड़ा निर्यात केंद्र |
| काँच और चूड़ियाँ | फ़िरोज़ाबाद | "चूड़ियों का शहर"; काँच का सामान |
| ताले | अलीगढ़ | ताला निर्माण का केंद्र |
| इत्र | कन्नौज | प्राकृतिक सुगंधों के आसवन की पारंपरिक विधि; GI टैग प्राप्त |
| ब्लू पॉटरी / सिरेमिक | खुर्जा (सिरेमिक), निज़ामाबाद (काली मिट्टी के बर्तन, आज़मगढ़) | निज़ामाबाद के काली मिट्टी के बर्तनों को GI टैग प्राप्त |
| लकड़ी के खिलौने | वाराणसी | लाख की परत वाले लकड़ी के खिलौने; GI टैग प्राप्त |
| ज़री–ज़रदोज़ी | बरेली, लखनऊ, आगरा | धातु के धागों की कढ़ाई |
| चमड़ा | कानपुर, आगरा | चर्मशोधन कारख़ाने (कानपुर); जूते-चप्पल (आगरा) |
| संगमरमर पर जड़ाई | आगरा | पित्रा दूरा (pietra dura) परंपरा |
| टेराकोटा | गोरखपुर | पकी मिट्टी के घोड़े और आकृतियाँ; GI टैग प्राप्त |
| खेल का सामान | मेरठ | क्रिकेट बैट, गेंदें और उपकरण |
| काष्ठ शिल्प | सहारनपुर | लकड़ी पर नक्काशी |
GI टैग
उत्तर प्रदेश उन राज्यों में है जिनके पास सबसे अधिक भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication — GI) टैग हैं, और इनमें से कई हस्तशिल्प के लिए हैं। GI टैग असली उत्पादों को नकल से बचाते हैं और ब्रांडिंग तथा निर्यात में मदद करते हैं।
एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP)
शुरुआत और विचार
- उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे 24 जनवरी 2018 (उत्तर प्रदेश दिवस) को शुरू किया।
- उत्तर प्रदेश के 75 ज़िलों में से हर एक ने एक ऐसे उत्पाद की पहचान की — प्रायः कोई पारंपरिक शिल्प या कृषि उत्पाद — जिसमें उसे ऐतिहासिक बढ़त प्राप्त है।
- विचार यह था कि पहले से मौजूद कौशल और बाज़ार वाले उत्पादों के इर्द-गिर्द क्लस्टर (cluster) बनाए जाएँ, ताकि रोज़गार पैदा हो, निर्यात बढ़े और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को सहारा मिले।
घटक
| घटक | उद्देश्य |
|---|---|
| सामान्य सुविधा केंद्र (Common Facility Centres) | साझा मशीनें, परीक्षण और डिज़ाइन सुविधाएँ |
| विपणन विकास सहायता (Marketing Development Assistance) | मेलों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन मंचों में भागीदारी |
| वित्त | उद्यमियों के ऋण पर मार्जिन मनी / सब्सिडी |
| कौशल विकास और टूलकिट | कारीगरों का प्रशिक्षण और औज़ार उपलब्ध कराना |
| ब्रांडिंग | ODOP लोगो, ई-कॉमर्स से गठजोड़, GI में सहायता |
उपलब्धियाँ (मोटे तौर पर)
- उत्तर प्रदेश के उत्पादों की पहचान और ब्रांडिंग बढ़ी।
- कई ODOP उत्पादों का निर्यात बढ़ा।
- इस विचार को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया गया — केंद्र सरकार की ODOP पहल ("निर्यात केंद्र के रूप में ज़िले" / Districts as Export Hubs के साथ) ने उत्तर प्रदेश के मॉडल से प्रेरणा ली।
चुनौतियाँ
| चुनौती | व्याख्या |
|---|---|
| कारीगरों की आय | बिचौलिये बड़ा हिस्सा ले लेते हैं |
| ऋण | कारीगरों को कर्ज़ पाने में कठिनाई होती है |
| डिज़ाइन और प्रौद्योगिकी | आधुनिक डिज़ाइन और गुणवत्ता मानकों की ज़रूरत |
| प्रतिस्पर्धा | मशीन से बने और आयातित सामान से (जैसे बनारसी साड़ियों की पावरलूम नकलें; चीनी पीतल का सामान और चूड़ियाँ) |
| काम की परिस्थितियाँ | स्वास्थ्य के ख़तरे (जैसे फ़िरोज़ाबाद की भट्ठियाँ; कानपुर के चर्मशोधन कारख़ाने); बाल श्रम की चिंताएँ |
| पर्यावरण | चर्मशोधन कारख़ानों और काँच की भट्ठियों से प्रदूषण |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- उत्तर प्रदेश में ODOP कब शुरू किया गया?
- कौन-सा ज़िला पीतल के सामान के लिए जाना जाता है?
- काली मिट्टी के बर्तन कहाँ बनते हैं?
- उत्तर प्रदेश का कौन-सा शहर चूड़ियों के शहर के रूप में जाना जाता है?
- चिकनकारी क्या है, और यह कहाँ होती है?
मुख्य परीक्षा शैली:
- "ODOP विरासत को आजीविका में बदलता है।" विवेचना कीजिए।
- उत्तर प्रदेश के शिल्प क्लस्टरों में कारीगरों के सामने आने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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