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कुंभ, रामलीला और उत्तर प्रदेश के पर्व-त्योहार

प्रयागराज का कुंभ करोड़ों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है; पूरे उत्तर प्रदेश में खेली जाने वाली रामलीला को यूनेस्को की मान्यता है; देव दीपावली पर वाराणसी जगमगा उठता है; बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाती है; मथुरा और अयोध्या के उत्सव दुनिया भर से लोगों को खींचते हैं। उत्तर प्रदेश के त्योहारों और मेलों पर एक मार्गदर्शिका — उनका अर्थ, उनका प्रबंधन और उनकी आर्थिक भूमिका।

9 Oct 2026 4 मिनट में पढ़ें

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इस गाइड में
  1. कुंभ मेला
  2. रामलीला
  3. वाराणसी के त्योहार
  4. ब्रज के त्योहार
  5. अयोध्या
  6. अन्य त्योहार और मेले
  7. आर्थिक और सामाजिक भूमिका
  8. अभ्यास

हर बारह वर्ष में प्रयागराज में संगम के रेतीले तट — जहाँ गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती मिलती हैं — कुछ हफ़्तों के लिए पृथ्वी के सबसे बड़े अस्थायी नगरों में से एक बन जाते हैं। कुंभ मेला करोड़ों तीर्थयात्रियों, साधु-संतों और आगंतुकों को आकर्षित करता है। यह उत्तर प्रदेश के अनेक त्योहारों और मेलों में सबसे भव्य है, और ये सब मिलकर राज्य की धार्मिक विविधता, जीवंत परंपराओं और आर्थिक जीवन को व्यक्त करते हैं।

कुंभ मेला

पहलूविवरण
स्थानबारी-बारी से चार स्थानों पर — प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), हरिद्वार (उत्तराखंड), उज्जैन (मध्य प्रदेश) और नासिक (महाराष्ट्र)
चक्रहर स्थान पर लगभग हर 12 वर्ष में कुंभ; प्रयागराज और हरिद्वार में लगभग हर 6 वर्ष में अर्धकुंभ; प्रयागराज में महाकुंभ
आधारबृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा की ज्योतिषीय स्थितियाँ
अनुष्ठानशुभ तिथियों पर पवित्र स्नान; अखाड़ों (साधुओं के संप्रदाय) की शाही स्नान / अमृत स्नान शोभायात्राएँ
यूनेस्को2017 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची (Representative List of the Intangible Cultural Heritage of Humanity) में शामिल
  • प्रयागराज में 2025 में महाकुंभ हुआ, जिसमें रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्री आए।
  • हर वर्ष संगम पर माघ मेला लगता है, जिसमें तीर्थयात्रियों के एक महीने तक वहीं रहने की कल्पवास परंपरा है।

कुंभ का प्रबंधन: शासन की एक सीख

कुंभ विशाल जनसमूहों के प्रबंधन का एक केस स्टडी (case study) है: अस्थायी नगर नियोजन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएँ, भीड़ नियंत्रण, यातायात, सुरक्षा, आपदा की तैयारी और प्रौद्योगिकी (CCTV, भीड़ का विश्लेषण)। कई वर्षों में — 2025 सहित — यहाँ दुखद भगदड़ की घटनाएँ भी हुई हैं, जो भीड़ प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करती हैं।

रामलीला

  • रामायण का नाट्य मंचन, जो मुख्यतः तुलसीदास के रामचरितमानस पर आधारित है और दशहरे के समय पूरे उत्तर प्रदेश (और उत्तर भारत) में होता है।
  • रामनगर की रामलीला (वाराणसी), जिसे काशी राजपरिवार का संरक्षण मिला, लगभग एक महीने चलती है और पूरे नगर को ही अपना मंच बना लेती है।
  • रामलीला को 2008 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल किया गया।

वाराणसी के त्योहार

त्योहारविवरण
देव दीपावलीकार्तिक पूर्णिमा पर घाट लाखों दीयों से जगमगाते हैं
गंगा आरतीदशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन संध्या की पूजा
नाग नथैयातुलसी घाट पर कृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन का मंचन
भरत मिलापनाटी इमली का प्रसिद्ध आयोजन, दशहरे के समय

ब्रज के त्योहार

त्योहारविवरण
लट्ठमार होलीबरसाना और नंदगाँव में — महिलाएँ खेल-खेल में पुरुषों पर लाठियाँ बरसाती हैं
जन्माष्टमीकृष्ण का जन्मोत्सव, मथुरा और वृंदावन में धूमधाम से मनाया जाता है
रासलीलाकृष्ण की नृत्य-नाटिका
फूलों की होलीवृंदावन में फूलों से खेली जाने वाली होली

अयोध्या

  • दीपोत्सव — सरयू के तट पर लाखों दीयों के साथ दीवाली का बड़ा आयोजन, जो 2017 से हो रहा है।
  • राम नवमी और अन्य पर्व, जिनमें राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा (2024) के बाद तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ी है।

अन्य त्योहार और मेले

त्योहार / मेलास्थानटिप्पणी
नौचंदी मेलामेरठएक देवी मंदिर और एक दरगाह, दोनों से जुड़ा ऐतिहासिक मेला — सामासिक संस्कृति का प्रतीक
देवा शरीफ़ का उर्सबाराबंकीहाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर; सभी समुदायों की साझा होली के लिए प्रसिद्ध
कीरत सागर मेला / कजली उत्सवमहोबाआल्हा–ऊदल की परंपराओं से जुड़ा
गंगा दशहरापूरे उत्तर प्रदेश मेंगंगा के अवतरण का उत्सव
छठपूर्वी उत्तर प्रदेशसूर्य उपासना (बिहार के साथ साझा)
गढ़मुक्तेश्वर मेलाहापुड़गंगा तट पर कार्तिक मेला
बटेश्वर मेलाआगरा ज़िलायमुना तट पर, उत्तर भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक
सलीम चिश्ती का उर्सफ़तेहपुर सीकरीसूफ़ी आयोजन

आर्थिक और सामाजिक भूमिका

भूमिकाउदाहरण
पर्यटनकुंभ, वाराणसी, अयोध्या, मथुरा–वृंदावन देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं
स्थानीय अर्थव्यवस्थाअस्थायी बाज़ार, हस्तशिल्प, भोजन, परिवहन
सामाजिक समरसताविभिन्न समुदायों के साझा उत्सव (नौचंदी, देवा शरीफ़)
सांस्कृतिक हस्तांतरणरामलीला और रासलीला मौखिक परंपराओं को जीवित रखती हैं

अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:

  1. कुंभ मेले को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में कब शामिल किया गया?
  2. उत्तर प्रदेश की कौन-सी परंपरा 2008 में यूनेस्को की सूची में शामिल हुई?
  3. लट्ठमार होली कहाँ मनाई जाती है?
  4. मेरठ का कौन-सा मेला सामासिक संस्कृति का प्रतीक है?
  5. देव दीपावली क्या है?

मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:

  • "कुंभ मेला एक आध्यात्मिक आयोजन भी है और शासन की एक उपलब्धि भी।" विवेचना कीजिए।
  • उत्तर प्रदेश में पर्यटन और आजीविका को बढ़ावा देने में त्योहारों की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।

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