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हर बारह वर्ष में प्रयागराज में संगम के रेतीले तट — जहाँ गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती मिलती हैं — कुछ हफ़्तों के लिए पृथ्वी के सबसे बड़े अस्थायी नगरों में से एक बन जाते हैं। कुंभ मेला करोड़ों तीर्थयात्रियों, साधु-संतों और आगंतुकों को आकर्षित करता है। यह उत्तर प्रदेश के अनेक त्योहारों और मेलों में सबसे भव्य है, और ये सब मिलकर राज्य की धार्मिक विविधता, जीवंत परंपराओं और आर्थिक जीवन को व्यक्त करते हैं।
कुंभ मेला
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| स्थान | बारी-बारी से चार स्थानों पर — प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), हरिद्वार (उत्तराखंड), उज्जैन (मध्य प्रदेश) और नासिक (महाराष्ट्र) |
| चक्र | हर स्थान पर लगभग हर 12 वर्ष में कुंभ; प्रयागराज और हरिद्वार में लगभग हर 6 वर्ष में अर्धकुंभ; प्रयागराज में महाकुंभ |
| आधार | बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा की ज्योतिषीय स्थितियाँ |
| अनुष्ठान | शुभ तिथियों पर पवित्र स्नान; अखाड़ों (साधुओं के संप्रदाय) की शाही स्नान / अमृत स्नान शोभायात्राएँ |
| यूनेस्को | 2017 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची (Representative List of the Intangible Cultural Heritage of Humanity) में शामिल |
- प्रयागराज में 2025 में महाकुंभ हुआ, जिसमें रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्री आए।
- हर वर्ष संगम पर माघ मेला लगता है, जिसमें तीर्थयात्रियों के एक महीने तक वहीं रहने की कल्पवास परंपरा है।
कुंभ का प्रबंधन: शासन की एक सीख
कुंभ विशाल जनसमूहों के प्रबंधन का एक केस स्टडी (case study) है: अस्थायी नगर नियोजन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएँ, भीड़ नियंत्रण, यातायात, सुरक्षा, आपदा की तैयारी और प्रौद्योगिकी (CCTV, भीड़ का विश्लेषण)। कई वर्षों में — 2025 सहित — यहाँ दुखद भगदड़ की घटनाएँ भी हुई हैं, जो भीड़ प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करती हैं।
रामलीला
- रामायण का नाट्य मंचन, जो मुख्यतः तुलसीदास के रामचरितमानस पर आधारित है और दशहरे के समय पूरे उत्तर प्रदेश (और उत्तर भारत) में होता है।
- रामनगर की रामलीला (वाराणसी), जिसे काशी राजपरिवार का संरक्षण मिला, लगभग एक महीने चलती है और पूरे नगर को ही अपना मंच बना लेती है।
- रामलीला को 2008 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल किया गया।
वाराणसी के त्योहार
| त्योहार | विवरण |
|---|---|
| देव दीपावली | कार्तिक पूर्णिमा पर घाट लाखों दीयों से जगमगाते हैं |
| गंगा आरती | दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन संध्या की पूजा |
| नाग नथैया | तुलसी घाट पर कृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन का मंचन |
| भरत मिलाप | नाटी इमली का प्रसिद्ध आयोजन, दशहरे के समय |
ब्रज के त्योहार
| त्योहार | विवरण |
|---|---|
| लट्ठमार होली | बरसाना और नंदगाँव में — महिलाएँ खेल-खेल में पुरुषों पर लाठियाँ बरसाती हैं |
| जन्माष्टमी | कृष्ण का जन्मोत्सव, मथुरा और वृंदावन में धूमधाम से मनाया जाता है |
| रासलीला | कृष्ण की नृत्य-नाटिका |
| फूलों की होली | वृंदावन में फूलों से खेली जाने वाली होली |
अयोध्या
- दीपोत्सव — सरयू के तट पर लाखों दीयों के साथ दीवाली का बड़ा आयोजन, जो 2017 से हो रहा है।
- राम नवमी और अन्य पर्व, जिनमें राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा (2024) के बाद तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ी है।
अन्य त्योहार और मेले
| त्योहार / मेला | स्थान | टिप्पणी |
|---|---|---|
| नौचंदी मेला | मेरठ | एक देवी मंदिर और एक दरगाह, दोनों से जुड़ा ऐतिहासिक मेला — सामासिक संस्कृति का प्रतीक |
| देवा शरीफ़ का उर्स | बाराबंकी | हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर; सभी समुदायों की साझा होली के लिए प्रसिद्ध |
| कीरत सागर मेला / कजली उत्सव | महोबा | आल्हा–ऊदल की परंपराओं से जुड़ा |
| गंगा दशहरा | पूरे उत्तर प्रदेश में | गंगा के अवतरण का उत्सव |
| छठ | पूर्वी उत्तर प्रदेश | सूर्य उपासना (बिहार के साथ साझा) |
| गढ़मुक्तेश्वर मेला | हापुड़ | गंगा तट पर कार्तिक मेला |
| बटेश्वर मेला | आगरा ज़िला | यमुना तट पर, उत्तर भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक |
| सलीम चिश्ती का उर्स | फ़तेहपुर सीकरी | सूफ़ी आयोजन |
आर्थिक और सामाजिक भूमिका
| भूमिका | उदाहरण |
|---|---|
| पर्यटन | कुंभ, वाराणसी, अयोध्या, मथुरा–वृंदावन देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं |
| स्थानीय अर्थव्यवस्था | अस्थायी बाज़ार, हस्तशिल्प, भोजन, परिवहन |
| सामाजिक समरसता | विभिन्न समुदायों के साझा उत्सव (नौचंदी, देवा शरीफ़) |
| सांस्कृतिक हस्तांतरण | रामलीला और रासलीला मौखिक परंपराओं को जीवित रखती हैं |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- कुंभ मेले को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में कब शामिल किया गया?
- उत्तर प्रदेश की कौन-सी परंपरा 2008 में यूनेस्को की सूची में शामिल हुई?
- लट्ठमार होली कहाँ मनाई जाती है?
- मेरठ का कौन-सा मेला सामासिक संस्कृति का प्रतीक है?
- देव दीपावली क्या है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "कुंभ मेला एक आध्यात्मिक आयोजन भी है और शासन की एक उपलब्धि भी।" विवेचना कीजिए।
- उत्तर प्रदेश में पर्यटन और आजीविका को बढ़ावा देने में त्योहारों की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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