इस गाइड में
वाराणसी के पास के एक छोटे-से गाँव लमही के एक कमरे में धनपत राय नाम के एक स्कूल शिक्षक — जो प्रेमचंद नाम से लिखते थे — ने किसानों, महाजनों, विधवाओं और बाल मज़दूरों पर ऐसी कहानियाँ और उपन्यास लिखे, जिन्होंने हिंदी और उर्दू साहित्य को हमेशा के लिए बदल दिया। प्रेमचंद उन असाधारण लेखकों में से केवल एक हैं जो उत्तर प्रदेश ने भारत को दिए। भक्ति कवियों से लेकर आधुनिक हिंदी और उर्दू तक, उत्तर प्रदेश उत्तर भारतीय साहित्य के केंद्र में रहा है।
भक्ति साहित्य
- कबीर (वाराणसी) — जन-भाषा में दोहे और साखियाँ।
- तुलसीदास — अवधी में रामचरितमानस।
- सूरदास — ब्रजभाषा में सूरसागर।
- मलिक मुहम्मद जायसी — अवधी में पद्मावत (1540), एक सूफ़ी रूपक-काव्य।
उत्तर प्रदेश के भक्ति संतों पर हमारी मार्गदर्शिका भी देखें।
आधुनिक हिंदी का जन्म
भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850–1885)
- वाराणसी में जन्म; आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक कहलाते हैं (और आधुनिक हिंदी रंगमंच के भी)।
- अंधेर नगरी (कुशासन पर व्यंग्य) और भारत दुर्दशा (औपनिवेशिक शासन में भारत की दुर्दशा पर) जैसे नाटक लिखे।
- कविवचन सुधा और हरिश्चंद्र चंद्रिका जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया।
- हिंदी साहित्य के इतिहास में इस काल को भारतेंदु युग कहा जाता है।
महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864–1938)
- सरस्वती (इलाहाबाद से प्रकाशित) के संपादक; खड़ी बोली हिंदी गद्य और पद्य का मानकीकरण किया — द्विवेदी युग।
प्रेमचंद (1880–1936)
- वाराणसी के पास लमही में जन्म।
- उर्दू और हिंदी दोनों में लिखा; लगभग 300 कहानियाँ और लगभग एक दर्जन उपन्यास।
- प्रमुख उपन्यास: गोदान (1936), ग़बन, निर्मला, रंगभूमि, कर्मभूमि, सेवासदन।
- कहानियाँ: कफ़न, ईदगाह, पंच परमेश्वर, पूस की रात, बड़े घर की बेटी।
- विषय: किसानों का शोषण, जाति, स्त्रियों की स्थिति, समाज सुधार, राष्ट्रवाद।
- उपन्यास सम्राट कहलाते हैं।
छायावाद (स्वच्छंदतावाद), लगभग 1918–1936
चार महान कवि — चारों उत्तर प्रदेश के थे या उससे घनिष्ठ रूप से जुड़े थे:
| कवि | प्रमुख कृतियाँ | टिप्पणी |
|---|---|---|
| जयशंकर प्रसाद | कामायनी | वाराणसी में जन्म; नाटक भी लिखे (चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त) |
| सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" | सरोज स्मृति, राम की शक्ति पूजा, कुकुरमुत्ता | इलाहाबाद में रहे; मुक्त छंद के अग्रदूत |
| सुमित्रानंदन पंत | पल्लव, चिदंबरा | कौसानी में जन्म (अब उत्तराखंड में, तब उत्तर प्रदेश में); ज्ञानपीठ पाने वाले पहले हिंदी कवि (1968) |
| महादेवी वर्मा | यामा, दीपशिखा; गद्य रेखाचित्र | इलाहाबाद में रहीं; "आधुनिक मीरा" कहलाती हैं; ज्ञानपीठ (1982) |
बाद के हिंदी लेखक
| लेखक | प्रमुख कृतियाँ |
|---|---|
| हरिवंशराय बच्चन | मधुशाला; चार खंडों में आत्मकथा |
| सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" | प्रयोगवाद (experimentalism) के प्रवर्तक; कुशीनगर (कसया) में जन्म |
| धर्मवीर भारती | गुनाहों का देवता, अंधा युग |
| अमृतलाल नागर | लखनऊ के जीवन पर उपन्यास |
| यशपाल | झूठा सच (विभाजन पर) |
| श्रीलाल शुक्ल | राग दरबारी — ग्रामीण राजनीति और नौकरशाही पर व्यंग्य |
| केदारनाथ सिंह | कवि; ज्ञानपीठ (2013) |
उर्दू साहित्य
| शायर / लेखक | टिप्पणी |
|---|---|
| मीर तक़ी मीर | दिल्ली से लखनऊ आ गए; उर्दू के सबसे महान शायरों में से एक |
| मीर अनीस और दबीर | लखनऊ में मर्सिया (शोकगीत) के उस्ताद |
| अकबर इलाहाबादी | औपनिवेशिक समाज पर व्यंग्य करने वाले शायर |
| फ़िराक़ गोरखपुरी (रघुपति सहाय) | गोरखपुर में जन्म; गुल-ए-नग़मा के लिए ज्ञानपीठ (1969) — यह पुरस्कार पाने वाले पहले उर्दू लेखक |
| जोश मलीहाबादी | "शायर-ए-इंक़लाब" (क्रांति के कवि); मलीहाबाद, लखनऊ से |
| मजाज़ लखनवी | शायर; अलीगढ़ का तराना |
| क़ुर्रतुलऐन हैदर | उपन्यासकार (आग का दरिया); ज्ञानपीठ (1989) |
पत्रकारिता
- इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी और कानपुर हिंदी और उर्दू पत्रकारिता के केंद्र थे।
- गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा संपादित प्रताप (कानपुर) एक निर्भीक राष्ट्रवादी पत्र था; विद्यार्थी की 1931 में कानपुर में सांप्रदायिक दंगे रोकने की कोशिश में मृत्यु हो गई।
संस्थाएँ
- हिंदी साहित्य सम्मेलन, 1910 में इलाहाबाद में स्थापित।
- नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी (1893) — देवनागरी लिपि में हिंदी को बढ़ावा दिया; हिंदी शब्दसागर शब्दकोश प्रकाशित किया।
- उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक किसे कहा जाता है?
- प्रेमचंद का जन्म कहाँ हुआ था, और उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति कौन-सी है?
- छायावाद के चार प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
- गोरखपुर के किस उर्दू शायर को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला?
- हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना कहाँ हुई थी?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "प्रेमचंद का कथा-साहित्य ग्रामीण उत्तर प्रदेश का दर्पण है।" विवेचना कीजिए।
- हिंदी और उर्दू साहित्य में इलाहाबाद के योगदान का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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