इस गाइड में
15 जनवरी 1934 की दोपहर बिहार–नेपाल क्षेत्र में एक विनाशकारी भूकंप आया। मुंगेर, दरभंगा, मोतिहारी और सीतामढ़ी जैसे नगर तबाह हो गए; ज़मीन फट गई, दरारों से बालू और पानी के फव्वारे फूट पड़े, और हज़ारों लोग मारे गए। चौहत्तर साल बाद, 2008 में, कोसी ने अपना तटबंध तोड़ दिया और उत्तर-पूर्व बिहार के बड़े हिस्से को डुबो दिया। इन दोनों घटनाओं के बीच बाढ़, सूखे, ग्रीष्म लहर और वज्रपात की अनगिनत घटनाएँ हैं। बिहार भारत के सबसे अधिक बहु-आपदा (multi-hazard) वाले राज्यों में है।
आपदा प्रोफ़ाइल
| आपदा | कहाँ | क्यों |
|---|---|---|
| बाढ़ | खासकर उत्तर बिहार (कोसी, गंडक, बागमती, कमला, महानंदा बेसिन) | हिमालयी नदियाँ, नेपाल में भारी वर्षा, समतल भूमि, गाद, तटबंध |
| भूकंप | उत्तर बिहार, भूकंपीय क्षेत्र (seismic zones) IV और V में | हिमालय के टकराव क्षेत्र से निकटता |
| सूखा | दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम बिहार | कम वर्षा, मौसमी नदियाँ |
| ग्रीष्म लहर (heatwave) | मुख्यतः दक्षिण बिहार (गया, औरंगाबाद, नवादा) | मई–जून में गर्म शुष्क हवाएँ |
| शीतलहर और कोहरा | पूरे मैदानी क्षेत्र में | सर्दी |
| वज्रपात (lightning, आकाशीय बिजली) | पूरे राज्य में, खासकर मानसून-पूर्व और मानसून में | संवहनी तूफ़ान; खुले खेतों में काम करने वाले बहुत-से लोग |
| अग्निकांड | गाँवों में, खासकर शुष्क मौसम में | फूस के घर, तेज़ हवाएँ |
| नाव दुर्घटनाएँ | बाढ़ और पर्वों के दौरान नदियों में | क्षमता से अधिक भरी नावें |
बाढ़
- बिहार के क्षेत्रफल का बड़ा हिस्सा बाढ़-प्रवण है — आमतौर पर इसके भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 73 प्रतिशत बताया जाता है — और उत्तर बिहार भारत के सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में है।
- बाढ़ लगभग हर वर्ष आती है; कुछ वर्ष (1987, 2004, 2007, 2008, 2017, 2019) विशेष रूप से भयंकर रहे।
- कारण: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में भारी वर्षा, गाद, समतल भूभाग, तटबंधों का टूटना, खराब जल-निकासी और बाढ़ के मैदानों पर अतिक्रमण।
- 2008 में कोसी तटबंध का टूटना हाल की सबसे प्रसिद्ध आपदा है — कोसी पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।
भूकंप
| भूकंप | तिथि | टिप्पणी |
|---|---|---|
| बिहार–नेपाल भूकंप | 15 जनवरी 1934 | तीव्रता (magnitude) लगभग 8; उत्तर बिहार (मुंगेर, दरभंगा, मोतिहारी, सीतामढ़ी) और नेपाल में व्यापक विनाश; बड़े पैमाने पर द्रवीकरण (liquefaction, बालू के फव्वारे) |
| बिहार–नेपाल भूकंप | 21 अगस्त 1988 | अधिकेंद्र (epicentre) पूर्वी नेपाल में; दरभंगा, मधुबनी और आसपास के ज़िलों में नुकसान |
| नेपाल (गोरखा) भूकंप | 25 अप्रैल 2015 | अधिकेंद्र नेपाल में; उत्तर बिहार में मौतें और नुकसान |
1934 के भूकंप पर एक प्रसिद्ध वाद-विवाद हुआ: गांधीजी ने इसे अस्पृश्यता के लिए ईश्वरीय दंड बताया, और रवींद्रनाथ टैगोर ने सार्वजनिक रूप से असहमति जताते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण भौतिक होते हैं, नैतिक नहीं — इस वाद-विवाद का उल्लेख कभी-कभी नीतिशास्त्र (Ethics) के उत्तरों में किया जाता है।
सूखा
- दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम बिहार (गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई, बांका) में अक्सर सूखा पड़ता है।
- कुछ वर्षों में उत्तर बिहार में भी कम वर्षा हो सकती है — बिहार कभी-कभी एक ही मौसम में बाढ़ और सूखा, दोनों झेलता है।
- पारंपरिक आहर–पईन प्रणाली ने दक्षिण बिहार को कम पानी का प्रबंधन करने में मदद की।
ग्रीष्म लहर और शीतलहर
- जून 2019 में एक भीषण ग्रीष्म लहर से गया, औरंगाबाद और नवादा में बहुत-सी मौतें हुईं; अधिकारियों ने बाहरी गतिविधियों पर धारा 144 के तहत प्रतिबंध लगाए।
- दिसंबर–जनवरी की शीतलहर बुज़ुर्गों, बेघर लोगों और फसलों को प्रभावित करती है।
वज्रपात
- बिहार में हर वर्ष वज्रपात से होने वाली मौतें भारत में सबसे अधिक में से होती हैं।
- शिकार अक्सर खुले खेतों में काम करने वाले किसान और मज़दूर होते हैं, या पेड़ों के नीचे शरण लेने वाले लोग।
- उपाय: पूर्व चेतावनी (राज्य के ऐप इंद्रवज्र सहित), SMS अलर्ट, जागरूकता ("30-30 नियम": बिजली चमकने के 30 सेकंड के भीतर गरज सुनाई दे तो आश्रय लें; आखिरी गरज के बाद 30 मिनट तक भीतर रहें), और भवनों पर तड़ित चालक (lightning arresters)।
संस्थाएँ और योजनाएँ
- बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA), जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत।
- राज्य सरकार का आपदा प्रबंधन विभाग।
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और NDRF की बटालियन (बिहटा में स्थित)।
- ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिनके अध्यक्ष ज़िला पदाधिकारी (District Magistrate) होते हैं।
- बिहार ने सेंडाई फ्रेमवर्क के अनुरूप आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप (2015–2030) (Disaster Risk Reduction Roadmap) अपनाया।
- बाढ़ की तैयारी के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP), जिनमें नावों, भोजन के पैकेटों और दवाओं को पहले से तैनात करना और राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई शामिल हैं।
सबक और आगे की राह
| सबक | उपाय |
|---|---|
| बाढ़ को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता | बाढ़ प्रबंधन — पूर्व चेतावनी, ऊँचे चबूतरे, बाढ़-रोधी आवास, बीमा |
| तटबंध टूट सकते हैं | निगरानी और रखरखाव; और तटबंध बनाते जाने के बजाय दूसरे विकल्प |
| भूकंप का जोखिम ऊँचा है | भवन संहिताओं (building codes) का पालन; स्कूलों और अस्पतालों को भूकंप-रोधी बनाना (retrofit) |
| वज्रपात से मौतें रोकी जा सकती हैं | चेतावनी, जागरूकता, आश्रय |
| ग्रीष्म लहरें बढ़ रही हैं | हीट एक्शन प्लान |
| नेपाल के साथ सहयोग ज़रूरी है | आँकड़ों की साझेदारी, संयुक्त परियोजनाएँ |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- बिहार–नेपाल का महान भूकंप कब आया था?
- बिहार के क्षेत्रफल का कितना हिस्सा आमतौर पर बाढ़-प्रवण बताया जाता है?
- BSDMA के अध्यक्ष कौन होते हैं?
- बिहार में NDRF की बटालियन कहाँ स्थित है?
- इंद्रवज्र ऐप क्या है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "बिहार एक ही वर्ष में बाढ़ और सूखा झेलता है।" व्याख्या कीजिए और रणनीतियाँ सुझाइए।
- बिहार में वज्रपात से होने वाली अधिक मौतों के कारणों का परीक्षण कीजिए और उपाय सुझाइए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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