इस गाइड में
भारत के क्षेत्रफल का लगभग 2.9 प्रतिशत बिहार के पास है, पर देश के लगभग 8.6 प्रतिशत लोग यहाँ रहते हैं (जनगणना 2011)। यही एक अनुपात — छोटे, समतल और बाढ़-प्रवण क्षेत्र पर बड़ी आबादी — राज्य की लगभग हर बात को आकार देता है: भूमि पर दबाव, प्रवास, कृषि का महत्व, और स्कूल, अस्पताल व रोज़गार उपलब्ध कराने की चुनौती।
जनगणना 2011: प्रमुख आँकड़े
सबसे हालिया पूरी हुई जनगणना 2011 की है; अगली जनगणना के लिए 2027 की संदर्भ तिथि तय की गई है।
| संकेतक | बिहार | भारत |
|---|---|---|
| जनसंख्या | लगभग 10.41 करोड़ — उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद तीसरा स्थान | लगभग 121 करोड़ |
| भारत की जनसंख्या में हिस्सा | लगभग 8.6% | — |
| जनसंख्या घनत्व (density) | लगभग 1,106 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी — राज्यों में सबसे अधिक | 382 |
| दशकीय वृद्धि (decadal growth, 2001–11) | लगभग 25.4% — सबसे अधिक में से | 17.7% |
| लिंगानुपात (sex ratio) | 918 | 943 |
| शिशु लिंगानुपात (child sex ratio, 0–6 वर्ष) | 935 | 919 |
| साक्षरता | लगभग 61.8% — राज्यों में सबसे कम | लगभग 73% |
| पुरुष / महिला साक्षरता | लगभग 71.2% / 51.5% | लगभग 80.9% / 64.6% |
| नगरीय जनसंख्या | लगभग 11.3% — सबसे कम में से | लगभग 31.2% |
| अनुसूचित जाति | लगभग 15.9% | 16.6% |
| अनुसूचित जनजाति | लगभग 1.3% | 8.6% |
एक रोचक अंतर पर ध्यान दें: बिहार का शिशु लिंगानुपात (935) राष्ट्रीय आँकड़े (919) से अधिक था, और राज्य के अपने कुल लिंगानुपात से भी अधिक — आंशिक रूप से इसलिए कि पुरुषों का बाहर प्रवास वयस्क लिंगानुपात को प्रभावित करता है।
ज़िलों के चरम मान (जनगणना 2011)
| संकेतक | सबसे अधिक | सबसे कम |
|---|---|---|
| जनसंख्या | पटना | शेखपुरा |
| घनत्व | शिवहर | कैमूर |
| साक्षरता | रोहतास | पूर्णिया |
| लिंगानुपात | गोपालगंज (1,000 से ऊपर) | कुछ ज़िलों में लगभग 870–880 (जैसे मुंगेर) |
गोपालगंज और सीवान जैसे ज़िलों का ऊँचा लिंगानुपात पुरुषों के बाहर प्रवास को दर्शाता है — बहुत-से पुरुष राज्य के बाहर काम करते हैं।
धर्म (जनगणना 2011)
- हिंदू लगभग 82.7%; मुस्लिम लगभग 16.9%; ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन कम संख्या में।
- सीमांचल के ज़िलों (किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्णिया) में मुस्लिम आबादी का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक है।
प्रजनन और स्वास्थ्य के रुझान
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019–21) के अनुसार:
- बिहार की कुल प्रजनन दर (total fertility rate, TFR) लगभग 3.0 थी — राज्यों में सबसे अधिक, हालाँकि यह घटती रही है।
- महिला शिक्षा का प्रजनन दर पर गहरा असर होता है — अधिक पढ़ी-लिखी महिलाओं के बच्चे कम होते हैं।
- बच्चों में ठिगनापन (stunting) और रक्ताल्पता (anaemia) जैसे संकेतक अब भी ऊँचे हैं।
बिहार जाति सर्वेक्षण (2023)
2023 में बिहार ने राज्य स्तर पर जाति-आधारित सर्वेक्षण कराया और उसके आँकड़े प्रकाशित किए (दशकों में किसी राज्य द्वारा की गई ऐसी पहली व्यापक गणना)। इसके मुख्य निष्कर्ष (अक्टूबर 2023 में जारी):
| वर्ग | जनसंख्या में हिस्सा |
|---|---|
| अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) | लगभग 36% |
| पिछड़ा वर्ग (BC) | लगभग 27% |
| अनुसूचित जाति | लगभग 19.7% |
| अनुसूचित जनजाति | लगभग 1.7% |
| अनारक्षित / सामान्य | लगभग 15.5% |
सर्वेक्षण ने 2022–23 में बिहार की जनसंख्या लगभग 13.07 करोड़ गिनी। इससे उठी बहसों के लिए जाति सर्वेक्षण पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।
जनसांख्यिकीय लाभांश या बोझ?
| अवसर | चुनौती |
|---|---|
| बहुत युवा आबादी — आने वाले दशकों में कामकाजी उम्र की बड़ी आबादी | रोज़गार: बिहार के भीतर उद्योग और सेवाएँ सीमित |
| भारत की वृद्धि के लिए संभावित श्रम शक्ति | शिक्षा और कौशल का निम्न स्तर |
| प्रवासियों से आने वाला धन (remittances) | स्वास्थ्य और पोषण में कमियाँ |
| उपभोक्ता बाज़ार | भूमि पर दबाव और छोटी जोतें |
नीति के लिए ये आँकड़े क्यों मायने रखते हैं
- घनत्व से जोतों के खंडित होने और बाढ़ के जोखिम की व्याख्या होती है।
- कम नगरीकरण सीमित औद्योगिक विकास को दर्शाता है।
- ऊँची प्रजनन दर लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की माँग करती है।
- प्रवास लिंगानुपात, परिवारों और अर्थव्यवस्था को आकार देता है।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- जनगणना 2011 में बिहार का जनसंख्या घनत्व कितना था?
- 2011 में बिहार की साक्षरता दर कितनी थी?
- 2011 में बिहार के किस ज़िले की साक्षरता सबसे अधिक थी?
- 2023 के जाति सर्वेक्षण के अनुसार बिहार की जनसंख्या में EBC का हिस्सा कितना था?
- NFHS-5 में बिहार की TFR कितनी थी?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "बिहार की जनसांख्यिकीय रूपरेखा उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है और सबसे बड़ा अवसर भी।" चर्चा कीजिए।
- बिहार में महिला साक्षरता और प्रजनन दर के संबंध का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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