भिखारी ठाकुर का नाटक बिदेसिया, जो सौ वर्ष से भी पहले लिखा गया, एक ऐसे युवक की कहानी है जो रोज़ी कमाने के लिए गाँव छोड़कर कलकत्ता चला जाता है, और उस पत्नी की, जिसे वह पीछे छोड़ जाता है। भोजपुर के दर्शक आज भी इसे देखकर रो पड़ते हैं — क्योंकि यह कहानी कभी पुरानी नहीं हुई। प्रवास (migration) बिहार की अर्थव्यवस्था और समाज की निर्णायक विशेषताओं में से एक है।
एक लंबा इतिहास
| काल | गंतव्य |
|---|---|
| उन्नीसवीं सदी | मॉरीशस, फ़िजी, त्रिनिदाद, गयाना, सूरीनाम और दक्षिण अफ़्रीका को गिरमिटिया मज़दूर (indentured labour) — इनमें बहुत-से भोजपुरी क्षेत्र से थे; साथ ही असम के चाय बागानों और कलकत्ता की जूट मिलों में |
| बीसवीं सदी | कलकत्ता, असम, झारखंड की कोयला खदानें, और बाद में पंजाब और दिल्ली |
| 1990 के बाद | दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मुंबई, गुजरात (सूरत), केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और खाड़ी देश |
आज भोजपुरी-भाषी मूल के नेता मॉरीशस और त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देशों में ऊँचे पदों पर हैं — यह गिरमिटिया प्रवास की विरासत है।
पैमाना और प्रतिरूप
- जनगणना के आँकड़ों ने, और रेल यात्रा के आँकड़ों का उपयोग करने वाले भारत के आर्थिक सर्वेक्षण (2016–17) ने, बिहार और उत्तर प्रदेश को अंतर-राज्यीय (inter-state) श्रम प्रवास का सबसे बड़ा स्रोत बताया।
- प्रवास के रूप:
- दीर्घकालिक (वर्षों तक बाहर, बीच-बीच में घर आना);
- मौसमी/चक्रीय (seasonal/circular) — जैसे पंजाब और हरियाणा में धान और गेहूँ की कटाई के लिए, या निर्माण के मौसम में;
- कम दूरी का (पटना और आसपास के कस्बों तक)।
- प्रवासी निर्माण, विनिर्माण, परिवहन, घरेलू काम, सुरक्षा, कृषि और छोटे व्यापार में काम करते हैं — अधिकतर असंगठित (informal) क्षेत्र में।
- विद्यार्थी भी प्रवास करते हैं — उच्च शिक्षा और कोचिंग के लिए दिल्ली, कोटा और अन्य जगहों पर।
कारण
| प्रतिकर्ष कारक (push factors, बिहार) | अपकर्ष कारक (pull factors, गंतव्य) |
|---|---|
| छोटी, खंडित जोतें | निर्माण, उद्योग और सेवाओं में रोज़गार |
| बाढ़ और फसल का नुकसान | अधिक मज़दूरी |
| सीमित उद्योग और औपचारिक रोज़गार | रिश्तेदारों और गाँव वालों के बने-बनाए नेटवर्क |
| कृषि में कम मज़दूरी | शिक्षा और कौशल के अवसर |
| जाति और सामाजिक बंधन | गुमनामी और सामाजिक गतिशीलता |
| जनसंख्या का दबाव |
प्रभाव
परिवारों और गाँवों पर
| सकारात्मक | नकारात्मक |
|---|---|
| प्रेषित धन (remittances) घरेलू आय बढ़ाता है; शिक्षा, स्वास्थ्य और मकान का खर्च चलता है | परिवार का बिछड़ना; महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों पर दबाव |
| भूमि पर दबाव घटता है | गाँवों से कामकाजी उम्र के पुरुषों का चले जाना |
| लौटने वाले नए कौशल और विचार लाते हैं | प्रवासियों के स्वास्थ्य को खतरा (असुरक्षित काम, खराब आवास) |
| कुछ जातियों के लिए सामाजिक गतिशीलता | गंतव्यों पर शोषण और भेदभाव का खतरा |
महिलाओं पर
- कृषि का स्त्रीकरण (feminisation of agriculture) — महिलाएँ खेती का अधिक काम और निर्णय अपने हाथ में लेती हैं।
- महिलाएँ अकेले घर और पैसों का प्रबंधन करती हैं, जिससे बोझ भी बढ़ता है और स्वायत्तता (agency) भी।
बिहार की अर्थव्यवस्था पर
- प्रेषित धन ग्रामीण आय और उपभोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- इससे गाँवों में निर्माण और छोटे व्यवसायों को सहारा मिलता है।
- पर प्रवास स्थानीय रोज़गार की कमी को भी दर्शाता है — और राज्य अपने युवा, उत्पादक कामगार खो देता है।
कोविड-19 और घर वापसी
- 2020 के लॉकडाउन में लाखों प्रवासी बिहार लौटे — शुरुआती हफ़्तों में, विशेष ट्रेनों की व्यवस्था होने से पहले, कई पैदल या साइकिल से।
- इस संकट ने उनकी असुरक्षा उजागर की: न बचत, न सामाजिक सुरक्षा, न कोई रिकॉर्ड।
- बिहार ने क्वारंटीन केंद्र चलाए, लौटने वालों का कौशल सर्वेक्षण (skill mapping) किया और मनरेगा (MGNREGA) का काम बढ़ाया।
- अर्थव्यवस्था खुलने पर कई प्रवासी फिर अपने गंतव्यों को लौट गए।
नीतिगत उपाय
| उपाय | उद्देश्य |
|---|---|
| ई-श्रम पोर्टल (केंद्र सरकार, 2021) | सामाजिक सुरक्षा के लिए असंगठित कामगारों का राष्ट्रीय डेटाबेस |
| एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड | प्रवासी कहीं भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से राशन ले सकते हैं |
| अंतर-राज्यीय प्रवासी कर्मकार अधिनियम, 1979 (अब व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020 में समाहित) | अंतर-राज्यीय प्रवासियों का पंजीकरण और संरक्षण |
| कौशल विकास | कुशल युवा कार्यक्रम और अन्य राज्य कार्यक्रम |
| स्थानीय रोज़गार सृजन | औद्योगिक नीति, कृषि-प्रसंस्करण, MSME |
| सहायता केंद्र | गंतव्य राज्यों में बिहारी कामगारों की मदद |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- भोजपुरी क्षेत्र के गिरमिटिया मज़दूर किन देशों में गए?
- किस आर्थिक सर्वेक्षण ने अंतर-राज्यीय प्रवास के अनुमान के लिए रेलवे के आँकड़ों का प्रयोग किया?
- ई-श्रम पोर्टल क्या है?
- कौन-सा भोजपुरी नाटक प्रवास को दर्शाता है?
मुख्य परीक्षा शैली:
- "बिहार से प्रवास जीवित रहने की रणनीति भी है और विकास की विफलता भी।" चर्चा कीजिए।
- ग्रामीण बिहार में पुरुषों के बाहर प्रवास के महिलाओं पर प्रभाव का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
अगली BPSC गाइड ईमेल पर पाएँ
हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।