इस गाइड में
आठवीं शताब्दी के आरंभ में सिंध जीत चुकी अरब सेनाएँ पूर्व और उत्तर की ओर बढ़कर राजस्थान, गुजरात और मालवा में घुस आईं। उन्हें रोका — और अगली दो शताब्दियों तक काफ़ी हद तक दूर रखा — राजस्थान में उभरी एक नई शक्ति ने: गुर्जर-प्रतिहारों ने। नौवीं शताब्दी में मिहिरभोज के समय अपने चरम पर प्रतिहार साम्राज्य सतलुज से बंगाल की सीमाओं तक और हिमालय की तलहटी से नर्मदा तक फैला था, और उसकी राजधानी कन्नौज थी। उनकी कहानी राजस्थान से शुरू होती है।
वे कौन थे?
प्रतिहार का अर्थ है "द्वारपाल"। प्रतिहार अभिलेख इस वंश को लक्ष्मण से जोड़ते हैं, जिन्होंने अपने भाई राम के द्वारपाल के रूप में सेवा की थी। गुर्जर उपसर्ग को अलग-अलग ढंग से पढ़ा गया है — एक जातीय या कबीलाई नाम के रूप में, या गुर्जरत्रा नामक भूभाग के क्षेत्रीय नाम के रूप में, जिसमें पश्चिमी राजस्थान का बड़ा हिस्सा शामिल था।
दो आरंभिक शाखाएँ
| शाखा | आधार | प्रमुख व्यक्ति |
|---|---|---|
| मंडोर के प्रतिहार | मंडोर (जोधपुर के पास) | हरिचंद्र (संस्थापक; जोधपुर अभिलेख के अनुसार एक ब्राह्मण, जिनकी पत्नी क्षत्रिय थीं); स्थानीय शासकों की एक परंपरा |
| साम्राज्यवादी प्रतिहार | जालोर / अवंति (उज्जैन), बाद में कन्नौज | नागभट्ट प्रथम और उनके उत्तराधिकारी |
साम्राज्य दूसरी, "साम्राज्यवादी" शाखा ने खड़ा किया।
महत्वपूर्ण शासक
| शासक | काल (लगभग) | उपलब्धियाँ |
|---|---|---|
| नागभट्ट प्रथम | लगभग 730–760 | सिंध से आए अरब आक्रमणकारियों को हराया; प्रतिहार शक्ति की स्थापना की |
| वत्सराज | लगभग 775–805 | शक्ति का विस्तार किया; पालों से लड़े; राष्ट्रकूट ध्रुव से पराजित हुए |
| नागभट्ट द्वितीय | लगभग 805–833 | कन्नौज जीता (लगभग 816) और उसे राजधानी बनाया; राष्ट्रकूट गोविंद तृतीय से पराजित हुए |
| मिहिरभोज (भोज प्रथम) | लगभग 836–885 | सबसे महान शासक; आदिवराह की उपाधि धारण की; साम्राज्य अपने चरम पर |
| महेंद्रपाल प्रथम | लगभग 885–910 | कवि राजशेखर के संरक्षक |
| महीपाल प्रथम | लगभग 912–944 | राष्ट्रकूटों के हमलों का सामना किया, जिनसे कन्नौज को क्षति पहुँची |
| राज्यपाल | ग्यारहवीं शताब्दी का आरंभ | महमूद ग़ज़नवी के कन्नौज पर आक्रमण (1018) के समय भाग गए |
अरब सीमांत
प्रतिहारों की सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूमिका अरब विस्तार के विरुद्ध एक सुदृढ़ दीवार की थी। 712 में अरबों की सिंध विजय के बाद उनके हमले पश्चिमी भारत में दूर तक पहुँचे। नागभट्ट प्रथम ने उन्हें खदेड़ा, और इसके बाद प्रतिहार अरबों के विरोधी बने रहे। रोचक बात यह है कि नौवीं शताब्दी के अरब यात्री सुलेमान ने प्रतिहार शासक (जिसे उसने "जुज़्र" का राजा कहा) को भारत में इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु बताया — और साथ ही उसके राज्य की सुरक्षा की प्रशंसा भी की, यह कहते हुए कि वह चोर-लुटेरों से भारत के सबसे सुरक्षित राज्यों में से एक था।
त्रिपक्षीय संघर्ष (tripartite struggle)
आठवीं से दसवीं शताब्दी के अधिकांश समय में तीन शक्तियाँ कन्नौज पर नियंत्रण के लिए लड़ती रहीं, जो हर्ष के समय से उत्तर भारत की प्रतीकात्मक राजधानी था:
- पश्चिम से गुर्जर-प्रतिहार;
- पूर्व से बंगाल के पाल;
- दक्षिण से दक्कन के राष्ट्रकूट।
अंततः कन्नौज सबसे लंबे समय तक प्रतिहारों के पास रहा, पर इस लंबे युद्ध ने तीनों शक्तियों को थका दिया और छोटे क्षेत्रीय राज्यों के लिए रास्ता खोल दिया।
संस्कृति और स्थापत्य
प्रतिहार काल में राजस्थान में मंदिर स्थापत्य का उत्कर्ष हुआ। यह उस शैली का आरंभिक रूप था जिसे कभी-कभी महामारू (या मारु-गुर्जर) शैली कहा जाता है।
| स्थल | ज़िला | मुख्य आकर्षण |
|---|---|---|
| ओसियाँ | जोधपुर | आठवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के मंदिरों का समूह — हरिहर मंदिर, सूर्य मंदिर, सच्चियाय माता मंदिर और महावीर जैन मंदिर; पश्चिमी भारत के सबसे महत्वपूर्ण आरंभिक मंदिर-समूहों में से एक |
| आभानेरी | दौसा | चाँद बावड़ी, भारत की सबसे गहरी और सबसे प्रभावशाली बावड़ियों में से एक, और हर्षत माता मंदिर, दोनों लगभग आठवीं-नौवीं शताब्दी के |
| मंडोर | जोधपुर | प्रतिहारों का आरंभिक केंद्र; बाद में राठौड़ों की छतरियाँ |
साहित्य भी फला-फूला। महेंद्रपाल के दरबार में राजशेखर ने कर्पूरमंजरी (प्राकृत में एक नाटक), काव्यमीमांसा (काव्यशास्त्र पर) और अन्य रचनाएँ लिखीं।
प्रशासन
प्रतिहार शासन सामंतों के एक पदानुक्रम पर टिका था, जिनमें से कई बाद में स्वतंत्र राजवंश बन गए — इनमें चौहान, गुहिल और परमार शामिल थे। दूसरे शब्दों में, इस साम्राज्य की संरचना ने ही आगे आने वाले राजपूत राज्यों को जन्म देने में मदद की।
पतन
राष्ट्रकूटों से बार-बार के युद्ध, सामंतों का उदय, और अंत में 1018 में महमूद ग़ज़नवी के कन्नौज पर आक्रमण ने साम्राज्य को समाप्त कर दिया। राजस्थान में उसके उत्तराधिकारी क्षेत्रीय राजपूत राज्य बने।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- किस प्रतिहार शासक ने आठवीं शताब्दी में अरबों को हराया?
- किसने कन्नौज जीतकर उसे प्रतिहारों की राजधानी बनाया?
- मिहिरभोज ने कौन-सी उपाधि धारण की?
- महेंद्रपाल प्रथम ने किस कवि को संरक्षण दिया?
- चाँद बावड़ी और हर्षत माता मंदिर किस ज़िले में हैं?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (50 शब्द): त्रिपक्षीय संघर्ष क्या था?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): पूर्व-मध्यकालीन भारतीय इतिहास में गुर्जर-प्रतिहारों के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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