इस गाइड में
31 मार्च 1958 को एक ऐसी नहर का निर्माण शुरू हुआ जिसका लक्ष्य लगभग असंभव लगता था: पंजाब की नदियों का पानी थार मरुस्थल के भीतर तक पहुँचाना। राजस्थान नहर, जिसका नाम 1984 में बदलकर इंदिरा गांधी नहर रखा गया, दुनिया की सबसे बड़ी नहर प्रणालियों में से एक बनी। आज यह उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के बड़े भू-भाग की सिंचाई करती है, पूरे मरुस्थल के कस्बों और गाँवों को पेयजल देती है, और इसने भू-दृश्य बदल दिया है — जहाँ कभी केवल टीले थे, वहाँ अब हरे खेत हैं। पर इसके साथ गंभीर समस्याएँ भी आई हैं। RAS के लिए यह नहर भूगोल और अर्थव्यवस्था, दोनों का एक क्लासिक विषय है।
राजस्थान में सिंचाई के साधन
| साधन | टिप्पणी |
|---|---|
| कुएँ और नलकूप | सिंचाई का सबसे बड़ा साधन; भूजल पर भारी निर्भरता |
| नहरें | उत्तर-पश्चिम (इंदिरा गांधी नहर, गंग, भाखड़ा), हाड़ौती (चंबल) और दक्षिण (माही) में केंद्रित |
| तालाब | अधिकतर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में |
राजस्थान के पास भारत के क्षेत्रफल का लगभग दसवाँ भाग है, पर सतही जल संसाधनों का केवल लगभग 1% — इसीलिए हर नहर का महत्व है।
इंदिरा गांधी नहर: मुख्य तथ्य
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| उद्गम | हरिके बैराज, पंजाब में सतलुज और ब्यास के संगम पर |
| पानी | मुख्यतः रावी–ब्यास प्रणाली से, जिसका पानी पोंग (ब्यास पर) जैसे बाँधों में संग्रहीत होता है |
| फीडर (पोषक) नहर | लगभग 204 किमी लंबी, पंजाब और हरियाणा से होकर राजस्थान तक |
| मुख्य नहर | मसीतावाली हैड (हनुमानगढ़) से मोहनगढ़ (जैसलमेर) तक — लगभग 445 किमी |
| कुल लंबाई (फीडर + मुख्य) | लगभग 649 किमी |
| निर्माण प्रारंभ | 31 मार्च 1958 |
| नया नाम | इंदिरा गांधी नहर — 2 नवंबर 1984 |
| लाभान्वित ज़िले | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, चूरू, नागौर और अन्य (सिंचाई और पेयजल) |
चरण
परियोजना दो चरणों में बनी: पहले चरण में उत्तरी भाग (बीकानेर में लगभग पूगल तक) आया, और दूसरे चरण में नहर बीकानेर, जैसलमेर और उससे आगे मरुस्थल के भीतर तक बढ़ाई गई।
लिफ्ट नहरें
कमान क्षेत्र (command area) का बड़ा भाग नहर से ऊँचाई पर है, इसलिए कई लिफ्ट (उठाऊ) नहरें पानी को पंप करके ऊपर पहुँचाती हैं, ताकि सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति हो सके। इनके नाम राजस्थान की विभूतियों के नाम पर रखे गए हैं, और ये बीकानेर, जोधपुर, नागौर, चूरू, जैसलमेर और बाड़मेर की सेवा करने वाली योजनाएँ हैं (उदाहरण के लिए, बीकानेर के लिए कँवरसेन लिफ्ट नहर, और जोधपुर को पानी देने वाली राजीव गांधी लिफ्ट नहर)।
लाभ
| लाभ | व्याख्या |
|---|---|
| सिंचाई | मरुस्थल के बड़े क्षेत्र खेती के अंतर्गत आए — गेहूँ, सरसों, कपास, चना, मूँगफली, फल |
| पेयजल | पूरे मरुस्थल के कस्बे और गाँव, जोधपुर और बीकानेर सहित |
| बसावट | नए गाँव; नहरी क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि |
| वनीकरण | नहर के किनारे रक्षक मेखलाएँ और वृक्षारोपण |
| मरुस्थलीकरण में कमी | कमान क्षेत्र के कुछ भागों में टीलों का स्थिरीकरण |
| पशुधन | पशुओं के लिए चारा और पानी |
| सुरक्षा | सीमा के पास बसावट |
समस्याएँ
| समस्या | व्याख्या |
|---|---|
| जलभराव | रिसाव और अति-सिंचाई से भू-जलस्तर ऊपर उठा, विशेषकर हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में |
| लवणता | ऊपर उठते भूजल के साथ लवण सतह पर आ गए |
| स्वास्थ्य | ठहरे पानी से कुछ क्षेत्रों में मलेरिया बढ़ा |
| पारिस्थितिक बदलाव | मरुस्थलीय आवासों की हानि; वन्यजीवों में बदलाव |
| असमान वितरण | नहर के अंतिम छोर (tail-end) वाले क्षेत्रों को कम पानी मिलता है |
| जल बँटवारा | पंजाब की नदियों पर निर्भरता; अंतर-राज्यीय विवाद |
| नहर की लाइनिंग | पुरानी लाइनिंग क्षतिग्रस्त; रिसाव कम करने के लिए मरम्मत ज़रूरी |
अन्य प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ
| परियोजना | क्षेत्र | टिप्पणी |
|---|---|---|
| गंग नहर | श्रीगंगानगर | बीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने बनवाई; 1927 में पूरी हुई; सतलुज से (हुसैनीवाला, फ़िरोज़पुर) पानी लेती है |
| भाखड़ा नहरें | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर | भाखड़ा–नांगल परियोजना से |
| चंबल परियोजना | कोटा, बूँदी, हाड़ौती | राजस्थान–मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना: गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर बाँध और कोटा बैराज |
| माही बजाज सागर | बाँसवाड़ा | जनजातीय दक्षिण में सिंचाई और जलविद्युत; गुजरात के साथ साझा |
| बीसलपुर | टोंक | जयपुर और अजमेर को पेयजल; सिंचाई |
| जवाई बाँध | पाली | पेयजल और सिंचाई |
| नर्मदा नहर | जालोर, बाड़मेर | गुजरात से नर्मदा का पानी दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान तक लाती है |
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP)
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (Eastern Rajasthan Canal Project) का प्रस्ताव चंबल बेसिन की नदियों (जैसे कालीसिंध, पार्वती और कूनो) का मानसूनी अधिशेष जल पेयजल और सिंचाई के लिए पूर्वी राजस्थान के ज़िलों तक ले जाने के लिए रखा गया था। 2024 में राजस्थान और मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय नदी-जोड़ो कार्यक्रम के तहत इसे पार्वती–कालीसिंध–चंबल नदी-जोड़ो परियोजना के साथ मिलाकर संशोधित PKC-ERCP बनाने पर सहमति दी। इससे पूर्वी राजस्थान के बड़े भाग को लाभ मिलने की आशा है।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- इंदिरा गांधी नहर का उद्गम कहाँ से होता है?
- राजस्थान नहर का नाम बदलकर इंदिरा गांधी नहर कब रखा गया?
- मुख्य नहर कहाँ समाप्त होती है?
- गंग नहर किसने बनवाई, और यह कब पूरी हुई?
- 2024 में किन दो राज्यों ने संशोधित PKC-ERCP पर सहमति दी?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (50 शब्द): लिफ्ट नहरें क्या हैं, और इंदिरा गांधी नहर परियोजना में इनकी आवश्यकता क्यों है?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): इंदिरा गांधी नहर परियोजना के लाभों और समस्याओं का मूल्यांकन कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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