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पश्चिमी राजस्थान के किसी गाँव में सबसे क़ीमती संरचना अक्सर कोई घर या मंदिर नहीं, बल्कि ज़मीन में बना एक गोल, पलस्तर किया हुआ गड्ढा होती है, जिस पर गुंबदनुमा ढक्कन होता है — टाँका। जब मानसून की गिनी-चुनी बौछारें आती हैं, तो परिवार आसपास के आगोर (जलग्रहण क्षेत्र) को साफ़ कर देता है ताकि बारिश का पानी बहकर इसमें आ जाए; इसी जमा पानी से लंबे सूखे महीनों में पीने का काम चलाना होता है। टाँका उन अनेक सूझबूझ भरी प्रणालियों में से एक है जिन्हें राजस्थान के लोगों ने भीषण जल संकट (water scarcity) के साथ जीने के लिए विकसित किया — ऐसी प्रणालियाँ जिन्हें आज फिर से खोजा जा रहा है, क्योंकि राज्य गंभीर भूजल संकट (groundwater crisis) का सामना कर रहा है।
संकट का पैमाना
- राजस्थान के पास भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 10% और उसकी जनसंख्या व पशुधन का बड़ा हिस्सा है, पर सतही जल संसाधनों का केवल लगभग 1%।
- राज्य के अधिकांश भाग में वर्षा कम और अत्यधिक परिवर्तनशील है (जलवायु पर हमारा लेख देखें)।
- भूजल सिंचाई और पेयजल का मुख्य स्रोत बन गया है — और इसका दोहन पुनर्भरण की तुलना में कहीं तेज़ी से हो रहा है।
भूजल संकट
- केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) के आकलनों में राजस्थान की अधिकांश आकलन इकाइयाँ (ब्लॉक) अति-दोहित (over-exploited) श्रेणी में हैं — यह अनुपात देश में सबसे ऊँचे अनुपातों में है।
- जयपुर, जोधपुर, नागौर, सीकर, झुंझुनूँ और अलवर जैसे ज़िलों में जलस्तर तेज़ी से गिरा है।
जल की गुणवत्ता
- फ्लोराइड — कई ज़िलों के भूजल में इसकी मात्रा अधिक है, जिससे दंत और अस्थि फ्लोरोसिस होता है।
- लवणता — विशेषकर पश्चिम में।
- नाइट्रेट — उर्वरकों और सीवेज से।
पारंपरिक जल संचयन प्रणालियाँ
| प्रणाली | कहाँ | कैसे काम करती है |
|---|---|---|
| टाँका | पश्चिमी मरुस्थल (बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, चूरू) | ढका हुआ भूमिगत हौज़, जो तैयार किए गए जलग्रहण क्षेत्र से वर्षा जल इकट्ठा करता है; पेयजल के लिए |
| कुंड / कुंडी | पश्चिमी मरुस्थल | टाँके जैसी ही, जिसमें तश्तरीनुमा जलग्रहण क्षेत्र का ढाल एक गोल गड्ढे की ओर होता है |
| खड़ीन | जैसलमेर | खेत के ढाल के आर-पार बना मिट्टी का बाँध बहते पानी को रोक लेता है; मिट्टी में नमी बनी रहती है और रबी फ़सल ली जाती है। पंद्रहवीं शताब्दी से पालीवाल ब्राह्मणों से जुड़ी |
| जोहड़ | अलवर, पूर्वी राजस्थान | अर्धचंद्राकार मिट्टी के रोक बाँध (check dams), जो वर्षा जल रोककर भूजल का पुनर्भरण करते हैं |
| नाडी | पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर क्षेत्र) | गाँव का तालाब, जो प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्र से बहकर आया पानी इकट्ठा करता है |
| तालाब | पूरे राजस्थान में | बड़े जलाशय या झीलें, जिन्हें प्रायः शासकों या समुदायों ने बनवाया |
| बेरी / कुई | पश्चिमी मरुस्थल | तालाबों के पास खोदे गए छोटे, गहरे कुएँ, जो जिप्सम या चिकनी मिट्टी की परत के ऊपर रेत में रुके रिसाव के पानी को निकालते हैं |
| बावड़ी / झालरा | पूरे राजस्थान में | सीढ़ीदार कुएँ और सीढ़ीदार कुंड — स्थापत्य पर हमारा लेख देखें |
| विरडा | मरुस्थलीय क्षेत्र (गुजरात के बन्नी क्षेत्र में भी) | गड्ढों में खोदे गए उथले कुएँ, जो खारे भूजल के ऊपर तैरते वर्षा जल को इकट्ठा करते हैं |
| एनीकट | पूरे राजस्थान में | किसी नाले के आर-पार बना छोटा रोक बाँध |
पुनर्जीवन की एक कहानी: अरवरी नदी
1980 के दशक में राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में संस्था तरुण भारत संघ ने अलवर ज़िले के गाँवों के साथ मिलकर जोहड़ दोबारा बनाने का काम शुरू किया। जैसे-जैसे हज़ारों जोहड़ बने और पुराने ठीक हुए, भूजल का पुनर्भरण हुआ, कुएँ फिर भर गए, और वर्षों से सूखी पड़ी अरवरी नदी फिर बहने लगी। "भारत के जलपुरुष (Waterman of India)" कहे जाने वाले राजेंद्र सिंह को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (2001) और स्टॉकहोम जल पुरस्कार (2015) मिले। नदी के किनारे बसे गाँवों ने उसके पानी के प्रबंधन के लिए अरवरी संसद (नदी संसद) बनाई।
सरकारी कार्यक्रम
| कार्यक्रम | विवरण |
|---|---|
| मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान | 2016 में शुरू; जल संचयन संरचनाओं, जलग्रहण उपचार और पारंपरिक स्रोतों के पुनरुद्धार के माध्यम से गाँवों को पानी में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य |
| जल जीवन मिशन (हर घर जल) | ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल |
| अटल भूजल योजना | जल-संकटग्रस्त ब्लॉकों में समुदाय के नेतृत्व में भूजल प्रबंधन (राजस्थान भाग लेने वाले राज्यों में से एक है) |
| जलग्रहण क्षेत्र विकास | चेक डैम, समोच्च मेड़बंदी, खेत तालाब |
| सूक्ष्म सिंचाई पर अनुदान | ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणालियाँ |
| छत पर वर्षा जल संचयन | शहरों में कुछ भवनों के लिए अनिवार्य |
जल सुरक्षा की रणनीति
| क्षेत्र | उपाय |
|---|---|
| आपूर्ति | पारंपरिक संरचनाओं का पुनरुद्धार; पुनर्भरण संरचनाएँ बनाना; नहर और नदी-जोड़ो परियोजनाएँ पूरी करना |
| माँग | सूक्ष्म सिंचाई; अति-दोहित ब्लॉकों में अधिक पानी वाली फ़सलों से हटना |
| नियमन | भूजल का नियमन और मीटरिंग; सामुदायिक जल बजट |
| गुणवत्ता | फ्लोराइड-निवारण (defluoridation); सुरक्षित नल जल |
| शहर | छत पर जल संचयन; उपचारित अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग; रिसाव में कमी |
| समुदाय | जल उपयोगकर्ता समूह; ग्राम जल समितियाँ |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- जैसलमेर में खड़ीन किस समुदाय से जुड़ी है?
- टाँका क्या है?
- अलवर की कौन-सी नदी जोहड़ों के माध्यम से पुनर्जीवित हुई?
- मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान कब शुरू हुआ?
- भूजल की कौन-सी गुणवत्ता समस्या फ्लोरोसिस का कारण बनती है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (50 शब्द): जोहड़ क्या है?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): "राजस्थान का पारंपरिक जल-ज्ञान ही उसके जल-भविष्य की कुंजी है।" विवेचना कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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