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1857 के विद्रोह के ज़्यादातर नेता युवा थे या अपने जीवन के सबसे सक्रिय दौर में थे। आज के भोजपुर ज़िले के जगदीशपुर के बाबू वीर कुँवर सिंह लगभग अस्सी वर्ष के थे। फिर भी उन्होंने ऐसे अभियान का नेतृत्व किया, जो उनकी सेना को बिहार और उत्तर प्रदेश के आर-पार ले गया और जिसमें वे बार-बार अंग्रेज़ी टुकड़ियों को चकमा देते रहे। गंगा पार करने की उनकी कहानी — लोक परंपरा के अनुसार उन्होंने अपनी घायल बाँह स्वयं काटकर नदी को अर्पित कर दी थी — ने उन्हें बिहार के सबसे बड़े नायकों में से एक बना दिया है।
पृष्ठभूमि: बिहार ने विद्रोह क्यों किया
| कारण | बिहार का पहलू |
|---|---|
| आर्थिक | भारी भू-राजस्व; स्थानीय उद्योगों का पतन; ज़मींदारों पर कर्ज़ |
| राजनीतिक | अंग्रेज़ी नीतियों से नाराज़गी, जिनमें दूसरी जगहों पर किए गए विलय भी शामिल थे |
| सैनिक | बंगाल सेना के बहुत से सिपाही बिहार (विशेषकर भोजपुर क्षेत्र) और अवध से आते थे; वेतन, विदेश में सेवा और चर्बी वाले कारतूसों को लेकर शिकायतें |
| व्यक्तिगत | कुँवर सिंह की जागीर कर्ज़ में डूबी थी, और उन्हें लगता था कि अंग्रेज़ राजस्व अधिकारियों ने उनके साथ अन्याय किया है |
बिहार में विद्रोह
पटना
- पटना में कमिश्नर विलियम टेलर ने विद्रोह रोकने के लिए कठोर कदम उठाए।
- शहर में एक हमले के बाद गिरफ़्तार किए गए लोगों में जिल्दसाज़ (bookbinder) पीर अली भी थे; उन्हें जुलाई 1857 में फाँसी दी गई। उन्हें बिहार में विद्रोह के आरंभिक शहीदों में याद किया जाता है।
- तिरहुत के वारिस अली को भी 1857 में बिहार में सबसे पहले फाँसी पाने वालों में याद किया जाता है।
दानापुर और आरा
- 25 जुलाई 1857 को पटना के पास दानापुर (Dinapore) छावनी के सिपाहियों ने विद्रोह किया और आरा की ओर कूच किया, जहाँ कुँवर सिंह ने कमान सँभाली।
- उन्होंने आरा के एक छोटे किलेबंद मकान को घेर लिया, जिसमें यूरोपीयों और सिख सैनिकों का एक दल डटा रहा ("आरा हाउस की घेराबंदी")।
- अंग्रेज़ों की एक राहत टुकड़ी हार गई, पर मेजर विंसेंट आयर के नेतृत्व में दूसरी सेना ने आरा को घेराबंदी से मुक्त कराया और फिर अगस्त 1857 में जगदीशपुर पर कब्ज़ा कर लिया।
कुँवर सिंह का अभियान
जगदीशपुर हाथ से निकल जाने के बाद भी कुँवर सिंह ने आत्मसमर्पण नहीं किया। उन्होंने अपनी सेना के साथ एक लंबा अभियान चलाया:
| चरण | स्थान |
|---|---|
| पश्चिम की ओर कूच | रोहतास क्षेत्र से होते हुए मध्य और उत्तर भारत में — रीवा, बाँदा, कालपी |
| कानपुर और लखनऊ | अन्य विद्रोही नेताओं से संपर्क |
| आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश) | 1858 के आरंभ में अंग्रेज़ी सेना को हराया |
| बिहार वापसी | अप्रैल 1858 में शिवपुर घाट पर गंगा पार की; पार करते समय अंग्रेज़ों की गोली से बाँह में घायल हुए |
| जगदीशपुर | 23 अप्रैल 1858 को कैप्टन ली ग्रैंड के नेतृत्व वाली अंग्रेज़ी सेना को हराया |
कुछ दिन बाद, 26 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर में उनका निधन हो गया।
अमर सिंह
उनकी मृत्यु के बाद उनके भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों में छापामार (guerrilla) युद्ध-नीति से संघर्ष जारी रखा, जब तक विद्रोह दबा नहीं दिया गया।
कुँवर सिंह क्यों अलग दिखते हैं
- उनकी आयु और दृढ़ संकल्प।
- उनकी गतिशीलता और छापामार युद्ध-नीति का उपयोग।
- सिपाहियों और स्थानीय लड़ाकों को एकजुट रखने की उनकी क्षमता।
- उनकी वीरता की लोक-स्मृति — उनकी कहानी भोजपुरी लोकगीतों में आज भी जीवित है।
दमन और उसके बाद
- 1859 तक बिहार में विद्रोह को कठोर बदले की कार्रवाइयों से दबा दिया गया — फाँसियाँ, संपत्ति की ज़ब्ती और गाँवों को जलाना।
- जगदीशपुर की जागीर ज़ब्त कर ली गई।
- पूरे भारत में भारत शासन अधिनियम, 1858 (Government of India Act, 1858) से कंपनी शासन का अंत हुआ।
बिहार के अन्य भागों में विद्रोह सीमित क्यों रहा
- दरभंगा राज जैसे कई बड़े ज़मींदार अंग्रेज़ों के प्रति वफ़ादार रहे।
- सख्त कदमों के ज़रिए पटना पर अंग्रेज़ों का नियंत्रण बना रहा।
- अलग-अलग क्षेत्रों में विद्रोह के बीच तालमेल की कमी थी।
विरासत
- कुँवर सिंह बिहार के सबसे सम्मानित व्यक्तित्वों में से एक हैं — आरा का वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय उन्हीं के नाम पर है।
- बिहार में 1857 का विद्रोह दिखाता है कि कैसे सिपाहियों का असंतोष स्थानीय शिकायतों से मिलकर एक जन-विद्रोह बन गया।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- कुँवर सिंह की जागीर कहाँ थी?
- दानापुर के सिपाहियों ने कब विद्रोह किया?
- किस अंग्रेज़ अधिकारी ने आरा को घेराबंदी से मुक्त कराया?
- बिहार में 23 अप्रैल को क्या मनाया जाता है?
- कुँवर सिंह की मृत्यु के बाद संघर्ष किसने जारी रखा?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "कुँवर सिंह का अभियान दिखाता है कि 1857 का विद्रोह केवल सिपाही विद्रोह नहीं था।" विवेचना कीजिए।
- बिहार में 1857 के विद्रोह के कारणों और स्वरूप का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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