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1903 में, जब मेवाड़ के महाराणा फतहसिंह ब्रिटिश सम्राट के राज्याभिषेक के उपलक्ष्य में हुए दिल्ली दरबार के लिए निकले, तो उन्हें कवि केसरीसिंह बारहठ की कुछ पंक्तियाँ मिलीं। डिंगल में लिखे ये तेरह सोरठे — चेतावणी रा चूंगट्या ("चेतावनी की चुभन") — महाराणा को मेवाड़ की उस गौरवशाली परंपरा की याद दिलाते थे, जिसमें कभी किसी बादशाह के आगे सिर नहीं झुकाया गया। परंपरा के अनुसार महाराणा दिल्ली तो गए, पर दरबार में शामिल नहीं हुए। विवरण ठीक-ठीक जो भी हों, यह प्रसंग राजस्थानी साहित्य की शक्ति दिखाता है: यह केवल कला नहीं, बल्कि स्मृति और अंतरात्मा की आवाज़ भी था।
राजस्थानी भाषा
राजस्थानी पूरे राज्य में बोली जाने वाली आपस में गहराई से जुड़ी बोलियों का एक समूह है। इसका एक हज़ार वर्ष से अधिक पुराना समृद्ध साहित्यिक इतिहास है।
| बोली | क्षेत्र |
|---|---|
| मारवाड़ी | जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, नागौर, पाली, बाड़मेर — सबसे अधिक बोली जाने वाली; साहित्यिक भाषा का आधार |
| ढूंढाड़ी (जयपुरी) | जयपुर, दौसा, टोंक क्षेत्र |
| मेवाड़ी | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा |
| मेवाती | अलवर, भरतपुर (मेवात क्षेत्र) |
| हाड़ौती | कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ |
| वागड़ी | डूंगरपुर, बाँसवाड़ा — बहुत-से भील इसे बोलते हैं |
| शेखावाटी | सीकर, झुंझुनूँ, चूरू |
| मालवी | मालवा से लगे सीमावर्ती क्षेत्र (झालावाड़, प्रतापगढ़) |
डिंगल और पिंगल
शास्त्रीय राजस्थानी काव्य पर दो साहित्यिक शैलियों का प्रभुत्व रहा:
| शैली | आधार | कवि | स्वरूप |
|---|---|---|---|
| डिंगल | पुरानी मारवाड़ी (राजस्थानी) | मुख्यतः चारण | वीर रस प्रधान, ओजपूर्ण; युद्ध-काव्य और योद्धाओं की प्रशंसा में प्रयुक्त |
| पिंगल | ब्रजभाषा मिश्रित राजस्थानी | मुख्यतः भाट | कोमल; भक्ति और दरबारी काव्य में प्रयुक्त |
साहित्य के रूप
| रूप | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| रासो | शासकों पर वीर काव्य | पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, हम्मीर रासो, खुमाण रासो |
| ख्यात | राजवंशों के गद्य इतिहास | मुहणोत नैणसी री ख्यात, बांकीदास री ख्यात, दयालदास री ख्यात |
| वात | गद्य कथाएँ और कहानियाँ | लोककथाएँ और किंवदंतियाँ |
| वचनिका | गद्य-पद्य मिश्रित आख्यान | अचलदास खींची री वचनिका (शिवदास गाडण) |
| वेलि / बेलि | काव्य रचनाएँ | वेलि क्रिसन रुकमणी री |
प्रमुख शास्त्रीय कृतियाँ
| कृति | लेखक | टिप्पणी |
|---|---|---|
| पृथ्वीराज रासो | चंदबरदाई | पृथ्वीराज चौहान पर वीर महाकाव्य; पाठ में बाद में जोड़े गए कई अंश हैं |
| बीसलदेव रासो | नरपति नाल्ह | विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) के बारे में |
| हम्मीर रासो | सारंगधर (रचयिता माने जाते हैं) | रणथंभौर के हम्मीर के बारे में |
| कान्हड़दे प्रबंध | पद्मनाभ | अलाउद्दीन ख़िलजी के विरुद्ध जालोर के कान्हड़देव का प्रतिरोध |
| वेलि क्रिसन रुकमणी री | बीकानेर के पृथ्वीराज राठौड़ ("पीथल") | कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह पर डिंगल की उत्कृष्ट रचना |
| मुहणोत नैणसी री ख्यात और मारवाड़ रा परगना री विगत | जसवंतसिंह के अधीन मारवाड़ के अधिकारी मुहणोत नैणसी | ऐतिहासिक वृत्तांत, और मारवाड़ के परगनों का सांख्यिकीय व प्रशासनिक विवरण; नैणसी को "राजपूताने का अबुल फ़ज़ल" कहा गया है |
| वंश भास्कर और वीर सतसई | बूँदी के सूर्यमल्ल मिश्रण | वंश भास्कर — बूँदी का इतिहास; वीर सतसई — वीर रस के दोहे, जिनमें 1857 के आसपास प्रतिरोध का आह्वान भी है |
आधुनिक राजस्थानी साहित्य
| लेखक | योगदान |
|---|---|
| केसरीसिंह बारहठ | कवि और क्रांतिकारी; चेतावणी रा चूंगट्या (1903) |
| कन्हैयालाल सेठिया | धरती धोरां री ("रेत के टीलों की धरती") और पातल अर पीथल जैसी कविताएँ |
| विजयदान देथा ("बिज्जी") | कथा के उस्ताद; बातां री फुलवाड़ी — दोबारा कही गई लोककथाओं का बड़ा संग्रह; उनकी कहानियों पर दुविधा और पहेली जैसी फ़िल्में बनीं |
| चंद्रप्रकाश देवल, नारायणसिंह भाटी और अन्य | कविता और नाटक; राजस्थानी में साहित्य अकादमी पुरस्कार |
साहित्य अकादमी 1970 के दशक से राजस्थानी साहित्य के लिए पुरस्कार देती आ रही है, जो इसे एक साहित्यिक भाषा के रूप में मान्यता है।
संवैधानिक मान्यता की माँग
राजस्थानी संविधान की आठवीं अनुसूची की 22 भाषाओं में शामिल नहीं है। राजस्थान विधानसभा ने 2003 में केंद्र से इसे शामिल करने का अनुरोध करते हुए एक संकल्प पारित किया। समर्थक इसके लंबे साहित्यिक इतिहास और बोलने वालों की बड़ी संख्या की ओर ध्यान दिलाते हैं; अन्य लोग इसकी बोलियों के मानकीकरण और हिंदी से इसके संबंध पर प्रश्न उठाते हैं। यह माँग अभी लंबित है।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- कोटा क्षेत्र में राजस्थानी की कौन-सी बोली बोली जाती है?
- डिंगल और पिंगल में क्या अंतर है?
- वेलि क्रिसन रुकमणी री किसने लिखी?
- "राजपूताने का अबुल फ़ज़ल" किसे कहा जाता है?
- चेतावणी रा चूंगट्या किसे संबोधित किए गए थे?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (50 शब्द): ख्यात क्या है?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): राजस्थान के इतिहास-लेखन में राजस्थानी साहित्य के योगदान की विवेचना कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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