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1570 के दशक तक मुग़ल बादशाह अकबर राजस्थान के अधिकांश शासकों को युद्ध, कूटनीति और वैवाहिक संबंधों के ज़रिए अपनी व्यवस्था में ला चुका था। आमेर, बीकानेर, जैसलमेर, बूंदी और मारवाड़ उसकी अधीनता स्वीकार कर चुके थे। अकेले मेवाड़ ने इनकार किया। 1572 से इसके शासक महाराणा प्रताप थे, और भारी कीमत चुकाकर भी झुकने से उनके इनकार ने उन्हें भारतीय इतिहास के सबसे प्रसिद्ध व्यक्तित्वों में से एक बना दिया।
आरंभिक जीवन और राज्याभिषेक
- 1540 में कुंभलगढ़ में जन्म; पिता उदयसिंह, माता जयवंता बाई।
- उदयसिंह ने एक छोटे पुत्र जगमाल को उत्तराधिकारी नामित किया था; पर मेवाड़ के सरदारों ने उसे हटाकर 1572 में गोगुंदा में प्रताप को गद्दी पर बैठाया।
- तब तक चित्तौड़ 1568 से मुग़लों के हाथ में था, और प्रताप पहाड़ियों से शासन करते थे।
अकबर के दूत
अकबर ने पहले कूटनीति का सहारा लिया। 1572 से 1573 के बीच उसने प्रताप को मुग़ल अधीनता स्वीकार करने के लिए मनाने हेतु चार दूत भेजे:
- जलाल खाँ कोरची
- आमेर के मानसिंह
- भगवंतदास (मानसिंह के पिता)
- टोडरमल
प्रताप ने उनका शिष्टता से स्वागत किया, पर स्वयं मुग़ल दरबार में उपस्थित होने या अधीनस्थ स्थिति स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद युद्ध हुआ।
हल्दीघाटी का युद्ध (1576)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| तिथि | जून 1576 (परंपरागत रूप से 18 जून; कुछ स्रोत 21 जून बताते हैं) |
| स्थान | हल्दीघाटी, उदयपुर के उत्तर में खमनौर के पास अरावली का एक संकरा दर्रा — हल्दी जैसी पीली मिट्टी के कारण यह नाम पड़ा |
| मुग़ल सेनापति | आमेर के मानसिंह (मुख्य सेनापति) और आसफ़ खाँ |
| मेवाड़ का पक्ष | महाराणा प्रताप; हकीम खाँ सूर (प्रताप की सेना के हरावल, यानी अग्रिम दस्ते का नेतृत्व करने वाले अफ़ग़ान सेनापति); राणा पूंजा और उनके भील धनुर्धर; राठौड़, चौहान और अन्य राजपूत सरदार; ग्वालियर के रामशाह तंवर और उनके पुत्र |
प्रताप की सेना ने ज़ोरदार आक्रमण किया और शुरुआत में मुग़लों पर भारी दबाव बनाया। पर बेहतर आरक्षित टुकड़ियों वाली बड़ी मुग़ल सेना टिकी रही। युद्ध के बीच झाला मान (झाला बीदा) ने, ऐसा कहा जाता है, शत्रु का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए राजचिह्न धारण कर लिया, जिससे प्रताप युद्धभूमि से निकल सके; झाला मान युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। कहा जाता है कि प्रताप का घोड़ा चेतक घायल होने के बावजूद उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले गया, और थोड़ी देर बाद उसकी मृत्यु हो गई।
परिणाम: युद्धभूमि मुग़लों के हाथ रही, पर वे अपने मुख्य उद्देश्य में विफल रहे — प्रताप को बंदी बनाना या मारना। अधिकांश इतिहासकार हल्दीघाटी को सामरिक रूप से अनिर्णायक मानते हैं: उस दिन मुग़लों की जीत, पर मेवाड़ के प्रतिरोध का अंत नहीं।
लंबा प्रतिरोध
हल्दीघाटी के बाद प्रताप पहाड़ियों में और भीतर चले गए और छापामार युद्ध (guerrilla war) छेड़ दिया। मुग़ल सेनाओं ने मेवाड़ के कस्बों पर कब्ज़ा कर लिया, पर ग्रामीण इलाकों पर नियंत्रण नहीं रख सकीं।
- मेवाड़ के मंत्री भामाशाह ने अपनी संपत्ति प्रताप को सौंप दी, जिससे वे अपनी सेना फिर से खड़ी कर सके। उन्हें निष्ठा और उदारता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
- दिवेर के युद्ध (लगभग 1582) में प्रताप और उनके पुत्र अमरसिंह के नेतृत्व में मेवाड़ की सेना ने वहाँ की मुग़ल चौकी को हराया। बाद में कर्नल जेम्स टॉड ने दिवेर को "मेवाड़ का मैराथन" कहा।
- प्रताप ने चित्तौड़ और कुछ गढ़ों को छोड़कर मेवाड़ का अधिकांश भाग वापस ले लिया और चावंड को अपनी राजधानी बनाया।
मृत्यु
महाराणा प्रताप की मृत्यु जनवरी 1597 में चावंड में हुई। उनकी छतरी बांडोली में है। उनके पुत्र अमरसिंह ने 1615 तक संघर्ष जारी रखा, जब उन्होंने जहाँगीर के साथ सम्मानजनक शर्तों पर संधि की: महाराणा को स्वयं मुग़ल दरबार में उपस्थित होना आवश्यक नहीं होगा।
मूल्यांकन
| दृष्टिकोण | तर्क |
|---|---|
| वीरतापूर्ण | प्रताप ने मेवाड़ की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए सुख और सुरक्षा का त्याग किया; वे प्रतिरोध के स्थायी प्रतीक बन गए |
| रणनीतिक | उनका छापामार युद्ध प्रभावी रहा; उन्होंने अपना अधिकांश क्षेत्र वापस पा लिया |
| सामाजिक | भीलों और एक अफ़ग़ान सेनापति के साथ उनका गठबंधन एक व्यावहारिक, समावेशी दृष्टि दिखाता है |
| आलोचनात्मक | मेवाड़ के प्रतिरोध की भारी कीमत उसकी जनता और अर्थव्यवस्था ने चुकाई; दूसरे राजपूत राज्यों ने मुग़ल गठबंधन से शक्ति और समृद्धि पाई |
RAS का एक संतुलित उत्तर प्रताप के साहस और रणनीतिक कौशल, उनके समावेशी गठबंधनों, और लंबे संघर्ष की कीमत — तीनों को स्वीकार करता है।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक कहाँ और कब हुआ?
- हल्दीघाटी में मुग़ल सेनापति कौन थे?
- कौन-से अफ़ग़ान सेनापति प्रताप की ओर से लड़े?
- जेम्स टॉड ने किस युद्ध को "मेवाड़ का मैराथन" कहा?
- महाराणा प्रताप की मृत्यु कहाँ हुई?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली (50 शब्द): भामाशाह कौन थे और उन्हें क्यों याद किया जाता है?
मुख्य परीक्षा शैली (100 शब्द): "हल्दीघाटी महाराणा प्रताप के प्रतिरोध का अंत नहीं, बल्कि आरंभ था।" विवेचना कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Rajasthan Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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