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दीवाली की रात जैन तीर्थयात्री नालंदा ज़िले के पावापुरी में इकट्ठा होते हैं, जहाँ कमल से भरे एक सरोवर के बीच सफ़ेद संगमरमर का एक मंदिर खड़ा है — जल मंदिर। परंपरा के अनुसार, जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर को यहीं निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हुआ। बुद्ध की तरह महावीर भी छठी–पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के मगध जगत में रहे और उपदेश दिए, और उनके जीवन से जुड़े बहुत-से स्थान बिहार में हैं।
महावीर का जीवन
| चरण | विवरण |
|---|---|
| नाम | वर्धमान; बाद में महावीर ("महान वीर") और जिन ("विजेता") कहलाए — इसी से "जैन" |
| जन्म | वैशाली (बिहार) के पास कुंडग्राम |
| कुल | वज्जि संघ का ज्ञातृक कुल |
| माता-पिता | सिद्धार्थ (पिता) और त्रिशला (माता), एक लिच्छवि राजकुमारी |
| परिवार | श्वेतांबर परंपरा के अनुसार यशोदा से विवाह हुआ और एक पुत्री हुई; दिगंबर परंपरा मानती है कि उन्होंने विवाह नहीं किया |
| गृहत्याग | लगभग 30 वर्ष की आयु में |
| तपस्या | लगभग 12 वर्षों की कठोर तपस्या |
| ज्ञान (कैवल्य) | जृंभिकग्राम गाँव के पास, ऋजुपालिका नदी के किनारे, एक साल वृक्ष के नीचे |
| उपदेश | लगभग 30 वर्ष, मगध, अंग, विदेह और आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण करते हुए |
| निर्वाण | लगभग 72 वर्ष की आयु में पावापुरी (पावा) में |
तीर्थंकर
जैन 24 तीर्थंकरों में विश्वास करते हैं ("घाट बनाने वाले", जो आत्माओं को पुनर्जन्म की धारा के पार ले जाने का मार्ग दिखाते हैं)।
- ऋषभनाथ (आदिनाथ) — पहले।
- पार्श्वनाथ — 23वें; ऐतिहासिक रूप से महावीर से पहले हुए वास्तविक व्यक्ति माने जाते हैं, और सम्मेद शिखर (पारसनाथ पहाड़ी, अब झारखंड में) से जुड़े हैं।
- महावीर — 24वें।
इस तरह जैन महावीर को संस्थापक नहीं, बल्कि एक पुरानी परंपरा के अंतिम सुधारक मानते हैं।
शिक्षाएँ
त्रिरत्न
- सम्यक दर्शन (सही श्रद्धा)
- सम्यक ज्ञान (सही ज्ञान)
- सम्यक चरित्र (सही आचरण)
पाँच व्रत
| व्रत | अर्थ |
|---|---|
| अहिंसा | सभी जीवों के प्रति हिंसा न करना |
| सत्य | सच बोलना |
| अस्तेय | चोरी न करना |
| अपरिग्रह | संपत्ति का संचय न करना |
| ब्रह्मचर्य | ब्रह्मचर्य का पालन / संयम — महावीर ने पार्श्वनाथ के चार व्रतों में इसे जोड़ा |
भिक्षु और भिक्षुणियाँ इनका पालन महाव्रत के रूप में करते हैं; गृहस्थ इन्हें हल्के रूप में अणुव्रत के रूप में अपनाते हैं।
अन्य प्रमुख विचार
- अनेकांतवाद — वास्तविकता के अनेक पक्ष हैं; कोई एक दृष्टिकोण पूरे सत्य को नहीं पकड़ सकता।
- स्याद्वाद — "शायद" का सिद्धांत; कथन विशेष दृष्टिकोणों से ही सत्य होते हैं।
- कर्म एक सूक्ष्म पदार्थ है, जो आत्मा (जीव) को बाँधता है; सही आचरण और तपस्या से उसे हटाकर मुक्ति मिलती है।
- वेदों की प्रामाणिकता और पशु-बलि का विरोध।
- कठोर अहिंसा, जिसके कारण जैन खेती के बजाय व्यापार और वाणिज्य की ओर गए।
दिगंबर और श्वेतांबर
| दिगंबर | श्वेतांबर |
|---|---|
| "आकाश ही वस्त्र" — भिक्षु वस्त्र नहीं पहनते | "श्वेत वस्त्रधारी" — भिक्षु और भिक्षुणियाँ सफ़ेद वस्त्र पहनते हैं |
| स्त्रियाँ पुरुष के रूप में पुनर्जन्म लिए बिना मुक्ति नहीं पा सकतीं | स्त्रियाँ मुक्ति पा सकती हैं |
| महावीर ने विवाह नहीं किया | महावीर ने विवाह किया |
परंपरा इस विभाजन को मौर्य काल में मगध में पड़े एक अकाल से जोड़ती है, जब भद्रबाहु भिक्षुओं के एक समूह को दक्षिण ले गए (जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य के साथ श्रवणबेलगोला), जबकि स्थूलभद्र मगध में ही रहे।
जैन संगीतियाँ
| संगीति | स्थान | अध्यक्ष | परिणाम |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पाटलिपुत्र (लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) | स्थूलभद्र | बारह अंगों का संकलन |
| द्वितीय | वल्लभी (गुजरात, लगभग पाँचवीं शताब्दी ईस्वी) | देवर्धि क्षमाश्रमण | जैन आगमों (धर्मग्रंथों) का अंतिम संकलन |
राजकीय संरक्षक
- बिंबिसार और अजातशत्रु पर जैन और बौद्ध, दोनों परंपराएँ अपना दावा करती हैं।
- चंद्रगुप्त मौर्य — जैन परंपरा के अनुसार जैन भिक्षु बने और श्रवणबेलगोला में उनकी मृत्यु हुई।
- कलिंग के खारवेल (पहली शताब्दी ईसा पूर्व) — जैन धर्म के महान संरक्षक।
बिहार के जैन स्थल
| स्थल | महत्व |
|---|---|
| पावापुरी (नालंदा) | महावीर के निर्वाण का स्थान; जल मंदिर |
| वैशाली (कुंडग्राम) | जन्मस्थान (पारंपरिक) |
| राजगीर | महावीर ने यहाँ कई वर्षावास बिताए; पहाड़ियों पर जैन मंदिर |
| चंपा (भागलपुर) | 12वें तीर्थंकर वासुपूज्य से जुड़ा |
जैन धर्म और बौद्ध धर्म की तुलना
| पहलू | जैन धर्म | बौद्ध धर्म |
|---|---|---|
| संस्थापक / सुधारक | महावीर (24वें तीर्थंकर) | गौतम बुद्ध |
| मार्ग | कठोर तपस्या | मध्यम मार्ग |
| आत्मा | आत्मा (जीव) में विश्वास | कोई स्थायी आत्मा नहीं (अनत्ता) |
| अहिंसा | अत्यंत कठोर | महत्वपूर्ण, पर उतनी चरम नहीं |
| प्रारंभिक ग्रंथों की भाषा | अर्धमागधी प्राकृत | पालि |
| प्रसार | अधिकतर भारत के भीतर | पूरे एशिया में |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- महावीर का जन्म कहाँ और किस कुल में हुआ?
- महावीर को निर्वाण कहाँ प्राप्त हुआ?
- महावीर ने पार्श्वनाथ की शिक्षाओं में कौन-सा व्रत जोड़ा?
- प्रथम जैन संगीति कहाँ हुई?
- अनेकांतवाद क्या है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- जैन धर्म और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं की तुलना कीजिए।
- "अहिंसा और सत्य के अनेक पक्षों पर जैन धर्म का ज़ोर आज भी प्रासंगिक है।" विवेचना कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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