इस गाइड में
2006 में बिहार ने वह किया जो किसी भारतीय राज्य ने पहले नहीं किया था: उसने पंचायतों की सभी सीटों का 50 प्रतिशत — और मुखिया, प्रमुख तथा जिला परिषद अध्यक्ष के पदों का भी 50 प्रतिशत — महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया। इसके बाद हुए चुनावों ने लाखों महिलाओं को सार्वजनिक पदों तक पहुँचाया। कई दूसरे राज्यों ने भी यही राह अपनाई। यह भारतीय लोकतंत्र में बिहार के सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक है, और BPSC का नियमित विषय है।
संक्षिप्त इतिहास
| वर्ष | घटनाक्रम |
|---|---|
| 1947–48 | बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1947 — ग्राम पंचायतों का आरंभिक कानून |
| 1961 | बिहार पंचायत समिति और जिला परिषद अधिनियम — बलवंतराय मेहता मॉडल पर त्रिस्तरीय व्यवस्था |
| 1992–93 | 73वाँ संशोधन; बिहार ने बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1993 पारित किया |
| 2001 | लंबे अंतराल के बाद पंचायत चुनाव (दो दशकों से अधिक में पहली बार) |
| 2006 | बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 — महिलाओं के लिए 50% आरक्षण; अत्यंत पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण; ग्राम कचहरियों को मज़बूती |
तीन स्तर
| स्तर | निकाय | निर्वाचित प्रमुख | प्रशासनिक पदाधिकारी |
|---|---|---|---|
| गाँव | ग्राम पंचायत | मुखिया | पंचायत सचिव |
| प्रखंड | पंचायत समिति | प्रमुख | प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) |
| जिला | जिला परिषद | अध्यक्ष | उप विकास आयुक्त (DDC) (मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में) |
आरक्षण
| वर्ग | प्रावधान |
|---|---|
| महिलाएँ | सभी स्तरों पर सीटों और पदों का 50 प्रतिशत (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग की सीटों के भीतर भी), चक्रानुक्रम (rotation) से |
| अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति | उनकी जनसंख्या के अनुपात में |
| अत्यंत पिछड़ा वर्ग (Extremely Backward Classes, EBC) | सीटों का अधिकतम 20 प्रतिशत — बिहार के कानून की एक विशिष्ट विशेषता |
ग्राम सभा
- पंचायत क्षेत्र के सभी मतदाता इसके सदस्य होते हैं।
- इसकी बैठकें नियमित होनी चाहिए; यह योजनाएँ स्वीकृत करती है, लाभार्थियों का चयन करती है और सामाजिक अंकेक्षण (social audit) करती है।
- इसमें भागीदारी — विशेषकर महिलाओं और हाशिए के समूहों की — असमान रही है।
ग्राम कचहरी: गाँव की अदालतें
बिहार के पंचायती राज की एक अनूठी विशेषता ग्राम कचहरी है — हर ग्राम पंचायत के स्तर पर एक ग्राम न्यायालय।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| प्रमुख | सरपंच, जिसका सीधा चुनाव होता है |
| सदस्य | पंच, जो वार्डों से चुने जाते हैं |
| अधिकार क्षेत्र | छोटे दीवानी विवाद (एक मौद्रिक सीमा तक) और अधिनियम में बताए गए छोटे फ़ौजदारी अपराध |
| सहायता | न्याय मित्र (कानून का स्नातक) कानूनी मामलों में मदद करता है; न्याय सचिव अभिलेख रखता है |
| दृष्टिकोण | सुलह और मध्यस्थता पर ज़ोर |
| आरक्षण | पंचायतों जैसा ही, महिलाओं के लिए 50% सहित |
ग्राम कचहरियों का उद्देश्य ग्रामीणों को जल्दी, सस्ता और स्थानीय न्याय देना और औपचारिक अदालतों का बोझ कम करना है।
कार्य
ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय हैं जो पंचायतों को सौंपे जा सकते हैं। बिहार में पंचायतें इन कामों से जुड़ी हैं:
- ग्रामीण सड़कें, नालियाँ और स्वच्छता;
- पेयजल (जैसे सात निश्चय के तहत "हर घर नल का जल");
- गलियाँ और नालियाँ ("घर तक पक्की गली-नालियाँ");
- स्ट्रीट लाइट;
- कल्याणकारी योजनाओं और मनरेगा (MGNREGA) का क्रियान्वयन;
- स्थानीय योजना निर्माण।
वित्त
- केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग से अनुदान।
- विशेष योजनाओं के लिए धन (जैसे मनरेगा, सात निश्चय)।
- सीमित स्वयं का राजस्व (स्थानीय कर और शुल्क कम हैं)।
समस्याएँ
| समस्या | व्याख्या |
|---|---|
| प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व | "मुखिया पति" — निर्वाचित महिलाओं की ओर से पति या रिश्तेदार सत्ता चलाते हैं |
| सीमित हस्तांतरण | कार्य, कोष और कर्मी पूरी तरह हस्तांतरित नहीं |
| क्षमता | निर्वाचित सदस्यों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण |
| अनुदानों पर निर्भरता | स्वयं का राजस्व बहुत कम |
| प्रभावशाली वर्गों का कब्ज़ा (elite capture) | स्थानीय सत्ता-संरचनाएँ परिणाम तय करती हैं |
| ग्राम कचहरी की प्रभावशीलता | बहुत भिन्न; संसाधन और कानूनी सहायता सीमित |
क्या बदला है
अध्ययन और अनुभव बताते हैं कि महिला आरक्षण से:
- सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की दृश्यता और आत्मविश्वास बढ़ा है;
- पानी, स्वच्छता, स्कूल और स्वास्थ्य पर ध्यान बढ़ा है;
- राजनीतिक अनुभव वाली महिलाओं का एक बड़ा समूह तैयार हुआ है।
जीविका (JEEViKA) स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर इसने ग्रामीण बिहार में महिलाओं की भूमिका से जुड़ी मान्यताएँ बदलने में योगदान दिया है।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली के प्रश्न:
- बिहार ने पंचायतों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण किस वर्ष लागू किया?
- बिहार में पंचायत समिति के प्रमुख को क्या कहा जाता है?
- ग्राम कचहरी का प्रमुख कौन होता है?
- न्याय मित्र की क्या भूमिका है?
- बिहार पंचायतों में अत्यंत पिछड़े वर्गों को कितना आरक्षण देता है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली के प्रश्न:
- "पंचायतों में महिलाओं के लिए बिहार का 50 प्रतिशत आरक्षण एक मील का पत्थर था, पर सशक्तिकरण अभी अधूरा है।" विवेचना कीजिए।
- ग्रामीण बिहार में न्याय तक पहुँच बेहतर बनाने में ग्राम कचहरियों की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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