इस गाइड में
बाराबंकी या बलिया के किसी गाँव का ग्राम प्रधान सड़कें, नालियाँ, पंचायत भवन, वित्त आयोग के अनुदान का एक हिस्सा, मनरेगा (MGNREGA) के काम और दर्जन भर लाभार्थी सूचियाँ सँभालता है। पद छोटा है, पर लगभग 58,000 ग्राम पंचायतों वाले राज्य में ये पद मिलकर उत्तर प्रदेश के अधिकांश लोगों का रोज़मर्रा का जीवन तय करते हैं। इसलिए पंचायती राज UPPSC का एक मुख्य विषय है — सामान्य अध्ययन (General Studies) के प्रश्नपत्रों में भी और साक्षात्कार (interview) में भी, जहाँ अभ्यर्थियों से अक्सर पूछा जाता है कि BDO के रूप में वे क्या करेंगे।
एक लंबा इतिहास
इस मामले में उत्तर प्रदेश ने जल्दी कदम उठाया। संयुक्त प्रांत पंचायत राज अधिनियम, 1947 (United Provinces Panchayat Raj Act) स्वतंत्रता के वर्ष में ही बना और इसने पूरे प्रांत में निर्वाचित ग्राम पंचायतें स्थापित कीं। इसमें छोटे-मोटे विवाद निपटाने के लिए न्याय पंचायतों (ग्राम न्यायालयों) का भी प्रावधान था, हालाँकि वे कभी व्यवस्था का प्रभावी हिस्सा नहीं बन पाईं।
बीच के और ऊपर के स्तर बाद में आए — बलवंत राय मेहता समिति की त्रिस्तरीय ढाँचे की सिफ़ारिश के बाद, उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के माध्यम से।
73वें संविधान संशोधन (1992) के बाद उत्तर प्रदेश ने 1994 में दोनों कानूनों में संशोधन करके उन्हें संविधान के भाग IX के अनुरूप बनाया — निश्चित पाँच वर्ष का कार्यकाल, आरक्षण, राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य वित्त आयोग।
तीन स्तर
| स्तर | क्षेत्र | निर्वाचित प्रमुख | प्रमुख का चुनाव कैसे होता है |
|---|---|---|---|
| ग्राम पंचायत | एक गाँव या गाँवों का समूह | ग्राम प्रधान | मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव |
| क्षेत्र पंचायत | विकास खंड | प्रमुख | क्षेत्र पंचायत के प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सदस्यों द्वारा |
| जिला पंचायत | जिला | अध्यक्ष | जिला पंचायत के प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सदस्यों द्वारा |
हर स्तर का एक अधिकारी-स्तर का समकक्ष भी होता है: गाँव में ग्राम पंचायत सचिव / ग्राम पंचायत अधिकारी, विकास खंड में खंड विकास अधिकारी, और जिला पंचायत के लिए अपर मुख्य अधिकारी (AMA)।
ग्राम सभा — ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी वयस्क मतदाता — को इस व्यवस्था की नींव माना गया है। यह वार्षिक योजना को मंज़ूरी देती है, लाभार्थियों का चयन करती है और सामाजिक अंकेक्षण (social audit) करती है। व्यवहार में इसकी बैठकों में उपस्थिति अक्सर कम रहती है, जिससे जवाबदेही की यह कड़ी कमज़ोर पड़ती है।
चुनाव और आरक्षण
- चुनाव हर पाँच वर्ष में राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश (अनुच्छेद 243K) कराता है। पिछले आम चुनाव 2021 में चार चरणों में हुए थे।
- सीटें और अध्यक्ष पद अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित हैं, और एक-तिहाई महिलाओं के लिए (हर श्रेणी के भीतर और कुल मिलाकर भी)। आरक्षित सीटों के चक्रानुक्रम (rotation) पर कई बार उच्च न्यायालय में मुकदमे हुए हैं।
- कई राज्यों ने महिलाओं का आरक्षण बढ़ाकर 50% कर दिया है; उत्तर प्रदेश में यह एक-तिहाई ही है।
कार्य और वित्त
ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय हैं जिन्हें राज्य पंचायतों को सौंप सकते हैं। उत्तर प्रदेश में व्यवहार में पंचायतों के मुख्य कार्य ये हैं:
- गाँव की सड़कें, नालियाँ, स्ट्रीट लाइट, तालाब और स्वच्छता;
- पंचायत भवनों और सामुदायिक परिसंपत्तियों का रखरखाव;
- गाँव के स्तर पर मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन;
- आवास और पेंशन के लिए लाभार्थियों का चयन;
- ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करना।
पैसा मुख्य रूप से केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों, राज्य वित्त आयोग के हस्तांतरण (अनुच्छेद 243I) और योजनाओं की राशि से आता है। अपनी आय — संपत्ति कर, शुल्क और तालाबों से — बहुत कम है।
उत्तर प्रदेश ने भौतिक ढाँचे में निवेश किया है, जैसे कंप्यूटर से लैस पंचायत भवन (ग्राम सचिवालय) और गाँव के स्तर पर सेवाएँ देने के लिए पंचायत सहायक।
समस्याएँ
| समस्या | यह कैसी दिखती है |
|---|---|
| कमज़ोर हस्तांतरण | कार्य, कोष और कार्मिक (functions, funds, functionaries — "3F") अब भी संबंधित विभागों के पास हैं |
| अपनी आय कम | अनुदानों पर भारी निर्भरता |
| छद्म नेतृत्व (proxy leadership) | "प्रधान-पति" — निर्वाचित महिलाओं की शक्तियों का प्रयोग उनके पति या रिश्तेदार करते हैं |
| क्षमता | सीमित कर्मचारी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता |
| नौकरशाही नियंत्रण | निर्णयों पर BDO और जिला अधिकारियों का वर्चस्व |
| कमज़ोर ग्राम सभाएँ | कम भागीदारी; वास्तविक विचार-विमर्श के बिना निर्णय |
| प्रभावशाली वर्गों का कब्ज़ा (elite capture) | संसाधनों पर प्रभुत्वशाली जातियों और परिवारों का नियंत्रण |
मुख्य परीक्षा के लिए ढाँचा: उत्तर प्रदेश में पंचायतों को मज़बूत करना
| क्षेत्र | उपाय |
|---|---|
| हस्तांतरण | गतिविधि मानचित्रण (activity mapping); सौंपे गए विषयों के लिए धन और कर्मचारियों का हस्तांतरण |
| वित्त | संपत्ति कर की वसूली; अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन; राज्य वित्त आयोग की सिफ़ारिशें समय पर |
| क्षमता | प्रशिक्षण (राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान); क्लस्टर स्तर पर तकनीकी कर्मचारी |
| महिला नेतृत्व | प्रशिक्षण और अनुभव के अवसर; छद्म प्रतिनिधित्व पर कार्रवाई |
| जवाबदेही | नियमित ग्राम सभाएँ; सामाजिक अंकेक्षण; ऑनलाइन लेखे (eGramSwaraj) |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम कब पारित हुआ?
- किस अधिनियम ने उत्तर प्रदेश में क्षेत्र पंचायतें और जिला पंचायतें बनाईं?
- क्षेत्र पंचायत प्रमुख का चुनाव कैसे होता है?
- उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कौन-सा निकाय कराता है?
- GPDP क्या है?
मुख्य परीक्षा शैली:
- "उत्तर प्रदेश में पंचायतें कानून में तो बना दी गई हैं, पर व्यवहार में सशक्त नहीं की गईं।" विवेचना कीजिए।
- पंचायतों में छद्म नेतृत्व की समस्या का परीक्षण कीजिए और उपाय सुझाइए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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