इस गाइड में
UPPSC का हर अभ्यर्थी एक दिन नीचे बताई गई कुर्सियों में से किसी एक पर बैठने की उम्मीद रखता है — तहसील में उपजिलाधिकारी (SDM), विकास खंड में खंड विकास अधिकारी (BDO), या जिला कार्यालय में डिप्टी कलेक्टर। इसलिए इस तंत्र को ठीक से समझना फ़ायदेमंद है: उत्तर प्रदेश में सत्ता किसके पास है, आदेश लखनऊ से गाँव तक कैसे पहुँचते हैं, और नियंत्रण कहाँ-कहाँ है। राज्य प्रशासन पर मुख्य परीक्षा (Mains) के कई प्रश्नों की नींव भी यही है।
संवैधानिक ढाँचा
हर राज्य की तरह उत्तर प्रदेश का शासन भी संविधान के भाग VI (अनुच्छेद 152–237) के अंतर्गत चलता है। उत्तर प्रदेश के लिए कोई विशेष दर्जा देने वाला प्रावधान नहीं है। इस राज्य को जो बात अलग बनाती है, वह है इसका आकार: 2011 में लगभग 20 करोड़ की आबादी, किसी भी राज्य का सबसे बड़ा विधानमंडल, लोकसभा की 80 और राज्यसभा की 31 सीटें।
कार्यपालिका
राज्यपाल (अनुच्छेद 153–162) राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं। उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं। राज्यपाल विधानमंडल का सत्र आहूत करते हैं और उसका सत्रावसान करते हैं, विधेयकों पर अनुमति देते हैं या रोकते हैं (और अनुच्छेद 200 के तहत विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर सकते हैं), अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेश (ordinance) जारी करते हैं, मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं, और राज्य विश्वविद्यालयों के पदेन कुलाधिपति (Chancellor) होते हैं। लखनऊ में राज्यपाल का निवास लंबे समय तक राजभवन कहलाया; जनवरी 2026 में इसका नाम जन भवन कर दिया गया।
मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद (अनुच्छेद 163–164) के पास वास्तविक कार्यकारी शक्ति होती है। मंत्रिपरिषद विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। 91वें संशोधन (2003) के अनुसार मंत्रिपरिषद का आकार विधान सभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकता — उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यों वाली विधान सभा के लिए इसका अर्थ है मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 60 मंत्री। मंत्रियों की तीन श्रेणियाँ होती हैं: कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्री।
महाधिवक्ता (Advocate General, अनुच्छेद 165) राज्य का मुख्य विधि अधिकारी होता है।
सचिवालय
नीतियाँ लखनऊ स्थित सचिवालय (Secretariat) में बनती हैं — 2016 से सचिवालय के नए भवन लोक भवन में मुख्यमंत्री का कार्यालय है, और पुराने सचिवालय परिसर (बापू भवन, विधान भवन एनेक्सी और अन्य) में विभाग हैं।
| स्तर | कौन | भूमिका |
|---|---|---|
| मुख्य सचिव | सबसे वरिष्ठ IAS अधिकारी | सिविल सेवा के प्रमुख; मंत्रिमंडल के सचिव; विभागों में समन्वय |
| कृषि उत्पादन आयुक्त / अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त | वरिष्ठ IAS अधिकारी | विभागों के समूहों में समन्वय |
| अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव | IAS अधिकारी | विभागों के प्रशासनिक प्रमुख |
| निदेशालय | विभागाध्यक्ष (जैसे स्वास्थ्य निदेशक) | क्षेत्र में नीतियों का क्रियान्वयन |
याद रखने लायक अंतर यह है: सचिवालय नीति बनाता है और निदेशालय (Directorates) उसे लागू करते हैं।
मंडल और जिले
लखनऊ के नीचे उत्तर प्रदेश 18 मंडलों और 75 जिलों में बँटा है।
| इकाई | प्रमुख | भूमिका |
|---|---|---|
| मंडल (Division) | मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) | जिलों की निगरानी; राजस्व अपीलें; समन्वय |
| जिला (जनपद) | जिलाधिकारी / कलेक्टर | कानून-व्यवस्था, राजस्व, चुनाव, आपदाएँ, विकास कार्यों का समन्वय |
| उपखंड / तहसील | उपजिलाधिकारी (SDM) और तहसीलदार | राजस्व प्रशासन, भू-अभिलेख, मजिस्ट्रेट के कार्य |
| विकास खंड | खंड विकास अधिकारी (BDO) | ग्रामीण विकास योजनाएँ; क्षेत्र पंचायत के साथ काम |
| गाँव | लेखपाल (राजस्व) और ग्राम पंचायत सचिव | भू-अभिलेख; पंचायत के कार्य |
जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) — जो अक्सर कोई युवा IAS अधिकारी होता है — विकास योजनाओं में समन्वय करता है, जबकि पुलिस व्यवस्था पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास होती है (कमिश्नरेट वाले शहरों को छोड़कर; पुलिस प्रशासन पर हमारी पोस्ट देखें)।
न्यायपालिका
इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court of Judicature at Allahabad) प्रयागराज में है, और लखनऊ में इसकी एक स्थायी खंडपीठ (bench) है। लखनऊ खंडपीठ की जड़ें अवध चीफ़ कोर्ट (Chief Court of Oudh) में हैं, जिसे 1948 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मिला दिया गया था। स्वीकृत न्यायाधीश-संख्या के हिसाब से यह भारत के सबसे बड़े उच्च न्यायालयों में से एक है। इसके नीचे जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल न्यायालय और विशेष न्यायालय हैं।
प्रमुख संवैधानिक और वैधानिक निकाय
| निकाय | आधार |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रयागराज) | अनुच्छेद 315; 1937 में स्थापित |
| राज्य निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 243K — पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराता है |
| राज्य वित्त आयोग | अनुच्छेद 243I — राज्य के राजस्व में स्थानीय निकायों के हिस्से की सिफ़ारिश करता है |
| लोकायुक्त | उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप-लोक आयुक्त अधिनियम, 1975 (UP Lokayukta and Up-Lokayuktas Act) |
| राज्य मानवाधिकार आयोग | मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 |
| राज्य सूचना आयोग | सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 |
| उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग | राज्य का कानून — समूह 'ग' (Group C) के पदों पर भर्ती |
भाषा
उत्तर प्रदेश राजभाषा अधिनियम, 1951 के अनुसार हिंदी (देवनागरी लिपि में) उत्तर प्रदेश की राजभाषा है। 1989 में एक संशोधन द्वारा कुछ निर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए उर्दू को दूसरी राजभाषा बनाया गया।
मुख्य परीक्षा के लिए ढाँचा: उत्तर प्रदेश के शासन की चुनौतियाँ
- आकार — बहुत बड़े जिले; जिलाधिकारियों पर प्रशासनिक बोझ।
- क्षमता — ज़मीनी स्तर पर रिक्त पद (लेखपाल, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी)।
- समन्वय — कई विभाग अलग-अलग खानों में काम करते हैं।
- जवाबदेही — शिकायत निवारण, पारदर्शिता और सामाजिक अंकेक्षण (social audit)।
- सुधार के विचार — छोटे जिलों का गठन, ई-गवर्नेंस, प्रदर्शन डैशबोर्ड, विकास खंड स्तर पर क्षमता निर्माण।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- उत्तर प्रदेश की मंत्रिपरिषद का अधिकतम आकार क्या है?
- राज्यपाल किस अनुच्छेद के तहत अध्यादेश जारी करते हैं?
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थायी खंडपीठ कहाँ है?
- उत्तर प्रदेश में कितने मंडल और कितने जिले हैं?
- उर्दू उत्तर प्रदेश की दूसरी राजभाषा कब बनी?
मुख्य परीक्षा शैली:
- "जिलाधिकारी आज भी उत्तर प्रदेश के प्रशासन की धुरी है।" विवेचना कीजिए।
- उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के प्रशासन की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए और सुधार सुझाइए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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