इस गाइड में
मानसून में बिहार के ऊपर से उड़िए, तो नीचे एक विशाल हरा मैदान दिखता है, जिसमें चमकती नदियाँ गुँथी हुई हैं और उनमें से कई पानी की चौड़ी चादरों में फैल जाती हैं। लगभग पूरा बिहार मध्य गंगा मैदान (middle Ganga plain) का हिस्सा है — जो करोड़ों वर्षों में हिमालय से आए अवसाद (sediment) से बना है। यही एक तथ्य बिहार के भूगोल की अधिकांश बातें समझा देता है: इसकी उर्वरता, घनी आबादी, बाढ़ और खनिजों की कमी।
स्थिति और विस्तार
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| क्षेत्रफल | लगभग 94,000 वर्ग किमी — भारत के क्षेत्रफल का लगभग 2.9 प्रतिशत |
| अक्षांश | लगभग 24° उत्तर से 27° उत्तर |
| देशांतर | लगभग 83° पूर्व से 88° पूर्व |
| पड़ोसी | नेपाल (उत्तर), पश्चिम बंगाल (पूर्व), झारखंड (दक्षिण), उत्तर प्रदेश (पश्चिम) |
| स्थलरुद्ध (landlocked) | हाँ — कोई समुद्र तट नहीं |
| ज़िले / प्रमंडल | 9 प्रमंडलों में 38 ज़िले |
भौतिक विभाग
बिहार को चार भौतिक (physiographic) क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है:
| क्षेत्र | स्थिति | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| 1. शिवालिक क्षेत्र | सुदूर उत्तर-पश्चिम — पश्चिम चंपारण का उत्तरी भाग | हिमालय की तलहटी; वनाच्छादित |
| 2. उत्तर गंगा मैदान | गंगा के उत्तर में | समतल, निचला; हिमालय से आने वाली अनेक नदियाँ; अत्यधिक बाढ़-प्रवण |
| 3. दक्षिण गंगा मैदान | गंगा के दक्षिण से पठार के किनारे तक | थोड़ा ऊँचा; पठार से आने वाली नदियाँ; बाढ़ का ख़तरा कम, सूखे का अधिक |
| 4. दक्षिणी पठारी किनारा | दक्षिणी भाग — कैमूर, रोहतास, गया, नवादा, जमुई, बाँका | विंध्य और छोटानागपुर पठारों के किनारे; पहाड़ियाँ और उच्च भूमि |
1. शिवालिक क्षेत्र
- पश्चिम चंपारण के उत्तर-पश्चिम में एक संकरी पट्टी।
- इसमें सोमेश्वर श्रेणी, रामनगर दून (एक अनुदैर्ध्य घाटी) और हरहा घाटी शामिल हैं।
- यहीं वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व है और बिहार की सबसे ऊँची भूमि भी।
2. उत्तर गंगा मैदान
- हिमालय से बहने वाली नदियों — घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा — से बना।
- बहुत समतल, दक्षिण-पूर्व की ओर हल्की ढाल के साथ।
- नदियाँ भारी मात्रा में अवसाद लाती हैं, अपनी तली ऊँची कर लेती हैं और बार-बार मार्ग बदलती हैं (सबसे नाटकीय रूप से कोसी)।
- अनेक चौर (पानी रोकने वाले गड्ढे) और गोखुर झीलें (oxbow lakes, मौन)।
- भारत के सबसे बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में से एक।
3. दक्षिण गंगा मैदान
- नदियाँ पठार से उत्तर की ओर बहती हैं — सोन, पुनपुन, फल्गु, किऊल, सकरी, चानन और अन्य।
- नदियाँ मौसमी हैं; कई गर्मी में सूख जाती हैं।
- इसमें गंगा के दक्षिणी तट के साथ-साथ टाल भूमि शामिल है — निचले क्षेत्र जो मानसून में डूब जाते हैं और सर्दियों में जिनमें दलहन उगाई जाती है (उदाहरण के लिए, मोकामा टाल, जिसे अक्सर बिहार का "दलहन का कटोरा" (pulse bowl) कहा जाता है)।
- ऐतिहासिक रूप से मगध का केंद्र।
4. दक्षिणी पठारी किनारा
- कैमूर पठार (कैमूर और रोहतास ज़िले) — विंध्य तंत्र का हिस्सा।
- गया, नवादा, जमुई और बाँका की पहाड़ियाँ, जिनमें राजगीर की पहाड़ियाँ और बराबर की पहाड़ियाँ शामिल हैं — छोटानागपुर पठार के बाहरी हिस्से (outliers)।
- 2000 के बाद बिहार में बचे अधिकांश खनिज और वन यहीं हैं।
विशेष भू-आकृतियाँ
| भू-आकृति | अर्थ |
|---|---|
| दियारा | नदी की धाराओं के बीच और नदी-द्वीपों पर बलुई नदी-तटीय भूमि, जिस पर बाढ़ उतरने के बाद खेती होती है |
| टाल | गंगा के दक्षिणी तट के साथ निचली भूमि, जो मौसम के अनुसार डूबती है और रबी की दलहन के लिए उपयोग होती है |
| चौर | उत्तर बिहार में तश्तरी जैसे गड्ढे, जिनमें साल के अधिकांश समय पानी भरा रहता है |
| मौन | मार्ग बदलती नदियों द्वारा छोड़ी गई गोखुर झीलें |
भूविज्ञान
- मैदान जलोढ़ (alluvium) से बने हैं — ऊँची भूमि पर पुराना जलोढ़ (बांगर) और नदियों के पास नया जलोढ़ (खादर)।
- दक्षिण में विंध्य और छोटानागपुर तंत्रों की पुरानी चट्टानें हैं।
- उत्तर भाग हिमालय के विवर्तनिक (tectonic) क्षेत्र के निकट है, जिससे बिहार भूकंपीय रूप से सक्रिय है — 1934 का बिहार–नेपाल भूकंप भारतीय इतिहास के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक था। उत्तर बिहार के कुछ हिस्से भूकंपीय क्षेत्र IV और V (seismic zones) में आते हैं।
भौतिक स्वरूप बिहार को कैसे गढ़ता है
| भौतिक विशेषता | परिणाम |
|---|---|
| समतल, उपजाऊ जलोढ़ मैदान | ऊँची कृषि क्षमता; बहुत अधिक जनसंख्या घनत्व |
| भारी अवसाद वाली हिमालयी नदियाँ | बाढ़; बदलते मार्ग; बालू का जमाव |
| दक्षिण में पठारी नदियाँ | मौसमी पानी; कुछ हिस्सों में सूखा |
| 2000 के बाद कठोर चट्टानी क्षेत्र कम | खनिजों की कमी |
| हिमालय से निकटता | भूकंप का ख़तरा |
| चौर और टाल भूमि | आर्द्रभूमियाँ; मौसमी जलजमाव; अनोखी खेती (मखाना, दलहन) |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- बिहार के किस ज़िले में शिवालिक क्षेत्र है?
- चौर क्या है?
- मोकामा टाल किसके लिए जाना जाता है?
- दक्षिण गंगा मैदान की दो नदियों के नाम बताइए।
- कौन-से राज्य और देश बिहार की सीमा से लगते हैं?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "बिहार का भौतिक स्वरूप वरदान भी है और अभिशाप भी।" विवेचना कीजिए।
- समझाइए कि उत्तर बिहार का भौतिक स्वरूप बार-बार आने वाली बाढ़ में कैसे योगदान देता है।
मानचित्र अभ्यास
बिहार के एक खाली मानचित्र पर चारों भौतिक क्षेत्र, सोमेश्वर श्रेणी, कैमूर पठार, राजगीर की पहाड़ियाँ, मोकामा टाल और प्रमुख नदियाँ अंकित कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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