इस गाइड में
दो नियम आपके RRB Group D के अंक तय करते हैं: ऋणात्मक अंकन (negative marking) और सामान्यीकरण (normalisation)। पहला नियम पूरी तरह आपके हाथ में है। दूसरा बिल्कुल आपके हाथ में नहीं है। जो अभ्यर्थी दोनों को समझते हैं, वे परीक्षा हॉल में शांत रहकर फैसले लेते हैं और बाद में चिंता करने में कम ऊर्जा गँवाते हैं।
अंक कैसे दिए जाते हैं
| आपका उत्तर | अंक |
|---|---|
| सही | +1 |
| गलत | −⅓ |
| उत्तर नहीं दिया | 0 |
याद रखने वाला नियम: तीन गलत उत्तर एक सही उत्तर को खत्म कर देते हैं। जिस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया, उस पर कुछ नहीं कटता।
हल किया गया उदाहरण 1
एक अभ्यर्थी 75 प्रश्न हल करते हैं: 66 सही, 9 गलत।
- सही उत्तर: 66
- कटौती: 9 × ⅓ = 3
- कच्चे अंक (raw score): 66 − 3 = 63
हल किया गया उदाहरण 2
दूसरे अभ्यर्थी 90 प्रश्न हल करते हैं: 69 सही, 21 गलत।
- सही उत्तर: 69
- कटौती: 21 × ⅓ = 7
- कच्चे अंक: 69 − 7 = 62
दूसरे अभ्यर्थी के तीन उत्तर ज़्यादा सही थे, फिर भी उनके अंक कम आए। पंद्रह अतिरिक्त प्रयासों से केवल 3 सही उत्तर बढ़े, और 12 गलत उत्तर बढ़ गए।
प्रयासों से ज़्यादा ज़रूरी है सटीकता
सटीकता (accuracy) का अर्थ है कि आपके प्रयासों में से कितने प्रतिशत सही हैं: सही ÷ प्रयास × 100। देखिए, चार अभ्यर्थियों पर इसका क्या असर होता है।
| प्रयास | सटीकता | सही | गलत | कच्चे अंक |
|---|---|---|---|---|
| 60 | 95% | 57 | 3 | 57 − 1 = 56 |
| 70 | 90% | 63 | 7 | 63 − 2.33 = 60.67 |
| 80 | 80% | 64 | 16 | 64 − 5.33 = 58.67 |
| 90 | 70% | 63 | 27 | 63 − 9 = 54 |
यहाँ सबसे अच्छे अंक 70 सावधानी से किए गए प्रयासों से आए हैं, 90 जल्दबाज़ी वाले प्रयासों से नहीं। ज़्यादा प्रयास तभी तक मदद करते हैं, जब तक सटीकता ऊँची रहती है। जैसे ही आप उन प्रश्नों के उत्तर देने लगते हैं जिन पर आपको भरोसा नहीं है, हर अतिरिक्त प्रयास अंकों से ज़्यादा जोखिम जोड़ता है।
अनुमान से उत्तर देना कब फायदेमंद है?
हर प्रश्न में चार विकल्प होते हैं। सोचिए कि बहुत सारे अनुमानों में औसतन क्या होता है।
| स्थिति | सही होने की संभावना | प्रति अनुमान औसत लाभ |
|---|---|---|
| 4 विकल्पों में से आँख मूँदकर अनुमान | 4 में 1 | 1/4 − 3/4 × 1/3 = 0 |
| एक विकल्प हटाया (3 बचे) | 3 में 1 | 1/3 − 2/3 × 1/3 = +1/9, लगभग +0.11 |
| दो विकल्प हटाए (2 बचे) | 2 में 1 | 1/2 − 1/2 × 1/3 = +1/3, लगभग +0.33 |
इसे पूरी संख्याओं में समझें। मान लीजिए एक अभ्यर्थी 12 बार आँख मूँदकर अनुमान लगाते हैं। औसतन 3 सही और 9 गलत होते हैं: 3 − 3 = 0। इतना जोखिम, और हाथ कुछ नहीं आया। अब मान लीजिए वही अभ्यर्थी हर बार दो विकल्प हटाने के बाद 12 अनुमान लगाते हैं। औसतन 6 सही और 6 गलत होते हैं: 6 − 2 = +4 अंक।
इसलिए सवाल कभी यह नहीं है कि "क्या अनुमान लगाना चाहिए?" सवाल यह है कि "कितने विकल्प पक्के तौर पर हटाए जा सकते हैं?"
विकल्प हटाना (elimination) कैसा दिखता है
- गणित: इकाई अंक जाँचें, या मोटा हिसाब लगाएँ। अगर 48 × 52 का अंतिम अंक 6 होना ही है, तो जिस विकल्प का अंतिम अंक 6 नहीं है, वह बाहर।
- तर्कशक्ति (रीज़निंग): किसी विकल्प को पहेली के पहले संकेत पर जाँचें। एक भी विरोधाभास मिला, तो वह विकल्प हट गया।
- विज्ञान: गलत श्रेणी वाले विकल्प हटाएँ। अगर प्रश्न किसी अम्ल के बारे में पूछता है, तो विकल्पों में दिया गया क्षार या धातु बाहर है।
- सामान्य जागरूकता (general awareness): वे विकल्प हटाएँ जो साफ़ तौर पर किसी दूसरे राज्य, खेल या काल के हैं।
सामान्यीकरण (Normalisation)
CBT कई दिनों तक कई शिफ्टों में होती है, और हर शिफ्ट को अलग प्रश्नपत्र मिलता है। कोई शिफ्ट दूसरी से कठिन हो सकती है। इसे निष्पक्ष रखने के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) हर अभ्यर्थी के कच्चे अंकों को अधिसूचना में छपे एक सूत्र से सामान्यीकृत अंकों (normalised score) में बदलते हैं। मेरिट और कट-ऑफ (cut-off) फिर इन्हीं सामान्यीकृत अंकों पर तय होते हैं।
मोटे तौर पर, यह सूत्र आपके अंकों की तुलना आपकी अपनी शिफ्ट के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन से करता है, जिसमें सबसे ज़्यादा अंक पाने वाले और औसत, दोनों शामिल हैं। फिर यह सबको एक साझा पैमाने पर रखता है। इसका असर:
- कठिन शिफ्ट में कच्चे अंक आम तौर पर बढ़ाए जाते हैं।
- आसान शिफ्ट में कच्चे अंक घटाए भी जा सकते हैं।
केवल समझाने के लिए: कठिन शिफ्ट के 60 कच्चे अंक, आसान शिफ्ट के 63 कच्चे अंकों से ज़्यादा कीमती साबित हो सकते हैं।
आपके लिए सामान्यीकरण का अर्थ
- अगर आपका प्रश्नपत्र कठिन लगा, तो वह आपकी शिफ्ट में सबके लिए कठिन था। परीक्षा के बीच में घबराएँ नहीं।
- सामान्यीकरण के बाद आपके कच्चे अंक बढ़ या घट सकते हैं। यह सामान्य बात है।
- सामान्यीकरण आप नहीं बदल सकते। अपनी सटीकता आप बदल सकते हैं।
कौन-से प्रश्न छोड़ें
किसी प्रश्न को बाद के लिए छोड़ दें, या पूरी तरह छोड़ दें, अगर:
- आप एक भी विकल्प नहीं हटा पा रहे हैं;
- हिसाब में साफ़ तौर पर दो मिनट से ज़्यादा लगेंगे;
- आपने प्रश्न दो बार पढ़ लिया है और फिर भी समझ नहीं आ रहा कि वह क्या पूछ रहा है।
परीक्षा हॉल के नियम
- पूरे प्रश्नपत्र को एक बार देखें और जिन प्रश्नों पर आप पक्के हैं, उन सबके उत्तर दें।
- पहले दौर में अनुमान लगाने के बजाय संदिग्ध प्रश्नों को समीक्षा के लिए चिह्नित (mark for review) करें।
- हर प्रश्न पूरा पढ़ें। "नहीं", "गलत" और "को छोड़कर" जैसे शब्दों पर ध्यान दें।
- दूसरे दौर में अनुमान से पहले विकल्प हटाएँ। दो विकल्प हट जाएँ, तो उत्तर दें। एक भी न हटे, तो छोड़ दें।
- बिना किसी साफ़ कारण के पक्का उत्तर न बदलें।
- दूसरी शिफ्टों के बारे में भूल जाएँ। आपका काम केवल अपना प्रश्नपत्र है।
CBT की स्क्रीन पर दिखता है कि हर प्रश्न की स्थिति क्या है (उत्तर दिया, उत्तर नहीं दिया, समीक्षा के लिए चिह्नित)। स्क्रीन पर दिए निर्देशों में पढ़ें कि "उत्तर दिया और समीक्षा के लिए चिह्नित" प्रश्न का मूल्यांकन होता है या नहीं। जिस उत्तर को आप गिनवाना चाहते हैं, उसे संदेह वाली स्थिति में न छोड़ें।
अगले मॉक टेस्ट में यह करके देखें
अपनी रफ़ शीट पर हर अनुमान वाले प्रश्न के आगे "अ" (अनुमान) लिखें। उत्तर जाँचने के बाद इन्हें गिनें।
- अगर आपके अनुमानों में से एक-चौथाई से कम सही निकले, तो उनसे अंक कटे। अनुमान कम लगाएँ।
- अगर लगभग एक-तिहाई सही निकले, तो आप लगभग बराबरी पर हैं। अनुमान से पहले ज़्यादा विकल्प हटाएँ।
- अगर आधे या उससे ज़्यादा सही निकले, तो आपका विकल्प हटाने का तरीका काम कर रहा है। इसे जारी रखें।
आगे क्या करें
- अपने पिछले तीन मॉक टेस्ट के कच्चे अंक और सटीकता निकालें।
- 85% सटीकता का लक्ष्य तय करें और उसे एक मॉक लॉग में दर्ज करते रहें।
- हमारी CBT रणनीति गाइड से दो दौर वाली विधि का अभ्यास करें।
- परीक्षा पैटर्न गाइड और अपनी CEN में अंकन के नियम दोबारा पढ़ें।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Railway Recruitment Boards की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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