Skip to content
Free shipping above ₹499
Oakspine Press

अवध के नवाब और लखनऊ

अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में अवध के नवाबों ने लखनऊ को इमामबाड़ों, बागों, शायरी, संगीत और उम्दा खान-पान का शहर बना दिया — जबकि ईस्ट इंडिया कंपनी की पकड़ लगातार कसती गई। सआदत खाँ से वाजिद अली शाह तक अवध का इतिहास और संस्कृति, और यह भी कि 1856 में अवध का विलय 1857 की चिंगारी क्यों बना।

27 Sept 2026 4 मिनट में पढ़ें

Read this guide in English →
इस गाइड में
  1. अवध का उदय
  2. कंपनी की कसती पकड़
  3. 1856 का विलय
  4. 1857 के लिए विलय का महत्व
  5. लखनऊ के स्मारक
  6. अवध की संस्कृति
  7. अभ्यास

1784 में अवध में भयानक अकाल पड़ा। नवाब आसफ़ुद्दौला ने राहत कार्य के रूप में लखनऊ में एक विशाल भवन — बड़ा इमामबाड़ा — बनवाना शुरू किया, ताकि लोग सम्मान के साथ अपनी रोटी कमा सकें। इसी से एक लोकप्रिय कहावत बनी: "जिसको न दे मौला, उसको दे आसफ़ुद्दौला" — यानी जिसे ईश्वर नहीं देता, उसे आसफ़ुद्दौला देते हैं। यह कहानी अवध के नवाबों की छवि का सार है: भवन-निर्माण, शायरी, संगीत और खान-पान के उदार संरक्षक, जो एक समृद्ध संस्कृति के शिखर पर थे, जबकि उनकी राजनीतिक शक्ति धीरे-धीरे ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथ में जा रही थी।

अवध का उदय

नवाबकालमुख्य बातें
सआदत खाँ (बुरहान-उल-मुल्क)1722–1739मुगलों ने उन्हें अवध का सूबेदार (subedar) नियुक्त किया; वंश के संस्थापक
सफ़दरजंग1739–1754मुगल वज़ीर भी रहे; उनका मकबरा दिल्ली में है
शुजाउद्दौला1754–1775बक्सर (1764) में कंपनी के विरुद्ध लड़े; हार के बाद इलाहाबाद की संधि (1765) से हर्जाना चुकाने पर अवध लौटा दिया गया; राजधानी फ़ैज़ाबाद
आसफ़ुद्दौला1775–1797राजधानी लखनऊ ले गए (1775); बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाज़ा बनवाए
सआदत अली खाँ1798–1814सहायक संधि (subsidiary alliance) पर हस्ताक्षर किए (1801), जिसमें अवध का आधा क्षेत्र कंपनी को सौंप दिया
गाज़ीउद्दीन हैदर1814–1827अंग्रेज़ों के प्रोत्साहन से स्वयं को बादशाह घोषित किया (1819), जिससे मुगल सम्राट से औपचारिक संबंध टूट गया
मुहम्मद अली शाह1837–1842छोटा इमामबाड़ा (हुसैनाबाद) बनवाया
वाजिद अली शाह1847–1856कवि, संगीतकार, कलाओं के संरक्षक; अवध के विलय के समय गद्दी से हटाए गए

कंपनी की कसती पकड़

  • बक्सर (1764) और इलाहाबाद की संधि (1765) ने अवध को कंपनी पर निर्भर एक मध्यवर्ती राज्य (buffer state) बना दिया।
  • अवध को अपने क्षेत्र में तैनात कंपनी की सेना का खर्च उठाना पड़ता था।
  • 1801 की सहायक संधि ने उसका आधा क्षेत्र छीन लिया ("सौंपे गए ज़िले" (ceded districts) — रुहेलखंड और निचला दोआब)।
  • अवध की वित्तीय स्थिति खोखली हो गई; प्रशासन कमज़ोर पड़ गया।

1856 का विलय

  • फ़रवरी 1856 में गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौज़ी ने कुशासन (misgovernment) के आधार पर अवध का विलय कर लिया। यह व्यपगत के सिद्धांत (हड़प नीति, Doctrine of Lapse) के अंतर्गत नहीं था, क्योंकि वहाँ उत्तराधिकारियों वाला एक शासक बादशाह मौजूद था।
  • वाजिद अली शाह को मटियाबुर्ज (कलकत्ता) निर्वासित कर दिया गया। वहाँ उन्होंने एक छोटा-सा लखनऊ फिर से बसा लिया और संगीत व नृत्य का संरक्षण जारी रखा।

1857 के लिए विलय का महत्व

  • बंगाल सेना के बहुत से सिपाही अवध के थे। उन्होंने अपने बादशाह को हटाए जाने को अपना अपमान माना।
  • नई राजस्व व्यवस्था में ताल्लुकदारों (भूस्वामियों) की जागीरें छिन गईं।
  • दरबार के सेवकों, कारीगरों और संगीतकारों का संरक्षण समाप्त हो गया।
  • 1857 में बेगम हज़रत महल के नेतृत्व में लखनऊ विद्रोह का एक बड़ा केंद्र बना (उत्तर प्रदेश में 1857 पर हमारी गाइड देखें)।

लखनऊ के स्मारक

स्मारकनिर्माता / तिथिविशेषताएँ
बड़ा इमामबाड़ाआसफ़ुद्दौला (1784)बिना धरनों (beams) के सहारे बना विशाल मेहराबदार कक्ष; भूलभुलैया; अकाल राहत के रूप में बना
रूमी दरवाज़ाआसफ़ुद्दौलाविशाल द्वार
छोटा इमामबाड़ामुहम्मद अली शाह (1838)अलंकृत, झाड़-फ़ानूसों से सजा
रेज़िडेंसीअठारहवीं शताब्दी का अंतब्रिटिश रेज़िडेंट का परिसर; 1857 में घेरा गया; खंडहर सुरक्षित रखे गए हैं
कैसरबागवाजिद अली शाहमहल परिसर

अवध की संस्कृति

क्षेत्रविशेषताएँ
संगीतठुमरी, दादरा, ग़ज़ल का संरक्षण; वाजिद अली शाह ने स्वयं ठुमरियाँ रचीं
नृत्यकथक का लखनऊ घराना, जो लालित्य और भावपूर्ण अभिनय के लिए जाना जाता है (संगीत और नृत्य पर हमारी गाइड देखें)
शायरीमीर तक़ी मीर (जो लखनऊ आ बसे), इंशा, आतिश, नासिख़ जैसे उर्दू शायर; मर्सिया परंपरा (अनीस, दबीर)
शिल्पचिकनकारी कढ़ाई; ज़रदोज़ी
खान-पानदम पुख़्त पाक-शैली, कबाब, बिरयानी — अवधी व्यंजन
शिष्टाचारलखनऊ की प्रसिद्ध तहज़ीब (नफ़ासत) — "पहले आप"
साझी संस्कृतिगंगा-जमुनी तहज़ीब — सभी समुदायों के साझे त्योहार और परंपराएँ

अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) जैसे प्रश्न:

  1. अवध वंश की स्थापना किसने की?
  2. किस नवाब ने राजधानी फ़ैज़ाबाद से लखनऊ स्थानांतरित की?
  3. बड़ा इमामबाड़ा क्यों बनवाया गया?
  4. 1856 में अवध का विलय किस आधार पर किया गया?
  5. वाजिद अली शाह को कहाँ निर्वासित किया गया?

मुख्य परीक्षा (Mains) जैसे प्रश्न:

  • "अवध का विलय 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख कारण था।" विवेचना कीजिए।
  • भारतीय संस्कृति में अवध के नवाबों के योगदान का परीक्षण कीजिए।

तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।

अगली UPPSC गाइड ईमेल पर पाएँ

हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।

और पढ़ें

UPPSCUP History & Cultureउत्तर प्रदेश में 18571857 का विद्रोह मेरठ में शुरू हुआ, कानपुर, लखनऊ और झाँसी में भड़का, और उसे समाज के हर वर्ग से नेता मिले — एक रानी, एक बेगम, एक मौलवी, एक पेशवा, सिपाही और किसान। उत्तर प्रदेश इस विद्रोह का केंद्र था। कारण, केंद्र, नेता और विरासत — उसी क्रम में, जिस तरह UPPSC इनके बारे में पूछता है। 4 min read·28 Sept 2026UPPSCUP History & Cultureआगरा और फ़तेहपुर सीकरी में मुगलसोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के बड़े भाग में आगरा दुनिया के महान साम्राज्यों में से एक की राजधानी रहा। अकबर ने उसका किला दोबारा बनवाया और फ़तेहपुर सीकरी में नया नगर बसाया; नूरजहाँ ने अपने पिता के लिए रत्न-मंजूषा जैसा मकबरा बनवाया; शाहजहाँ ने ताजमहल बनवाया। उत्तर प्रदेश में मुगल — इतिहास, स्थापत्य और विरासत। 4 min read·27 Sept 2026UPPSCUP History & Cultureदिल्ली सल्तनत और जौनपुर का शर्की राज्य1194 में कन्नौज के पतन से लेकर 1526 में बाबर के आगमन तक उत्तर प्रदेश पर दिल्ली से शासन हुआ — सिवाय लगभग एक शताब्दी के, जब जौनपुर एक स्वतंत्र राज्य की राजधानी बना और अपनी मस्जिदों के कारण "भारत का शिराज़" कहलाया। उत्तर प्रदेश में सल्तनत, शर्की वंश और आगरा की स्थापना। 4 min read·27 Sept 2026UPPSCUP History & Cultureहर्षवर्धन और कन्नौजसातवीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश का कन्नौज हर्षवर्धन के समय उत्तर भारत की राजधानी बना। हर्ष ने नाटक लिखे, ह्वेनसांग का सत्कार किया, प्रयाग में महासभा की, और उन्हें केवल चालुक्यों ने रोका। उनके बाद तीन शताब्दियों तक कन्नौज वह पुरस्कार रहा जिसके लिए हर बड़ी शक्ति लड़ी। 8 min read·27 Sept 2026