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उत्तर प्रदेश में 1857

1857 का विद्रोह मेरठ में शुरू हुआ, कानपुर, लखनऊ और झाँसी में भड़का, और उसे समाज के हर वर्ग से नेता मिले — एक रानी, एक बेगम, एक मौलवी, एक पेशवा, सिपाही और किसान। उत्तर प्रदेश इस विद्रोह का केंद्र था। कारण, केंद्र, नेता और विरासत — उसी क्रम में, जिस तरह UPPSC इनके बारे में पूछता है।

28 Sept 2026 4 मिनट में पढ़ें

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इस गाइड में
  1. उत्तर प्रदेश क्यों उठ खड़ा हुआ
  2. मंगल पांडे
  3. उत्तर प्रदेश के मुख्य केंद्र
  4. बेगम हज़रत महल
  5. झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई
  6. दमन और उसके बाद
  7. उत्तर प्रदेश में विद्रोह का स्वरूप
  8. अभ्यास

10 मई 1857 की शाम मेरठ में सिपाही अपने अंग्रेज़ अफ़सरों के विरुद्ध उठ खड़े हुए। उन्होंने नए कारतूस लेने से इनकार करने पर कैद किए गए अपने साथियों को छुड़ाया और रात भर चलकर दिल्ली पहुँचे, जहाँ उन्होंने वृद्ध मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र को अपना नेता घोषित किया। कुछ ही हफ़्तों में विद्रोह पूरे गंगा के मैदान में फैल गया। उत्तर प्रदेश — जो तब पश्चिमोत्तर प्रांत और हाल में विलय किया गया अवध राज्य था — इसका केंद्र बन गया।

उत्तर प्रदेश क्यों उठ खड़ा हुआ

कारणउत्तर प्रदेश का पहलू
अवध का विलय (1856)वाजिद अली शाह को गद्दी से हटाया गया; अवध की जनता और सिपाहियों में गहरा आक्रोश
ताल्लुकदारनई राजस्व व्यवस्था ने अवध के भूस्वामियों (ताल्लुकदारों) से गाँव छीन लिए
सिपाहीबंगाल सेना का बड़ा हिस्सा अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आता था; वेतन, विदेश में सेवा और जाति को लेकर शिकायतें
चर्बी वाले कारतूसअफ़वाह थी कि एनफ़ील्ड राइफ़ल के कारतूसों पर गाय और सुअर की चर्बी लगी है
आर्थिक संकटऊँचा भू-राजस्व; दस्तकारियों का पतन
व्यपगत का सिद्धांत (हड़प नीति, Doctrine of Lapse)झाँसी का विलय
नाना साहब की पेंशनबाजीराव द्वितीय की मृत्यु के बाद देने से इनकार

मंगल पांडे

  • 34वीं बंगाल नेटिव इन्फ़ैंट्री के सिपाही; जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के नगवा गाँव में।
  • 29 मार्च 1857 को बैरकपुर (कलकत्ता के पास) में उन्होंने अपने अफ़सरों पर हमला किया; अप्रैल 1857 में उन्हें फाँसी दे दी गई।
  • उन्हें विद्रोह के पहले नायकों में गिना जाता है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य केंद्र

केंद्रनेताघटनाएँ
मेरठतीसरी लाइट कैवेलरी और देशी पैदल सेना के सिपाही10 मई 1857 को विद्रोह; दिल्ली की ओर कूच
कानपुरनाना साहब, तात्या टोपे, अज़ीमुल्लाह ख़ानजनरल व्हीलर के मोर्चे (entrenchment) की घेराबंदी; सत्तीचौरा घाट और बीबीघर हत्याकांड; अंग्रेज़ों का पुनः कब्ज़ा और कठोर बदले की कार्रवाई
लखनऊबेगम हज़रत महल, मौलवी अहमदुल्लाह शाहबेगम ने अपने पुत्र बिरजिस क़द्र को शासक घोषित किया; रेज़िडेंसी की लंबी घेराबंदी (हेनरी लॉरेंस मारे गए); हैवलॉक और आउट्रम द्वारा राहत; कॉलिन कैंपबेल द्वारा पुनः कब्ज़ा (1858)
झाँसीरानी लक्ष्मीबाईझाँसी की रक्षा (1858); बाद में कालपी और ग्वालियर में लड़ीं, जहाँ उनकी मृत्यु हुई
बरेलीख़ान बहादुर ख़ानरुहेलखंड में अपनी सरकार स्थापित की
फ़ैज़ाबादमौलवी अहमदुल्लाह शाहअवध के प्रमुख नेता; "विद्रोह का प्रकाश-स्तंभ" (Lighthouse of the Rebellion) कहलाए
इलाहाबादमौलवी लियाक़त अलीनगर और आसपास के क्षेत्र में विद्रोह
गोरखपुर क्षेत्रबंधु सिंह और अन्यस्थानीय विद्रोह
आज़मगढ़कुँवर सिंह (बिहार से) की सेनाएँ1858 में अंग्रेज़ों पर विजय

बेगम हज़रत महल

  • वाजिद अली शाह की पत्नी।
  • उन्होंने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस क़द्र को गद्दी पर बिठाकर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया।
  • रेज़िडेंसी की घेराबंदी संगठित की और अंग्रेज़ों के क्षमादान के प्रस्ताव ठुकरा दिए।
  • लखनऊ के पतन के बाद वे नेपाल चली गईं, जहाँ उनकी मृत्यु हुई।
  • उन्हें 1857 में स्त्री नेतृत्व के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई

  • झाँसी के गंगाधर राव की पत्नी; उनकी मृत्यु के बाद व्यपगत के सिद्धांत के तहत झाँसी का विलय कर लिया गया।
  • 1858 में सर ह्यू रोज़ के विरुद्ध झाँसी की रक्षा की; वहाँ से निकलकर तात्या टोपे से जा मिलीं।
  • तात्या टोपे के साथ ग्वालियर पर कब्ज़ा किया; जून 1858 में ग्वालियर के पास लड़ते हुए वीरगति पाई।

दमन और उसके बाद

  • अंग्रेज़ों ने दिल्ली (सितंबर 1857), लखनऊ (मार्च 1858) और अन्य केंद्रों पर 1858–59 तक फिर से कब्ज़ा कर लिया, और क्रूर बदले की कार्रवाई की।
  • भारत शासन अधिनियम, 1858 (Government of India Act, 1858) ने कंपनी का शासन समाप्त कर दिया।
  • महारानी विक्टोरिया की घोषणा (Queen's Proclamation) 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद में लॉर्ड कैनिंग ने पढ़ी — उस स्थान पर, जिसे अब मदन मोहन मालवीय पार्क (पहले मिंटो पार्क) कहा जाता है।
  • घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता, भारतीय राजाओं के प्रति सम्मान और विलयों की समाप्ति का वचन दिया गया।

उत्तर प्रदेश में विद्रोह का स्वरूप

उत्तर प्रदेश में 1857 केवल सिपाही विद्रोह नहीं था:

  • ताल्लुकदार और किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए, खासकर अवध में।
  • नेता राजघरानों से भी आए, धार्मिक व्यक्तित्वों से भी और साधारण सैनिकों से भी।
  • हिंदू और मुसलमान साथ मिलकर लड़े।

इतिहासकारों में इस पर बहस है कि यह "स्वतंत्रता संग्राम" था, "सैनिक विद्रोह" था, या कई विद्रोहों का मेल। उत्तर प्रदेश में इसका जन-चरित्र विशेष रूप से स्पष्ट दिखता है।

अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) जैसे प्रश्न:

  1. 1857 का विद्रोह कहाँ और किस तारीख को शुरू हुआ?
  2. मंगल पांडे का जन्म कहाँ हुआ था?
  3. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
  4. बरेली में विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
  5. महारानी विक्टोरिया की घोषणा कहाँ और कब पढ़ी गई?

मुख्य परीक्षा (Mains) जैसे प्रश्न:

  • "अवध में 1857 का विद्रोह एक जन-युद्ध था।" विवेचना कीजिए।
  • उत्तर प्रदेश में 1857 के विद्रोह में महिलाओं की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।

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