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दक्षिण उत्तर प्रदेश के पथरीले, ऊँचे-नीचे उच्च भागों में सैकड़ों पुराने तालाब — जिनमें से कुछ लगभग एक हज़ार साल पहले चंदेल राजाओं ने बनवाए थे — आज भी जगह-जगह दिखते हैं। ये याद दिलाते हैं कि बुंदेलखंड के लोगों को पानी के लिए हमेशा कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। आज यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की विकास चुनौती का प्रतीक है: बार-बार सूखा, कम कृषि उत्पादकता, कर्ज़ और पलायन। साथ ही, यह राज्य की कुछ सबसे बड़ी विकास परियोजनाओं का केंद्र भी है।
बुंदेलखंड कहाँ है?
बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैला है। उत्तर प्रदेश में इसमें सात ज़िले हैं:
| मंडल | ज़िले |
|---|---|
| झाँसी | झाँसी, ललितपुर, जालौन |
| चित्रकूट धाम | बाँदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा |
भूगोल
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| चट्टानें | कठोर ग्रेनाइट और नीस (बुंदेलखंड पिंड, Bundelkhand massif) — भारत की सबसे प्राचीन चट्टानों में |
| भू-भाग | ऊँचा-नीचा, पथरीला, बिखरी पहाड़ियों और बीहड़ों वाला |
| मिट्टियाँ | राकड़, पड़वा, मार, काबर — अक्सर पतली, कटी हुई या भारी चिकनी |
| नदियाँ | बेतवा, केन, धसान, पहूज, यमुना (उत्तरी सीमा) |
| वर्षा | गंगा के मैदान की तुलना में कम और बहुत अनियमित |
| भूजल | सीमित, क्योंकि कठोर चट्टान में पानी कम जमा होता है |
| तापमान | बहुत गर्म ग्रीष्म ऋतु (उत्तर प्रदेश के सबसे ऊँचे तापमानों में) |
इतिहास
| काल | मुख्य बातें |
|---|---|
| चंदेल (लगभग 9वीं–13वीं शताब्दी) | खजुराहो (मध्य प्रदेश में), कालिंजर और महोबा जैसे किले, और सैकड़ों तालाब बनवाए |
| आल्हा और ऊदल | महोबा के लोककथाओं वाले योद्धा; आल्हा गाथाएँ पूरे उत्तर भारत में गाई जाती हैं |
| बुंदेले | क्षेत्र को इन्हीं से नाम मिला; ओरछा (मध्य प्रदेश) इनकी राजधानी थी; छत्रसाल ने मराठों की मदद से मुगलों का प्रतिरोध किया |
| 1857 | झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई |
बुंदेलखंड संकट में क्यों है
| कारण | व्याख्या |
|---|---|
| कम और अनियमित वर्षा | बार-बार सूखा (जैसे 2000 के दशक के मध्य में लंबा सूखा) |
| कठोर चट्टान | भूजल का कम पुनर्भरण (recharge) |
| पारंपरिक तालाबों का पतन | चंदेलकालीन तालाबों पर अतिक्रमण और उनकी उपेक्षा |
| वनों की कटाई | अधिक अपवाह (runoff) और मृदा अपरदन |
| वर्षा-आधारित कृषि | कम सिंचाई; कम उपज |
| कर्ज़ | फसल खराब होने से ऋणग्रस्तता |
| अन्ना प्रथा | दूध देना बंद करने के बाद मवेशियों को खुला छोड़ देने की प्रथा; आवारा पशुओं के झुंड फसलें नष्ट करते हैं |
| खनन | अवैध बालू और पत्थर खनन नदियों और ज़मीन को नुकसान पहुँचाता है |
| पलायन | युवा काम के लिए शहरों की ओर जाते हैं |
विकास पहलें
| पहल | विवरण |
|---|---|
| केन–बेतवा लिंक परियोजना | राष्ट्रीय नदी जोड़ो योजना के अंतर्गत भारत की पहली परियोजना; बुंदेलखंड (उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश) की सिंचाई के लिए केन से बेतवा में पानी पहुँचाती है; 2024 में शिलान्यास |
| बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे | लगभग 296 किमी, चित्रकूट से इटावा के पास आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे तक; 2022 में शुरू |
| उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा | झाँसी और चित्रकूट में नोड (आगरा, अलीगढ़, कानपुर और लखनऊ के साथ) |
| सौर पार्क | कम उपजाऊ ज़मीन पर बड़ी सौर परियोजनाएँ |
| हर घर जल | पाइप से पेयजल — जल जीवन मिशन में बुंदेलखंड को प्राथमिकता दी गई |
| तालाबों का पुनरुद्धार | खेत तालाब और पारंपरिक तालाबों की मरम्मत |
| गौशालाएँ | आवारा पशुओं के लिए आश्रय |
| बुंदेलखंड पैकेज | क्षेत्र के लिए केंद्र और राज्य की विशेष सहायता |
बुंदेलखंड और अलग राज्य की बहस
उपेक्षा और अलग पहचान का हवाला देते हुए समय-समय पर अलग बुंदेलखंड राज्य (उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ज़िलों को मिलाकर) की माँग उठती रही है। इसे एक बहस के रूप में प्रस्तुत करें और ध्यान विकास के समाधानों पर रखें।
मुख्य परीक्षा के लिए एक ढाँचा
| क्षेत्र | रणनीति |
|---|---|
| जल | तालाबों का पुनरुद्धार, खेत तालाब, जलसंभर विकास (watershed development), केन–बेतवा, टपक सिंचाई (drip irrigation) |
| कृषि | दलहन, तिलहन, मोटे अनाज; बागवानी; पशुधन प्रबंधन |
| आवारा पशु | गौशालाएँ; चारा बैंक; प्रोत्साहन |
| आजीविका | रक्षा गलियारे में रोज़गार; सौर ऊर्जा; पर्यटन (कालिंजर, चित्रकूट, झाँसी) |
| संपर्क | एक्सप्रेसवे और औद्योगिक नोड |
| पर्यावरण | वनीकरण; अवैध खनन पर नियंत्रण |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के सात ज़िलों के नाम बताइए।
- अन्ना प्रथा क्या है?
- बुंदेलखंड के कई तालाब किस राजवंश ने बनवाए?
- केन–बेतवा परियोजना किन नदियों को जोड़ती है?
- बुंदेलखंड के कौन-से दो शहर रक्षा गलियारे के नोड हैं?
मुख्य परीक्षा शैली:
- "बुंदेलखंड का संकट जितना प्राकृतिक है, उतना ही मानव-निर्मित भी।" विवेचना कीजिए।
- बुंदेलखंड के समाधान के रूप में केन–बेतवा लिंक परियोजना का मूल्यांकन कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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