इस गाइड में
पूर्वांचल — यानी "पूर्वी क्षेत्र" — में उत्तर प्रदेश के पूर्वी ज़िले आते हैं: वाराणसी और प्रयागराज से लेकर गोरखपुर, देवरिया, आज़मगढ़, बलिया और नेपाल सीमा तक। यह गहरी संस्कृति की धरती है: काशी, सारनाथ, कुशीनगर, भोजपुरी भाषा और छठ पर्व। यह कठिनाइयों की धरती भी है: हर साल की बाढ़, छोटे-छोटे खेत, भीड़ भरे गाँव, और वे युवा पुरुष जो मुंबई, दिल्ली, पंजाब और खाड़ी देशों को चले जाते हैं।
विस्तार
पूर्वांचल कोई आधिकारिक प्रशासनिक इकाई नहीं है, पर मोटे तौर पर इसमें उत्तर प्रदेश के पूर्वी मंडल आते हैं, जैसे:
- वाराणसी, गोरखपुर, बस्ती, आज़मगढ़, मिर्ज़ापुर, देवीपाटन (गोंडा) तथा प्रयागराज और अयोध्या मंडलों के कुछ भाग।
भूगोल
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भू-भाग | निचला, समतल पूर्वी गंगा मैदान; उत्तर में तराई |
| नदियाँ | गंगा, घाघरा (सरयू), राप्ती, गंडक, रोहिणी, गोमती, टोंस |
| वर्षा | पश्चिमी उत्तर प्रदेश से अधिक |
| मिट्टियाँ | उपजाऊ जलोढ़; कुछ क्षेत्रों में जलभराव |
बाढ़
- नेपाल से आने वाली नदियाँ — राप्ती, घाघरा, गंडक, रोहिणी — गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बहराइच और गोंडा जैसे ज़िलों में मानसून के दौरान भारी बाढ़ लाती हैं।
- बाढ़ लगभग हर साल फसलें, घर और सड़कें नष्ट करती है और जलभराव (waterlogging) पैदा करती है।
- प्रबंधन तटबंधों, पूर्व चेतावनी और नेपाल के साथ सहयोग पर निर्भर है।
कृषि
- मुख्यतः धान और गेहूँ; कुछ भागों में गन्ना (जैसे गोरखपुर–देवरिया–कुशीनगर पट्टी, जहाँ ऐतिहासिक रूप से कई चीनी मिलें थीं)।
- बहुत छोटी और बिखरी हुई जोतें।
- कम मशीनीकरण और कम निवेश।
- विशिष्ट फसलें: कालानमक चावल (सिद्धार्थनगर क्षेत्र, GI टैग प्राप्त)।
जनसंख्या और पलायन
- बहुत अधिक घनत्व — भारत में सबसे अधिक में से।
- बाहरी पलायन (out-migration) यहाँ जीवन का हिस्सा है — मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, पंजाब, गुजरात और खाड़ी देशों की ओर।
- प्रेषित धन (remittances) परिवारों का सहारा है।
- कुछ ज़िलों में ऊँचा लिंगानुपात पुरुषों के पलायन को दर्शाता है।
- पलायन की संस्कृति भोजपुरी लोकगीतों और रंगमंच में झलकती है।
स्वास्थ्य: इंसेफेलाइटिस की कहानी
- दशकों तक गोरखपुर और आसपास के ज़िलों में जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis, JE) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome, AES) का प्रकोप होता रहा, जिसमें हज़ारों बच्चों की मौत हुई, खासकर मानसून में।
- गोरखपुर का BRD मेडिकल कॉलेज इलाज का केंद्र था; 2017 में वहाँ हुई एक त्रासदी ने राष्ट्रीय ध्यान खींचा।
- एक बहुआयामी अभियान — JE टीकाकरण, स्वच्छता, साफ़ पेयजल, समर्पित केंद्रों पर जल्दी इलाज, निगरानी और दस्तक सामुदायिक संपर्क अभियान — से अगले वर्षों में मौतों में तेज़ी से कमी आई।
संस्कृति और विरासत
- वाराणसी (काशी) — दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित नगरों में से एक; काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (2021 में उद्घाटन)।
- सारनाथ और कुशीनगर — बौद्ध विरासत।
- गोरखनाथ मंदिर और मठ (गोरखपुर) — नाथ परंपरा।
- भोजपुरी भाषा और संगीत; छठ।
- बलिया — 1942 का "बागी बलिया"।
- अयोध्या (क्षेत्र के पश्चिमी किनारे पर)।
विकास पहलें
| पहल | विवरण |
|---|---|
| पूर्वांचल एक्सप्रेसवे | लगभग 341 किमी, लखनऊ से गाज़ीपुर तक; 2021 में शुरू |
| गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे | गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है |
| गोरखपुर उर्वरक संयंत्र | पुनर्जीवित यूरिया संयंत्र (HURL), 2021 में उद्घाटन |
| AIIMS गोरखपुर | तृतीयक स्वास्थ्य सेवा |
| कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा | बौद्ध पर्यटन (2021) |
| वाराणसी | काशी विश्वनाथ कॉरिडोर; गंगा पर अंतर्देशीय जलमार्ग टर्मिनल |
| औद्योगिक गलियारे और ODOP | टेराकोटा (गोरखपुर), काली मिट्टी के बर्तन (आज़मगढ़), कालीन (भदोही), रेशम (वाराणसी) |
मुख्य परीक्षा के लिए एक ढाँचा
| क्षेत्र | रणनीति |
|---|---|
| बाढ़ | पूर्व चेतावनी; आपदा-रोधी आवास; जल निकासी; नेपाल से सहयोग |
| कृषि | विविधीकरण; मत्स्य पालन; प्रसंस्करण |
| रोज़गार | एक्सप्रेसवे के किनारे उद्योग; MSME; ODOP; पर्यटन |
| मानव पूँजी | स्वास्थ्य (इंसेफेलाइटिस की सफलता को आगे बढ़ाना); शिक्षा; कौशल |
| पलायन | सुरक्षित पलायन; कौशल प्रमाणन; लौटने वालों का पुनर्समायोजन |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- गोरखपुर क्षेत्र में कौन-सी नदियाँ बाढ़ लाती हैं?
- पूर्वांचल एक्सप्रेसवे किन स्थानों के बीच है?
- दस्तक अभियान क्या था?
- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन कब हुआ?
- कालानमक चावल क्या है?
मुख्य परीक्षा शैली:
- "पूर्वांचल संसाधनों में समृद्ध है, पर अवसरों में गरीब।" विवेचना कीजिए।
- इंसेफेलाइटिस के विरुद्ध पूर्वी उत्तर प्रदेश के अभियान से मिलने वाली सीखों का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
अगली UPPSC गाइड ईमेल पर पाएँ
हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।