इस गाइड में
बिहार में साल भर चरम स्थितियाँ बनी रहती हैं। मई और जून में लू — गर्म और शुष्क पछुआ हवा — दोपहर को खतरनाक बना देती है। जुलाई और अगस्त में उत्तर की नदियाँ उफान पर होती हैं। दिसंबर और जनवरी तक घना कोहरा मैदानों को ढक लेता है और शीतलहर गाँवों को ठिठुरा देती है। बिहार की जलवायु और मृदा को समझना केवल भूगोल के प्रश्नपत्र (paper) के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि, आपदा और स्वास्थ्य से जुड़े उत्तरों के लिए भी ज़रूरी है।
जलवायु का प्रकार
बिहार की जलवायु आर्द्र उपोष्ण मानसूनी (humid subtropical monsoon) है। समुद्र से दूरी के कारण इसमें कुछ महाद्वीपीय (continental) विशेषताएँ भी हैं।
| ऋतु | महीने (लगभग) | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| ग्रीष्म ऋतु | मार्च – मध्य जून | गर्म; मई–जून में तापमान अक्सर 40 °C से ऊपर; लू (गर्म पछुआ हवाएँ); पूर्व में कभी-कभी गरज के साथ आँधी-वर्षा (नॉर्वेस्टर, जिसे स्थानीय रूप से काल बैसाखी कहते हैं) |
| मानसून | मध्य जून – सितंबर | दक्षिण-पश्चिम मानसून साल की अधिकांश वर्षा लाता है |
| लौटता मानसून (retreating monsoon) | अक्टूबर – नवंबर | बंगाल की खाड़ी से कभी-कभी चक्रवाती वर्षा |
| शीत ऋतु | दिसंबर – फरवरी | ठंडी से बहुत ठंडी; कोहरा; शीतलहर; पश्चिमी विक्षोभ (western disturbances) से हल्की शीतकालीन वर्षा |
वर्षा
- औसत वार्षिक वर्षा लगभग 1,000–1,500 mm है, पर इसमें काफी अंतर रहता है।
- मानसून बिहार में बंगाल की खाड़ी वाली शाखा से प्रवेश करता है, इसलिए वर्षा सामान्यतः पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर घटती जाती है।
- उत्तर-पूर्व (किशनगंज, पूर्णिया, अररिया) में वर्षा सबसे अधिक होती है।
- दक्षिण-पश्चिम (गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर के कुछ हिस्से) में वर्षा कम होती है और यह क्षेत्र सूखे की आशंका वाला है।
- बाढ़ के लिए उत्तर बिहार की नदियों के नेपाल स्थित जलग्रहण क्षेत्र (catchment) की वर्षा उतनी ही मायने रखती है जितनी बिहार के भीतर की वर्षा।
क्षेत्रीय जलवायु में अंतर
| क्षेत्र | जलवायु की प्रकृति |
|---|---|
| उत्तर-पूर्व बिहार | सबसे अधिक वर्षा; बाढ़; अधिक आर्द्रता |
| उत्तर-पश्चिम बिहार | मध्यम वर्षा; नेपाल से आने वाली बाढ़-प्रवण नदियाँ |
| दक्षिण बिहार का मैदान | कम वर्षा; गर्म ग्रीष्म; सूखे का खतरा |
| दक्षिणी पहाड़ियाँ | थोड़ी ठंडी; पतली मृदा |
चरम मौसमी घटनाएँ
| आपदा | विवरण |
|---|---|
| बाढ़ | हर मानसून में उत्तर बिहार (कोसी और आपदाओं पर हमारी मार्गदर्शिकाएँ देखें) |
| सूखा | दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम बिहार; कमज़ोर मानसून उत्तर को भी प्रभावित करता है |
| ग्रीष्म लहर (heatwave) | मई–जून; स्वास्थ्य के लिए खतरा, खासकर खुले में काम करने वालों के लिए |
| शीतलहर और कोहरा | दिसंबर–जनवरी; स्वास्थ्य, परिवहन और फसलों पर असर |
| वज्रपात (lightning, आकाशीय बिजली) | बिहार में हर वर्ष वज्रपात से बहुत मौतें दर्ज होती हैं, खासकर मानसून-पूर्व और मानसून के दौरान; खुले खेतों में काम करने वाले खेतिहर मज़दूरों को सबसे अधिक खतरा रहता है |
| ओलावृष्टि और बेमौसम वर्षा | रबी फसलों और आम व लीची के बागों को नुकसान |
बिहार ने वज्रपात की पूर्व चेतावनी (early warning) के संदेश और जागरूकता अभियान शुरू किए हैं; राज्य ने वज्रपात की चेतावनी के लिए इंद्रवज्र ऐप को बढ़ावा दिया है।
बिहार की मृदा
| मृदा | कहाँ | विशेषताएँ | किसके लिए उपयुक्त |
|---|---|---|---|
| नवीन जलोढ़ (खादर) | नदियों के पास, बाढ़ के मैदान | हल्की, उपजाऊ, बाढ़ से हर साल नवीकृत | धान, मक्का, सब्ज़ियाँ, जूट (पूर्व में) |
| पुराना जलोढ़ (बांगर) | मैदानों के ऊँचे भाग | पुरानी, अधिक परिपक्व; इसमें कंकड़ (चूने की ग्रंथियाँ) हो सकते हैं | गेहूँ, धान, दालें |
| टाल मृदा | गंगा के दक्षिणी तट की निचली भूमि (जैसे मोकामा टाल) | भारी चिकनी मिट्टी; मानसून में जलमग्न | रबी दालें (चना, मसूर) |
| दियारा मृदा | नदी के द्वीप और किनारे | बाढ़ से जमा बलुई से दोमट | बाढ़ के बाद सब्ज़ियाँ, मक्का, तरबूज़-खरबूज़ |
| गिरिपद दलदली मृदा (piedmont swamp soil) | उत्तर-पश्चिम (चंपारण), तलहटी के पास | जलजमाव वाली | धान |
| तराई मृदा | नेपाल सीमा के साथ | नम, उपजाऊ | धान, गन्ना |
| लाल और पीली मृदा | दक्षिणी पठार का किनारा (कैमूर, गया, जमुई, बांका) | कम उपजाऊ; जल धारण क्षमता कम | मोटे अनाज, दालें |
| बलसुंदरी मृदा | उत्तर बिहार के कुछ भाग | चूनायुक्त (calcareous) जलोढ़ | गेहूँ, मक्का, गन्ना |
मृदा की समस्याएँ
| समस्या | कहाँ / कारण |
|---|---|
| जलजमाव (waterlogging) | उत्तर बिहार, बाढ़, तटबंधों और खराब जल-निकासी के कारण |
| बालू का जमाव | बाढ़ के बाद (जैसे 2008 की कोसी बाढ़ के बाद) — खेत बालू में दब गए |
| मृदा अपरदन (soil erosion) | दक्षिणी पहाड़ियाँ और नदी-तट |
| पोषक तत्वों की कमी | सघन खेती, उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग; जिंक और सल्फर की कमी |
| क्षारीयता (alkalinity) | कुछ ज़िलों में छिटपुट क्षेत्र |
कृषि पर प्रभाव
- खरीफ: धान प्रमुख है; उत्तर बिहार में मक्का।
- रबी: गेहूँ, चना, मसूर (खासकर टाल क्षेत्रों में), सरसों।
- ज़ायद (गर्मी): सब्ज़ियाँ, मूँग, मक्का।
- बाढ़ और जलजमाव आर्द्रभूमियों में मखाना जैसी फसलों के अनुकूल हैं, और धान की बाढ़-सहिष्णु किस्मों की ज़रूरत पैदा करते हैं।
- सूखे की आशंका वाले दक्षिण बिहार को जल संचयन और सूखा-सहिष्णु फसलों की ज़रूरत है।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- बिहार को मानसून की किस शाखा से वर्षा मिलती है?
- बिहार के किस भाग में सबसे अधिक वर्षा होती है?
- टाल मृदा किस फसल के लिए उपयुक्त है?
- बिहार में लाल और पीली मृदा कहाँ पाई जाती है?
- लू क्या है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "बिहार एक ही वर्ष में बाढ़ और सूखा, दोनों झेलता है।" व्याख्या कीजिए।
- बिहार में वज्रपात से होने वाली अधिक मौतों के कारणों की चर्चा कीजिए और उपाय सुझाइए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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