इस गाइड में
18 अगस्त 2008 को कोसी ने नेपाल में कुसहा पर, भीमनगर के बराज से कुछ किलोमीटर ऊपर की ओर, अपना पूर्वी तटबंध तोड़ दिया। नदी ने अपनी धारा छोड़ दी और पूर्व की ओर एक पुराने मार्ग में उमड़ पड़ी, जिससे सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, अररिया और पूर्णिया जैसे ज़िले डूब गए। लाखों लोग विस्थापित हुए; गाँव, सड़कें और खेत पानी और बालू के नीचे गायब हो गए। यह बिहार के हाल के इतिहास की सबसे भीषण आपदाओं में से एक थी — और एक याद दिलाने वाली घटना कि कोसी को बिहार का शोक (Sorrow of Bihar) क्यों कहा जाता है।
नदी
- कोसी नेपाल में सात हिमालयी धाराओं से मिलकर बनती है — इसीलिए इसे सप्तकोसी कहते हैं — जिनमें सुनकोसी, अरुण और तमोर शामिल हैं। इसके जलग्रहण क्षेत्र (catchment) में एवरेस्ट क्षेत्र सहित दुनिया की कुछ सबसे ऊँची चोटियाँ हैं।
- यह भीमनगर (सुपौल ज़िला) के पास बिहार में प्रवेश करती है और दक्षिण की ओर बहकर कुरसेला (कटिहार ज़िला) के पास गंगा से मिलती है।
कोसी इतनी कठिन क्यों है
| कारक | व्याख्या |
|---|---|
| अत्यधिक अवसाद भार | युवा और आसानी से कटने वाले हिमालय से आने के कारण कोसी दुनिया की किसी भी नदी की तुलना में सबसे अधिक अवसाद (sediment) ढोने वाली नदियों में से है |
| ढाल में अचानक कमी | जब नदी खड़ी ढाल वाले पहाड़ों को छोड़कर समतल मैदान में आती है, तो उसकी गति धीमी हो जाती है और वह अपना अवसाद गिरा देती है |
| तल-उन्नयन (aggradation) | अवसाद नदी की तली को ऊँचा कर देता है, इसलिए नदी अपने किनारों से बाहर बहने लगती है |
| मार्ग परिवर्तन | नदी बार-बार अपनी ऊँची हो चुकी तली छोड़कर निचली भूमि की ओर चली जाती है |
| भारी मानसूनी वर्षा | नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा तीव्र और केंद्रित होती है |
| भूकंपीय क्षेत्र | यह क्षेत्र भूकंप-प्रवण है, जिसका असर ढलानों और अवसाद की आपूर्ति पर पड़ता है |
कोसी मेगाफ़ैन
हज़ारों वर्षों में मार्ग बदलती कोसी ने अवसाद का एक विशाल, पंखे के आकार का जमाव बनाया है — कोसी मेगाफ़ैन (Kosi megafan) — जो दुनिया के सबसे बड़े मेगाफ़ैनों में से एक है। पिछली लगभग दो शताब्दियों के ऐतिहासिक नक्शे दिखाते हैं कि इस पंखे पर नदी पश्चिम की ओर सौ किलोमीटर से कहीं अधिक खिसकी है।
कोसी परियोजना
आज़ादी के बाद भारत और नेपाल ने 1954 में कोसी समझौते (Kosi Agreement) पर हस्ताक्षर किए। कोसी परियोजना में ये शामिल थे:
- भीमनगर (नेपाल सीमा पर) पर कोसी बराज, जो 1960 के दशक की शुरुआत में पूरा हुआ;
- नदी को एक तय धारा में बाँधने के लिए दोनों ओर तटबंध (embankments);
- सिंचाई के लिए नहरें (पूर्वी और पश्चिमी कोसी नहर);
- एक छोटा जलविद्युत घटक।
तटबंधों पर बहस
तटबंधों ने दशकों तक कोसी को मार्ग बदलने से रोका। पर विशेषज्ञ लंबे समय से समस्याओं की ओर इशारा करते रहे हैं:
| समस्या | व्याख्या |
|---|---|
| तटबंधों के बीच फँसी गाद | तटबंधों के बीच नदी की तली ऊँची होती जाती है, कभी-कभी आसपास की ज़मीन से भी ऊपर |
| तटबंधों के भीतर गाँव | कई सौ गाँव तटबंधों के बीच बसे हैं, जो लगभग हर वर्ष डूबते हैं और जहाँ सेवाएँ कमज़ोर हैं |
| बाहर जलजमाव | तटबंध प्राकृतिक जल-निकासी रोकते हैं, जिससे बाहर के ग्रामीण इलाकों में जलजमाव होता है |
| तटबंध टूटना | जब कोई तटबंध टूटता है, तो नुकसान विनाशकारी होता है, क्योंकि पानी उन इलाकों में घुसता है जो निश्चिंत हो चुके होते हैं — जैसा 2008 में हुआ |
| रखरखाव | खिसकती बालू पर लंबे तटबंधों का रखरखाव कठिन और महँगा है |
दिनेश कुमार मिश्र जैसे शोधकर्ताओं और कार्यकर्ताओं ने इन समस्याओं का विस्तार से दस्तावेज़ीकरण किया है।
2008 का कुसहा तटबंध टूटना
- कारण: नेपाल में कुसहा पर पूर्वी तटबंध में दरार — जिसका कारण तटबंध की कमज़ोरियों और अपर्याप्त रखरखाव तथा निगरानी को माना गया, और वह भी ऐसे समय जब प्रवाह अपेक्षाकृत सामान्य था।
- प्रभाव: नदी ने पूर्व की ओर एक पुराना मार्ग पकड़ लिया, जिससे पूर्वोत्तर बिहार के बड़े हिस्से डूब गए।
- प्रतिक्रिया: बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान; बाद में विश्व बैंक के सहयोग से कोसी बाढ़ पुनर्प्राप्ति परियोजना (Kosi Flood Recovery Project) के तहत पुनर्निर्माण।
- सबक: रखरखाव, निगरानी, पूर्व चेतावनी (early warning) और नेपाल के साथ सहयोग का महत्व।
भविष्य के विकल्प
| विकल्प | लाभ | कमियाँ |
|---|---|---|
| नेपाल में ऊँचा बाँध (प्रस्तावित सप्तकोसी हाई डैम) | पानी जमा कर सकता है, अवसाद रोक सकता है, बिजली बना सकता है और बाढ़ नियंत्रित कर सकता है | बहुत महँगा; भूकंप का जोखिम; नेपाल में विस्थापन; अवसाद जलाशय को भर देगा; नेपाल की सहमति ज़रूरी |
| मज़बूत तटबंध | मौजूदा निवेश की रक्षा करता है | गाद की समस्या हल नहीं करता |
| बाढ़ के साथ जीना | बाढ़-रोधी आवास, ऊँचे चबूतरे, पूर्व चेतावनी, बाढ़ बीमा, बाढ़ क्षेत्र का ज़ोनिंग (floodplain zoning) | बसावट और आजीविका में बदलाव ज़रूरी |
| जल-निकासी में सुधार | जलजमाव घटाता है | लगातार निवेश चाहिए |
| अवसाद प्रबंधन | ड्रेजिंग; गाद फैलाने के लिए नियंत्रित बाढ़ आने देना | तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण |
| नदी जोड़ (कोसी–मेची) | पानी मोड़ता है | बाढ़ पर सीमित असर; महँगा |
अधिकांश विशेषज्ञ अब केवल नदी को नियंत्रित करने की कोशिश के बजाय बाढ़ प्रबंधन (flood management) के तरीके के पक्ष में हैं — यानी नुकसान घटाना और लोगों को बाढ़ के साथ जीने में मदद करना।
BPSC के लिए कोसी क्यों अहम है
- यह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) और मुख्य परीक्षा (Mains), दोनों का पारंपरिक विषय है।
- यह भूगोल (अवसाद, मेगाफ़ैन), आपदा प्रबंधन (2008), अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत–नेपाल समझौते), अर्थव्यवस्था (कोसी क्षेत्र बिहार के सबसे गरीब क्षेत्रों में है) और पलायन को आपस में जोड़ता है।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा शैली:
- कोसी को सप्तकोसी क्यों कहा जाता है?
- नेपाल के साथ कोसी समझौते पर कब हस्ताक्षर हुए?
- कोसी बराज कहाँ है?
- 2008 में तटबंध कहाँ टूटा?
- पिछली दो शताब्दियों में कोसी किस दिशा में खिसकी है?
मुख्य परीक्षा शैली:
- "तटबंधों ने कोसी को एक समस्या से आपदा में बदल दिया है।" आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- कोसी बेसिन में बाढ़ प्रबंधन के लिए एक टिकाऊ रणनीति सुझाइए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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