इस गाइड में
मई में दोपहर की लू — एक गर्म, शुष्क पछुआ हवा — उत्तर प्रदेश के मैदानों में चलती है, और बाँदा, झाँसी और प्रयागराज जैसी जगहों पर तापमान 45 °C से ऊपर जा सकता है। जनवरी में वही मैदान घने कोहरे से ढक जाते हैं, और रेलगाड़ियाँ तथा उड़ानें देर से चलती हैं। और इन दोनों के बीच मानसून वह वर्षा लाता है, जो तय करती है कि खरीफ़ की फ़सल सफल होगी या नहीं। जलवायु और मृदा (मिट्टी) उत्तर प्रदेश की कृषि की दो प्राकृतिक नींवें हैं।
जलवायु का प्रकार
उत्तर प्रदेश की जलवायु आर्द्र उपोष्ण (humid subtropical) मानसूनी है। समुद्र से दूर होने के कारण इसमें महाद्वीपीय (continental) लक्षण भी हैं (गर्म ग्रीष्म, ठंडी सर्दियाँ)।
| ऋतु | महीने (लगभग) | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| ग्रीष्म | मार्च – मध्य जून | बहुत गर्म; लू; धूल भरी आँधियाँ; मानसून-पूर्व गरज के साथ बौछारें |
| मानसून | मध्य जून – सितंबर | वार्षिक वर्षा का अधिकांश भाग |
| मानसून-पश्चात | अक्टूबर – नवंबर | सुहावना; शुष्क |
| शीत | दिसंबर – फ़रवरी | ठंड; कोहरा; शीत लहर; पश्चिमी विक्षोभों (western disturbances) से हल्की वर्षा |
वर्षा
- दक्षिण-पश्चिम मानसून (बंगाल की खाड़ी की शाखा) उत्तर प्रदेश में पूर्व से प्रवेश करता है।
- इसलिए वर्षा पूर्व से पश्चिम की ओर और उत्तर (तराई) से दक्षिण-पश्चिम की ओर घटती है।
- तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा होती है; पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कुछ भागों में सबसे कम।
- पूरे राज्य में औसत वार्षिक वर्षा मोटे तौर पर 800–1,000 मिमी है, जिसमें काफ़ी भिन्नता है।
चरम मौसम
| आपदा | विवरण |
|---|---|
| ग्रीष्म लहर (heatwave) | मई–जून में आम, विशेषकर बुंदेलखंड और दक्षिण-मध्य उत्तर प्रदेश में |
| शीत लहर और कोहरा | दिसंबर–जनवरी; स्वास्थ्य और परिवहन पर असर |
| बाढ़ | पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई (आपदाओं पर हमारी मार्गदर्शिका देखें) |
| सूखा | बुंदेलखंड; कमज़ोर मानसून वाले वर्षों में अन्य क्षेत्र भी |
| आकाशीय बिजली | हर मानसून में बड़ी संख्या में मौतें |
| धूल भरी आँधी | मानसून-पूर्व; मई 2018 की आँधियों में बहुत-सी मौतें हुईं |
उत्तर प्रदेश की मृदा
गंगा का मैदान
| मृदा | कहाँ | विशेषताएँ | फ़सलें |
|---|---|---|---|
| खादर (नई जलोढ़) | नदियों के पास बाढ़ के मैदान | हल्की, उपजाऊ, हर वर्ष नवीकृत | धान, सब्ज़ियाँ, गन्ना |
| बांगर (पुरानी जलोढ़) | ऊँची भूमि | अधिक चिकनी; कंकड़ की ग्रंथियाँ; खादर से कम उपजाऊ | गेहूँ, गन्ना, दालें |
| तराई की मृदा | उत्तरी पट्टी | बारीक, नम, जैविक पदार्थ से भरपूर | धान, गन्ना, गेहूँ |
बुंदेलखंड की मृदा
बुंदेलखंड में मृदा के विशिष्ट स्थानीय नाम हैं:
| मृदा | विशेषताएँ |
|---|---|
| राकर | लाल, कंकरीली, अपरदित; कम उपजाऊ |
| पड़वा | हल्की, बलुई दोमट |
| मार | काली, चिकनी (रेगुर जैसी); उपजाऊ पर जुताई में कठिन |
| काबर | काली, भारी चिकनी मिट्टी; सूखने पर दरारें पड़ती हैं |
विंध्य उच्चभाग
- मिर्ज़ापुर और सोनभद्र में लाल और पीली मृदा — पतली और कम उपजाऊ।
ऊसर: लवणीय–क्षारीय मृदा की समस्या
- मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऊसर (लवणीय और क्षारीय / सोडिक) भूमि के बड़े टुकड़े हैं — उदाहरण के लिए उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़, एटा, मैनपुरी और कानपुर देहात जैसे ज़िलों में।
- कारण: ख़राब जल-निकास, ऊँचा भूजल स्तर, नहरों से रिसाव, वाष्पीकरण के बाद बचे लवण, और कुछ प्राकृतिक कारक।
- सुधार: जिप्सम डालना, लवणों का निक्षालन (leaching), जल-निकास, लवण-सहिष्णु फ़सलें, हरी खाद। उत्तर प्रदेश के ऊसर सुधार कार्यक्रमों (विश्व बैंक की सहायता से चली सोडिक भूमि सुधार परियोजना सहित) ने बड़े क्षेत्र को फिर से उपजाऊ बनाया।
मृदा की अन्य समस्याएँ
| समस्या | कहाँ |
|---|---|
| मृदा अपरदन और बीहड़ | चंबल और यमुना के किनारे (चंबल के बीहड़), बुंदेलखंड |
| जलभराव (waterlogging) | नहर कमान क्षेत्र; तराई |
| पोषक तत्वों की कमी | सघन खेती; ज़िंक की कमी |
| घटता जैविक कार्बन | रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग |
कृषि पर प्रभाव
- खादर और दोआब सघन गेहूँ–धान–गन्ना फ़सल प्रणाली को सहारा देते हैं।
- बुंदेलखंड को सूखा-सहिष्णु फ़सलों (दालें, तिलहन, मोटे अनाज) और जल संरक्षण की ज़रूरत है।
- सुधार के बाद ऊसर भूमि को भी उत्पादक बनाया जा सकता है।
- दाना भरने के समय बढ़ती गर्मी गेहूँ की उपज के लिए ख़तरा है — यह जलवायु परिवर्तन से जुड़ी एक चिंता है।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- मानसून उत्तर प्रदेश में किस दिशा से प्रवेश करता है?
- उत्तर प्रदेश के किस भाग में सबसे कम वर्षा होती है?
- बुंदेलखंड की चार प्रकार की मृदा के नाम बताइए।
- ऊसर भूमि क्या है, और उसका सुधार कैसे किया जाता है?
- लू क्या है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "उत्तर प्रदेश की जलवायु और मृदा समृद्धि भी पैदा करती हैं और असुरक्षा भी।" विवेचना कीजिए।
- उत्तर प्रदेश में मृदा निम्नीकरण के कारणों का परीक्षण कीजिए और उपाय सुझाइए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
अगली UPPSC गाइड ईमेल पर पाएँ
हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।