इस गाइड में
पाठ्यपुस्तकों में मध्यकालीन बिहार को अक्सर कुछ नामों तक सीमित कर दिया जाता है — बख्तियार खिलजी, शेरशाह, पटना। पर पाल शासन के अंत और अंग्रेज़ों के आगमन के बीच की छह शताब्दियों ने बिहार की संस्कृति के बड़े हिस्से को आकार दिया: उसकी सूफ़ी दरगाहें, उसकी सिख विरासत, उसका नगरीय जीवन और विश्व व्यापार में उसका स्थान।
तुर्कों का आगमन
- लगभग 1200 में दिल्ली सल्तनत के संस्थापकों की सेवा में रहे सेनानायक इख़्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने दक्षिण बिहार पर धावा बोला, जिसमें बड़े बौद्ध महाविहार भी शामिल थे (नालंदा और विक्रमशिला पर हमारी मार्गदर्शिका देखें)। फिर वह बंगाल की ओर बढ़ा।
- ओदंतपुरी के स्थल के पास जो नगर विकसित हुआ, वह बिहार कहलाया — विहार (बौद्ध मठ) शब्द से — और बाद में बिहार शरीफ़। पूरे प्रांत का, और बाद में राज्य का, नाम इसी से आया।
दिल्ली और बंगाल के बीच बिहार
अगली तीन शताब्दियों तक बिहार अलग-अलग शक्तियों के बीच एक सीमांत क्षेत्र रहा:
| काल | शासन |
|---|---|
| तेरहवीं शताब्दी | दिल्ली के अधीन तुर्क सूबेदार; बंगाल से बार-बार संघर्ष |
| चौदहवीं शताब्दी | कभी तुगलकों का नियंत्रण, कभी बंगाल के सुल्तानों का |
| पंद्रहवीं शताब्दी | जौनपुर के शर्की सुल्तानों का पश्चिमी बिहार के कुछ भागों पर नियंत्रण; पूर्व पर बंगाल का |
| सोलहवीं शताब्दी का आरंभ | दक्षिण बिहार में लोहानी अफ़ग़ान; फिर शेर खाँ (शेरशाह) का उदय |
उत्तर बिहार (मिथिला) पर लंबे समय तक स्थानीय राजवंशों का शासन रहा, जैसे कर्णाट वंश और बाद में ओइनवार (ओइनिवार) वंश। इन्हीं के समय मैथिली संस्कृति और कवि विद्यापति का उत्कर्ष हुआ।
बिहार के सूफ़ी
बिहार सूफ़ीवाद का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना।
- फिरदौसी सिलसिले के संत शेख शरफुद्दीन अहमद याह्या मनेरी (चौदहवीं शताब्दी) बिहार शरीफ़ में रहे और उपदेश दिए। उनके पत्र (मकतूबात-ए-सदी, "सौ पत्र") भारतीय सूफ़ी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में गिने जाते हैं।
- मनेर शरीफ़ (पटना ज़िला) — मखदूम याह्या मनेरी की दरगाह और शाह दौलत की छोटी दरगाह, जो मुगल काल का एक उल्लेखनीय स्मारक है।
- सूफ़ी दरगाहें सभी धर्मों के लोगों के लिए आस्था के स्थान बन गईं। इससे बिहार की समन्वयवादी (syncretic) संस्कृति को बल मिला।
शेरशाह और सूर वंश
शेरशाह सूरी पर हमारी मार्गदर्शिका देखें — सासाराम के वह प्रशासक, जिनके सुधारों ने मुगल प्रशासन को आकार दिया और जिन्होंने पटना को फिर से खड़ा किया।
बिहार का मुगल सूबा
- अकबर ने 1580 में साम्राज्य को सूबों (प्रांतों) में संगठित किया; बिहार उनमें से एक बना, जिसकी राजधानी पटना थी।
- सूबेदारों में मान सिंह भी थे, जिनके पास रोहतासगढ़ का किला भी था।
- राजस्व व्यवस्था टोडरमल की ज़ब्त पद्धति पर आधारित थी।
पटना बना अज़ीमाबाद
- अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में सूबेदार शहज़ादा अज़ीम-उश-शान (औरंगज़ेब के पोते) ने पटना का नाम अज़ीमाबाद रखा।
- पटना व्यापार, प्रशासन और फ़ारसी तथा उर्दू संस्कृति के केंद्र के रूप में फला-फूला।
गुरु गोविंद सिंह और पटना साहिब
- दसवें सिख गुरु गुरु गोविंद सिंह का जन्म 1666 में पटना में हुआ।
- उनके पिता गुरु तेग बहादुर बिहार आए थे और यहाँ रहे थे।
- तख़्त श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब — सिख धर्म के पाँच तख़्तों (सर्वोच्च धार्मिक पीठों) में से एक — उनके जन्मस्थान पर स्थित है।
- 2017 में पटना में उनकी जयंती की 350वीं वर्षगाँठ (प्रकाश पर्व) बड़े स्तर पर मनाई गई।
यूरोपीय और शोरा
बिहार शोरे (पोटैशियम नाइट्रेट) का एक बड़ा स्रोत था। यह बारूद के लिए ज़रूरी था और यूरोप में इसकी भारी माँग थी।
- अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी ने सत्रहवीं शताब्दी में पटना में एक कारखाना (factory) खोला (इसका पहला प्रयास 1620 में हुआ); डच भी यहाँ मज़बूती से मौजूद थे।
- अन्य निर्यातों में अफ़ीम, वस्त्र और चीनी शामिल थे।
- गंगा पर स्थित होने के कारण पटना एक ऐसा व्यापारिक केंद्र बना, जो उत्तर भारत को बंगाल और समुद्र से जोड़ता था।
इसी व्यापारिक महत्व ने यूरोपीय शक्तियों को बिहार की राजनीति में और गहरे खींचा — जिसका परिणाम अठारहवीं शताब्दी में बक्सर का युद्ध (1764) था। कंपनी शासन में बिहार पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।
स्थापत्य
| स्मारक | स्थान | काल |
|---|---|---|
| शेरशाह का मकबरा | सासाराम | सूर |
| रोहतासगढ़ किला | रोहतास | सूर और मुगल |
| छोटी दरगाह | मनेर शरीफ़ | मुगल (सत्रहवीं शताब्दी का आरंभ) |
| पत्थर की मस्जिद | पटना | मुगल (सत्रहवीं शताब्दी का आरंभ) |
| तख़्त श्री पटना साहिब | पटना | बाद के कालों में पुनर्निर्मित |
समाज और संस्कृति
- मैथिली साहित्य — मिथिला के महान कवि विद्यापति (चौदहवीं–पंद्रहवीं शताब्दी) ने मैथिली, संस्कृत और अवहट्ट में रचना की; उनके गीत आज भी लोकप्रिय हैं।
- पटना में फ़ारसी और उर्दू की साहित्यिक संस्कृति।
- समन्वयवादी परंपराएँ — सूफ़ी दरगाहों और भक्ति काव्य ने सभी समुदायों के लोगों को जोड़ा।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- "बिहार" नाम किस शब्द से बना है?
- शरफुद्दीन मनेरी किस सूफ़ी सिलसिले से जुड़े थे?
- पटना का नाम अज़ीमाबाद किसने रखा?
- गुरु गोविंद सिंह का जन्म कहाँ और कब हुआ?
- किस वस्तु ने यूरोपीय व्यापारियों को बिहार की ओर आकर्षित किया?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "मध्यकालीन बिहार संस्कृतियों का संगम-स्थल था।" सूफ़ीवाद, सिख धर्म और मैथिली साहित्य के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
- मुगल काल में पटना के आर्थिक महत्व का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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