रोहतास ज़िले के सासाराम में एक कृत्रिम झील के बीच लाल बलुआ पत्थर का एक अष्टकोणीय मकबरा खड़ा है, जो सीढ़ीनुमा तलों में ऊपर उठता हुआ एक विशाल गुंबद तक पहुँचता है। यह शेरशाह सूरी का मकबरा है — एक ऐसे व्यक्ति का, जिसने जीवन की शुरुआत बिहार के एक छोटे जागीरदार के बेटे के रूप में की, मुगल बादशाह हुमायूँ को हराया, और उत्तर भारत के शासक के रूप में मुश्किल से पाँच वर्षों में ऐसी प्रशासनिक नींव रखी, जो सदियों तक टिकी रही।
आरंभिक जीवन
- उनका जन्म फरीद के रूप में हुआ (पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में; सटीक वर्ष पर बहस है)। वे सासाराम के एक अफ़ग़ान जागीरदार हसन खाँ सूर के पुत्र थे।
- उन्होंने अपने पिता की जागीर का प्रबंध सँभाला और स्थानीय स्तर पर राजस्व प्रशासन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया।
- परंपरा के अनुसार, दक्षिण बिहार के शासक बहार खाँ लोहानी की सेवा में रहते हुए एक बाघ को मारने पर उन्हें शेर खाँ की उपाधि मिली।
- आगे चलकर वे बिहार के वास्तविक शासक बन गए और उन्होंने रोहतासगढ़ (रोहतास) का किला जीता।
हुमायूँ पर विजय
| युद्ध | वर्ष | स्थान | परिणाम |
|---|---|---|---|
| चौसा | 1539 | बक्सर के पास, बिहार | शेर खाँ ने हुमायूँ को हराया; शेरशाह की उपाधि धारण की |
| कन्नौज (बिलग्राम) | 1540 | उत्तर प्रदेश | हुमायूँ की निर्णायक हार; वह भाग गया और पंद्रह वर्ष निर्वासन में बिताए |
शेरशाह ने 1540 से 1545 में अपनी मृत्यु तक शासन किया। कालिंजर किले की घेराबंदी के दौरान बारूद के एक आकस्मिक विस्फोट में उनकी मृत्यु हुई।
प्रशासन
ढाँचा
| इकाई | अधिकारी |
|---|---|
| सरकार (ज़िला) | शिकदार-ए-शिकदारान (कानून-व्यवस्था), मुंसिफ-ए-मुंसिफान (राजस्व और न्याय) |
| परगना (गाँवों का समूह) | शिकदार, अमीन (राजस्व), फोतदार (खजांची), कारकून (लिपिक) |
| गाँव | मुखिया (मुकद्दम), पटवारी |
अधिकारियों का नियमित रूप से तबादला किया जाता था, ताकि वे स्थानीय स्तर पर अपना शक्ति-आधार न बना सकें।
भू-राजस्व
शेरशाह की राजस्व व्यवस्था उनका सबसे महत्वपूर्ण सुधार थी।
- एक मानक माप से खेती वाली भूमि की पैमाइश (ज़ब्त)।
- भूमि का अच्छी, मध्यम और खराब में वर्गीकरण; औसत उपज की गणना की जाती थी।
- राज्य का हिस्सा औसत उपज का लगभग एक-तिहाई तय किया गया।
- पट्टा — किसान को दिया जाने वाला दस्तावेज़, जिसमें भूमि और देय राजस्व लिखा होता था।
- कबूलियत — किसान द्वारा हस्ताक्षरित स्वीकृति-पत्र, जिसमें वह राजस्व स्वीकार करता था।
- राजस्व नकद या अनाज के रूप में चुकाया जा सकता था।
- संकट के समय राहत (ऋण); अधिकारियों को निर्देश था कि आकलन के समय नरमी और वसूली के समय सख्ती बरतें।
बाद में अकबर के अधीन राजा टोडरमल ने इन सिद्धांतों को आगे विकसित किया (टोडरमल पहले शेरशाह की सेवा में रह चुके थे)।
मुद्रा
- चाँदी का रुपया (लगभग 178 ग्रेन का) और ताँबे का दाम चलाया।
- तब से मुद्रा का नाम रुपया ही बना हुआ है।
सड़कें और सराय
- प्रमुख सड़कों की मरम्मत और निर्माण कराया। इनमें सबसे प्रसिद्ध है सोनारगाँव (बंगाल) से उत्तर-पश्चिम (सिंधु की ओर) जाने वाली सड़क — जिसे बाद में ग्रांड ट्रंक रोड कहा गया (पहले इसका नाम सड़क-ए-आज़म था)।
- सड़कों पर नियमित दूरी पर सराय (विश्राम-गृह) बनवाईं, जिनमें हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग व्यवस्था, कुएँ और छायादार पेड़ थे।
- सराय व्यापार के केंद्र और छोटे कस्बे बन गईं।
डाक व्यवस्था
- पूरे साम्राज्य में समाचार और संदेश तेज़ी से पहुँचाने के लिए सरायों में घोड़े रखे जाते थे — यह एक प्रारंभिक डाक और गुप्तचर तंत्र था।
पुलिस और न्याय
- गाँव के मुखियाओं को अपने क्षेत्र के अपराधों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता था — अपराधी न मिलने पर वे स्वयं उत्तरदायी होते थे। इस कठोर व्यवस्था से सड़कों पर अपराध घटे।
- उस समय के मानकों से न्याय कठोर और निष्पक्ष था।
सेना
- एक मज़बूत स्थायी सेना; अलाउद्दीन खिलजी का अनुसरण करते हुए उन्होंने घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया दर्ज करने (चेहरा) की प्रथा फिर से शुरू की।
पटना
शेरशाह ने (लगभग 1541 में) पटना में एक किला बनवाया और गंगा पर इस स्थान के सामरिक महत्व को पहचाना। पटना फिर से एक बड़े नगर के रूप में उभरा और बाद में बिहार के मुगल प्रांत (सूबा) की राजधानी बना।
सासाराम में उनका मकबरा
- एक कृत्रिम झील के बीच बना विशाल अष्टकोणीय मकबरा, जिस पर एक बड़ा गुंबद है।
- इसे मुगल-पूर्व काल की हिंद-इस्लामी (Indo-Islamic) वास्तुकला के सबसे सुंदर उदाहरणों में गिना जाता है।
विरासत
| क्षेत्र | विरासत |
|---|---|
| राजस्व | अकबर की ज़ब्ती व्यवस्था का आधार |
| मुद्रा | रुपया |
| सड़कें | ग्रांड ट्रंक रोड |
| प्रशासन | सरकार और परगना मुगलों के अधीन भी जारी रहे |
| बिहार | पटना का पुनरुत्थान; सासाराम के स्मारक |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- शेरशाह का मकबरा कहाँ बना है?
- चौसा का युद्ध कहाँ और कब लड़ा गया?
- पट्टा और कबूलियत क्या थे?
- शेरशाह ने चाँदी का कौन-सा सिक्का चलाया?
- शेरशाह की मृत्यु कैसे हुई?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "शेरशाह के सुधारों ने मुगल प्रशासन की नींव रखी।" विवेचना कीजिए।
- शेरशाह की भू-राजस्व व्यवस्था और किसानों पर उसके प्रभाव का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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