इस गाइड में
UPPSC मुख्य परीक्षा (Mains) में हर प्रश्नपत्र वर्णनात्मक है और हर प्रश्नपत्र मेरिट (merit) में गिना जाता है। आपका ज्ञान परीक्षक तक केवल आपके लेखन के ज़रिए पहुँचता है। एक जितना ज्ञान रखने वाले दो अभ्यर्थियों के अंकों में दर्जनों का अंतर हो सकता है, क्योंकि एक सुगठित, ठोस और अच्छी तरह प्रस्तुत उत्तर लिखते हैं और दूसरे लंबे, बिखरे हुए अनुच्छेद।
परीक्षक आपका उत्तर कैसे पढ़ते हैं
दूसरी ओर बैठे व्यक्ति की कल्पना करना मददगार है। UPPSC मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएँ जाँचने वाले परीक्षक एक दिन में दर्जनों कॉपियाँ देख सकते हैं, और हर कॉपी में कई उत्तर होते हैं। उनके पास लंबे अनुच्छेद के बीच में आपका सबसे अच्छा बिंदु खोजने का समय नहीं होता। पहले कुछ सेकंड में वे पहली पंक्ति, उपशीर्षक या बिंदु, उभरकर दिखने वाला कोई उदाहरण या आँकड़ा, और निष्कर्ष देखते हैं। इन्हीं से वे एक धारणा बना लेते हैं, जिसे बाकी उत्तर अधिकतर पुष्ट ही करता है।
इसीलिए ढाँचा इतना मायने रखता है। सुगठित उत्तर परीक्षक को एक नज़र में दिखा देता है कि आपने प्रश्न समझा, उसके सभी हिस्सों को कवर किया, और उसमें कुछ ठोस जोड़ा। शब्दों की दीवार — सही होने पर भी — परीक्षक से ऐसी मेहनत माँगती है जिसके लिए शायद उनके पास समय न हो।
प्रश्न पढ़ें
एक भी शब्द लिखने से पहले प्रश्न को दो बार पढ़ें और चार चीज़ें पहचानें: निर्देशक शब्द (directive word), प्रश्न के हिस्से, उसका दायरा, और शब्द सीमा।
निर्देशक शब्द बताता है कि किस तरह का उत्तर अपेक्षित है:
| शब्द | क्या माँगता है |
|---|---|
| विवेचना कीजिए / Discuss | अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल करें |
| परीक्षण कीजिए / Examine | प्रमाण के साथ विस्तार से जाँच करें |
| विश्लेषण कीजिए / Analyse | हिस्सों में बाँटें; उनके आपसी संबंध दिखाएँ |
| मूल्यांकन कीजिए / Evaluate | ताकत और कमज़ोरियाँ आँकें; निर्णय दें |
| टिप्पणी कीजिए / Comment | जानकारी पर आधारित राय दें |
| स्पष्ट कीजिए / Explain | कारणों के साथ स्पष्ट करें |
इसके बाद हिस्से देखें। कई प्रश्नों में दो या तीन माँगें होती हैं — "कारणों का परीक्षण कीजिए और उपाय सुझाइए" — और जो उत्तर केवल पहला हिस्सा लिखते हैं, वे आधे तक अंक गँवा देते हैं। दायरा जाँचें: प्रश्न भारत के बारे में है, उत्तर प्रदेश के बारे में, या दोनों? अंत में शब्द सीमा और अंक नोट करें, और उसी के अनुसार लंबाई तय करें। 125 शब्दों वाले प्रश्न के लिए 300 शब्द लिखने से अतिरिक्त अंक नहीं मिलते; इससे अगले उत्तर का समय छिन जाता है।
योजना (एक मिनट)
हाशिये में जल्दी से लिख लें:
- 3–5 मुख्य बिंदु;
- 1–2 उदाहरण (जहाँ प्रासंगिक हो, कम से कम एक उत्तर प्रदेश से);
- एक आँकड़ा;
- निष्कर्ष के लिए एक पंक्ति।
ढाँचा
| हिस्सा | भाग | सामग्री |
|---|---|---|
| भूमिका | ~10% | परिभाषा, तथ्य, संदर्भ |
| मुख्य भाग | ~75–80% | उपशीर्षकों के नीचे बिंदु या छोटे अनुच्छेद |
| निष्कर्ष | ~10–15% | संतुलित आगे की राह |
हल किया गया उदाहरण
प्रश्न: "बुंदेलखंड की कृषि समस्याओं के कारणों का परीक्षण कीजिए और उपाय सुझाइए।" (GS VI)
भूमिका: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैला बुंदेलखंड भारत के सबसे अधिक सूखा-प्रवण क्षेत्रों में से है; इसके उत्तर प्रदेश वाले सात ज़िले बार-बार फ़सल की बर्बादी और पलायन झेलते हैं।
मुख्य भाग — कारण:
- प्राकृतिक: कम और अनियमित वर्षा; कठोर पथरीला भूभाग; पतली मिट्टियाँ; ऊँचा तापमान।
- जल: सीमित भूजल; पारंपरिक तालाब (चंदेलों के समय बने) जर्जर हालत में।
- आर्थिक: छोटी जोतें; कर्ज़; कम सिंचाई।
- सामाजिक: मवेशियों को खुला छोड़ देने की प्रथा (अन्ना प्रथा), जिससे फ़सलों को नुकसान होता है।
मुख्य भाग — उपाय:
- जल: पारंपरिक तालाबों का जीर्णोद्धार; खेत तालाब; केन–बेतवा लिंक परियोजना; ड्रिप सिंचाई।
- कृषि: सूखा सहने वाली फ़सलें (दालें, तिलहन, मोटे अनाज); बागवानी।
- अवसंरचना: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे; रक्षा औद्योगिक गलियारे के नोड (झाँसी, चित्रकूट)।
- आजीविका: डेयरी, बकरी पालन, गैर-कृषि काम।
निष्कर्ष: जल संरक्षण, उपयुक्त फ़सलों और गैर-कृषि रोज़गार का मेल बुंदेलखंड को सक्षम और टिकाऊ बना सकता है।
उत्तर प्रदेश के उदाहरणों और आँकड़ों का उपयोग
| विषय | उत्तर प्रदेश के उदाहरण |
|---|---|
| विरासत | सारनाथ; ताजमहल; कुंभ (UNESCO) |
| शिल्प | ODOP — चिकनकारी, बनारसी रेशम, मुरादाबाद का पीतल |
| अवसंरचना | पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा एक्सप्रेसवे |
| शासन | पुलिस कमिश्नरेट; ई-गवर्नेंस |
| पर्यावरण | दुधवा; रामसर आर्द्रभूमियाँ; गंगा |
| सामाजिक | गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण; बालिका शिक्षा |
अपने नोट्स में हर आँकड़े का स्रोत और वर्ष लिखें।
आरेख
- उत्तर प्रदेश की नदियों, क्षेत्रों और एक्सप्रेसवे के मानचित्र।
- योजनाओं के फ्लोचार्ट।
- विकल्पों की तुलना करने वाली तालिकाएँ।
हिंदी माध्यम के लिए सुझाव
- मानक शब्दों का लगातार प्रयोग करें (माध्यम पर हमारी गाइड देखें)।
- वर्तनी और लिंग के मेल (संज्ञा-क्रिया का लिंग) पर ध्यान दें।
- वाक्य छोटे और स्पष्ट रखें।
आम कमियाँ, और उन्हें कैसे सुधारें
| कमी | सुधार |
|---|---|
| लंबी भूमिका जो प्रश्न को ही दोहराती है | संदर्भ की एक पंक्ति या परिभाषा, फिर आगे बढ़ें |
| दो हिस्सों वाले प्रश्न का केवल एक हिस्सा लिखना | योजना बनाने से पहले हर माँग को रेखांकित करें |
| सामान्य बिंदु जो किसी भी राज्य पर लागू हों | उत्तर प्रदेश से जुड़ा एक तथ्य या उदाहरण जोड़ें |
| निष्कर्ष न होना | हमेशा संतुलित, आगे की ओर देखती पंक्ति से अंत करें |
| न पढ़ी जा सकने वाली लिखावट | थोड़ा धीमे लिखें; बिंदुओं के बीच जगह छोड़ें |
समय प्रबंधन
- अंकों के अनुसार समय बाँटें।
- समय कम पड़े तो आख़िरी उत्तर बिंदुओं में लिखें।
- छूटे हुए प्रश्नों की जाँच के लिए पाँच मिनट बचाएँ।
उत्तर लेखन (answer writing) के अभ्यास का क्रम
| चरण | अभ्यास |
|---|---|
| महीने 4–6 | रोज़ एक उत्तर, बिना समय सीमा के; ढाँचे पर ध्यान |
| महीने 7–9 | रोज़ दो उत्तर, समय बाँधकर; हर सप्ताह प्रतिक्रिया |
| प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के बाद | हर सप्ताह पूरे प्रश्नपत्र; कमज़ोर उत्तर दोबारा लिखें |
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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