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प्राचीन उत्तर प्रदेश: सिनौली से वैदिक युग तक

महाजनपदों से बहुत पहले, आज का उत्तर प्रदेश विंध्य के पाषाणकालीन शिकारियों, दक्षिण एशिया के सबसे आरंभिक धान उगाने वाले किसानों, दोआब की हड़प्पाई बस्तियों और रथों के साथ दफ़नाए गए सिनौली के योद्धाओं का घर था। GS V और प्रारंभिक परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश के प्रागितिहास और आरंभिक इतिहास की गाइड।

27 Sept 2026 4 मिनट में पढ़ें

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इस गाइड में
  1. उत्तर प्रदेश में पाषाण काल
  2. आरंभिक कृषि
  3. दोआब में हड़प्पाई सीमांत
  4. सिनौली
  5. ताम्र निधि और OCP संस्कृतियाँ
  6. चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) संस्कृति
  7. वैदिक युग और उत्तर प्रदेश
  8. UPPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
  9. अभ्यास

2018 में बागपत जिले के सिनौली में एक शवाधान स्थल (burial ground) की खुदाई कर रहे पुरातत्वविदों को ऐसा कुछ मिला जो उपमहाद्वीप में पहले कभी नहीं देखा गया था: शवाधानों में ताँबे से सजे ताबूतों, तलवारों और ढालों के साथ रखे रथों के अवशेष, जिनका काल लगभग ईसा पूर्व दूसरी सहस्राब्दी का आरंभ माना गया। इस खोज ने इतिहासकारों को याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश के सुदूर अतीत का कितना बड़ा हिस्सा अभी सामने आ रहा है। UPPSC में उत्तर प्रदेश के प्रागितिहास और आरंभिक इतिहास से प्रश्न लगातार अधिक पूछे जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में पाषाण काल

पुरापाषाण काल (Palaeolithic)

  • बेलन घाटी (प्रयागराज और मिर्ज़ापुर का विंध्य क्षेत्र) में भारत के पाषाणकालीन संस्कृतियों के सबसे पूर्ण क्रमों में से एक मिलता है — निम्न पुरापाषाण काल के औज़ारों से लेकर बाद के कालों तक।
  • सोन और बेलन घाटियों तथा दक्षिणी उत्तर प्रदेश की विंध्य पहाड़ियों में पत्थर के औज़ार इस्तेमाल करने वाले शिकारी-संग्राहक रहते थे।

मध्यपाषाण काल (Mesolithic)

भारत के कुछ सबसे महत्वपूर्ण मध्यपाषाणकालीन स्थल उत्तर प्रदेश में हैं, विशेषकर गंगा मैदान के प्रतापगढ़ क्षेत्र में:

स्थलजिलामहत्व
सराय नाहर रायप्रतापगढ़मध्यपाषाणकालीन शवाधान; सूक्ष्म पाषाण उपकरण (microliths)
महदहाप्रतापगढ़शवाधान, जिनमें एक युगल शवाधान भी है; पशुओं की हड्डियाँ
दमदमाप्रतापगढ़अनेक शवाधान; स्थायी जीवन के साक्ष्य
चोपनी मांडोप्रयागराज (बेलन घाटी)स्थायी जीवन की ओर संक्रमण; आरंभिक मृद्भांड

आरंभिक कृषि

मध्य गंगा मैदान और विंध्य के सीमांत क्षेत्र में दक्षिण एशिया में धान की खेती के कुछ सबसे आरंभिक साक्ष्य मिलते हैं:

स्थलजिलाटिप्पणी
लहुरादेवासंत कबीर नगरगंगा मैदान में धान के सबसे आरंभिक साक्ष्यों में से एक (दावा ईसा पूर्व कई हज़ार वर्ष का)
कोल्डिहवाप्रयागराज (बेलन घाटी)आरंभिक धान; नवपाषाणकालीन बस्ती
महगड़ाप्रयागराजपशुओं के बाड़ों वाला नवपाषाणकालीन गाँव

दोआब में हड़प्पाई सीमांत

हड़प्पा (सिंधु-सरस्वती) सभ्यता पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैली थी:

स्थलजिलामहत्व
आलमगीरपुरमेरठइसे अक्सर हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल कहा जाता है; हिंडन नदी पर
हुलाससहारनपुरउत्तर हड़प्पाई बस्ती
अन्य उत्तर हड़प्पाई स्थलपश्चिमी उत्तर प्रदेशसभ्यता के अंतिम चरण और पूर्व की ओर उसके प्रसार को दिखाते हैं

सिनौली

  • कहाँ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बागपत जिला।
  • क्या: एक बड़ा शवाधान स्थल, जिसकी पहली खुदाई 2005–06 में हुई और बड़ी खोजें 2018 में हुईं।
  • प्राप्तियाँ: ताँबे से सजे ताबूतों वाले शवाधान, रथ (ठोस पहियों वाले), तलवारें, ढालें, शिरस्त्राण (helmets), मृद्भांड और आभूषण।
  • काल: लगभग ईसा पूर्व दूसरी सहस्राब्दी का आरंभ।
  • महत्व: गंगा-यमुना दोआब में रथ रखने वाली एक योद्धा संस्कृति का साक्ष्य; पुरातत्वविद इसे ताम्र निधि (Copper Hoard) और गेरुए रंग के मृद्भांड (Ochre Coloured Pottery, OCP) संस्कृतियों से जोड़ते हैं।

सिनौली की व्याख्या — जिसमें हड़प्पावासियों और वैदिक लोगों से इसका संबंध भी शामिल है — पर अभी जीवंत बहस चल रही है।

ताम्र निधि और OCP संस्कृतियाँ

  • ताम्र निधियाँ — गंगा-यमुना दोआब में मिले ताँबे की वस्तुओं के संग्रह (हार्पून, तलवारें, कुल्हाड़ियाँ, मानवाकृतियाँ)।
  • गेरुए रंग के मृद्भांड (OCP) — दोआब की एक मृद्भांड संस्कृति, जो इन निधियों से जुड़ी है।

चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) संस्कृति

  • चित्रित धूसर मृद्भांड (Painted Grey Ware, PGW) संस्कृति (लगभग ईसा पूर्व पहली सहस्राब्दी का आरंभ) पश्चिमी गंगा मैदान में उत्तर वैदिक काल से जुड़ी है।
  • उत्तर प्रदेश के प्रमुख PGW स्थलों में हस्तिनापुर, अहिच्छत्र, मथुरा, कौशाम्बी और अतरंजीखेड़ा शामिल हैं।
  • इस काल में लोहे का उपयोग बढ़ा।

वैदिक युग और उत्तर प्रदेश

  • उत्तर वैदिक काल में वैदिक संस्कृति का केंद्र पूर्व की ओर खिसककर कुरु-पांचाल क्षेत्र में आ गया, जिसका बड़ा हिस्सा आज के पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में है।
  • परंपरा में कुरुओं से जुड़ा हस्तिनापुर, और पांचालों से जुड़े अहिच्छत्र और कांपिल्य उत्तर प्रदेश में हैं।
  • और पूर्व में कोसल और काशी शक्तिशाली राज्यों के रूप में उभरे, जिससे महाजनपदों का युग आया (हमारी अगली गाइड देखें)।

UPPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

  • प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में स्थलों और उनके जिलों के बारे में पूछा जाता है।
  • GS V में प्रारंभिक भारतीय सभ्यता में उत्तर प्रदेश के योगदान पर प्रश्न आ सकता है।
  • सिनौली की खोजें और प्रतापगढ़ के मध्यपाषाणकालीन स्थल भारतीय प्रागितिहास में उत्तर प्रदेश को एक विशिष्ट स्थान देते हैं।

अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा शैली:

  1. उत्तर प्रदेश का कौन-सा हड़प्पाई स्थल सबसे पूर्वी माना जाता है?
  2. 2018 में रथ-शवाधान कहाँ खोजे गए?
  3. प्रतापगढ़ के दो मध्यपाषाणकालीन शवाधान स्थलों के नाम बताइए।
  4. दक्षिणी उत्तर प्रदेश की कौन-सी घाटी पाषाण काल का लंबा क्रम दिखाती है?
  5. उत्तर प्रदेश के दो चित्रित धूसर मृद्भांड स्थलों के नाम बताइए।

मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:

  • "उत्तर प्रदेश में पाषाण काल से ऐतिहासिक काल तक मानव बसावट का निरंतर अभिलेख मिलता है।" उदाहरण सहित विवेचना कीजिए।
  • सिनौली की खोजों के महत्व का परीक्षण कीजिए।

तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।

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