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गोमती के किनारे बसे जौनपुर में ऐसी मस्जिदें हैं जैसी भारत में और कहीं नहीं हैं। इनके प्रार्थना-कक्षों के सामने विशाल प्रवेश-द्वार (प्रोपिलॉन, propylon) खड़े हैं, जो मिस्र के मंदिरों के तोरण-द्वारों जैसे ऊँचे उठते हैं। इन्हें शर्की सुल्तानों ने बनवाया था। उन्होंने पंद्रहवीं शताब्दी के अधिकांश भाग में जौनपुर से एक स्वतंत्र राज्य पर शासन किया और उसे शिक्षा और संस्कृति का ऐसा केंद्र बना दिया कि उसे शिराज़-ए-हिंद — "भारत का शिराज़" — कहा जाने लगा। उत्तर प्रदेश के सल्तनतकालीन इतिहास में शर्की वंश सबसे विशिष्ट अध्याय है।
गोरी की विजय
| घटना | वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| तराइन का दूसरा युद्ध | 1192 | मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया (आज के हरियाणा में) |
| चंदावर का युद्ध | 1194 | मुहम्मद गोरी ने कन्नौज और वाराणसी के गहड़वाल राजा जयचंद को हराया (आज के फ़िरोज़ाबाद/इटावा के पास) |
चंदावर के बाद कन्नौज और वाराणसी सहित गंगा का मैदान तुर्क शासन के अधीन आ गया। कुतुबुद्दीन ऐबक ने इन विजयों को सुदृढ़ किया और दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate) की स्थापना की (1206)।
सल्तनत के अधीन उत्तर प्रदेश
- सल्तनत ने अपने क्षेत्र को इक्ताओं में बाँटा था। इक्ता राजस्व का वह क्षेत्र था जो सैनिक अधिकारियों (इक्तादार या मुक्ती) को सौंपा जाता था।
- उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण इक्ताओं में बदायूँ, कोल (अलीगढ़), अवध, कड़ा (प्रयागराज के पास) और कन्नौज शामिल थीं।
- इल्तुतमिश सुल्तान बनने से पहले बदायूँ के सूबेदार रहे थे।
- अलाउद्दीन खिलजी गद्दी हथियाने (1296) से पहले कड़ा के सूबेदार थे।
- तुगलकों को दोआब में विद्रोहों से जूझना पड़ा। मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा दोआब में भारी कर लगाने से किसान गाँव छोड़कर भागे और विद्रोह हुए।
जौनपुर की स्थापना
- फ़िरोज़ शाह तुगलक ने 1359 में जौनपुर की स्थापना की। कहा जाता है कि उन्होंने इसका नाम अपने चचेरे भाई जूना खाँ (मुहम्मद बिन तुगलक) के नाम पर रखा।
शर्की वंश (1394–1479)
| शासक | मुख्य बातें |
|---|---|
| मलिक सरवर | तुगलक दरबार के एक अमीर, जिन्हें 1394 में मलिक-उस-शर्क ("पूर्व का स्वामी") की उपाधि मिली; तैमूर के आक्रमण (1398) से दिल्ली कमज़ोर होने के बाद व्यावहारिक रूप से स्वतंत्र हो गए |
| मुबारक शाह | शाही उपाधि धारण की |
| इब्राहिम शाह शर्की (लगभग 1402–1440) | सबसे महान शासक; कला और विद्या के संरक्षक; अटाला मस्जिद बनवाई |
| महमूद शाह | निर्माण कार्य जारी रखा |
| हुसैन शाह शर्की | अंतिम शासक; जामा मस्जिद पूरी करवाई; 1479 में बहलोल लोदी से पराजित |
शर्की स्थापत्य
| स्मारक | विशेषताएँ |
|---|---|
| अटाला मस्जिद (1408) | सबसे उत्कृष्ट शर्की मस्जिद; प्रार्थना-कक्ष के सामने विशाल प्रोपिलॉन द्वार |
| झंझरी मस्जिद | अपनी बारीक जाली के लिए प्रसिद्ध |
| लाल दरवाज़ा मस्जिद | छोटी, पर सुरुचिपूर्ण |
| जामा मस्जिद (जौनपुर) | भव्य आकार; हुसैन शाह के समय पूरी हुई |
शर्की शैली की विशेषताएँ: विशाल प्रोपिलॉन; मीनारों का अभाव; धरन-शहतीर (trabeate) और मेहराब (arcuate) — दोनों तकनीकों का एक साथ प्रयोग; कुछ इमारतों में हिंदू कारीगर और पुराने मंदिरों की सामग्री।
सांस्कृतिक जीवन
- जौनपुर ने विद्वानों, कवियों और संगीतकारों को आकर्षित किया — इसी से वह शिराज़-ए-हिंद कहलाया।
- हुसैन शाह शर्की का नाम संगीत से जुड़ा है। परंपरा उन्हें ख़याल से जुड़ी शैलियों के विकास और नए रागों (जैसे जौनपुरी) का श्रेय देती है।
- मदरसों ने जौनपुर को इस्लामी शिक्षा का केंद्र बना दिया।
लोदी वंश और आगरा
- बहलोल लोदी ने जौनपुर को अपने राज्य में मिला लिया।
- सिकंदर लोदी ने लगभग 1504 में (एक पुरानी बस्ती के स्थान पर) आगरा की स्थापना की और उसे अपनी राजधानी बनाया। यहीं से आगरा के शाही नगर बनने की शुरुआत हुई।
- सिकंदर लोदी को गज़-ए-सिकंदरी (माप की एक इकाई) चलाने का श्रेय भी दिया जाता है। वे गुलरुखी उपनाम से कविता लिखते थे।
- इब्राहिम लोदी को बाबर ने पानीपत (1526) में हराया।
सल्तनत काल में धर्म और समाज
- सूफ़ी सिलसिले — चिश्ती, सुहरावर्दी और अन्य — पूरे उत्तर प्रदेश में फैले।
- भक्ति आंदोलन बढ़ा। वाराणसी में कबीर और रैदास (रविदास) ने जाति और कर्मकांड के विरुद्ध आवाज़ उठाई (उत्तर प्रदेश के भक्ति संतों पर हमारी गाइड देखें)।
- एक साझी संस्कृति ने आकार लिया — साझे त्योहार, संगीत और भाषा (हिंदवी का विकास)।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) जैसे प्रश्न:
- 1194 में चंदावर में मुहम्मद गोरी ने किसे हराया?
- जौनपुर की स्थापना किसने और कब की?
- किस शर्की शासक ने अटाला मस्जिद बनवाई?
- शर्की राज्य का अंत किसने किया?
- आगरा को राजधानी के रूप में किसने बसाया?
मुख्य परीक्षा (Mains) जैसे प्रश्न:
- "शर्कियों के अधीन जौनपुर हिंद-इस्लामी संस्कृति का केंद्र था।" विवेचना कीजिए।
- शर्की स्थापत्य की विशिष्ट विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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