Skip to content
Free shipping above ₹499
Oakspine Press

राष्ट्रीय आंदोलन में बिहार, 1905–1947

1908 के मुज़फ़्फ़रपुर बम कांड और 1912 के बांकीपुर कांग्रेस से लेकर चंपारण, असहयोग, चौकीदारी कर-विरोधी अभियान और 1937 के पहले कांग्रेस मंत्रिमंडल तक — स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की भूमिका, चरण-दर-चरण, उन व्यक्तियों और स्थानों के साथ, जिन पर BPSC प्रश्न पूछता है।

5 Oct 2026 4 मिनट में पढ़ें

Read this guide in English →
इस गाइड में
  1. स्वदेशी और क्रांतिकारी गतिविधियाँ (1905–1912)
  2. अलग प्रांत का आंदोलन
  3. बांकीपुर कांग्रेस (1912)
  4. चंपारण और उसके बाद (1917–1919)
  5. असहयोग आंदोलन (1920–22)
  6. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34)
  7. 1934 का भूकंप और राहत कार्य
  8. प्रांतीय स्वायत्तता और 1937 का मंत्रिमंडल
  9. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
  10. किसान आंदोलन
  11. बिहार के प्रमुख नेता
  12. अभ्यास

स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की भूमिका को कभी-कभी दो शब्दों में समेट दिया जाता है — चंपारण और भारत छोड़ो। दोनों अपनी प्रसिद्धि के हकदार हैं। पर 1905 से 1947 के बीच बिहार ने हर चरण में योगदान दिया: क्रांतिकारी, वकील और पत्रकार, किसान नेता, गांधीवादी रचनात्मक कार्यकर्ता और, 1937 में, पहले निर्वाचित कांग्रेस मंत्रिमंडलों में से एक।

स्वदेशी और क्रांतिकारी गतिविधियाँ (1905–1912)

  • बंगाल विभाजन (1905) के विरुद्ध स्वदेशी आंदोलन को बिहार में भी समर्थन मिला, जो उस समय बंगाल प्रेसिडेंसी का हिस्सा था।
  • मुज़फ़्फ़रपुर बम कांड (30 अप्रैल 1908): खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मुज़फ़्फ़रपुर में एक बग्घी पर बम फेंका, यह मानकर कि उसमें अलोकप्रिय मजिस्ट्रेट किंग्सफ़ोर्ड है। इसके बजाय दो अंग्रेज़ महिलाएँ मारी गईं। गिरफ़्तारी से बचने के लिए प्रफुल्ल चाकी ने खुद को गोली मार ली; केवल अठारह वर्ष के खुदीराम बोस को अगस्त 1908 में मुज़फ़्फ़रपुर में फाँसी दी गई।
  • बिहार प्रांतीय सम्मेलन (Bihar Provincial Conference) की स्थापना हुई (इसका पहला अधिवेशन 1908 में पटना में हुआ), जिससे बिहार के नेताओं को एक मंच मिला।

अलग प्रांत का आंदोलन

बिहार के शिक्षित नेताओं — सच्चिदानंद सिन्हा, महेश नारायण, अली इमाम, मज़हरुल हक़ और अन्य — ने अलग प्रांत के लिए अभियान चलाया। बिहार टाइम्स (1894) जैसे समाचार-पत्रों ने बिहार का पक्ष रखा। 1912 में बिहार और उड़ीसा प्रांत बना। बिहार के गठन पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।

बांकीपुर कांग्रेस (1912)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 27वाँ अधिवेशन दिसंबर 1912 में बांकीपुर (पटना) में हुआ, जिसकी अध्यक्षता आर. एन. मुधोलकर ने की — यह बिहार में कांग्रेस का पहला अधिवेशन था।

चंपारण और उसके बाद (1917–1919)

  • चंपारण सत्याग्रह (1917) — भारत में गांधी का पहला सत्याग्रह (इस पर हमारी अलग मार्गदर्शिका देखें)।
  • इसने राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा और ब्रजकिशोर प्रसाद जैसे नेताओं को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा।
  • रौलट सत्याग्रह (1919) को बिहार में समर्थन मिला।

असहयोग आंदोलन (1920–22)

  • बिहार ने ज़ोरदार प्रतिक्रिया दी — अदालतों, स्कूलों और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार; शराब की दुकानों पर धरना।
  • मज़हरुल हक़ ने पटना में सदाकत आश्रम के लिए ज़मीन दान की, जो बिहार में कांग्रेस का मुख्यालय बना।
  • राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान बिहार विद्यापीठ का उद्घाटन गांधी ने फ़रवरी 1921 में सदाकत आश्रम में किया। मज़हरुल हक़ इसके कुलाधिपति और राजेंद्र प्रसाद इसके प्राचार्य बने।
  • मज़हरुल हक़ ने द मदरलैंड (The Motherland) समाचार-पत्र भी शुरू किया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34)

  • नमक सत्याग्रह: बिहार में कई जगहों पर नमक कानून तोड़े गए; पटना में स्वयंसेवकों ने नखास तालाब क्षेत्र के पास नमक बनाया।
  • चौकीदारी कर-विरोधी अभियान: बिहार चौकीदारी कर के विरुद्ध अपने अभियान के लिए जाना गया (यह कर गाँव के चौकीदारों के खर्च के लिए लिया जाता था, जिन्हें औपनिवेशिक पुलिस का औज़ार माना जाता था)। कई गाँवों ने कर देने से इनकार किया और उन्हें ज़ब्ती और दमन झेलना पड़ा।
  • बिहपुर (भागलपुर ज़िला): 1930 में सत्याग्रहियों पर पुलिस कार्रवाई हुई, जिसमें राजेंद्र प्रसाद घायल हुए; इस घटना ने व्यापक ध्यान खींचा।
  • विदेशी कपड़ों और शराब का बहिष्कार।
  • महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

1934 का भूकंप और राहत कार्य

15 जनवरी 1934 के भीषण बिहार–नेपाल भूकंप ने उत्तर बिहार को तबाह कर दिया। कांग्रेस नेताओं, विशेषकर राजेंद्र प्रसाद, ने बड़े पैमाने पर राहत कार्य संगठित किया (बिहार केंद्रीय राहत समिति, Bihar Central Relief Committee), जिससे जनता के साथ कांग्रेस का जुड़ाव मज़बूत हुआ। बिहार की आपदाओं पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।

प्रांतीय स्वायत्तता और 1937 का मंत्रिमंडल

  • भारत शासन अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935) के तहत 1937 के प्रांतीय चुनावों में कांग्रेस को बिहार में बहुमत मिला।
  • श्रीकृष्ण सिंह ("श्री बाबू") जुलाई 1937 में प्रीमियर (प्रधानमंत्री, यानी प्रांत के मुख्यमंत्री) बने — इससे पहले अप्रैल–जुलाई 1937 में मोहम्मद यूनुस की अल्पकालिक अंतरिम सरकार रही थी — और अनुग्रह नारायण सिन्हा वरिष्ठ मंत्री बने।
  • मंत्रिमंडल ने काश्तकारी सुधार, मद्यनिषेध और शिक्षा पर कदम उठाए।
  • बिना परामर्श के भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल किए जाने के विरोध में इसने अन्य कांग्रेस मंत्रिमंडलों के साथ 1939 में इस्तीफ़ा दे दिया।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

बिहार में देश के सबसे तीव्र भारत छोड़ो आंदोलनों में से एक चला — इस पर हमारी अलग मार्गदर्शिका देखें, जिसमें पटना सचिवालय के शहीद और हज़ारीबाग जेल से जयप्रकाश नारायण का भागना भी शामिल है।

किसान आंदोलन

कांग्रेस के साथ-साथ स्वामी सहजानंद सरस्वती ने किसान सभा खड़ी की, जिसने बिहार को संगठित किसान राजनीति का केंद्र बना दिया — इस पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।

बिहार के प्रमुख नेता

नेतायोगदान
राजेंद्र प्रसादचंपारण; कांग्रेस अध्यक्ष; बाद में भारत के पहले राष्ट्रपति
मज़हरुल हक़सदाकत आश्रम; बिहार विद्यापीठ; हिंदू–मुस्लिम एकता
सच्चिदानंद सिन्हाअलग प्रांत का आंदोलन; संविधान सभा के पहले (अस्थायी) अध्यक्ष
श्रीकृष्ण सिंहपहले कांग्रेसी प्रीमियर (1937) और स्वतंत्रता के बाद बिहार के पहले मुख्यमंत्री
अनुग्रह नारायण सिन्हाचंपारण; 1937 में और स्वतंत्रता के बाद मंत्री
जयप्रकाश नारायणसमाजवादी नेता; भारत छोड़ो आंदोलन
स्वामी सहजानंद सरस्वतीकिसान सभा
ब्रजकिशोर प्रसादचंपारण; विधायक

अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:

  1. 1908 में मुज़फ़्फ़रपुर में बम किसने फेंका, और वह किसके लिए था?
  2. बिहार में कांग्रेस का पहला अधिवेशन कहाँ और कब हुआ?
  3. सदाकत आश्रम के लिए ज़मीन किसने दान की?
  4. चौकीदारी कर-विरोधी अभियान क्या था?
  5. 1937 में बिहार के पहले कांग्रेस मंत्रिमंडल का नेतृत्व किसने किया, और उससे पहले की अंतरिम सरकार किसके नेतृत्व में थी?

मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:

  • 1905 से 1942 तक भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में बिहार के योगदान का विवरण दीजिए।
  • स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार में गांधीवादी रचनात्मक कार्य की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।

अगली BPSC गाइड ईमेल पर पाएँ

हर हफ़्ते नई गाइड। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें सदस्यता छोड़ें।

और पढ़ें

BPSCBihar Historyचंपारण 1917: भारत में गांधी का पहला सत्याग्रहचंपारण के एक ज़िद्दी काश्तकार ने लखनऊ से कानपुर, अहमदाबाद और फिर कलकत्ता तक गांधी का पीछा किया, जब तक वे नील किसानों की दुर्दशा देखने को राज़ी नहीं हो गए। अप्रैल 1917 में गांधी ने ज़िला छोड़ने के आदेश की अवहेलना की और भारत की धरती पर अपना पहला सत्याग्रह शुरू किया। कारण, घटनाएँ, टीम, 1918 का अधिनियम, मुख्य परीक्षा का आदर्श उत्तर और MCQ। 8 min read·4 Oct 2026BPSCBihar Historyजनजातीय विद्रोह: संथाल हूल, बिरसा मुंडा, ताना भगत2000 से पहले छोटानागपुर के जंगल और संथाल परगना की पहाड़ियाँ बिहार का हिस्सा थीं — और यहीं से भारत में औपनिवेशिक शासन का सबसे तीखा प्रतिरोध हुआ। तिलका माँझी, कोल विद्रोह, संथाल हूल, बिरसा मुंडा का उलगुलान और ताना भगत: कारण, नेता और विरासत। 4 min read·3 Oct 2026BPSCBihar Historyपटना में वहाबी आंदोलनउन्नीसवीं शताब्दी में चार दशकों से अधिक समय तक पटना एक ऐसे आंदोलन का संगठनात्मक केंद्र रहा, जो भारत की उत्तर-पश्चिमी सीमा पर औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध युद्ध के लिए धन और स्वयंसेवक जुटाता था। इसका नेतृत्व किसने किया, इसकी मान्यताएँ क्या थीं, अंग्रेज़ों ने मुकदमों की एक शृंखला से इसे कैसे कुचला, और इतिहासकार इसका मूल्यांकन कैसे करते हैं। 4 min read·2 Oct 2026BPSCBihar Historyकुँवर सिंह और बिहार में 1857लगभग अस्सी वर्ष की आयु में जगदीशपुर के ज़मींदार ने 1857 के विद्रोह के सबसे उल्लेखनीय अभियानों में से एक का नेतृत्व किया — पूरे उत्तर भारत में कूच, घायल बाँह के साथ गंगा पार करना, और मृत्यु से कुछ दिन पहले घर लौटकर अंतिम जीत। कुँवर सिंह की कहानी और बिहार में विद्रोह का व्यापक रूप। 4 min read·1 Oct 2026