इस गाइड में
- स्वदेशी और क्रांतिकारी गतिविधियाँ (1905–1912)
- अलग प्रांत का आंदोलन
- बांकीपुर कांग्रेस (1912)
- चंपारण और उसके बाद (1917–1919)
- असहयोग आंदोलन (1920–22)
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34)
- 1934 का भूकंप और राहत कार्य
- प्रांतीय स्वायत्तता और 1937 का मंत्रिमंडल
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
- किसान आंदोलन
- बिहार के प्रमुख नेता
- अभ्यास
स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की भूमिका को कभी-कभी दो शब्दों में समेट दिया जाता है — चंपारण और भारत छोड़ो। दोनों अपनी प्रसिद्धि के हकदार हैं। पर 1905 से 1947 के बीच बिहार ने हर चरण में योगदान दिया: क्रांतिकारी, वकील और पत्रकार, किसान नेता, गांधीवादी रचनात्मक कार्यकर्ता और, 1937 में, पहले निर्वाचित कांग्रेस मंत्रिमंडलों में से एक।
स्वदेशी और क्रांतिकारी गतिविधियाँ (1905–1912)
- बंगाल विभाजन (1905) के विरुद्ध स्वदेशी आंदोलन को बिहार में भी समर्थन मिला, जो उस समय बंगाल प्रेसिडेंसी का हिस्सा था।
- मुज़फ़्फ़रपुर बम कांड (30 अप्रैल 1908): खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मुज़फ़्फ़रपुर में एक बग्घी पर बम फेंका, यह मानकर कि उसमें अलोकप्रिय मजिस्ट्रेट किंग्सफ़ोर्ड है। इसके बजाय दो अंग्रेज़ महिलाएँ मारी गईं। गिरफ़्तारी से बचने के लिए प्रफुल्ल चाकी ने खुद को गोली मार ली; केवल अठारह वर्ष के खुदीराम बोस को अगस्त 1908 में मुज़फ़्फ़रपुर में फाँसी दी गई।
- बिहार प्रांतीय सम्मेलन (Bihar Provincial Conference) की स्थापना हुई (इसका पहला अधिवेशन 1908 में पटना में हुआ), जिससे बिहार के नेताओं को एक मंच मिला।
अलग प्रांत का आंदोलन
बिहार के शिक्षित नेताओं — सच्चिदानंद सिन्हा, महेश नारायण, अली इमाम, मज़हरुल हक़ और अन्य — ने अलग प्रांत के लिए अभियान चलाया। बिहार टाइम्स (1894) जैसे समाचार-पत्रों ने बिहार का पक्ष रखा। 1912 में बिहार और उड़ीसा प्रांत बना। बिहार के गठन पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।
बांकीपुर कांग्रेस (1912)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 27वाँ अधिवेशन दिसंबर 1912 में बांकीपुर (पटना) में हुआ, जिसकी अध्यक्षता आर. एन. मुधोलकर ने की — यह बिहार में कांग्रेस का पहला अधिवेशन था।
चंपारण और उसके बाद (1917–1919)
- चंपारण सत्याग्रह (1917) — भारत में गांधी का पहला सत्याग्रह (इस पर हमारी अलग मार्गदर्शिका देखें)।
- इसने राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा और ब्रजकिशोर प्रसाद जैसे नेताओं को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा।
- रौलट सत्याग्रह (1919) को बिहार में समर्थन मिला।
असहयोग आंदोलन (1920–22)
- बिहार ने ज़ोरदार प्रतिक्रिया दी — अदालतों, स्कूलों और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार; शराब की दुकानों पर धरना।
- मज़हरुल हक़ ने पटना में सदाकत आश्रम के लिए ज़मीन दान की, जो बिहार में कांग्रेस का मुख्यालय बना।
- राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान बिहार विद्यापीठ का उद्घाटन गांधी ने फ़रवरी 1921 में सदाकत आश्रम में किया। मज़हरुल हक़ इसके कुलाधिपति और राजेंद्र प्रसाद इसके प्राचार्य बने।
- मज़हरुल हक़ ने द मदरलैंड (The Motherland) समाचार-पत्र भी शुरू किया।
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34)
- नमक सत्याग्रह: बिहार में कई जगहों पर नमक कानून तोड़े गए; पटना में स्वयंसेवकों ने नखास तालाब क्षेत्र के पास नमक बनाया।
- चौकीदारी कर-विरोधी अभियान: बिहार चौकीदारी कर के विरुद्ध अपने अभियान के लिए जाना गया (यह कर गाँव के चौकीदारों के खर्च के लिए लिया जाता था, जिन्हें औपनिवेशिक पुलिस का औज़ार माना जाता था)। कई गाँवों ने कर देने से इनकार किया और उन्हें ज़ब्ती और दमन झेलना पड़ा।
- बिहपुर (भागलपुर ज़िला): 1930 में सत्याग्रहियों पर पुलिस कार्रवाई हुई, जिसमें राजेंद्र प्रसाद घायल हुए; इस घटना ने व्यापक ध्यान खींचा।
- विदेशी कपड़ों और शराब का बहिष्कार।
- महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
1934 का भूकंप और राहत कार्य
15 जनवरी 1934 के भीषण बिहार–नेपाल भूकंप ने उत्तर बिहार को तबाह कर दिया। कांग्रेस नेताओं, विशेषकर राजेंद्र प्रसाद, ने बड़े पैमाने पर राहत कार्य संगठित किया (बिहार केंद्रीय राहत समिति, Bihar Central Relief Committee), जिससे जनता के साथ कांग्रेस का जुड़ाव मज़बूत हुआ। बिहार की आपदाओं पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।
प्रांतीय स्वायत्तता और 1937 का मंत्रिमंडल
- भारत शासन अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935) के तहत 1937 के प्रांतीय चुनावों में कांग्रेस को बिहार में बहुमत मिला।
- श्रीकृष्ण सिंह ("श्री बाबू") जुलाई 1937 में प्रीमियर (प्रधानमंत्री, यानी प्रांत के मुख्यमंत्री) बने — इससे पहले अप्रैल–जुलाई 1937 में मोहम्मद यूनुस की अल्पकालिक अंतरिम सरकार रही थी — और अनुग्रह नारायण सिन्हा वरिष्ठ मंत्री बने।
- मंत्रिमंडल ने काश्तकारी सुधार, मद्यनिषेध और शिक्षा पर कदम उठाए।
- बिना परामर्श के भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल किए जाने के विरोध में इसने अन्य कांग्रेस मंत्रिमंडलों के साथ 1939 में इस्तीफ़ा दे दिया।
भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
बिहार में देश के सबसे तीव्र भारत छोड़ो आंदोलनों में से एक चला — इस पर हमारी अलग मार्गदर्शिका देखें, जिसमें पटना सचिवालय के शहीद और हज़ारीबाग जेल से जयप्रकाश नारायण का भागना भी शामिल है।
किसान आंदोलन
कांग्रेस के साथ-साथ स्वामी सहजानंद सरस्वती ने किसान सभा खड़ी की, जिसने बिहार को संगठित किसान राजनीति का केंद्र बना दिया — इस पर हमारी मार्गदर्शिका देखें।
बिहार के प्रमुख नेता
| नेता | योगदान |
|---|---|
| राजेंद्र प्रसाद | चंपारण; कांग्रेस अध्यक्ष; बाद में भारत के पहले राष्ट्रपति |
| मज़हरुल हक़ | सदाकत आश्रम; बिहार विद्यापीठ; हिंदू–मुस्लिम एकता |
| सच्चिदानंद सिन्हा | अलग प्रांत का आंदोलन; संविधान सभा के पहले (अस्थायी) अध्यक्ष |
| श्रीकृष्ण सिंह | पहले कांग्रेसी प्रीमियर (1937) और स्वतंत्रता के बाद बिहार के पहले मुख्यमंत्री |
| अनुग्रह नारायण सिन्हा | चंपारण; 1937 में और स्वतंत्रता के बाद मंत्री |
| जयप्रकाश नारायण | समाजवादी नेता; भारत छोड़ो आंदोलन |
| स्वामी सहजानंद सरस्वती | किसान सभा |
| ब्रजकिशोर प्रसाद | चंपारण; विधायक |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- 1908 में मुज़फ़्फ़रपुर में बम किसने फेंका, और वह किसके लिए था?
- बिहार में कांग्रेस का पहला अधिवेशन कहाँ और कब हुआ?
- सदाकत आश्रम के लिए ज़मीन किसने दान की?
- चौकीदारी कर-विरोधी अभियान क्या था?
- 1937 में बिहार के पहले कांग्रेस मंत्रिमंडल का नेतृत्व किसने किया, और उससे पहले की अंतरिम सरकार किसके नेतृत्व में थी?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- 1905 से 1942 तक भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में बिहार के योगदान का विवरण दीजिए।
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार में गांधीवादी रचनात्मक कार्य की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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